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स्वस्थ शरीर के लिए जरूरी बातें, रखें ख्याल

मोनिका अग्रवाल

3rd June 2020

आज की व्यस्त जिंदगी में स्वास्थ्य का ख्याल रखना बहुत ही मुश्किल काम हो गया है। इंसान समाज में ऊपर उठने और पैसे कमाने की लालसा में इतना उलझ गया है कि उसे खुद के स्वास्थ्य पर ध्यान देने का ख्याल ही नहीं आता है। पैसे से इलाज तो संभव है, लेकिन आप बीमार न पड़ें यह केवल आपकी अच्छी आदतों से ही संभव है। यह अच्छी आदतें आपके शरीर को स्वस्थ रखेंगी, दिमाग को अधिक सक्रिय बनाएंगी और आपका दिल लंबे समय तक मजबूती से आपका साथ निभाएगा।

स्वस्थ शरीर के लिए जरूरी बातें, रखें ख्याल

स्वस्थ रहने के सूत्र

डिप्रेशन, चिंता, तनाव ऐसी समस्याएं हैं, जिनसे हर इंसान परेशान है।कोरोना वायरस महामारी ने विश्व भर में लोगों के दैनिक जीवन को पूरी तरह से बाधित कर दिया है. ऐसा पहली बार हुआ है. ऐसे में बहुत जरूरी हो जाता है कि हम सब अपनी सेहत का ख्याल रखें और हमेशा स्वस्थ रहें.अगर हम अपने आहार और शारीरिक गतिविधि पर ध्‍यान नहीं देंगे तो यह हमारे  स्वास्थ्य और इम्यूनिटी सिस्टम के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इसके लिए जरूरी है कि हम एक हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल को अपनायें. जब हम पर्यावरणीय गतिरोध से खुद को बचाते हैं तब हमारा इम्‍यून सिस्‍टम बेहतर तरीके से काम करता है और इसकी वजह से हमारी हेल्थ भी सही रहती है. आइए जानते हैं ऐसी कौन सी जरूरी 10 बातें हैं जिन्हें अपनाकर हमेशा स्वस्थ रह सकते हैं.

एक्सरसाइज व योग करें 

प्रतिरक्षा प्रणाली को स्‍वस्‍थ रखने के लिए नियमित व्यायाम बहुत जरूरी है. यदि आपकी रोजाना व्यायाम करने की आदत है, लेकिन प्रतिबंध के कारण ऐसा करने में असमर्थ हैं, तो योग सही उपाय है. योग एक इनडोर एक्‍सरसाइज है (घर के अंदर व्यायाम) जो न केवल शरीर को फ्लेक्सिबल (लचीला) बनाता है वरन यह हृदय और संचार प्रणाली के लिए भी अच्छा  हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाये रखने में भी मदद करता है.ऐसे में सुबह उठकर क्रंचेज़, स्क्वाट्स, रस्सी  कूदना, हाथों को घुमाना आदि एक्सरसाइज़ करें. इसके अलावा रोज़ाना एक घंटा डांस भी करें. इस प्रकार आपका शरीर भी फिट रहेगा.अभी शुरुआत करें अपने लाइफस्टाइल में बदलाव लायें और फिट रहने के लिए इन कामों को आज ही से करना शुरू कर दें. इन उपायों को कम से कम तीन दिन अपनाकर देखें. शुरू में आपको परेशानी हो सकती है लेकिन एक बार आदत हो जाने पर आपको अच्छा लगने लगेगा. सुखासन और प्राणायाम,अर्ध मत्स्येन्द्रासन,मत्स्यासन,उत्तानासन विशेष रूप से फायदेमंद हैं.

अपने खान-पान पर विशेष ध्‍यान दें 

शोध बताते हैं कि सूक्ष्म पोषक तत्वों (माइक्रोन्‍यूट्रिएंट्स) जैसे सेलेनियम, जिंक, कॉपर, ऑयरन, फॉलिक एसिड, विटामिन ए, विटामिन बी 6, विटामिन सी और विटामिन ई की कमी से प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है.यदि आपका आहार आपके सभी सूक्ष्म पोष तत्वों की जरूरतों को पूरा नहीं करता है तो अपने आहार में मिनरल (खनिज) या मल्टीविटामिन सप्‍लीमेंट को शामिल करें. दरअसल हमारे शरीर में प्रतिरक्षा प्रणाली एक सेना है .जो पोषक तत्वों के बल पर बिमारियों से लड़ाई करती है. प्रतिरक्षा कोशिकाओं को अच्छे भोजन और पोषण की आवश्यकता होती है. विज्ञान ने भी कुपोषण और संक्रामक रोगों के बीच सीधा संबंध बताते हुए कहा है कि बीमारियों का बढ़ना सीधे तौर पर कुपोषण का परिणाम है.

तरल पदार्थों का अधिक सेवन करें

शरीर में एनर्जी लेवल बना रहे इसके लिए आप अपने दिन की शुरुआत गुनगुने पानी से करें. गुनगुना पानी पीने से शरीर का मेटाबॉलिक रेट बढ़ जाता है.पानी की कमी से बचने के लिए एक दिन में कम से कम 1.5 से 2 लीटर पानी अवश्य पिये .लेकिन कभी भी एक बार में बहुत ज्यादा पानी न पियें. इसके अलावा तरल पदार्थों का सेवन ज्यादा करें जैसे की सूप, दूध, ताज़े फलों का जूस, निम्बू पानी आदि और वो चीज़े खाये जिसमे पानी की मात्रा भरपूर होता है जैसे की खीरा, तरबूज़ आदि.कॉफ़ी और चाय पीने से बचें क्यूंकि ये मूत्रवर्धक होते हैं .जो शरीर से पानी निकाल देते हैं.नमकीन और मीठे पदार्थों का सेवन करें. इससे आपके शरीर में शर्करा और नमक की कमी दूर होती है.तरल खाद्य पदार्थों का सेवन करें जैसे सूप, ताज़ा जूस और ताज़ा नारियल पानी आदि .इन सबसे आप खुद को डिहाइड्रेशन से बचा सकते हैं.ऐसे लोग पेट की समस्या से कभी परेशानी नहीं होते हैं, उनकी स्किन ग्लो करती है.

हरी सब्जियां और मौसमी फल

फल और सब्जियों में अन्य खाने के मुकाबले भरपूर मात्रा में पोषक तत्व होते हैं. इनमें मौजूद 70 से 80 फीसदी तक एल्कलाइन  हमारे शरीर के पीएच (PH) को बैलेंस बनाये रखने में मददगार है. यही नहीं फलों और सब्ज़ियो में भरपूर मात्रा में बीटा कैरोटीन भी होता है जिससे हमारे इम्यून सिस्टम को  फायदा पहुंचता है. क्योंकि ये तत्व  शरीर में  विटामिन ए की भरपाई के लिए जिम्मेदार है.फल और सब्जियां खाने से एक ओर जहां कैंसर से बचाव होता है वहीं दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी कम होता है.शोध के अनुसार सफेद फल और सब्जियों के मुकाबले लाल, नारंगी और पीली सब्जियों में बीटा कैरोटीन ज्यादा पाया जाता है और कई ख़तरनाक और जानलेवा बीमारियों से बचाता है. इसलिए डाइट में अलग-अलग रंग के फल और सब्जियों को शामिल करें.

प्रोसेस्ड फूड और चीनी का कम प्रयोग

इन दिनों प्रोसेस्ड फूड और चीनी की खपत बढ़ रही है. ये बाजार में आसानी से मिल जाते हैं और लोग अक्सर इसके हानिकारक प्रभावों जानकारी का पता किए बिना इन्हें खा लेते हैं. यही कारण है कि हृदय रोग, मधुमेह और मोटापा बहुत आम हो गए हैं. पेय पदार्थो में भारी मात्रा में चीनी का उपयोग किया जाता है जो अंततः शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं. स्वास्थ्यवर्धक विकल्प जैसे नारियल पानी या बिना किसी एडिटिव्स या चीनी के सिर्फ पानी पीना सबसे अच्छा है और जहां तक प्रोसेस्ड फूड की बात है तो इसकी खपत को सीमित करने की कोशिश करें. ये दोनों इन दिनों स्वास्थ्य समस्याओं का मूल कारण हैं. 

प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थ कम खाएं

 प्रोबायोटिक्स पाचन में सहायता के लिए पाचन तंत्र में मौजूद सूक्ष्मजीव होते हैं. आमतौर पर खाद्य प्रक्रिया जीवित जीवाणुओं को नष्ट कर देती है . सबसे आम हैं लैक्टोबैसिलस और बिफीडोबैक्टीरियम. दही सबसे बुनियादी स्रोत है जो पाचन में मदद करता है और आमतौर पर भारतीय घरों में पाया जाता है. प्रोबायोटिक्स वाले अन्य खाद्य पदार्थ गुड, या चेडर हैं. 

ट्रांस फैट्स / फास्ट फूड से बचें

फास्‍ट फूड खाने से  दिमागी शक्ति पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है. इन खाद्य पदार्थों में मौजूद ट्रांस फैट शरीर में मौजूद लाभदायक फैट्स को रिप्‍लेस कर दिमाग की कार्य क्षमता को बुरी तरह से प्रभावित करने लगता है.शरीर में गैस या कब्ज जैसी शिकायतें होने लगती  हैं और मोटापा, तनाव, कैंसर , सिर दर्द ,बदन दर्द, पेट की कई बीमारियां पेप्टिक अल्सर आदि घर करने लगती हैं .पेट से संबंधित बीमारियों के बढ़तने से कैंसर ,कोलोन कैंसर का खतरा भी बढ़ता है. यही नहीं इस तरह के खाद्य पदार्थों में ओमेगा-6 फैटी एसिड का बढ़ा स्तर बहुत ही नकारात्मक रूप से प्रभाव डालता है. सिर्फ जो बाजार में बिकता है वही जंक फूड है, ऐसा नहीं है. घर में बनने वाली भी बहुत सी चीजें इस श्रेणी में आती हैं जैसे कि परांठा, कुलचे, कचौरी, कोफ्ते, पूरी, पकोड़े और इत्यादि.

लो ग्लाइसिमिक इंडेक्स चीजें खायें

ग्लाइसिमिक इंडेक्स उस लेवल को कहा जाता है, जिस पर खाने से मिलने वाले एनर्जी ग्लूकोज में बदलती है. हाई-ग्लाइसिमिक, यानी जिन चीजों का ग्लाइसिमिक इंडेक्स ज्यादा होता है, वे तेजी से ग्लूकोज में बदलती हैं. इससे भूख जल्दी लगती है और हमें दोबारा खाना पड़ता है. नतीजा शरीर में फैट बढ़ जाता है. डाक्टर के अनुसार ओमेगा-3 और ओमेगा-6 का अनुपात शरीर में 1:1 होना चाहिए.लेकिन हाई-ग्लाइसिमिक की अधिकता होने पर यह अनुपात 1:20 से 1:25 तक पहुंच जाता है. तब बहुत हानिकारक होता है. लो-ग्लाइसिमिक इंडेक्स वाली चीजें धीरे-धीरे ग्लूकोज में बदलती हैं और काफी देर तक पेट भरा होने का अहसास कराती हैं. ये वजन घटाने के लिहाज से काफी फायदेमंद हैं.

पर्याप्त नींद लें 

 गहरी और पर्याप्त नींद लेना शरीर को डिटॉक्सीफाई करने का एक और तरीका है. सोते समय शरीर अपनी मरम्मत ही नहीं करता खुद को रिचार्ज भी करता है. अच्छी और पर्याप्त नींद स्वस्थ सेहत के लिए बहुत जरूरी है. जो लोग रात को 10 बजे सोने जाते हैं और 6 बजे उठते हैं वे पूरा दिन फ्रेश महसूस करते हैं. ऐसे लोगों को तनाव और चिंता कम होती है. नींद की कमी के कारण विषाक्त पदार्थों का निर्माण होगा और स्वास्थ्य को प्रभावित करेगा.  आरामदायक नींद पाने के लिए जीवनशैली में कुछ बदलाव करें  ताकि इससे शरीर डिटॉक्सीफाय हो सके ।

हफ्ते में एक दिन व्रत रखें

व्रत के दौरान फैट बर्निंग प्रोसेस तेज हो जाता है, जिससे चर्बी तेजी से गलती है. फैट सेल्स लैप्ट‍िन नाम का हॉर्मोन छोड़ती हैं. व्रत के दौरान कम कैलोरी मिलने से लैप्ट‍िन की सक्रियता पर असर पड़ता है और वजन कम होता है. शरीर में पोषण को बनाए रखने के लिए आप ताजे फलों व उबली हुई हरी सब्जियों का सेवन कर सकते हैं.

 

सुमैया हामिद , न्यूट्रीशनिस्ट ,सर्वा और दिवा योगा से बातचीत पर आधारित।।

 

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