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ब्यूटी बिजनेस की चार रानियों से कीजिए मुलाकात

चयनिका निगम

13th June 2020

आयुर्वेदिक ब्यूटी प्रोडक्ट आज के प्रदूषण भरे समय की मांग है। इसी मांग को पूरा कर रही हैं देश की कई बिजनेस वुमेन

ब्यूटी बिजनेस की चार रानियों से कीजिए मुलाकात
महिलाओं का दबदबा अब हर क्षेत्र में है। आसमान से लेकर धरती तक जो भी काम हो रहे हैं उनमें महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। ब्यूटी बिजनेस में भी महिलाओं ने झण्डा गाड़ दिया है। नेचुरल प्रोडक्ट हों या फ्लॉंलेस कॉस्मेटिक, इनका प्रोडक्शन हो या मार्केटिंग या फिर पब्लिसिटी...महिलाएं ब्यूटी से जुड़ा कारोबार बखूबी चला रही हैं। इसमें भी आयुर्वेदिक और नेचुरल प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियों का बोलबाला है। इतना ही नहीं इन महिलाओं की कहानी ऐसी है, जो दूसरी महिलाओं को प्रेरित भी करती है। उन्हें रास्ता दिखाती हैं कि तुम भी घर से निकल अपनी पहचान बना सकती हो। खुद को मामूली समझने की गलती अब न करो। बस इसी मंत्र के साथ इन महिलाओं ने भी अपने अरमान पूरे कर लिए हैं। इनकी सफलता अब दूसरों के लिए उदाहरण है। ब्यूटी बिजनेस की इन ब्यूटी क्वीन्स से जुड़ी अनोखी बातों से रूबरू हो लीजिए, आइए जानें-
20 साल लंबा मीरा कुलकर्णी का सफर-
आयुर्वेदिक प्रोडक्ट की धूम आजकल मार्केट में खूब है। इन्हीं प्रोडक्ट के ढेरों नामों में से काफी जाना-पहचाना नाम है फॉरेस्ट इसेंशियल का। ये एक ऐसा ब्रांड है, जिसके प्रोडक्ट आयुर्वेद के बेस्ट तरीकों से बनाए जाते हैं। यही वजह है कि इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। मगर फॉरेस्ट इसेंशियल एक ब्रांड ऐसे ही नहीं बन गया है, इसके लिए इनकी फाउंडर मीरा कुलकर्णी ने 20 सालों का सफर तय किया है। शुरुआती समय में बिजनेस मकसद नहीं था बल्कि सिर्फ शौक के तौर पर मीरा ने कुछ प्रोडक्ट बनाए थे। इनको खुद ही घर पर इस्तेमाल किया करती थीं। चेन्नई के स्टेला मारिस कॉलेज से ग्रेजुएट मीरा ऋषिकेश में रहते हुए आयुर्वेदिक प्रोडक्टस की तरह आकर्षित हुई थीं। दरअसल ये राज्य इस काम का गढ़ माना जाता है। वो कहती हैं, साल 2000 में मैंने परंपरागत आयुर्वेदिक तरीके से साबुन बनाए थे। मैंने कोल्ड प्रेस आयुर्वेदिक तरीके का इस्तेमाल किया था। इस तरह से पोषण तत्व ज्यादा मिल जाते हैं। लेकिन मुझे पहला कस्टमर 2002 में मिला। उस वक्त दिल्ली के बड़े होटल के बड़े अधिकारी को मीरा के प्रोडक्ट बहुत पसंद आए। उन्होंने इन्हें रूम में रखने की शुरुआत कर दी। अब इस बिजनेस से मीरा को इतना प्यार हो चुका है कि वो इसे ही अपना शौक भी मानती हैं। लेकिन हां, कुकिंग का शौक भी वो रखती हैं।
खुद पढ़ा-समझा और तब बनी बायोटिक- 
बायोटिक आयुर्वेदिक स्किन केयर से जुड़ा ऐसा नाम है, जो किसी पहचान का मोहताज तो बिलकुल नहीं है। इसकी फाउंडर विनीता जैन भी अब किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। देश की बड़ी बिजनेस वुमेन  में इनका नाम गिना जाता है। मगर उन्होंने ये ब्रांड यूंही शौक में बिलकुल नहीं बनाया है। बल्कि सबकुछ खुद करना सीखा-समझा और फिर बनाने की शुरुआत की। विनीता ने स्विट्जरलैंड से बायोटेक्नोलॉजी में रिसर्च की और बाद में कैलीफोर्निया की स्टेनफोर्ड यूनीवर्सिटी से मार्केटिंग का फंडा भी समझा। तब कहीं जाकर उन्होंने खुद को बिजनेस शुरू करने के काबिल माना। मगर सिर्फ पढ़ाई ही उनके मकसद की शुरुआत नहीं है। बल्कि बचपन में दार्जलिंग में दादा जी के चाय के बागानों को देखते हुए और फिर जड़ीबूटीयों के इलाज का अनुभव करते हुए ही उनका मन आयुर्वेद की तरफ झुका था। 1990 में दिल्ली यूनीवर्सिटी से ग्रेजुएट विनीता ने 10 करोड़ के निवेश और 6 डॉक्टरों की टीम के साथ काम शुरू किया था। वो कहती हैं कि मैं हमेशा से ही आयुर्वेद की ओर आकर्षित रहती थी।मुझे इनकी शुद्धता और असर पर पूरा विश्वास था। वैसे भी मैं मानती हूं कि सच्चे मन से कुछ चाहो तो जरूर मिलता है। मेरा बिजनेस मेरी सच्ची चाहत, इच्छाशक्ति और मेहनत का नतीजा है। करीब 50 साल की विनीता की फैक्टरी हिमाचल प्रदेश में है लेकिन रिसर्च का काम स्विट्जरलैंड में होता है। इस वक्त बायोटिक के 4000 से ज्यादा मल्टी ब्रांड आउटलेट हैं। साथ ही उनके प्रोडक्ट फ्रांस, निदरलैंड्स, इटली, मलेशिया, श्रीलंका और सिंगापुर जैसे देशों में बिकते हैं। विनीता कहती हैं, मेरे बिजनेस की एक खासियत तो आपको माननी ही होगी। मेरे यहां काम करने वाले कुल कर्मचरियों में 75 प्रतिशत महिलाएं हैं। 
आयुर्वेद से परिचय कराती शहनाज-
भारत में आयुर्वेद और कॉस्मेटिक का रिश्ता जोड़ने में जिस एक नाम को सबसे पहले लिया जाना चाहिए। वो है शहनाज हुसैन, जिनको इसी काम के लिए पद्मश्री से भी नवाजा जा चुका है। 1944 में जन्मीं शहनाज ने आयुर्वेद के बारे बहुत छोटी उम्र में शादी के बाद तेहरान में सीखा। यहां उनके पति की पोस्टिंग थी। शहनाज ने अपने काम को इस कदर बढ़ाया है कि उनको हावर्ड बिजनेस स्कूल की ओर से आमंत्रित भी किया जा चुका है। यहां उनको अपनी सफलता की कहानी पर बोलना था। उनका काम हावर्ड के लिए स्टडी केस भी बना क्योंकि उन्होंने बिना किसी विज्ञापन के ही अपने प्रोडक्ट को इंटरनेशनल ब्रांड बनाया था। इलाहाबाद में पढ़ी लिखी शहनाज के अपने ब्रांड से जुड़े करीब डेढ़ लाख स्टोर्स अकेले भारत में हैं। इसके अलावा 138 देशों में करीब 400 फ्रेंचाइस भी हैं। शहनाज ने ये बात हमेशा मानी है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस पिता ने ही उनके अंदर कुछ कर दिखाने का जज्बा पहचाना था। फिलहाल शहनाज के बड़े से बिजनेस में उनकी बेटी उनका साथ देती है। उनके पति और बेटे की मृत्यु हो चुकी है। 
द नेचर्स कंपनी की नताशा शाह-
द नेचर्स कंपनी एक ऐसा ब्रांड बनकर सामने आया है, जिसने लोगों की नेचुरल ब्यूटी प्रोडक्ट की चाहत पूरी की है। इस अनोखे ब्रांड को शुरू करने का श्रेय जाता है नताशा शाह को। एमईटी, मुंबई से एमबीए करने वाली नताशा मानती हैं कि वो खुद भी बचपन से प्राकृतिक चीजों या कहें घरेलू चीजों का इस्तेमाल ही किया करती थीं। अपने बेहतरीन अनुभवों को साझा करने के लिए ही उन्होंने इस कंपनी की शुरुआत की थी। मगर ये उनका पहला मौका नहीं था। बल्कि उन्होंने तो करियर की शुरुआत 2003 में की थी। तब वो आयुर्वेदिक प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी में एशिया, अफ्रीका और साउथ अमेरिका में एक्सपोर्ट का काम हैंडल करती थीं।
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