कोरोना और किचन में सोशल डिस्टैन्सिंग

सरिता शर्मा

25th May 2020

हमारे घर में सबसे संवेंदनशील स्थान होता है हमारी किचन । जी हाँ, हमारी किचन में हर धातु से बने बर्तन, बिजली उपकरण, फल-सब्ज़ियां व अन्य अनेक प्रकार के खाद्य-पदार्थ होते हैं जिनमे कई प्रकार के कीटाणु विद्यमान रहते हैं ।

कोरोना और किचन में सोशल डिस्टैन्सिंग

social distancing in kitchen

चीन के वुहान प्रान्त से शुरू होकर कोविड-१९ यानि कोरोना महामारी ने सम्पूर्ण विश्व को अपनी चपेट में ले लिया है। इसके संक्रमण को रोकने के लिए कोई वैक्सीन नहीं बन सकी है लेकिन बड़े-बड़े देश इसके खात्मे के लिए प्रयासरत है । यह एक इंसान से दूसरे इंसान या किसी वस्तु के सहायता से कहीं भी पहुँच सकता है । हमारी नियमित दिनचर्या में प्रयोग होने वाली बहुत सी सामग्री हम बाज़ार से लेकर आते है और उसके बाद हम बताये हुए दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए स्वयं को कीटाणु-मुक्त करने का यथासम्भव प्रयास करते है । हमारे घर में सबसे संवेंदनशील स्थान होता है हमारी किचन । जी हाँ, हमारी किचन में हर धातु से बने बर्तन, बिजली उपकरण, फल-सब्ज़ियां व अन्य अनेक प्रकार के खाद्य-पदार्थ होते हैं जिनमे कई प्रकार के कीटाणु विद्यमान रहते हैं । अगर उन्हें ठीक से साफ़ किया या धोया ना जाए तो वे हमारे स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकते हैं । ऐसे में जब कोरोना जैसी महामारी की बात आती है तो डरना स्वाभाविक है क्योंकि यहाँ हमारे परिवार के स्वास्थ्य का सवाल है इसलिए कोरोना के संक्रमण के फैलाव की रोकथाम आवश्यक है ।

corona

  कोरोना के प्रवेश-द्वार

गैस सिलेंडर - गैस सिलेंडर हमारी रसोई का अभिन्न अंग है क्योंकि इसके बिना कोई भी खाद्य-पदार्थ पकाया नहीं जा सकता । ये बाहर खुले में पड़े रहते है और कई स्थानों से व कई लोगों  के हाथों से होकर गुज़रते है । जब हम इसे बदलते है तो इसके रेगुलेटर को छूना पड़ता है जिससे इंसान के शरीर में वायरस का आसानी से आगमन हो सकता है । कोरोना वायरस धातु की सतह पर ८ से ९ दिन तक जीवित रहता है । अगर सावधानी बरती ना जाये तो यह बड़ी आसानी से आपको अपनी कैद में ले लेगा ।

 

फल-सब्जियां - आमतौर पर महिलाएं हर रोज़ फल-सब्जियां खरीदती हैं, जो कि संक्रमण को फ़ैलाने में अहम भूमिका निभाते है । सब्जी वाले  सब्जी व फलों को मुख्य सब्जी-मंडी से खरीद कर लाते हैं जहाँ अनेक स्थानों से किसान अपनी गाड़ियों में फल-सब्जियां लाकर बेचते है और कुछ स्थानीय दुकानदार सब्जियां खरीद कर ले जाते हैं । ऐसे में ये फल-सब्जियां हमारे घर तक पहुँचते-पहुँचते कोरोना को भी साथ ला सकती हैं । सबसे अधिक खतरा तो पॉलीथिन बैग होते है जिनमे इन्हे पैक करके दिया जाता है । वैज्ञानिकों के अनुसार प्लास्टिक की सतह पर ये वायरस तीन दिन तक जीवित रह सकता है । ऐसे में ज़रा  सी लापरवाही हमें खतरे में डाल सकती है ।

fruits n vegetables

हैंड-टू-हैंड सम्पर्क - अनजाने में हम हर रोज़ कई काम ऐसे कर जाते हैं जिनमें दूसरे व्यक्ति के हाथों से हमारा हाथ छू जाता है या उसके द्वारा दी जाने वाली कोई चीज़ हमारे हाथों के सम्पर्क में आती है । उदाहरण के लिए सब्जी-वाले के हाथ से सब्जी से भरा बैग लेना, उससे बचे पैसे लेना, सफाई कर्मचारी द्वारा छुए गए डस्टबिन को छूना आदि  । अगर इनमें से कोई भी कोरोना संक्रमित हुआ तो उनके सम्पर्क में आये लोगों की शामत आ सकती है  । महिलाओं की आदत होती है कि वे किसी भी फल-सब्जी की रेहड़ी के साथ सट कर मोल-भाव करने लगती है जो उनके लिए बहुत हानिकारक हो सकता है क्योंकि फल-सब्जियों की तरह रेहड़ी भी कई लोगों के सम्पर्क में आयी होती है जिस पर वायरस काफी समय तक टिका रह सकता है  ।

नॉन-वेज और जंक फ़ूड - नॉन-वेज इस वायरस की पैदाइश की सबसे अधिक सक्रिय जगह हैं  । जब ये पैक होकर आपकी रसोई में पहुंचते हैं तो खतरा भी साथ में पैक करवा कर ला सकते हैं  । इसके अतिरक्त जंक-फ़ूड भी आपकी सेहत को बिगाड़ सकता हैं । बेहतर हैं की घर का पका हुआ सादा भोजन ही खाएं ।

junk

बार-बार हाथों को ना धोना - प्राय: रसोई में काम करते-करते महिलाओं को मल्टी-टास्किंग की आदत होती हैं जैसे झाड़ू-पोछा, सब्जी काटना, बर्तन धोना, आटा गूंथना आदि । ऐसे में उन्हें बार-बार हाथ धोना परेशानी लगती हैं जबकि कोरोना के मौसम में समय-समय पर हाथ धोना अति-आवश्यक है। 

डस्टबिन और गंदगी - किचन में डस्टबिन को हम लोग फलों व सब्जियों के छिलकों के साथ-साथ, चायपत्ती, बची हुई बासी सब्जियां व अन्य चीज़ों से भर देते है  । अगर डस्टबिन ढका न हुआ हो तो बदबू के साथ-साथ संक्रमण का भय भी रहता हैं  । इसके इलावा रसोई घर की साफ़-सफाई का ना होना भी कीटाणुओं को आमंत्रण देता हैं  ।

इन बातों का रखे ध्यान

बेशक सिलेंडर को एजेंसी द्वारा सेनिटाइज़ करके भेजा जाता हैं फिर भी जब आपके घर पर सिलेंडर आये तो उसे एक बार पुन: सेनिटाइज़ करके दो-तीन दिन बाद इस्तेमाल करें ताकि उस पर अगर कोई संक्रमण हो तो वो नष्ट हो जाये  । जब भी सिलेंडर बदलें तो अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह से धो लें  ।

फल-सब्जियों को काटने के बाद छुरी व चोप्पिंग बोर्ड को अच्छे से धोकर रखें  । नॉन-वेज को काटने के लिए अलग छुरी व बर्तन का प्रयोग करें  ।

जब फल-सब्जियां घर लाएं तो उन्हें ५ मिनट के लिए हल्के गर्म पानी में डालकर धो ले और फिर सादे पानी से धो लें  । गर्म पानी में सिरका (विनेगर) या नमक अवश्य मिला ले । पत्तेदार सब्जियों से परहेज़ करें  । बंदगोभी की ऊपरी परत को उतार कर अच्छे से साफ़ कर लें  ।

प्लास्टिक पैक्ड खाद्य-सामग्री को साबुन के घोल वाले पानी में डुबो कर साफ़ करें व फिर सादे पानी में अच्छे से धो लें  ।

किचन-शेल्फ, गैस स्टोव, सिंक व रसोई के दरवाजे के हैंडल को अच्छे से साफ़ करके सेनिटाइज़ करें  । सब्जियों के खाली प्लास्टिक बैग्स को उसी समय डस्टबिन में डाल दे और खाना बनाने में साफ़ पानी का इस्तेमाल करें  ।

सेनिटाइज़र्स कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने की एक अहम कड़ी हैं  । इन्हे बाजार से खरीदने की बजाए किचन में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री जैसे की एलो-वेरा, नीम आदि से तैयार करें  ।

kitchen

इन बातों को ध्यान में रखकर कोरोना और किचन में सोशल डिस्टैन्सिंग का फार्मूला अपना कर हम अपनी रसोई को और अपने परिवार को कोरोना-मुक्त रख सकते हैं  ।  

  

सरिता शर्मा

 

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