माहवारी चक्र मिथक और सत्य

Jyoti Sohi

28th May 2020

महिलाओं की जिंदगी में महावारी एक ऐसा सेतु है, जिससे हमें हर महीने संभल कर गुज़रना पड़ता है। संभल कर इसलिए की कहीं कोई गलती न हो जाए। महावारी के कारण पहले से ही अस्वस्थ शरीर को समाज में फैले अंधविश्वास की दोहरी मार झेलनी पड़ती है।

माहवारी चक्र मिथक और सत्य
अगर पौधों में पानी डाल दिया तो दादी डांटेगी, अचार की बर्नी को छू लिया तो मां से फटकार पड़ेगी और अगर गलती से मंदिर के पास से भी गुज़र गए, तो तो गंगाजल से सब कुछ पवित्र करना पड़ेगा। इसके अलावा और न जाने ऐसी कितनी बातें है, जिनसे हमें इन मुश्किल दिनों में गुज़रना पड़ता है। क्यों की ऐसा माना जाता है कि पीरियड्स के दिनों में पौधों में पानी डालने से वह मुरझा जाते हैं और अचार निकालने से बर्नी का बाकी अचार खराब हो जाता है। दरअसल, आज भी गावं देहात में महावारी के दौरान लड़की को अशुद्ध माना जाता है। इसके अलावा एक्सरसाइज करने और कुछ चीजों को खाने से भी मना कर दिया जाता है। लेकिन पीरियड एक नॉर्मल प्रोसेस है जिससे एक महिला को हर महीने गुजरना होता है। लेकिन हमारे भारतीय समाज में इसे एक बीमारी की तरह ट्रीट किया जाता है। पीरियड को अशुद्ध माना जाता है। आज हम बात करेंगे पीरियड्स से जुड़े कुछ मिथक और उनसे जुड़े तथ्यों के बारे में ताकि महिलाएं जिन विचारों को सदियों से बोझ समझ कर ढ़ो रही है, वो उनके पीछे छुपी सच्चाई को जान सकें। साथ ही इन मुश्किल दिनों में वह अपनी और अपनी बेटियों की अच्छे से देखभाल कर सकें। हमें ये प्रण लेना चाहिए कि हम Menstrual Hygiene Day  पर खुद और खुद से जुड़ी महिलाओं और टीनएज बच्चियों की मदद कर सके और उन्हें सही.गलत का फर्क बता कर पीरियड्स के डर से आजाद कराने की ओर एक कदम बढ़ा सकें।

 

मिथक पीरियड एक हफ्ते में खत्म हो जाना चाहिए।
सत्य हर महिला का शरीर अलग होता है और वह अलग तरीके से काम करता है। जाहिर है सभी की मेंसुरेशन साइकिल भी अलग ही होगी। बदलती उम्र के अनुसार भी इस साइकिल में बदलाव आते रहते हैं। किसी महिला को पीरियड्स कम दिन तो किसी को ज्यादा दिनों तक हो सकते हैं।

 

मिथक पीरियड में निकलने वाला ब्लड गंदा होता है।
सत्य हालांकि नसों में बहने वाला ब्लड से ये अलग होता है लेकिन पीरियड के दौरान निकलने वाला ब्लड भी नॉर्मल ही होता है। वेजाइना से निकलने वाले इस ब्लड में वेजाइना के टिश्यू, सेल्स और एस्ट्रोजन हॉर्मोन के कारण बच्चेदानी में ब्लड और प्रोटीन की बनी परत के टुकड़े होते हैं। ये सारी चीजें पीरियड के पहले बच्चेदानी में जमा होते हैं। क्योंकि इनकी जरूरत नहीं होती हैं इसलिए पीरियड्स के ब्लड के रूप में बॉडी से बाहर निकल जाते है।

 

मिथक पीरियड्स के दौरान पूजा नहीं करनी चाहिए।
सत्य भारत जैसे देश में आज भी हम आंखें बंद करके इस मिथक को मान रहे हैं कि पीरियड्स के समय पूजा नहीं करनी चाहिए। साथ ही महावारी के समय मंदिर जाने धार्मिक कार्यों में भाग लेने और यहां तक की किचन में जाने की अनुमति नहीं होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस दौरान महिलाओं को अशुद्ध माना जाता हैं। लेकिन यह मानना बिल्कुल गलत है। जिस भगवान ने महिलाओं को यह प्रकृति दी है वह किसी महिला के छूने मात्र से कैसे अशुद्ध हो सकते हैं।
मिथक पीरियड्स के दौरान महिलाएं गर्भधारण नहीं कर सकती हैं।
सत्य ऐसा माना जाता है कि पीरियड्स के दौरान महिलाएं गर्भधारण नहीं कर सकती हैं। लेकिन यह एक मिथक है क्योंकि इस दौरान गर्भधारण करना मुश्किल जरूर है लेकिन नामुमकिन नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि पुरुष शुक्राणु महिला वेजाइना में लगभग 5 दिनों तक जीवित रह सकते हैं। इसलिए अगर पीरियड्स के दौरान असुरक्षित यौन संबंध बनाए जाते हैं प्रेग्नेंट होने की संभावना खत्म नहीं होती है।

 

मिथक पीरियड के दौरान अचार छूने से अचार खराब हो जाता है 
सत्य ये एक साधारण मिथक है, जो पूरी तरह से बेबुनियाद है। अचार सिर्फ नमी यां फिर पानी से भीगे हाथ से छूने से खराब होता हैं।
मिथक पीरियड के वक्त कपड़ों में दाग लगने का मतलब है पीरियड्स खुल कर आ रहा है।
सत्य दाग लगने मतलब है आपने पैड सही से नहीं पहना है या फिर पैड पूरा गीला हो चुका है और उससे चेंज करने की जरुरत है।
मिथक पीरियड के पहले बहुत ज्यादा खट्टी और ठंडी चीजे खाने से पेट दर्द होता है।
सत्य महावारी के दौरान आप कुछ भी खा सकते हैं, लेकिन प्रीमेन्सट्रूअल सिंड्रोम की वजह से महिलाओं में फूड क्रेविंग होना नॉर्मल है।
मिथक एक पैड दिनभर चल जाता है
सत्य दिनभर एक ही पैड इस्तेमाल करने से बैक्टीरियल इंफैक्शन का खतरा बना रहता है। इन दिनों में हर 6 घंटे में पैड चेंज करना चाहिए।

 

मिथक एक्सरसाईज यंा व्यायाम से करें परहेज़
सत्य एक्सरसाईज़ करने से शरीर में रक्त संचार सुचारू बना रहता है और शरीर चुस्त रहता है। इन दिनों में ज्यादा व्यायाम यां हैवी एक्सरसाइज़ की बजाय योगा और कुछ देर एरोबिक्स कर सकते हैं। इससे शरीर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। 

 

मिथक 28 दिन का ही साईकिल होता है
सत्य ऐसा नहीं है साईकिल कभी कभी आगे पीछे हो सकती है। 20 दिन का भी साईकिल हो सकता है और 30 दिन का भी हो सकता है। कभी कभार साईकिल की डेट आगे पीछे होना साधारण है। मगर इस बात का ध्यान रखें कि अगर हर महीने साईकिल की डेट गड़बड़ा रही है, तो तुरंत डाॅक्टर से सम्पर्क करें।
सूथ हेल्थकेयर में बतौर मैनेजिंग कंज्यूमर इनसाईटस एंड प्रोडक्ट इनोवेशन संभाल रही परिधि मंत्री से जब बात की गई तो उन्होंने कुछ ज़रूरी बातों पर रोशनी डाली की पीरियड साईकिल में हमें क्या कारना चाहिए। परी सैनिटरी नैपकिन्स से जुड़ी परिधि मंत्री  बता रही हैं।
सबसे पहले सही सैनेटरी पैड का चुनाव करना चाहिए। आजकल बाज़ार में कई तरह के पैडस उपलब्ध है, तो अपनी ज़रूरत के मुताबिक पैड का चयन करना चाहिए। 

 

पैड चेंज करने के बाद हाथों को अच्छी तरह से धोना चाहिए। 
पैड को अच्छी तरह से डिस्पोज़ करना चाहिए और डिस्पोज़ करने से पहले उसे एक कागज़ में लपेट लेना चाहिए। आजकल पैड के साथ ही डिस्पोज़ पेपर अटैच होता है। अगर नहीं है, तो कोई भी कागज़ इस्तेमाल करें ताकि इससे वातावरण दूषित होने से बचें
दिनभर गीलापन महसूस नहीं होना चाहिए, इससे खुजली और रैशिज़ की समस्या होने लगती है। पीरियड्स के दौरान खुद की सफाई का भी जरूर ध्यान रखें। पैड चेंज करने के बाद प्राईवेट पार्टस का अच्छी तरह से साफ करें।

यह भी पढ़ें -इंटीमेंट हाइजीन प्रोडक्ट बन सकता है यूटीआई का कारण

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