बर्तन भी हैं स्वास्थ्य का आधार

सरिता शर्मा

15th June 2020

स्वास्थ्य व स्वाद की दृष्टि से हम प्राय: सबके लिए बेहतर, स्वादिष्ट और पौष्टिक खाने को महत्त्व देते हैं। लेकिन यह सोचना भी जरूरी है कि हम खाना पकाने के लिए कौन सी धातु के बर्तनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

बर्तन भी हैं स्वास्थ्य का आधार

स्वास्थ्य व स्वाद की दृष्टि से हम प्राय: सबके लिए बेहतर, स्वादिष्टï और पौष्टिïक खाने को महत्त्व देते हैं। लेकिन यह सोचना भी जरूरी है कि हम खाना पकाने के लिए कौन सी धातु के बर्तनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

सामान्यत: रसोईघर में स्टील, पीतल, कांसे, कांच, एल्युमिनियम, लोहे व प्लास्टिक, तकरीबन सब तरह की धातु के बर्तन उपलब्ध होते हैं। यह भी सच है कि बर्तन गर्म होने पर, मसाले भूनने पर या कोई भी खट्टे पदार्थ बनाने पर किसी न किसी रासायनिक प्रक्रिया से अवश्य गुजरते हैं जिसका असर भोजन पर होता है और भोजन ग्रहण करने के बाद हमारे स्वास्थ्य पर भी उसका प्रभाव पड़ता है। शायद यही वजह रही होगी कि हमारी नानी-दादी मिट्टी व उच्चकोटि के पीतल के बर्तनों में खाना पकाती थीं। आजकल भी गांवों में चूल्हे पर मिट्टी की हांडी में साग, दाल व अन्य सब्जियां बनती देखी जा सकती है। पहले की रसोई में मसाला पीसने वाले सिलवटें या कुंडी-सोटे की जगह आज मिक्सी ने ले ली है, चॉटी (एक प्रकार का घड़ा) में मलाई मंथते हुए मक्खन व लस्सी निकालना बिल्कुल गायब हो चुका है। आजकल रसोई में जो बर्तन इस्तेमाल हो रहे हैं, अध्ययनों से पता चला है कि वे किसी न किसी रूप में हमारी सेहत को प्रभावित करते हैं। हम सब के लिए यह जानना जरूरी है कि खाना पकाने या खाने में प्रयोग होने वाले किस धातु के बर्तन हमारे लिए सही हैं। 

 

पीतल के बर्तन

पुराने समय में लोग पीतल के बर्तनों का इस्तेमाल करते थे और पीतल को शुभ भी मानते थे। वे चूल्हे की गर्म राख से रगड़-रगड़ कर बर्तनों को चमका देते थे। पीतल की परात, कड़ाही, लस्सी वाले बड़े गिलास, पतीले, हांडी आदि रसोई की शान होते थे। खाना पकाने वाले पीतल के बर्तनों को समय-समय पर कलई भी करवाया जाता था ताकि उनका रख-रखाव ठीक रहे। जब पीतल का बर्तन गर्म होता है तो नमक या कुछ खट्टे खाद्य-पदार्थ रासायनिक प्रकिया कर के भोजन को खराब कर देते हैं जिससे फूड पॉयजनिंग का खतरा रहता है। पीतल की प्रकृति गर्म होती है, अत: इसमें दूध, दही, खीर, लस्सी, नींबू, पानी आदि डालने पर इनके पौष्टिक तत्त्व नष्ट हो जाते हैं। अत: ध्यान रखें कि अगर आप पीतल के बर्तनों में खाना बनाती या परोसती हैं तो पीतल उच्चकोटि का हो और बर्तनों की सफाई में नींबू, सिरके को गर्म पानी के साथ प्रयोग में लाएं। 

एल्युमिनियम के बर्तन

वर्तमान समय में एल्युमिनियम के बर्तनों का रसोईघर में अधिक से अधिक इस्तेमाल होता है जिनमें मुख्यत: प्रेशर कुकर, इडली कुकर, कड़ाही, पैन, पतीले आदि शामिल हैं। कुकर में बेशक खाना जल्दी पकता है परंतु भोजन के 85' तक पौष्टिक तत्त्व नष्ट भी हो जाते हैं। एल्युमिनियम भारी धातु है और बॉक्साईट धातु से बनती है जो कि लीवर व नर्वस सिस्टम, अस्थमा तथा हड्डियों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए जिम्मेदार है। पकते हुए भोजन में से यह आयरन और कैल्सियम को झट से सोख लेता है। एल्युमिनियम खट्टी वस्तुओं के साथ भी रिएक्शन करता है। इनकी सफाई में भी काफी ध्यान रखना पड़ता है, खासतौर से प्रेशर कुकर का। कुकर की सीटी व रबड़ को उतार कर अच्छी तरह से उसे धोएं ताकि तैयार भोजन के जरा से अंश भी उसमें फंसे ना रहे अन्यथा जब आप अगला भोजन पकाएंगे तो पुरानी गंदगी भी उसमें मिल कर आपको बीमार कर सकती है। 

तांबे के बर्तन

धार्मिक कार्यों में तांबे के बर्तनों का काफी महत्त्व है। तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से ब्लडप्रेशर, मोटापा संबंधी बीमारियां दूर होती हैं, खून साफ होता है और लीवर से जुड़ी समस्याओं को आराम मिलता है इसमें बना खाना पौष्टिक गुणों को बढ़ा देता है परन्तु तांबा एसिडिक यानि खट्टी चीजों के साथ रिएक्ट करके उन्हें विषैला बना देता है। आजकल बाजार में कई तरह की कलात्मक डिजाइन के तांबे के बर्तन उपलब्ध हैं जो देखने में बहुत ही आकर्षक होते हैं। आपको खरीदते समय यह ध्यान में रखना आवश्यक है कि बर्तन ऐसे हों जिन्हें आसानी से साफ किया जा सके। तांबे के बर्तनों की सफाई में नींबू या इमली के गूदे का प्रयोग करें। इन बर्तनों में दही, दूध, लस्सी, आचार आदि कभी भी मत रखें। 

 

प्लास्टिक के बर्तन

वॉटर बॉटल, लंच-बॉक्स, माईक्रोवेव में खाना गर्म करने वाले बर्तन, राशन के लिए कंटेनर्स व दालें-अनाज आदि के लिए जार सब के लिए किसी न किसी रूप में प्लास्टिक इस्तेमाल होता है। प्लास्टिक बनाने में नायलॉन, फिनोलिक पॉलीथाईलीन जैसे घातक केमिकल्स प्रयोग में लाए जाते हैं। माईक्रोवेव में खाना तैयार करने या खाना गर्म करने वाले महंगे बर्तन भी विषैले रसायन पैदा करते हैं जो हमारे भोजन में मिलकर कोशिकाओं को नुकसान पहचाते हैं व कैंसर का कारण बनते हैं। इसी प्रकार भोज्य पदार्थों की पैकिंग कई बार प्लास्टिक के लिफाफों में की जाती है, पानी की बोतल दुकानों में धूप में पड़ी रहती है तो प्लास्कि गर्म होने पर तरह-तरह के केमिकल्स छोड़ता रहता है। अत: जरूरी है प्लास्टिक के बर्तनों को गर्म पानी और डिश-बार के साथ अच्छे से धोएं। हो सके तो साल-दो साल के बाद उन्हें बदल दें।

स्टील के बर्तन 

आजकल खाना बनाने व परोसने में सब से अधिक स्टील ही इस्तेमाल हो रहा है क्योंकि ये जल्दी गर्म होता है, खाना भी जल्दी बनता है और इसे साफ करने में भी अधिक समय नहीं लगता। स्टील के बर्तन आकर्षक व टिकाऊ होते हैं। यह एक मिश्रित धातु होती है जो लोहे में कार्बन, क्रोमियम और निकिल मिलाकर बनाई जाती है। वैसे तो इनकी सफाई का अगर ठीक से ध्यान रखा जाए तो किसी प्रकार से ये नुकसानदायक नहीं होते। अधिक रगड़ने से ये घिस जाते हैं और उनकी परत कमजोर होने लगती है जिससे खाना जलने का डर रहता है। अत: पतली परत वाले बर्तनों में खाना न बनाएं और उस बर्तन को बदल दें।

 

नॉनस्टिक बर्तन

घरों में नॉनस्टिक बर्तनों का प्रयोग इसलिए अधिक होता है क्योंकि एक तो घी-तेल कम लगता है, दूसरे खाना चिपकता नहीं है। नॉनस्टिक बर्तनों में टैफ्लॉन की परत चढ़ाई जाती है। जब यह बर्तन गर्म होता है तो टैफ्लॉन से घातक धुंआ निकलता है जो नुकसानदेह होता है। इन बर्तनों का ज्यादा इस्तेमाल करने से कई बार टैफ्लॉन की परत टूटने लगती है और छोटे-छोटे कणों के रूप में उतरने लगती है। जब हम खाना पकाते हैं तो ये कण हमारे भोजन में मिलकर शरीर में पहुंच जाते हैं और धीरे- धीरे नुकसान पहुंचाते रहते हैं। अत: इनके उपयोग में सावधानी जरूरी है। इन्हें सॉफ्ट नायलॉन स्क्रॅब से साफ करें व लकड़ी के चम्मच का प्रयोग खाना पकाते समय करें। जब खाना बन जाए तो खाना दूसरे बर्तन में निकाल लें व नैपकिन से नॉनस्टिक बर्तन की सतह को साफ कर दें या डिश-बार से अच्छी तरह से धो दें। 

 

लोहे के बर्तन

स्वास्थ्य की दृष्टिï से खाना बनाने के लिए सर्वाधिक उत्तम लोहे के बर्तन होते हैं। इसमें मौजूद ऑयरन हमारे भोजन में मिल कर हमारे शरीर में लौह की मात्रा को बढ़ाता है जिससे एनीमिया से बचाव होता है। यह हमारी पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करता है। इस धातु का एक दोष यह है कि यदि इसे ढंग से साफ करके व सूखाकर न रखा जाए तो इसमें जंग लग जाता है। जंग लगे बर्तन में खाना बनाना नुकसान दे सकता है। अत: जरूरी है लोहे के बर्तनों को अच्छी तरह रगड़ कर और गर्म पानी में धोकर-सुखाकर रखें।

मिट्टी के बर्तन

पुराने समय से मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने की और परोसने की परंपरा चलती आ रही है। मिट्टïी के बर्तनों में खूब पोषक तत्त्व होते हैं और शरीर को भी फायदा ही पहुंचाते हैं। इन बर्तनों में खाना बेशक धीरे बनता है लेकिन हर खाने का बहुत ही बढ़िया व अनोखा स्वाद होता है। मिट्टïी के मटके के पानी के आगे महंगे फ्रिज का पानी भी बेकार है। मिट्टी के बर्तनों में बना खाना हमारी पाचन क्रिया को बेहतर करता है क्योंकि मिट्टी कीटाणुनाशक होती है।

अत: आप के लिए जरूरी है कि बर्तन किसी भी धातु का प्रयोग करें, उसे प्रयोग करते समय और सफाई करते समय पूरी सावधानी बरतें। स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले बर्तनों का कम प्रयोग करें ताकि आपके शरीर को पौष्टिक तत्त्व मिले और आपका भोजन स्वादिष्ट होने के साथ लाभप्रद भी हो। 

 

- सरिता शर्मा

 

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