बच्चों का भविष्य रहेगा 'सिक्योर', ऐसे करें निवेश

चयनिका निगम

6th June 2020

बच्चों को बड़ा कर देना भर पेरेंट्स की जिम्मेदारी नहीं होती है। बल्कि उनकी आर्थिक मजबूती के बारे में भी माता पिता को ही सोचना होता है।

बच्चों का भविष्य रहेगा 'सिक्योर', ऐसे करें निवेश
बच्चों का भविष्य कैसा होगा ये माता-पिता की दी हुई परवरिश पर निर्भर करता है। यही परवरिश बच्चे को सही रास्ते पर चलना सिखाती है तो आगे बढ़ते रहना भी। लेकिन इसी परवरिश में बच्चे को बचत की अहमियत समझाना भी शामिल होता है। उन्हें समय-समय पर ये बताते रहना कि पैसों की भी जिंदगी आगे बढ़ते रहने में बहुत अहम जगह है, परवरिश का जरूरी हिस्सा है। मगर बच्चों को समझाने से पहले ये बात खुद समझना भी जरूरी हो जाता है। दरअसल माता-पिता बच्चों को ये बात तब समझा पाएंगे, जब वे खुद उनके लिए जरूरतभर की बचत करके रखेंगे। और उनके लिए बचत की शुरुआत सही समय पर करेंगे। बचत का वैसे तो सही समय कोई नहीं हो सकता, इसमें जब जागो तब सवेरा वाला मामला फिट होता है। लेकिन सुरक्षित आर्थिक भविष्य के लिए आपको एक निश्चित समय पर बचत की शुरुआत करनी होगी।ताकि बच्चे को जरूरत के समय पैसों का मुंह बिलकुल न देखना पड़े। क्या-क्या करना होगा बच्चे के भविष्य के लिए बचत करते रहने के लिए आइए जानें-
10 प्रतिशत वाला फंडा- 
बच्चे की शिक्षा के लिए जोड़ने की सलाह एक्सपर्ट ही नहीं बल्कि रिशतेदारों से भी अक्सर मिल जाती है। आप जरूर इसके लिए सोचते भी जरूर होंगे। लेकिन ये सेविंग कितनी होनी चाहिए? किस आधार पर इसे किया जाए? तो इन सवालों के जवाब एक्सपर्ट देते हैं। वे कहते हैं कि सबसे पहले अभी की शिक्षा का खर्च समझ लें। फिर इसको 10 प्रतिशत कर दें। आपको ऐसे कैलकुलेटर ऑनलाइन बहुत आसानी से मिल जाएंगे जो ये हिसाब आपके लिए आसानी से लगा देंगे। ये अंदाजा मिलने के बाद बच्चे की शिक्षा के लिए जोड़ना शुरू करना आपको बेहतर परिणाम देगा। 
उम्र का अंदाजा-
बच्चों के लिए निवेश करते समय उनकी उम्र के बारे में भी खूब सोचना होगा। जिनके बच्चे 15 साल के हैं उनके लिए निवेश अलग तरह का होगा वहीं जिनके बच्चे 3-4 साल के ही हैं, उनके लिए निवेश का दायरा थोड़ा बड़ा होगा। बच्चे की उम्र कम है तो म्यूचुअल फंड में निवेश सही रहेगा लेकिन बच्चे की उम्र ज्यादा है मतलब आपको निवेश का पैसा जल्दी चाहिए तो बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट सही रहेगा। 
इमर्जेंसी फंड बनाया क्या-
आप बच्चे के पहले ‘बॉडीगार्ड' हैं। मतलब आप उनकी जिंदगी के वो शख्स हैं, जो उनकी जिम्मेदारी सबसे पहले लेंगे। इसलिए आपको एक ऐसे फंड की तैयारी भी करनी होगी, जो बुरे समय में काम आए। ऐसा समय, जब पैसों की सख्त जरूरत हो और कोई रास्ता न समझ आए, तब ये पैसे काम आएंगे। कोशिश कीजिए कि इस फंड में कम से कम छह से नौ महीने के बीच की सेविंग जरूर हो। इस धन को भी ऐसे अकाउंट में सेव कीजिए, जिसमें ब्याज ज्यादा मिलता हो। याद रखिए ये फंड आपको कभी भी फायदा दे सकता है, जैसे अचानक बीमारी, बच्चों के एडमिशन। और इन सबमें काम नहीं भी आए तो आपके रिटायरमेंट के बाद तो ये पैसे जरूर काम आएंगे। 
जितना जल्दी, उतना ज्यादा-
बच्चे के भविष्य को लेकर जरा भी चिंता है तो उनके लिए निवेश जितना जल्दी हो सके शुरू कर दें। ताकि एक उम्र के बाद उसे ज्यादा से ज्यादा फाइनेंशियल सुविधा मिल सके। जैसे 1 करोड़ रुपए भले ही आपको बड़ी रकम लगे लेकिन जल्दी और समझदारी से किए गए निवेश से इसे रकम को जरूरत के समय तक जोड़ा जा सकता है। जैसे तकरीबन 18 सालों तक अगर 9000 या इससे ज्यादा की एसआईपी दी जाए। तो 15 प्रतिशत रिटर्न के साथ ये रकम जोड़ना कठिन नहीं होगा। 
भविष्य का बीमा-
इंश्योरेंस लेने का सुझाव आपको कई बार मिल चुका होगा। इसके कई फायदे हैं, जैसे कि इसे भी एक निश्चित समय के बाद निकाला जा सकता है। इसका फायदा आपको इमर्जेंसी के समय तो मिलेगा ही बाकी कई कामों के हिसाब से निवेश किया जाए तो भविष्य भी सुरक्षित किया जा सकता है। जैसे इसे आप बच्चे की हायर एजुकेशन के हिसाब से भी निवेश कर सकते हैं। आप बच्चे की उच्च शिक्षा का समय हिसाब कर लीजिए जैसे कितने साल बाद वो स्कूल से निकल कर प्रोफेशनल पढ़ाई करने जाए। फिर उतने समय का इंश्योरेंस ले लीजिए। जब बच्चा उच्च शिक्षा के लिए जा रहा होगा तो एक मुश्त रकम आपके हाथ आ जाएगी। 
खर्चे, जो कर सकते हैं परेशान-
अब महंगाई बढ़ती जा रही है इसलिए सिर्फ शिक्षा के बारे में सोचना काफी नहीं होगा। मतलब ऐसा नहीं है कि आप सिर्फ फीस के बारे में सोच कर योजना बनाएंगे और आपका काम चल जाएगा। आपको तो कुछ और खर्चों के बारे में भी सोचना पड़ेगा। जैसे कोचिंग, यातायात, बुक्स और एक्सट्रा करिकुलर एक्टिविटी भी। आपको कई बार कुछ अलग तरह के कोर्स भी कराने पड़ सकते हैं, जैसे लेंगवेज कोर्स। इस बात को ऐसे समझिए कि अब तो प्रोफेशनल कोर्स की कोचिंग भी बहुत महंगी हो चुकी है। इसलिए बचत करते समय हमेशा कुछ अलग बचत के साधनों पर भी ध्यान देना होगा। 
ग्रोथ एसेट पर दें ध्यान-
आपको ध्यान देना होगा कि आपको ऐसी जगह पैसा लगाना है, जहां पैसे की वैल्यू लगातार बढ़ती रहे। ऐसे मदों को ग्रोथ एसेट कहा जाएगा। इनमें रिस्क ऊंचा होता है लेकिन बहुत बड़े रिटर्न देने का मौका भी इनसे मिलता है। इनमें शेयर्स को शामिल किया जा सकता है तो संपत्ति भी। 
डिफेंसिव एसेट भी तो है-
जी हां, बच्चों के लिए निवेश करना है तो ग्रोथ एसेट के साथ डिफेंसिव एसेट पर भी ध्यान देना होगा। ये निश्चित रिजल्ट देने वाले मद होते हैं। एक तरह से इनमें निवेश के बाद उस धन को लेकर सोचने की जरूरत नहीं पड़ती है। इनकी खासियत ये होती है कि इनमें रिस्क कम होता है। लेकिन इनमें रिटर्न को लेकर ज्यादा अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। क्योंकि रिटर्न ज्यादा नहीं मिलते हैं। इनमें कैश और फिक्स्ड डिपॉजिट को शामिल किया जा सकता है। 
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