पीरियड्स यानी मासिक धर्म में कैसा हो खान-पान

विम्मी करण सूद

28th May 2020

स्नेहा के पेट में सुबह से बहुत क्रैम्प्स पड़ रहे थे. हर महीने पीरियड्स के दौरान पेट में असहनीय दर्द उठने की उसे धीरे- धीरे आदत सी हो चली थी पर कभी- कभी ये दर्द जब हद पार कर जाता तो ना चाहते हुए भी पैन किलर्स ही इसका इलाज बनते।

पीरियड्स यानी मासिक धर्म में कैसा हो खान-पान
मम्मी ने दादी के सारे नुस्खे आज़मा डाले, पीरियड्स के दौरान न तो दही या कोई दूसरी खट्टी चीज़ें खाने को देती है और ना ही ठंडा पानी ही फिर भला चाहे पारा कितना भी झुलसाने वाला क्यों न हो। पर इतना सब होने पर भी स्नेहा की तकलीफ काम नहीं हुई और ये हाल स्नेहा नहीं कितनी ही किशोरियों और महिलाओं का है जिनके लिए महीने के ये पांच दिन त्रासदी भरे होते हैं। सोचती रहती हैं कि आखिर क्या करें ऐसा जिससे कि सृष्टि के इस अनमोल चक्र को आनंददायक बना सकें, कैसी होनी चाहिए डाइट ताकि पीरियड्स के दौरान शारीरिक कमज़ोरी से बचें? 
दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लिनिक की पहली डॉक्टर और जानी-मानी गयनाकोलॉजिस्ट डॉक्टर अलका चौधरी का मानना है कि 'ध्यान रहे की इन दिनों साफ-सफाई के साथ ये भी ज़रूरी है कि शरीर तंदुरस्त रहे क्यूंकि जहाँ एक ओर रक्तस्राव से एनीमिया होने का खतरा बढ़ जाता है वहीँ भोजन के ज़रिये शरीर को आयरन की सप्लाई भी बदस्तूर मिलनी चहिये। इसके लिए वे अपने निम्न तबके के मरीज़ों को गुड़, चने और भरपूर पौष्टिक भोजन करने की हिदायत देती हैं'. पेटदर्द की ऐंठन और मूड स्विंग्स को डील करने के लिए आजकल देखा गया है यंग जनरेशन गोल गप्पे, जंक फ़ूड यानी पिज़ा, बर्गर जैसे अपोषक खाने की ओर ज़्यादा आकर्षित हो रही है पर हम बात करेंगे कि ऐसा क्या खाना चाहिए जिससे शरीर को सभी ज़रूरी पोषक तत्व मिल सकें.

 

कैल्शियम- एक व्यस्क शरीर को औसतन बारह सौ मिलीग्राम कैल्शियम की आवश्यकता होती है जो शरीर को तंदुरस्त व आकर्षक दिखने के लिए ज़रूरी है तभी बचपन से हर घर में बच्चों को दूध ज़रूर पिलाया जाता है। कैल्शियम हड्डियों की मज़बूती के लिए भी अनिवार्य है और ये दूध के अलावा पनीर, दही, राजमा, मछली, नारियल की गिरी, चावल, मोटे आटे की रोटी, टमाटर व हरी पत्तेदार सब्ज़िओं में भी पाया जाता है. इसलिए इन दिनों अपने भोजन में इन्हें ज़रूर शामिल करें. अगर आप लेक्टोजन इन्टॉलरेंट हैं तो दूध की जगह आप सोया मिल्क, नगेट्स व ग्रैन्यूल्स भी ले सकते हैं। ध्यान रहे कि इन दिनों शरीर में कैल्शियम युक्त भोजन की मात्रा बढ़ानी चाहिए। इंटरनल मेडिसिन ने एक आर्टिकल पब्लिश किया था जिसमें साफ़ कहा गया है कि कैल्शियम और विटामिन डी पीएमएस के लक्षण काम करने में मदद करता है. भारतीय परिवारों की आज़मायी बात है कि पीरियड्स के दौरान एक गिलास हल्दी वाला दूध भी चमत्कारी रूप से असर डालता है।  

 

विटामिन-  शरीर को स्वस्थ रखने के लिए ऐसे भोजन का सेवन करें जिसमें विटामिन्स की आवश्यक मात्रा हो क्यूंकि ये न केवल शरीर की प्रतिरोधात्मक क्षमता को बढ़ाते हैं  बल्कि बीमारियों से लड़ने में भी अहम भूमिका निभाते हैं. विटामिन हमारे मेटाबोलिज्म और इम्यून सिस्टम के लिए ज़रूरी है सो इन दिनों पूरी कोशिश रहनी चाहिए कि ऐसा भोजन लें जो हमें स्ट्रांग बनाये। आंवला, नीम्बू, अंगूर, संतरा, पालक, ब्रोकली, बंदगोभी में विटामिन सी प्रचुर मिलता है तो चीज़, अंडे, फिश, मिल्क प्रोडक्ट, गाजर, मशरूम व  हरी पत्तेदार सब्ज़िओं से हमें विटामिन ए व डी मिलता है। सोया आयल और फूल गोभी खाने से शरीर में विटामिन के की कमी दूर होती है. पीरियड्स के दौरान मीठा खाने की तीव्र इच्छा होती है लेकिन साथ ही वज़न बढ़ने का भी डर लगा रहता है। हमारा भोजन यदि संतुलित व विटामिन्स से भरपूर होगा तो शरीर में शर्करा के स्तर को रोकने में मदद करेगा। जिससे मीठा खाने की इच्छा पर भी कण्ट्रोल होगा. कद्दू, मूँगफली, सूरजमुखी, फ्लेक्स आदि बीजों के सेवन से पीएमएस के लक्षणों को काम करने में मदद मिलती है और शरीर में पौष्टिक तत्वों की बढ़ोतरी होती है.  

 

मैग्नीशियम और पोटैशियम- मैग्नीशियम और पोटैशियम से भरपूर भोजन मासिक धर्म के दौरान लेने से शरीर में हो रही सूजन और दर्द से राहत मिलती है. इसका सबसे बड़ा स्रोत है टोफू, जो आजकल वैसे भी हमारी डाइट का एक हिस्सा बनता जा रहा है. केला एक ऐसा फल है जो पोटैशियम का रिच सोर्स है और अमूमन किसी भी रूप में यानी बनाना शेक, कस्टर्ड या वैसे ही खाया जा सकता है. केले की सब्ज़ी भी ली जा सकती है.अलसी, सोयाबीन, खजूर, बादाम, कद्दू के बीज, सेम अवोकाडो, शकरकंदी भी मूड स्विंग्स को कण्ट्रोल करने में सहायक है. इनका सेवन अच्छी नींद में सहायक होता है और शरीर की ऐंठन कम करता है. साथ ही इन दिनों होनेवाले डिप्रेशन को भी डील करने में मदद मिलती है. डार्क चॉकलेट में कम कैलोरी होती है और ये ब्लड शुगर को कण्ट्रोल करती है इसलिए मीठे की तलब होने पर इसे भी थोड़ी- थोड़ी मात्रा में खा सकते हैं.

 

कार्बोहाइड्रेट- कार्बोहाइड्रेट लगभग सभी में पाया जाता है चाहे आपका पिज़ा हो या चिप्स का पैकेट या घर का बना खाना।हमारे शरीर में ऊर्जा का मुख्य स्रोत है और इससे रोज़मर्रा के लिए आवश्यक कैलोरी मिलती है. इन दिनों आप चाहे तो दलिया, मल्टीग्रैन चपाती या ओट्स से भी शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्व ले सकते हैं. सबसे बड़ी बात है कि आवश्यक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट लेने के बाद जंक फ़ूड की क्रेविंग अपने आप ख़त्म हो जाएगी और वज़न बढ़ने का खतरा नहीं रहेगा.

 

फ्रूट्स और नट्स- भला ऐसा कौन होगा जिसे फ्रूट्स और नट्स पसंद नहीं बल्कि आजकल तो बाजार में भी मन्चिंग के लिए रेडीमेड सीड्स के पैकेट मिलते है. पीरियड्स के दौरान जब भी कुछ खाने का मन करे बेहतर है आप मिक्स फ्रूट का एक बाउल भर लें, वज़न बढ़ने की चिंता वहीं ख़त्म. साथ ही कभी - कभी अधिक ब्लीडिंग से कमज़ोरी और चक्कर आने की जो समस्या आ रही होगी वो भी समाप्त हो जाएगी। इसके लिए मौसमी फल सबसे बढ़िया रहते है जो शरीर को ज़रूरी पोषण देते है. नट्स लेते समय हो सके तो बिना नमक के लें क्यूंकि नमक से पेट में ब्लोटिंग यानी फूलापन महसूस होता है. हाँ, कैलोरीज इनमें फलों से अधिक होती है तो बेहतर है अपनी आवश्यकता के अनुसार दो-चार दाने चबाते रहें.

 

ओमेगा 3 फैटी एसिड - हाल ही में हुए एक मेडिकल सर्वे में पाया गया की जिन महिलाओं ने रोज़ाना छः ग्राम मछली का तेल लिया था उन्हें पीरियड्स के दौरान कम तकलीफ हुई। ओमेगा 3 शरीर के लिए एक बढ़िया पोलीअनसैचुरेटेड फैट है जो अमूमनतौर पर दिमाग को सुचारु रूप से चलाने, दिल को सेहतमंद रखने और तनाव को दूर करने में फायदेमंद है. इसलिए अलसी के बीज, अखरोट, सभी तरह की बेरी, किसी भी तरीके से ली गयी राई , सालमन मछली, केनोला आयल, सी फ़ूड और बीन्स को अपने भोजन में अवश्य शामिल करें क्योंकि इससे इन दिनों में आपको दर्द से राहत मिलेगी.

 

भरपूर पानी पियें - पीरियड्स के दर्द को काम करने में पानी भी बहुत बड़ी भूमिका है इसलिए भरपूर पानी पियें. जी हाँ पानी न केवल बेचैनी को कम करता है बल्कि शरीर में आयी सूजन को भी कम करता है. बहुत सी महिलाएं इस दौरान स्विमिंग आदि एक्सरसाइजेज भी करती हैं क्यूंकि इससे क्रैम्प्स में हेल्प मिलती है.  

 

पीरियड्स के दौरान हो सकता है की आपका मन अधिक खाना खाने का न कर रहा हो तो ज़बरदस्ती खाने की जगह छोटी- छोटी मात्रा में भोजन ले, नट्स खाएं या फ्रूट्स भी ले सकते हैं. पीरियड्स के दौरान हमारा डाईजेसटिव सिस्टम कमज़ोर हो जाता है इसलिए खाना खूब चबाकर खाना चाहिए. अगर ऐसा नहीं करेंगे तो पेट की गड़बड़ी भी हो सकती है. इन पांच दिनों में अधिक मीठा ना खाएं हालाँकि हार्मोनल असंतुलन के कारण ब्लड शुगर ऊपर नीचे हो जाती है इसलिए मीठा खाने की तलब उठती है पर कण्ट्रोल करें. अधिक से अधिक नेचुरल फ्रूट खाएं. ये कुछ ऐसे खान-पान के उपाय है जिन्हे अपनाकर पीरियड्स को बेहतर बनाया जा सकता है.  

यह भी पढ़ें -लॉकडाउन की स्वास्थ्य समस्याओं से कैसे बचें?

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मम्मी ने दादी के सारे नुस्खे आज़मा डाले, पीरियड्स के दौरान न तो दही या कोई दूसरी खट्टी चीज़ें खाने को देती है और ना ही ठंडा पानी ही फिर भला चाहे पारा कितना भी झुलसाने वाला क्यों न हो। पर इतना सब होने पर भी स्नेहा की तकलीफ काम नहीं हुई और ये हाल स्नेहा नहीं कितनी ही किशोरियों और महिलाओं का है जिनके लिए महीने के ये पांच दिन त्रासदी भरे होते हैं। सोचती रहती हैं कि आखिर क्या करें ऐसा जिससे कि सृष्टि के इस अनमोल चक्र को आनंददायक बना सकें, कैसी होनी चाहिए डाइट ताकि पीरियड्स के दौरान शारीरिक कमज़ोरी से बचें? 
दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लिनिक की पहली डॉक्टर और जानी-मानी गयनाकोलॉजिस्ट डॉक्टर अलका चौधरी का मानना है कि 'ध्यान रहे की इन दिनों साफ-सफाई के साथ ये भी ज़रूरी है कि शरीर तंदुरस्त रहे क्यूंकि जहाँ एक ओर रक्तस्राव से एनीमिया होने का खतरा बढ़ जाता है वहीँ भोजन के ज़रिये शरीर को आयरन की सप्लाई भी बदस्तूर मिलनी चहिये। इसके लिए वे अपने निम्न तबके के मरीज़ों को गुड़, चने और भरपूर पौष्टिक भोजन करने की हिदायत देती हैं'. पेटदर्द की ऐंठन और मूड स्विंग्स को डील करने के लिए आजकल देखा गया है यंग जनरेशन गोल गप्पे, जंक फ़ूड यानी पिज़ा, बर्गर जैसे अपोषक खाने की ओर ज़्यादा आकर्षित हो रही है पर हम बात करेंगे कि ऐसा क्या खाना चाहिए जिससे शरीर को सभी ज़रूरी पोषक तत्व मिल सकें.

कैल्शियम- एक व्यस्क शरीर को औसतन बारह सौ मिलीग्राम कैल्शियम की आवश्यकता होती है जो शरीर को तंदुरस्त व आकर्षक दिखने के लिए ज़रूरी है तभी बचपन से हर घर में बच्चों को दूध ज़रूर पिलाया जाता है। कैल्शियम हड्डियों की मज़बूती के लिए भी अनिवार्य है और ये दूध के अलावा पनीर, दही, राजमा, मछली, नारियल की गिरी, चावल, मोटे आटे की रोटी, टमाटर व हरी पत्तेदार सब्ज़िओं में भी पाया जाता है. इसलिए इन दिनों अपने भोजन में इन्हें ज़रूर शामिल करें. अगर आप लेक्टोजन इन्टॉलरेंट हैं तो दूध की जगह आप सोया मिल्क, नगेट्स व ग्रैन्यूल्स भी ले सकते हैं। ध्यान रहे कि इन दिनों शरीर में कैल्शियम युक्त भोजन की मात्रा बढ़ानी चाहिए। इंटरनल मेडिसिन ने एक आर्टिकल पब्लिश किया था जिसमें साफ़ कहा गया है कि कैल्शियम और विटामिन डी पीएमएस के लक्षण काम करने में मदद करता है. भारतीय परिवारों की आज़मायी बात है कि पीरियड्स के दौरान एक गिलास हल्दी वाला दूध भी चमत्कारी रूप से असर डालता है।  

विटामिन-  शरीर को स्वस्थ रखने के लिए ऐसे भोजन का सेवन करें जिसमें विटामिन्स की आवश्यक मात्रा हो क्यूंकि ये न केवल शरीर की प्रतिरोधात्मक क्षमता को बढ़ाते हैं  बल्कि बीमारियों से लड़ने में भी अहम भूमिका निभाते हैं. विटामिन हमारे मेटाबोलिज्म और इम्यून सिस्टम के लिए ज़रूरी है सो इन दिनों पूरी कोशिश रहनी चाहिए कि ऐसा भोजन लें जो हमें स्ट्रांग बनाये। आंवला, नीम्बू, अंगूर, संतरा, पालक, ब्रोकली, बंदगोभी में विटामिन सी प्रचुर मिलता है तो चीज़, अंडे, फिश, मिल्क प्रोडक्ट, गाजर, मशरूम व  हरी पत्तेदार सब्ज़िओं से हमें विटामिन ए व डी मिलता है। सोया आयल और फूल गोभी खाने से शरीर में विटामिन के की कमी दूर होती है. पीरियड्स के दौरान मीठा खाने की तीव्र इच्छा होती है लेकिन साथ ही वज़न बढ़ने का भी डर लगा रहता है। हमारा भोजन यदि संतुलित व विटामिन्स से भरपूर होगा तो शरीर में शर्करा के स्तर को रोकने में मदद करेगा। जिससे मीठा खाने की इच्छा पर भी कण्ट्रोल होगा. कद्दू, मूँगफली, सूरजमुखी, फ्लेक्स आदि बीजों के सेवन से पीएमएस के लक्षणों को काम करने में मदद मिलती है और शरीर में पौष्टिक तत्वों की बढ़ोतरी होती है.  

मैग्नीशियम और पोटैशियम- मैग्नीशियम और पोटैशियम से भरपूर भोजन मासिक धर्म के दौरान लेने से शरीर में हो रही सूजन और दर्द से राहत मिलती है. इसका सबसे बड़ा स्रोत है टोफू, जो आजकल वैसे भी हमारी डाइट का एक हिस्सा बनता जा रहा है. केला एक ऐसा फल है जो पोटैशियम का रिच सोर्स है और अमूमन किसी भी रूप में यानी बनाना शेक, कस्टर्ड या वैसे ही खाया जा सकता है. केले की सब्ज़ी भी ली जा सकती है.अलसी, सोयाबीन, खजूर, बादाम, कद्दू के बीज, सेम अवोकाडो, शकरकंदी भी मूड स्विंग्स को कण्ट्रोल करने में सहायक है. इनका सेवन अच्छी नींद में सहायक होता है और शरीर की ऐंठन कम करता है. साथ ही इन दिनों होनेवाले डिप्रेशन को भी डील करने में मदद मिलती है. डार्क चॉकलेट में कम कैलोरी होती है और ये ब्लड शुगर को कण्ट्रोल करती है इसलिए मीठे की तलब होने पर इसे भी थोड़ी- थोड़ी मात्रा में खा सकते हैं.

कार्बोहाइड्रेट- कार्बोहाइड्रेट लगभग सभी में पाया जाता है चाहे आपका पिज़ा हो या चिप्स का पैकेट या घर का बना खाना।हमारे शरीर में ऊर्जा का मुख्य स्रोत है और इससे रोज़मर्रा के लिए आवश्यक कैलोरी मिलती है. इन दिनों आप चाहे तो दलिया, मल्टीग्रैन चपाती या ओट्स से भी शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्व ले सकते हैं. सबसे बड़ी बात है कि आवश्यक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट लेने के बाद जंक फ़ूड की क्रेविंग अपने आप ख़त्म हो जाएगी और वज़न बढ़ने का खतरा नहीं रहेगा.

फ्रूट्स और नट्स- भला ऐसा कौन होगा जिसे फ्रूट्स और नट्स पसंद नहीं बल्कि आजकल तो बाजार में भी मन्चिंग के लिए रेडीमेड सीड्स के पैकेट मिलते है. पीरियड्स के दौरान जब भी कुछ खाने का मन करे बेहतर है आप मिक्स फ्रूट का एक बाउल भर लें, वज़न बढ़ने की चिंता वहीं ख़त्म. साथ ही कभी - कभी अधिक ब्लीडिंग से कमज़ोरी और चक्कर आने की जो समस्या आ रही होगी वो भी समाप्त हो जाएगी। इसके लिए मौसमी फल सबसे बढ़िया रहते है जो शरीर को ज़रूरी पोषण देते है. नट्स लेते समय हो सके तो बिना नमक के लें क्यूंकि नमक से पेट में ब्लोटिंग यानी फूलापन महसूस होता है. हाँ, कैलोरीज इनमें फलों से अधिक होती है तो बेहतर है अपनी आवश्यकता के अनुसार दो-चार दाने चबाते रहें.

ओमेगा 3 फैटी एसिड - हाल ही में हुए एक मेडिकल सर्वे में पाया गया की जिन महिलाओं ने रोज़ाना छः ग्राम मछली का तेल लिया था उन्हें पीरियड्स के दौरान कम तकलीफ हुई। ओमेगा 3 शरीर के लिए एक बढ़िया पोलीअनसैचुरेटेड फैट है जो अमूमनतौर पर दिमाग को सुचारु रूप से चलाने, दिल को सेहतमंद रखने और तनाव को दूर करने में फायदेमंद है. इसलिए अलसी के बीज, अखरोट, सभी तरह की बेरी, किसी भी तरीके से ली गयी राई , सालमन मछली, केनोला आयल, सी फ़ूड और बीन्स को अपने भोजन में अवश्य शामिल करें क्योंकि इससे इन दिनों में आपको दर्द से राहत मिलेगी.

भरपूर पानी पियें - पीरियड्स के दर्द को काम करने में पानी भी बहुत बड़ी भूमिका है इसलिए भरपूर पानी पियें. जी हाँ पानी न केवल बेचैनी को कम करता है बल्कि शरीर में आयी सूजन को भी कम करता है. बहुत सी महिलाएं इस दौरान स्विमिंग आदि एक्सरसाइजेज भी करती हैं क्यूंकि इससे क्रैम्प्स में हेल्प मिलती है.  

पीरियड्स के दौरान हो सकता है की आपका मन अधिक खाना खाने का न कर रहा हो तो ज़बरदस्ती खाने की जगह छोटी- छोटी मात्रा में भोजन ले, नट्स खाएं या फ्रूट्स भी ले सकते हैं. पीरियड्स के दौरान हमारा डाईजेसटिव सिस्टम कमज़ोर हो जाता है इसलिए खाना खूब चबाकर खाना चाहिए. अगर ऐसा नहीं करेंगे तो पेट की गड़बड़ी भी हो सकती है. इन पांच दिनों में अधिक मीठा ना खाएं हालाँकि हार्मोनल असंतुलन के कारण ब्लड शुगर ऊपर नीचे हो जाती है इसलिए मीठा खाने की तलब उठती है पर कण्ट्रोल करें. अधिक से अधिक नेचुरल फ्रूट खाएं. ये कुछ ऐसे खान-पान के उपाय है जिन्हे अपनाकर पीरियड्स को बेहतर बनाया जा सकता है.  

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