GREHLAKSHMI

FREE - On Google Play
OPEN

बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं : कारण और निवारण

Neeraj Gupta

16th May 2020

पिछले वर्ष आगरा के निकट यमुना एक्सप्रेसवे पर बस के रेलिंग तोड़कर गड्ढे में गिर जाने से 29 यात्रियों, फिर राजस्थान के भरतपुर में योग करते हुए ट्रक द्वारा कुचले जाने से एकसाथ 6 वरिष्ठ नागरिकों और बाद में उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में ट्रक की टक्कर से टेम्पो में बैठे 17 लोगों की दर्दनाक मौत के विषय में सुनकर हृदय विचलित हो उठा I

बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं : कारण और निवारण

साथ ही मन में प्रश्न उठा, क्या कारण है कि हमारे देश में सड़क दुर्घटनाएं इतनी आम हो चुकी हैं कि थोड़े-थोड़े अंतराल के बाद ऐसे दुखद समाचार सुनने को मिलते ही रहते हैं I अब तो लगता है कि हम ऐसे समाचार सुनने के आदी हो चुके हैं और छोटी-मोटी सड़क दुर्घटना, जिसमें एक-दो लोगों की जान चली गयी हो, उससे किसी को कोई फर्क ही नहीं पड़ता I हाँ, जब कोई बड़ी दुर्घटना हो जाती है, तब खूब हो-हल्ला मचता है, पर फिर कुछ दिनों बाद सब शांत हो जाता है I सरकार ‘उच्च-स्तरीय' जांच बैठाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेती है और मीडिया भी अपना ध्यान किसी अन्य समाचार पर फोकस कर लेता है I

भारत में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति

देश में सड़क दुर्घटनाओं की भयावह स्थिति को देखते हुए वर्ष 2015 में भारत ने ब्राज़ीलिया घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर करके आने वाले समय में इनकी संख्या में 50% कमी करने का लक्ष्य रखा है I यद्यपि बाद के वर्षों में इसमें कुछ कमी देखने को मिली है, परन्तु मंजिल अभी दूर है, क्योंकि आज भी देश में प्रतिवर्ष होने वाली लगभग 4.50 लाख सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वालों की संख्या लगभग 5.00 लाख तथा मृतकों की संख्या 1.50 लाख तक हो जाती है, जो हमारे देश के किसी छोटे शहर की कुल जनसंख्या के बराबर है I

इन दुर्घटनाओं में मरने वालों की तो असमय जीवन डोर टूटती ही है, जो बच्चे अनाथ, महिलायें विधवा और बूढ़े माँ-बाप बेसहारा हो जाते हैं, उनका जीवन भी बर्बाद हो जाता है I साथ ही घायल लोगों के शारीरिक, मानसिक, आर्थिक व पारिवारिक कष्ट का अंदाजा लगाना भी कोई मुश्किल काम नहीं है I अतः प्रासंगिक है कि हमारे देश में इतनी बड़ी संख्या में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के कारण व निवारण हेतु उपायों पर गंभीरता-पूर्वक विचार कर उनका त्वरित क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया जाए I

सरकारी स्तर पर  

  • खराब सड़कें

हमारे देश में सड़कों की स्थिति इतनी दयनीय है कि रास्ता चलते आप समझ भी नहीं पायेंगें कि सड़क में गड्ढे हो गए हैं या गड्ढों में ही सड़क बनी हुई है I ऊपर से सड़कें जगह-जगह ऊँची-नीची होना व दोनों साइड में कच्चा भाग एकदम गहरा होना भी दुर्घटनाओं को खुला निमंत्रण देता है I इसके लिए सरकार को चाहिए कि सड़क बनाने का ठेका देते समय एक निश्चित अवधि तक उसके रख-रखाव की जिम्मेदारी भी ठेकेदार पर डाली जाए और यदि खराब सड़क के कारण कोई हादसा हो तो विभागीय कार्यवाही के साथ सम्बंधित ठेकेदार व अधिकारी, पीड़ित तथा उसके परिवार को क्षतिपूर्ति देने के लिए भी उत्तरदायी हों I

  • खुले मेनहोल 

हमारे यहाँ सड़कों पर जगह-जगह मेनहोल खुले पड़े मिल जाते हैं, जिनमें कोई पैदल पथिक या दुपहिया-वाहन सवार गिर जाए तो जीवित बचना तो दूर शव मिलना भी मुश्किल हो जाता है I इसको रोकने के लिए सभी मेनहोलों को एक निर्धारित नम्बर दिया जाये और जिस होल के खुले रहने से दुर्घटना हुई हो, उसके सुपरवाइजर के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही के अतिरिक्त उससे पीड़ित व उसके परिवार को क्षतिपूर्ति भी दिलाई जाए I

  • नियमों के उल्लंघन की अनदेखी   

यातायात पुलिस तथा परिवहन विभाग, जिन पर नियमों के उल्लंघन को रोकने की जिम्मेदारी होती है, उनके स्टाफ का ध्यान केवल वाणिज्यिक वाहनों को रोककर उनके कागज़ चैक' करने पर ही रहता है, शेष वाहन नियमों का पालन कर रहें हैं या नहीं, उन्हें कम ही सरोकार रहता है I परिणाम यह होता है कि बिना हेलमेट लगाए स्कूटर सवार, एक बाइक पर एक साथ बैठे चार लोग, बिना सीट बेल्ट लगाए कार ड्राईवर, बिना लाइट का ट्रक और यात्रियों से ठसाठस भरी बस के खुले दरवाज़े पर लटके तथा छत पर बैठे बीसियों लोग, लम्बी यात्रा बिना किसी रोक-टोक के पूरी कर आराम से घर वापिस आ सकते हैं, बशर्ते कि उनका सामना किसी दुर्घटना से न हो जाए I इसको रोकने के लिए नियमों में परिवर्तन करना होगा कि ऐसे किसी कारण से दुर्घटना होने पर दुर्घटना-ग्रस्त व्यक्ति जहां से वाहन लेकर चला था और दुर्घटना-स्थल तक के बीच में जितने भी चेक-पोस्ट पड़ें हों, उन सबके ड्यूटी-स्टाफ के विरुद्ध कार्यवाही हो I

भारी वाहनों का योगदान

आमतौर से भारी वाहनों को सड़क दुर्घटनाओं के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार माना जाता है, जो कुछ हद तक सही भी है I चलिए जानते हैं, कैसे -

  • शराब पीकर, लापरवाही या अनियंत्रित गति से, अथवा बिना प्रशिक्षण गाड़ी चलाना

बहुत सी सड़क-दुर्घटनायें बस, ट्रक या कार ड्राईवर द्वारा शराब पीकर गाड़ी चलाने तथा लापरवाही से या गंतव्य पर पहुँचने की जल्दी में तेज़ गति से गाड़ी चलाने के कारण होती हैं I लेख के प्रारंभ में शाहजहांपुर में घटी घटना शराब पीकर तेज़ गति से गाड़ी चलाने का परिणाम कही जा रही है I इसके अतिरिक्त अप्रशिक्षित अथवा अवयस्क व्यक्तियों द्वारा नियम-विरुद्ध हाईवे पर गाड़ी चलाना भी कई बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन जाता है I

संतोष का विषय है कि अभी हाल ही में मोटर व्हीकल अधिनियम में संशोधन कर इस सम्बन्ध में कई कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं, जिनको यदि बाद में भी सख्ती से लागू करना जारी रखा गया तो उक्त कारणों से होने वाली दुर्घटनाओं में कमी अवश्य देखने को मिलेगी I  

  • लगातार अधिक समय के लिए बिना रुके या बिना नींद पूरी किये रात में गाड़ी चलाना

ऐसा पाया गया है कि बहुत सी सड़क-दुर्घटनाएं सुबह 3-4 बजे के आस-पास होती हैं, जब सारी रात नींद से लड़कर थक चुका ड्राइवर झपकियाँ लेने को विवश हो जाता है I इसके अतिरिक्त लम्बी दूरी तय करने के लिए कई बार ड्राईवर बिना रुके लगातार गाड़ी चलाता है, जो एक प्रकार से दुर्घटना को खुला निमंत्रण देने जैसा ही है I चूँकि इसको रोकने के लिए सरकार कुछ नहीं कर सकती, अतः यात्रियों को चाहिये कि ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर सब मिलकर ड्राईवर को विश्राम लेकर ही गाड़ी चलाने के लिए राजी करें और अपने प्राण अनावश्यक रूप से खतरे में न डालें I लेख के प्रारंभ में यमुना एक्सप्रेसवे पर हुई दुर्घटना के बारे में सुना गया कि ड्राईवर के थके होने के कारण उसने बस पर से अपना नियंत्रण खो दिया था I

  • यातायात नियमों का पालन करना

यातायात के नियम सुरक्षा के लिए बनाए जाते हैं, जिनका उल्लंघन दुर्घटनाओं का कारण बन जाता है, जैसे रात में बिना लाइट जलाए वाहन चलाना, हॉर्न खराब होने पर भी चलते रहना, रेड-लाइट पर बिना रुके निकलने का प्रयास करना, मोड़ दूर होने पर विपरीत दिशा से वाहन ले जाना, गाड़ियों में क्षमता से अधिक सवारी बैठा लेना आदि I इन कारणों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जहां सम्बंधित वाहन स्वामियों व विभागीय अधिकारियों का दायित्व निर्धारित करना होगा, वहीं यात्रियों को भी जागरूक होकर इसका विरोध करना चाहिए, जिससे कोई वाहन चालक उनके जीवन से इस प्रकार खिलवाड़ न कर सके I  

हलके वाहनों की लापरवाही

आजकल दुपहिया वाहन जैसे मोटरसाइकिल, स्कूटर वगैरह से होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या भी बहुत होती जा रही है, जिसके मुख्य कारण इस प्रकार हैं - 

  • दुपहिया वाहनों पर दो से अधिक लोगों का बैठना हेलमेट का प्रयोग करना

हमारे देश में दुपहिया-वाहन चालक हेलमेट को एक बेकार की मुसीबत समझते हैं, इसलिए वे इसे पहनने की जगह हैंडल पर टांगकर ले जाना ज्यादा पसंद करते हैं, ताकि पुलिस वाले के मिल जाने पर उसे पहनकर चालान से बच सकें I इसके अलावा बाइक पर जितने संभव हो, उतने लोगों को बैठाकर चलने की कोशिश की जाती है I आपने कई बार बाइक पर बैठकर जा रहे पूरे परिवार की सड़क-दुर्घटना में हुयी दर्दनाक मौत के विषय में सुना होगा, जो सुनने वाले के मन को विषाद से भर देता है I

परन्तु क्या आपने कभी सोचा है कि जो बाइक दो लोगों की सवारी के लिए बनी हो, उसपर 3-4 लोग बैठकर तेज गति से जा रहे हों, साथ में सामान भी लाद रखा हो, पर हेलमेट किसी ने नहीं पहना हो, तो इस असावधानी का संभावित परिणाम और क्या हो सकता है ? इस कारण से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जहां ऐसे वाहनों का चालान न करने वाले अधिकारियों पर कार्यवाही करनी होगी, वहीं सघन जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को इस आचरण से मौत के मुहँ में जाने की सम्भावना से अवगत भी कराते रहना होगा I

  • खतरनाक स्टंट करना

आपने कई बार युवाओं को सड़क पर खतरनाक स्टंट करते देखा होगा, जैसे मोटर-साइकिल से हाई-वे पर रेस लगाना, खड़े होकर बाइक चलाना, दो अलग दोपहिया वाहनों पर एक दूसरे का हाथ पकड़कर बराबर-बराबर चलना, ट्रक के पीछे हुक पकड़कर साइकिल दौड़ाना, आदि I ऐसे लोगों को हम यही कहना चाहेंगें कि यदि वे सड़क-दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल या सदा के लिए अपंग होकर अपनी क्षणिक भूलपर पश्चात्ताप करते रहकर जीवन नहीं बिताना चाहते तो इस प्रकार के जोखिम-पूर्ण स्टंट करने का दुस्साहस कदापि न करें I

  • साइकिल सवारों के लिए कुछ टिप्स

साइकिल सवारों को चाहिए कि वे सड़क के बांयी ओर चलें I रात में जहांतक हो सके सड़क पर चलने से बचें और यदि आवश्यक हो तो टॉर्च लेकर चलें और साइकिल पर पीछे की तरफ रिफ्लेक्टर भी लगवाएं I

पैदल चलने वाले भी जिम्मेदार

यद्यपि प्रथम-द्रष्टया ऐसा प्रतीत हो सकता है कि पैदल चलने वाले भला सड़क दुर्घटनाओं के लिए कैसे जिम्मेदार हो सकते हैं, वे तो अक्सर इनके शिकार ही होते हैं ! परन्तु यदि आप गहनता से विचार करें तो पायेंगें कि बहुत सी स्थितियों में पैदल यात्रियों की लापरवाही भी बड़ी सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन जाती है I आइये जानते हैं, कैसे -

  • हाईवे पर चलते समय अपेक्षित सावधानी न बरतना

देखा जाए तो हाईवे बड़े वाहनों के द्वारा प्रयोग हेतु बनाये जाते हैं, अतः पैदल चलने के लिए इनका प्रयोग करने से बचना चाहिये I यदि बहुत आवश्यक हो, तो सावधानी-पूर्वक सड़क के किनारे चलें और सड़क पार करने के लिए फुटओवर-ब्रिज का ही प्रयोग करें I परन्तु यदि यह संभव न हो, तो दोनों तरफ अच्छी तरह देखे बिना तो बिलकुल भी सड़क पार न करें I किसी-किसी राजमार्ग का कुछ भाग घनी आबादी के बीच से होकर जाता है I यद्यपि ऐसी जगहों से गुजरते हुए प्रथमतः भारी वाहन चालकों का ही दायित्व बनता है कि वे धीमी गति से सावधानी-पूर्वक चलें, परन्तु कई बार पैदल यात्री बिना इधर-उधर देखे इस प्रकार सड़क पार करने का प्रयास करते हैं, मानो वे व्यस्त राज-मार्ग पर न होकर किसी पार्क में टहल रहे हों, जो बिलकुल भी ठीक नहीं है I

  • सड़कों पर असामान्य गतिविधियाँ करना

कुछ लोग राजमार्गों का प्रयोग नाचते-गाते बारात ले जाने, जॉगिंग करने, सड़क किनारे आराम करने व खेलने तक के लिए कर लेते हैं I कुछ मामलों में तो वाहन चालक का दोष भी नहीं होता और पैदल चलने वाले की लापरवाही दुर्घटना का कारण बन जाती है I लेखक ने कई बार अपनी आँखों से देखा है, जब व्यस्त राजमार्ग पर पतंग लूटने या पकड़म-पकड़ाई खेलते सड़क किनारे की बस्ती में रहने वाले बच्चे, सही दिशा में जा रहे वाहन के सामने अचानक कूद पड़ते हैं, जिन्हें बचाने में ड्राईवर के पसीने छूट जाते हैं I यदि ऐसे में उन्हें कुछ नुक्सान हो जाए तो एक तो चालक स्वयं को मासूम बच्चों को चोट लगने का कारण मानकर बिना कोई गल्ती किये अपराध-भावना (Guilt feeling) का शिकार हो जाएगा और दूसरे अकारण सज़ा भी पा जाएगा I लेख के प्रारम्भ में ट्रक से कुचलकर 6 वरिष्ठ नागरिकों की मौत की जिस दुखद घटना का जिक्र किया गया है, उसमें ऐसा प्रतीत होता है कि शायद ये लोग सड़क किनारे बैठकर योग कर रहे हों, जो उचित नहीं कहा जा सकता !   

  • यातायात नियमों की अनदेखी करना

कुछ लोग यातायात नियमों को तोड़ना गर्व की बात समझते हैं और अक्सर ज़ेबरा-क्रासिंग छोड़कर अन्य किसी स्थान से या बिना हरी बत्ती जले सड़क पार करते देखे जाते हैं, जो सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन जाता है I

अतः पैदल यात्रियों को समझना होगा कि यदि असावधानी-वश उन्हें चोट आ गयी या जान से ही हाथ धो बैठे तो चाहे बाद में वाहन चालक को दोषी मानकर सजा भी हो जाए, परन्तु क्या इससे उनके नुक्सान की भरपाई हो  सकेगी ? अतः मानकर चलें "एक सावधानी, हज़ार नियामत"  !

 

कमेंट करें

blog comments powered by Disqus

संबंधित आलेख

default

अपने जीवन से प्यार करें !

default

लिखें रिश्तों की नई परिभाषा

default

मैं मेकअप के बिना बाहर नहीं जा सकती - ब्लॉसम...

default

रिमझिम फुहारों में त्वचा रहे जवां

पोल

सबसे अछि दाल कौन सी है

गृहलक्ष्मी गपशप

जानिए बॉलीवु...

जानिए बॉलीवुड की...

चलिए जानते हैं कुछ एक्ट्रेसेस के बारे में जिन्होंने...

चाणक्य के अन...

चाणक्य के अनुसार...

सदियों से ये सोच चली आ रही है महिलाएं शारीरिक और मानसिक...

संपादक की पसंद

रामायण: घर-घ...

रामायण: घर-घर में...

रामानंद सागर की 'रामायण' लॉकडाउन में जब दोबारा प्रसारित...

खाद्य पदार्थ...

खाद्य पदार्थ जो...

आजकल आप थके-थके रहते हैं। रोमांस करने की आपकी इच्छा...

सदस्यता लें

Magazine-Subscription