कहीं पीरियडस में दर्द का कारण ये तो नहीं

Jyoti Sohi

28th May 2020

कहीं पीरियडस में दर्द का कारण ये तो नहीं मेन्सटरूअल हाईजीन डे 2020 पर जाने पीरियड्स में होने वाले दर्द के बारे में विस्तार से पीरियड्स के दौरान हर महिला दर्द का अनुभव करती है।

कहीं पीरियडस में दर्द का कारण ये तो नहीं
फर्क सिर्फ इतना होता है कि कुछ लोगों को दर्द कम होता है, तो कुछ का दर्द असहनीय हो जाता है। आज भी पीरियड्स के बारे में लोग खुलकर बात करने से कतराते हैं और अगर दर्द का जिक्र कर भी तो उसपर खुलकर बात करने की बजाय कोई न कोई घरेलू नुस्खा बताकर चुप करा दिया जाता हैं। मगर दर्द को चुपचाप बर्दाश करना किसी बड़ी बीमारी को न्यौता देने के बराबर है। जी हां अगर हर पीरियड्स की हर साईकिल पर दर्द असहलीय हो रहा है यां साईकिल शुरू होने से पहले ही दर्द का अहसास होने लगता है, तो इस बात को अनदेखा न करें और तुरंत डाॅक्टर से संपर्क करें। आइए सबसे पहले जानते हैं होने वाले असहनीय दर्द के कारण।
एंडोमेट्रियोसिस
एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी समस्या है, जिससे 10 फीसदी महिलाएं होकर गुज़रती हैं। इसमें यूटरस के अंदर पाया जाने वाला एक टिशू बढ़कर गर्भाशय यानी यूटरस के बाहर फैलने लगता है। यह टिशू अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब या गर्भाशय के बाहरी हिस्सों में और अन्य आंतरिक हिस्सों में फैल सकता है। एंडोमेट्रियोसिस होने पर पीरियड्स के दौरान तेज दर्द हो सकता है। यह टिशू गर्भाशय के अंदर वाले टिश्यू जैसा ही होता है लेकिन पीरियड्स के दौरान यह बाहर नहीं निकल पाता है जिससे दर्द होता है। कभी.कभी यह टिश्यू निशान छोड़ देते हैं या द्रव से भरे अल्सर बनाते हैं। इससे महिलाओं की प्रजनन क्षमता में कमी आ सकती है।
इंदरप्रस्थ अपोलो हाॅस्पिटल, सीनियर कंसलटेंट आॅफ गाइनिकॉलाजी नई दिल्ली डॉक्टर नीलम सूरी कहती हैं कि पीरियड्स के दौरान दर्द अगर ज्यादा है और पेट के अंदर खिचाव महसूस हो रहा है तो ये एंडोमेट्रियोसिस बीमारी के लक्षण है। इसका इलाज सर्जरी यां दवाईयों से संभव है। सबसे पहले समझना ये ज़रूरी है कि ये किसी बीमारी का दर्द हैं यां नार्मल दर्द। अगर दर्द एक यां दो घंटे का है, तो चिंता की बात नहीं है, लेकिन अगर आपको उल्टी हो रही है और पेनकिलर खानी पड़ रही है, तो ज़रूर गाइनिकॉलजिस्ट  से संपर्क करें। वो फिर आपको अल्टासाउंड की सलाह दे सकते हैं, ताकि बीमारी की जांच की जा सके। 
एसोसिएट डाॅयरेक्टर, आॅबस्टिरक्स एंड गाइनिकॉलाजी फोर्टिस ला फेम नई दिल्ली डॉ मधु गोयल बताती हैं कि आजकल पीरियड्स की शुरूआत 10 सं 12 साल की उम्र में शुरू हो जाती है। ऐसे में कम उम्र में दर्द का अनुभव भी ज्यादा होता है। लेकिन अगर दर्द बहुत ज्यादा और लगातार है, तो उसके कई कारण हो सकते हैं। मगर ऐसे में दर्द को सहन करने की बजाय इनकी जांच कराए और पेनकिलर भी लें। क्यों की कोई भी असहनीय दर्द शरीर के हानिकारक साबित हो सकता है।   
एंडोमेट्रिओसिस के लक्षण.
  • एंडोमेट्रियोसिस के मुख्य लक्षणों में से पीरियड्स के दौरान 
  • सामान्य से ज्यादा दर्द 
  • बैक पेन, 
  • दर्दनाक मूत्र विसर्जन
  • ज्यादा ब्लीडिंग, 
  • अनियमित पीरियड्स, 
  • कब्ज, डायरिया 
  • बार-बार पेशाब लगना 
  • थकान
एंडोमेट्रियोसिस के कुछ चक्रीय लक्षण भी होते हैं यानी महिलाओं के मासिक धर्म शुरू होने से पहले या कुछ समय बाद होने के दौरान ही नजर आते हैं. आंत्र समस्याएं जैसे समय-समय पर सूजन, शौच में दर्द, कंधे का दर्द इत्यादि.एंडोमेट्रिओसिस से महीने में कई बार रक्तस्त्राव हो सकता है और सामान्य से अधिक भी. 
 पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज 
पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज यानी पीआईडी मेट्रो शहरों की महिलाओं में इन्फर्टिलिटी का बड़ा कारण बन रही है। 15.24 साल तक की लड़कियां में यह दिक्कत ज्यादा है। इसका असर उनके मां बनने पर पड़ सकता है। यह हार्मोनल डिसऑर्डर है जिसमें रोगी महिला के गर्भाशयए फेलोपियन ट्यूब व प्रजनन से जुड़े अंगों में सूजन आती है। इलाज के अभाव में इन्फर्टिलिटी की आशंका रहती है। मेंस्ट्रुअल क्रेंप्स बहुत ज्यादा होते हैं, जननांग में किसी तरह की गंध है या समय से पहले रक्तस्राव होता है, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से मिलने की जरूरत है. ज्यादातर मामलों में एंटीबायोटिक की मदद से इसका इलाज किया जा सकता है, पर जितनी जल्दी आप इसका पता कर सकें, उतना बेहतर है.
पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज के लक्षण 
  • वैजाईनल इरीटेशन
  • वज़न बढ़ना
  • पीरियड्स अनियमित होना
  • वाईट डिस्चार्ज
  • निचले हिस्से में दर्द
  • बुखार और उल्टी
यूटराइन फाइब्रॉइड्स
लगभग 75 फीसदी महिलाओं को उनके जीवन में कभी न कभी यूटराइन फाइब्रॉइड्स का सामना करना पड़ता है. यूटराइन फाइब्रॉइड्स गर्भाशय में बनने वाले ट्यूमर्स होते हैं. ये कैंसर नहीं होते हैं, पर जब ये यूटरस की लाइनिंग को छूते हैं, तो बेहद दर्दनाक हो जाते हैं. तो अगर आपके पीरियड्स काफी लंबे चलते हैं, काफी ज्यादा खून बहता है या फिर बहुत दर्द होता है, तो अल्ट्रासाउंड कराइए और देखिए कहीं आपके यूटरस में फाइब्रॉइड तो नहीं.
व्यायाम नहीं करतीं
पीरियड्स से एक हफ्ते पहले एक महिला का शरीर काफी मात्रा में प्रोजेस्ट्रॉन बनाता है. तनाव की वजह से आपका कॉर्टिसोल लेवल भी बढ़ जाता है और ये दोनों मिलकर आपके हार्मोन्स में असंतुलन पैदा कर देते हैं.
इसे योग, मेडिटेशन या कार्डियो के द्वारा काबू में किया जा सकता है क्योंकि व्यायाम करने से ‘आपको अच्छा महसूस कराने वाला हार्मोन' सेरोटोनिन निकलता है.
पीरियड्स में दर्द के सामान्य कारण
जरूरी नहीं कि पीरियड्स में होने वाला दर्द किसी बड़ी बीमारी की ही दस्तक हो। दर्द के बहुत से सामान्य कारण भी हो सकते हैं। मगर सवाल यह उठता है कि वो कौन से कारण है, जिसके चलते कुछ महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान कमर दर्द, पेट दर्द या अकड़न की समस्या सबसे ज्यादा होती है। आइए जानते हैं।
पोषक तत्वों की कमी
शरीर में पोषक तत्वों की कमी से पीरियड्स के दौरान दर्द की समस्या हो सकती है। गलत जीवनशैली व खान-पान इसका अहम कारण है।
संक्रमण के कारण
किसी तरह के संक्रमण के कारण भी मासिक धर्म के समय दर्द की समस्या हो सकती है।
रक्त का बहाव
मासिक धर्म के दौरान जरूरत से ज्यादा रक्त का बहाव या फिर ठीक तरह से रक्त का बहाव न होने से भी दर्द की परेशानी हो सकती है।
हॉर्मोनल चेंज
पीरियड्स के दौरान हॉर्मोन्स में होने वाले बदलाव भी दर्द का कारण बन सकते हैं।
महिलाओं को पीरियड्स में होने वाली परेशानी से निज़ात पाने के लिए खुद का ख्याल रखना ज़रूरी है। घर में सबका ख्याल रखने वाली औरतें दिनभर में अपने लिए वक्त नहीं निकाल पाती हैं। ऐसे में कई बीमारियों की शिकार हो जाती है। इस खास दिन पर खुद से खुद का ख्याल रखने का हमें खुद वादा करना होगा।  

यह भी पढ़ें -जानें क्या है सर्वाइकल कैंसर, प्रमुख कारण, लक्षण और बचाव

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