कैसे संवारे बच्चों का नटखट बचपन

Jyoti Sohi

4th June 2020

आधुनिकता की इस दौड़भाग में कदम से कदम मिलाकर चलने की ललक ने मासूम बचपन के मायने काफी हद तक बदल दिए हैं। एक वो दौर था जब हमारा बचपन दादी नानी की कहानियों से लेकर गुड्डे गुड़ियों के खेल से गुज़रता हुआ कब दबे पांव धीरे धीरे किताबों के बोझ तले दब जाता था, मालूम ही नहीं पड़ता था। मगर नए दौर के रंग में रंगे बच्चों का बचपन काफी आगे निकल चुका है।

कैसे संवारे बच्चों का नटखट बचपन
आज का बचपन पहले से मुखर और होशियार है। पहले परिवार ही बच्चों का मूल आधार होते थे। खेल-खेल में ही बच्चों में मिलजुलकर रहने और खेलने की प्रवृत्ति का विकास होता था। आज एकल खेल और एकल परिवार बच्चों में अंर्तमुखी भावना को जागृत कर रहे हैं जिससे मासूम बच्चे चिडचिड़ापन और ज़िद्दीपन का षिकार हो रहे हैं। ऐसे में कुछ उपायों से बचपन को संवारना हमारी प्रमुख ज़िम्मेदारी है।  
बच्चों को अनुशासन में रहना सिखाएं
बच्चों को बचपन से ही अनुषासन प्रिय बनाने के लिए प्ररित करना चाहिए। ताकि धीरे धीरे उन्हें नियमों के दायरे में रहने की आदत हो जाए। कई बार माता पिता बच्चों को हर छोटी-छोटी बात पर निर्देश देने लगते हैं और उनके ना समझने पर डांटने और फटकारने भी लगते हैं। मगर ऐसा कदम बच्चों को जिद्दी और विद्रोही बना सकता है।
बच्चों के साथ वक्त बिताएं 
बच्चे माता पिता की बेषकीमती पूंजी होते हैं इसलिए उनके साथ बिताया हुआ हर पल कीमती और ज़रूरी होता है। मगर बदलते दौर के साथ कामकाजी माता पिता बच्चांे को भरपूर समय नहीं दे पा रहे हैं। वक्त की किल्लत के चलते उन्हें रोज़ अपने बच्चों के साथ बातचीत यां खेलने के लिए समय नहीं मिल पाता। ऐसे में साप्ताहिक यां सामान्य दिनों में भी कुछ वक्त निकालकर बच्चों की गतिविधियों और उनके क्रियाकलापों पर ध्यान दें ताकि उनके आचरण और उनके कार्यों पर ध्यान दे सकें। 
प्यार-भरा और मददगार माहौल बनाइए
अगर आप हर वक्त गुस्से में, डरे-सहमे और चिंतित दिखाई देंगे तो आपके बच्चे भी खुश नहीं रह पाएंगे। उनके अंदर भी हर वक्त गुस्से की भावना बढ़ेगी। बच्चों की बेहतर परवरिष के लिए उनके आसपास एक प्यार-भरा खुशनुमा माहौल बनाएं, ताकि वो फूलों की तरह खिले हुए रहें।
जिद्दी ना बनने दें 
जो पेरेंट्स बच्चों की हर मांग को पूरा करते हैं उनके बच्चे जिद्दी हो जाते हैं। यदि बच्चे बेवजह जिद करते हैं, तो उनकी मांग को हर बार पूरा करना गलत है। ऐसे हालात में उन्हें प्यार से समझाएं कि उनकी मांग जायज नहीं है ताकि उनमें धीरे धीरे सुधार आ सके। 
बच्चों से गहरी दोस्ती करें
अपने बच्चे पर खुद को थोपना छोड़ दें और उससे गहरी दोस्ती करें। अपने को उससे उपर रख कर उस पर शासन ना चलाएं, बल्कि खुद भी बच्चे के बराबर रखकर उसकी मुष्किलें आंके और उनसे सहनषील व्यवहार करें, ताकि वह आपके सामने आसानी से अपनी समस्याएं रख सके और खुलकर अपने दिल की बात कर सकें।
बच्चों को बड़ा बनाने की जल्दी न करें
बचपन दोबारा लौटकर नहीं आता इसलिए बच्चे को बच्चा ही रहने दें। उसे बड़ा बनाने की जल्दी न करें क्योंकि बच्चा जब बच्चे की तरह बर्ताव करता है तो खुशियां फैलाता है। बच्चों को अपना बचपन भरपूर जीने दीजिए। दरअसल बच्चे उन फूलों के समान होते हैं, जिन्हंे पूर्ण रूप से अगर न खिलने दिया जाए, तो वो मुरझा जाते हैं इसीलिए बच्चों को आराम से बड़ा होने दीजिए, जल्दी क्या है!
जो बनना चाहें बनने दें 
बच्चों पर विष्वास कीजिए और उनको जो बनना है बनने दें। जिंदगी में अपनी समझ और अपने तरीके के मुताबिक हर वक्त उनको ढालने की कोशिश न करें। जरूरी नहीं कि आपने अपनी जिंदगी में जो किया वही आपका बच्चा भी करे। बच्चे को कुछ नया करने का मौका दीजिए क्यों की आपके अलावा उन्हें इस तरह का विकल्प और कहीं नहीं मिल पाएगा। 
बिगड़े बच्चों की निशानियां
 बच्चे को जरूरत से ज्यादा गुस्सा आए या गुस्से में तोड़फोड़ करे।
 घर के किसी भी सदस्य की बात न माने और अपनी मर्जी से ही हर काम करंे।
आपको बच्चे पर इतना गुस्सा आए कि उसकी पिटाई करने का दिल करे।
जब बच्चा देर रात जागने लगे और दिन में उसे नींद आए।
जब उसकी हर जिद्द पूरी करने के अलावा आपके पास कोई और चारा नहीं बचता।
अपनी बात मनवाने के लिए वह आपको अलग अलग तरीके से ब्लैकमेल करने लगे।
स्कूल और मोहल्ले के लोग अक्सर उसकी शैतानियों की शिकायत लेकर आपके पास आने लगें।
उसकी हरकतों के कारण पारिवारिक कार्यक्रमों में जाना आपने कम कर दिया हो।
बिगड़े बच्चों से कैसा व्यवहार करें
बच्चों को सुनें, बहस से बचें
अगर आप चाहते है कि बच्चा आपकी बात को अनसुना न करे, तो आपको पहले आगे बढ़कर खुद भी बच्चे की बात को सुनना पड़ेगा। उनकी बात न सुनने पर वे बहस करने लगते हैं और ज़िद्दी बन जाते हैं। 
बच्चों के साथ ज़बरदस्ती करने से बचें
किसी बात पर ज़बरदस्ती करने से बच्चे स्वभाव से विद्रोही होते चले जाते हैं। कुछ देर के लिए भले ही आपको समाधान मिल जाए, मगर मन से वो दूर होने लगते हैं। ऐसी परिस्थ्तिियों से बचने के लिए बच्चों से कनेक्ट होने की आवष्ष्कता होती है।  
बच्चों के सामने षांत रहें
बच्चों की जिद् से कई बार परिजन परेषान हो जाते हैं और चिल्लाने लगते हैं। मगर बच्चों को प्यार से समझाएं अन्यथा बच्चों में तहज़ीब खत्म होने का ख़तरा बना रहता है। 
बच्चों का सम्मान करें
अगर आप चाहते हैं कि बच्चे आपका सम्मान करें, तो आपको भी उन्हें सम्मान देना होगा और उनके सुझावों और फैसलों पर सहमती देनी होगी।  
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