प्रकृति से कैसे करें दोस्ती

Jyoti Sohi

4th June 2020

बार बार हमें प्रकृति किसी न किसी रूप में सचेत करती है, चेतावनी देती है और रोकने की कोशिश भी करती है। मगर मानव उसके इशारों और उसके किरदारों को पहचानने में चूक करता आया है। हम हर बार जाने अनजाने में पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में प्रकृति को अगर हम अपना दोस्त बना लें, तो कैसा रहेगा।

प्रकृति से कैसे करें दोस्ती
पहले कोरोना, फिर तूफानी चक्रवात, उसके बाद भूकंप और अब आंधी तूफान। प्रकृति का कहर एक के बाद एक आपदाओं के रूप में मानव के सामने आकर खड़ा हो रहा है। बार बार हमें प्रकृति किसी न किसी रूप में सचेत करती है,   चेतावनी देती है और रोकने की कोशिश भी करती है। मगर मानव उसके इशारों और उसके किरदारों को पहचानने में चूक करता आया है। हम हर बार जाने अनजाने में पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में प्रकृति को अगर हम अपना दोस्त बना लें, तो कैसा रहेगा। दरअसल, हम में से बहुत से लोग ऐसे हैं कि जो प्रकृति की गोद से मिले संसाधनों का गलत इस्तेमाल कर रहे है। शायद वो ये सोचते हैं वो इस दुनिया की आखिरी पीढ़ी में हैं, जो जब चाहे जितना चाहे प्राकृतिक संसाधनों की बर्बादी कर सकते हैं। मगर शायद वो ये भूल जाते हैं कि ंहम रोजमर्रा के कामों के दौरान छोटी छोटी सावधानी से काफी उर्जा बचा सकते हैं। प्रक्ति के नियमों को बदलने की कोशिश करंगे तो परेशानी होगी।
हमें तीन बातों का भी खास ख़्याल रखना होगा।
रिडयूज़
संसाधनों का कम से कम इस्तेमाल कर, व्यर्थ उपयोग रोक सकते हैं।
रिसाईकल
प्लास्टिक, कागज़, कांच और धातु से बनी चीजों को रिसाईकल करके उपयोगी वस्तुएं बना सकते हैं। 
रीयूज़
ऐसा सामान जिनका हम दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं, उनका उपयोग ज़रूर करना चाहिए। जैसे प्लास्टिक के डिब्बे, बोतलें और अन्य सामान। दरअसल जो सामान दोबारा इस्तेमाल हो सकता है अगर हम उसे रिसाईकल करते हैं, तो उससे उर्जा व्यय होती है। 
घर पर पौधे लगाएं
अगर आप ये सोच रहे हैं कि एक फलैट के अंदर कैसे पौधे लगाएं, तो ये बेहद आसान है। इसके लिए आप पुराने डिब्बों, बोतलों यां बक्सों में पौधे लगा सकते हैं, जिससे आप पुरानी चीजों को दोबारा इस्तेमाल में ला सकते हैं और वातावरण को स्वच्छ रख पाएंगे। इसके अलावा आप कम जगह में हैंगिग पौधों का भी भरपूर इस्तेमाल कर सकते हैं।  
जंगलों के सर्वनाश को रोकें 
जंगलों में लगे अनगिनत पेड़ न सिर्फ हमें आक्ॅसीज़न देते हैं, बल्कि जल को भी छानते हैं और हवा को शुद्ध करते हैं। इसके अलावा खेतों में मिट्टी का कटाव रोकते हैं और हमें भोजन भी देते हैं। मगर इन सभी चीजों की जानकारी से परे हम जंगलों को अंधाधुंध काट रहे हैं। जो प्रकृति के नियमों के खिलाफ है। ऐसे में हमें जंगलों की रक्षा करनी है और दिनों दिन फैल रही महामारी से खुद का बचाव करना है। 
कागज़ को बरबाद होने से बचाएं
अक्सर हम लोग पेपर का एक तरफ इस्तेमाल करके उसे कूड़े के ढ़ेर में शामिल कर देते हैं। मगर कहीं न कहीं इस बात को भूल जाते हैं कि इसे बनाने में कितनी चीजों का इस्तेमाल होता है और ये कितनी विधियों से होकर गुज़रता है। प्राचीन काल से ही कागज़ उद्योग भारत में बतौर कुटीर उद्योग के तौर पर किया जाता रहा है। 
पेपर को दोनों तरफ से इस्तेमाल करें
वेस्ट पेपर से बैग बनाकर उसमें जरूरी कागजात यां हल्का सामान रख सकते हैं।
वेस्ट पेपर से हम बच्चों को फूल, नाव और तरह तरह की चीजें और खिलौने बनाना सीखा सकते हैं।
इसके अलावा पुराने अख़बार, जिनकी गिनती हम रद्दी में करते हैं। हम उससे ढ़ेरों डेगकोरेटिव आईटमस बनाकर उसे रंगों यां अन्य सामान से सजा सकते हैं।  र्
इंधन बचाएं
एयर कंडीश्नर के इस्तेमाल से बचें। दरअसल एयर कंडीश्नर से करीबन दस प्रतिशत ईंधन ज्यादा खर्च होता है। 
गाड़ी की रफ्तार धीरे धीरे बढ़ाएं अन्यर्था इंधन ज्यादा खर्च होता है।
फयूल कम खर्च हो इसके लिए टायर की हवा का लेवल सही रखना चाहिए।  
आवरलोडिंग से बचें, गाड़ी में आवश्यकता से ज्यादा सामान लोड न करें। ऐसा करने से फयूल तो ज्यादा लगता ही है। साथ ही इजंन पर भी इसका असर पड़ता हैै।
सिग्नल पर गाड़ी बंद कर दें, ऐसा करने से आप पंद्रह फीसदी पेट्रोल बचा सकते हैं।    
ईधन बचाने के लिए अपने वाहन के टायरो में हवा का दबाव उचित मात्रा में रखें।
बिजली कैसे बचाएं
साधारण बल्ब की जगह पर सी एफ एल लाइटस का इस्तेमाल करें। इससे आप तकरीबन अस्सी फीसदी तक बिजली बचा सकते है। 
अपने इलैक्ट्रानिक उपकरणों को पावर एक्सटेंशन काॅर्ड से जोड़ें और रात को इस्तेमाल न होने पर उसे बंद कर दें। पावर एक्सटेंशन काॅर्ड की मदद से आप दस फीसदी बिजली की बचत कर सकते हैं। इसके अलावा आप 
दिनभर घर में लगी लाईटस से घर को रोशन करने की बजाय सूरज की रोशनी से भी घरेलू काम निपटा सकते हैं। 
पानी की बूंद बूंद है कीमती 
आर ओ मशीन से निकलने वाले पानी का 75 फीसदी हिस्सा बर्बादी की भेंट चढ़ जाता है, इसलिए मशीन के पाईप से जो भी पानी निकलता है, उसे आप कई तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे अलावा ए सी से निकलने वाला पानी भी कई कामों में इस्तेमाल हो सकता है। जैसे
पौधों को सींचनें में प्रयोग कर सकते हैं
गाड़ी धोने के काम आ सकता है
घर की साफ सफाई में इस्तेमाल हो सकता है
वाटर हारवेस्टिंग
बारिश के पानी को इकट्ठा करके उसका सदुपयोग किया जा सकता है और वर्षा के बाद इस पानी को उत्पादक कार्यों के लिये प्रयोग में लाया जा सकता है। बारिश के पानी को एक जगह पर एकत्र करने की प्रक्रिया को वर्षाजल संग्रहण यानि वाॅटर हारवेस्टिंग कहा जाता है। दूसरे शब्दों में आपकी छत पर गिर रहे वर्षा जल को सामान्य तरीके से एकत्र कर उसे शुद्ध बनाने के काम को वर्षाजल संग्रहण कहते हैं। इजराइल, सिंगापुर चीन आस्ट्रेलिया जैसे कई देशों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग पर काफी समय से काम हो रहा है। अब समय आ चुका है जबकि भारत में भी इस तकनीक को लागू करने के लिये जन.जागरण को प्रोत्साहन दिया जाये। यह अत्यन्त आसान तकनीक है। इसके अन्तर्गत वर्षाजल को व्यर्थ बहने से रोककर इसे नालियों व पाइप लाइनों के माध्यम से इस प्रकार संग्रहीत किया जाता है ताकि इसका उपयोग फिर से किया जा सके। जो प्रकृति के लिए बेहद सहायक साबित भी होगा। 
मास्क को सही तरह से डिस्पोज़ करें
एक तरफ ऐसी जनसंख्या है, जो कचरा और बेकार चीजें फेंक रही हैं और एक जनसंख्या ऐसी भी है, जो कचरा बिन दरही है और पुराने मास्क उठाकर इस्तेमाल करने को तैयार है। ऐसे में इंफेक्षन का दोहरा खतरा पनपने का डर है। 
सीनियर कंसलटेंट इंटरनल मेडिसिनए पारस अस्पताल, गुरूग्राम डाॅ राजेश कुमार ने बताया कि सोलर एनर्जी और विंड एनर्जी और वाॅटर हारवेसटिंग से पर्यावरण के लिए बेहद फायदेमंद है। इसके अलावा हमें पौधे ज़रूर लगाना चाहिए। वायुप्रदूषण को हम छोटे छोटे प्रयासों से ठीक कर सकते हैं। ऐसे में इम्यूनिटी बढ़ेगी और कोई भी काम प्रकृति के खिलाफ न करें। अन्यथा हमें कोरोना जैसी महामारी से निपटने के लिए तैयार रहना होगा। इसके अलावा हमें मास्क को सही तरह से डिस्पोज़ करना चाहिए, ताकि कोई इसे दोबारा न इस्तेमाल कर सके। इसके अलावा पैदल चलने की आदत हमें प्रकृति के नज़दीक ले जाएगी। 
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