ऐसे करें मेडिटेशन की शुरुआत

चयनिका निगम

7th June 2020

मेडिटेशन की अहमियत समझने वाले लगातार बढ़ रहे हैं। लेकिन इसकी शुरुआत करने वालों को कुछ बातें जान लेनी चाहिए।

ऐसे करें मेडिटेशन की शुरुआत
मेडिटेशन करना अब हेल्थी लाइफस्टाइल के लिए जरूरी मान लिया गया है। लोग योगा को अपना रहे हैं और ठीक इसी तरह मेडिटेशन को भी अपना बना रहे हैं। दरअसल मेडिटेशन के फायदों को लोगों ने समझ लिया है। आम लोग जान गए हैं कि ये क्रिया एक जादू सी है। इसमें मन की शांति तो है ही शारीरिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर बेहतरीन पड़ता है। मेडिटेशन से ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है तो भूलने की बीमारी से भी छुटकारा मिलता है। इतना ही नहीं तनाव से मुक्ति और नींद में सुधार भी मेडिटेशन के रिजल्ट में मिलते हैं। इसलिए खुद से खुद की पहचान वाली ये क्रिया साधारण बिलकुल नहीं है। अब अगर साधारण नहीं है तो इसको करने का तरीका भी साधारण बिलकुल नहीं होगा। अगर आप मेडिटेशन की शुरुआत करने की सोच रही हैं तो इससे जुड़े कुछ टिप्स भी ध्यान कर लीजिए। इन टिप्स के सहारे मेडिटेशन की शुरुआत करना आसान हो जाएगा। चलिए इनसे रूबरू होते हैं-
मंत्र की जरूरत है या नहीं-
कई लोगों को लगता है कि मेडिटेशन के माहौल में जाने के लिए मंत्र की जरूरत होती है लेकिन ऐसा पूरी तरह से सही नहीं है। मंत्र का असल मतलब होता है मन का वाहन। मतलब मंत्र का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है कि मन को मेडिटेशन प्रेक्टिस में प्रवेश दिलाया जा सके। मगर ये काम सिर्फ मंत्र ही नहीं करते बल्कि लोग किसी खास आवाज, सांसों की गिनती आदि का इस्तेमाल भी करते हैं। जिससे मन पर काबू पाकर मेडिटेशन की स्थिति में लंबे समय तक रहा जा सके। 
मन पूरी तरह से खाली हो जाएगा-
ज्यादातर लोग यही सोचते हैं कि मेडिटेशन के दौरान मन पूरी तरह से खाली हो जाता है। जबकि ये सोच भ्रम भर है। ये सही नहीं है। याद रखिए कि आपको क्रिया के दौरान दिमाग पूरी तरह से खाली करने की कोशिश बिलकुल नहीं करनी है। आपको ये नहीं सोचना है कि सारे विचार मिट जाएं। मन का एक विचार से दूसरे विचार तक जाना इसकी आम प्रक्रिया है। आप कोशिश न कीजिए ऐसा खुद ब खुद हो जाए वो अलग बात है।  
खास मुद्रा की जरूरत-
आमतौर पर ये भी सोचा जाता है कि पलथी बनाकर खास मुद्रा में बैठने से ही मेडिटेशन की क्रिया पूरी होती है। जबकि ऐसा नहीं है। आप उस तरह से बैठें, जिसमें आपको आराम मिले। कई सारे लोग कुर्सी पर बैठकर भी मेडिटेशन करते हैं। 
सो जाने की आदत-
अगर आप मेडिटेशन करने वाले किसी भी शख्स को जानती हैं तो आप ये भी जानती होंगी कि ऐसा करते हुए अक्सर लोगों को नींद आ जाती है। अब इसको गलत समझने की जरूरत बिलकुल नहीं है। क्योंकि ये बहुत ही आम सी बात है। लेकिन हां, तब जब ऐसा जानबूझकर ना किया गया हो। ऐसा मेडिटेशन के नतीजे के तौर पर हुआ है तो कोई बात नहीं। बस इससे निजात पाने के कई तरीके जान कर इतनी कोशिश जरूर की जाए कि नींद न आए। जैसे लेटकर मेडिटेशन करने से अच्छा है कि कुर्सी पर बैठा जाए। 
ये भी पढ़ें-
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स्टोरी-
मेडिटेशन करना अब हेल्थी लाइफस्टाइल के लिए जरूरी मान लिया गया है। लोग योगा को अपना रहे हैं और ठीक इसी तरह मेडिटेशन को भी अपना बना रहे हैं। दरअसल मेडिटेशन के फायदों को लोगों ने समझ लिया है। आम लोग जान गए हैं कि ये क्रिया एक जादू सी है। इसमें मन की शांति तो है ही शारीरिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर बेहतरीन पड़ता है। मेडिटेशन से ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है तो भूलने की बीमारी से भी छुटकारा मिलता है। इतना ही नहीं तनाव से मुक्ति और नींद में सुधार भी मेडिटेशन के रिजल्ट में मिलते हैं। इसलिए खुद से खुद की पहचान वाली ये क्रिया साधारण बिलकुल नहीं है। अब अगर साधारण नहीं है तो इसको करने का तरीका भी साधारण बिलकुल नहीं होगा। अगर आप मेडिटेशन की शुरुआत करने की सोच रही हैं तो इससे जुड़े कुछ टिप्स भी ध्यान कर लीजिए। इन टिप्स के सहारे मेडिटेशन की शुरुआत करना आसान हो जाएगा। चलिए इनसे रूबरू होते हैं-
मंत्र की जरूरत है या नहीं-
कई लोगों को लगता है कि मेडिटेशन के माहौल में जाने के लिए मंत्र की जरूरत होती है लेकिन ऐसा पूरी तरह से सही नहीं है। मंत्र का असल मतलब होता है मन का वाहन। मतलब मंत्र का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है कि मन को मेडिटेशन प्रेक्टिस में प्रवेश दिलाया जा सके। मगर ये काम सिर्फ मंत्र ही नहीं करते बल्कि लोग किसी खास आवाज, सांसों की गिनती आदि का इस्तेमाल भी करते हैं। जिससे मन पर काबू पाकर मेडिटेशन की स्थिति में लंबे समय तक रहा जा सके। 
मन पूरी तरह से खाली हो जाएगा-
ज्यादातर लोग यही सोचते हैं कि मेडिटेशन के दौरान मन पूरी तरह से खाली हो जाता है। जबकि ये सोच भ्रम भर है। ये सही नहीं है। याद रखिए कि आपको क्रिया के दौरान दिमाग पूरी तरह से खाली करने की कोशिश बिलकुल नहीं करनी है। आपको ये नहीं सोचना है कि सारे विचार मिट जाएं। मन का एक विचार से दूसरे विचार तक जाना इसकी आम प्रक्रिया है। आप कोशिश न कीजिए ऐसा खुद ब खुद हो जाए वो अलग बात है।  
खास मुद्रा की जरूरत-
आमतौर पर ये भी सोचा जाता है कि पलथी बनाकर खास मुद्रा में बैठने से ही मेडिटेशन की क्रिया पूरी होती है। जबकि ऐसा नहीं है। आप उस तरह से बैठें, जिसमें आपको आराम मिले। कई सारे लोग कुर्सी पर बैठकर भी मेडिटेशन करते हैं। 
सो जाने की आदत-
अगर आप मेडिटेशन करने वाले किसी भी शख्स को जानती हैं तो आप ये भी जानती होंगी कि ऐसा करते हुए अक्सर लोगों को नींद आ जाती है। अब इसको गलत समझने की जरूरत बिलकुल नहीं है। क्योंकि ये बहुत ही आम सी बात है। लेकिन हां, तब जब ऐसा जानबूझकर ना किया गया हो। ऐसा मेडिटेशन के नतीजे के तौर पर हुआ है तो कोई बात नहीं। बस इससे निजात पाने के कई तरीके जान कर इतनी कोशिश जरूर की जाए कि नींद न आए। जैसे लेटकर मेडिटेशन करने से अच्छा है कि कुर्सी पर बैठा जाए। 

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