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मदर्स डे पर खास

Shipra Sharma

8th May 2020

इस दुनिया में कई प्रकार के दिन मनाए जाते हैं,फ्रेंडशिप डे, हग डे,रोज डे, अर्थ डे,फादर्स डे, पर मई की दूसरी रविवार को जो दिन आता है, वह सारी दुनिया के बच्चों के लिए बहुत खास है। सारी दुनिया उस दिन मदर्स डे मनाने में जुटी रहती है। ऑस्ट्रेलिया,अमेरिका,कनाडा में तो इसे मई के दूसरे रविवार के दिन मनाया जाता है,पर ब्रिटेन में यह ईस्टर संडे के तीन हफ्ते पहले मनाया जाता है।

मदर्स डे पर खास
वहां यह ऐसा इसलिए था कि उस दिन ब्रिटिश लोग मदर चर्च जाते थे और लोग अपने घर के सेवक-सेविकाओं को उस दिन की छुट्टी देते थे कि वह उस दिन अपने घर के लोगों के साथ मिलकर प्रार्थना करें। आधुनिक मदर्स डे 1908 में पश्चिमी वर्जिनिया में अन्ना जार्विस ने अपनी मां की याद में मदर्स डे मनाया। चूंकि यह त्यौहार पाश्चात्य देशों से आया है,इसलिए थोड़ी खोजबीन करके पता चला कि बाइबिल में भी मदर्स डे का कोई उल्लेख नहीं है,पर वहां मातृत्व एवं मां बनने की खुशी का उत्सव मनाने का वर्णन है।
जैसे-जैसे पाश्चात्य देशों का प्रभाव भारत में बढ़ता गया, नई पीढ़ी ने भी इसे अपनाना शुरु कर दिया। यह एक बेहद सराहनीय कदम है। भारत में किसी भी युग की युवा पीढ़ी अच्छी चीजों को अपनाने में कभी भी पीछे नहीं हटती। इस बात के कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि भारत में यह कब से शुरु हुआ,पर जो भी हुआ अच्छा हुआ।
वैसे तो हर खास दिन के लिए मैं अपने से जुड़े लोगों को शुभकामनाएं देती हूं। मेरे जीवन में मेरी नानी,मौसी,मम्मी,और मेरी चाचियों एवं साथ ही साथ मेरी सासू मां का भी बहुत गहरा प्रभाव रहा है,जिन्होंने हर गिरते समय मुझे हाथ देकर उठाया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। मेरी इन सारी मांओं को कुछ भी कहकर धन्यवाद नहीं दिया जा सकता है,क्योंकि उनका किया शब्दों से परे है, इसलिए उन सबके नक्शे-कदम पर चलना ही, उनकी सीख का अनुसरण करना है,इसलिए उन्हें इस अवसर पर मेरी ओर से बहुत सारी बधाई। 
मेरी मम्मी का नाम श्रीमती सरोज पाण्डेय् है और आज मदर्स डे के दिन मुझे अपनी मां से कुछ खास कहना है-
‘मम्मी, आप सर्वोत्तम हो। हमारे लिए हमारे जीवन का स्तंभ हो। आपका जीवन के हर मोड़ पर हमें संबल प्रदान करना हमारे लिए एक ढ़ाल समान है। 70 के दशक में हमारी मम्मी जीवन के कठिन झंझावातों से निकलकर एक स्वावलंबी स्त्री बनीं,इसके साथ-साथ वह एक सुघड़ महिला भी रही हैं। उनको इस मुकाम तक पहुंचाने में उनकी मेहनत और मेरे नाना-नानी जी का असीम योगदान रहा। कुंमाऊ के छोटे से शहर अल्मोड़ा से निकलकर अकेले कौसानी में 20-22 की छोटी-सी उम्र में प्रिंसिपल बनना कोई आम बात नहीं थी। मम्मी ने वह भी किया,मीलों चलकर स्कूल में अपना स्थान, अपना वह मुकाम हासिल किया। शादी के बाद वह पापा का संबल बनीं, उनके परिवार के लिए एक मिसाल बनीं। मम्मी कई सालों तक फिर दिल्ली में यूनिसेफ में सुपरवाइजर रहीं। विषय परिस्थितियों से लड़ना हम सबने अपनी मां से ही सीखा होगा। जिंदगी के हर पग पर पापा की सहयात्री,सहयोगी रहीं, फिर पापा की नौकरी में ट्रांसफर होने के कारण उन्होंने बिहार में नए सिरे से नई नौकरी शुरु की। अब वह हिंदी,संस्कृत व अर्थशास्त्र की शिक्षिका बनीं। जैसी परिस्थितियां आती गईं,वह उस तरह से खुद को ढालती गईं। हजारीबाग जिले के सरकारी शिक्षकों की सूची में उनकी अपनी एक अलग पहचान रही। वह अपने छात्रों के बीच बहुत सम्मानीय व श्रध्देय़ रहीं। कई सालों तक परिवार की देखभाल करने के बाद उन्होंने हम बच्चों की खुशी के लिए ही वीआरएस भी ले लिया।
मां, सच में मां ही होती है, जॉब भी बच्चों के लिए की, और जब मोटी पेंशन मिलने की बारी आई,तो बच्चों की खुशी के लिए वह पेंशन भी छोड़ दी। मम्मी में संतुष्टि नामक एक बहुत बड़ा भाव है जो उनके बच्चों में भी आया है।
ऐसे कई दिन आते-जाते रहेंगे,जब हम लोगों को शुभकामना संदेश भेजेंगे,पर आज मैं इस आलेख के माध्यम से सबको यह बताना चाहूंगी कि एक महिला होने के नाते मम्मी ने स्वयं को कभी भी कमजोर नहीं समझा,तब भी नहीं जब वह अविवाहित थीं, और आज जब तक नाती-पोते वाली हैं। नित नई बातें सिखाना,जीवन में कभी हार न मानना,नए संकल्पों के साथ नया जीवन जीना हम सबके लिए एक प्रेरणा है। मैं आज जो भी थोड़ा लिख पाती हूं,कुछ कर पाती हूं,यह उन्हीं की सीख की ही देन है,कि कोई भी काम छोटा नहीं होता, किसी भी छोटे काम को निरंतर कर उसे बड़ा बनाया जा सकता है। जो काम आपको आता है, उसे करते रहिये,वह काम ही आपको एक दिन बड़ा बना देगा। 
मेरी कलम में आपके जीवन की-सी सच्चाई,स्पष्टता,अपनी बातों को पुरज़ोर तरीके से रखने की हमेशा काबिलियत बनी रहे,और हम ऐसा जीवन जीएं जिससे हम अपने परिवार,समाज और देश की ताकत बनें,यही मेरी कामना है। अब तक तो मैं आपके लिए कुछ ऐसा ख़ास नहीं कर पाई,पर आज का यह दिन,अपना समस्त लेखन कार्य,अपना यह जीवन मैं आपको ही हमेशा समर्पित करती रहूंगी। आप स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें,ऐसी ही मनोकामना है मेरी। हम बच्चों की ओर से आपको ‘हैप्पी मदर्स डे मम्मी'।     

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