सोमवार का व्रत: ऐसे करें पूजा

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16th June 2020

सोमवार व्रत करते हुए भक्तों की उनकी मूर्ति घर के ईशान कोण पर रखनी चाहिए। ईशान कोण मतलब घर उत्तर-पूर्व क्षेत्र।

सोमवार का व्रत: ऐसे करें पूजा
सोमवार का व्रत ज्यादातर हिंदू परिवारों में रहा ही जाता है। खासतौर पर लड़कियों को अच्छे वर के लिए ये व्रत रखने की सलाह दी जाती है। इसमें भगवान शिव को प्रसन्न करने की कोशिश की जाती है। इस व्रत को अच्छे से और विधिविधान से पूरा करने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना होता है। इन नियमों को ध्यान करके ही पूजा और व्रत अच्छे से पूरे हो सकते हैं। कौन-कौन से हैं ये नियम चलिए जान लेते हैं, ताकि सोमवार का व्रत करके पूरा फल पाया जा सके-
शिव जी की उपासना और कथा-
सोमवार का व्रत शुरू करने के लिए आपको सुबह उठकर नहाना होगा। अब शिव जी को बेल पत्र और जल चढ़ा कर भगवान शिव की आराधना करनी होगी। इसके बाद व्रत कथा भी सुननी होगी।
दिन का तीसरा पहर-
सोमवार का व्रत माना जाता है कि सिर्फ दिन के तीन पहर तक ही होता है। कह सकते हैं कि इसे शाम तक ही रखा जाता है और इसके बाद व्रत पूरा मान लिया जाता है। इसलिए इसमें एक समय का भोजन करने को ही कहा जाता है। 
एक व्रत, तीन प्रकार-
ये व्रत तीन प्रकार का होता है। इसको सोमवार व्रत, सोलह सोमवार व्रत और सौम्य प्रदोष व्रत के तौर पर पहचाना जाता है। खास बात ये है कि व्रत कोई भी हो, सबकी विधि एक ही होती है। 
सफेद रंग का महत्व-
सोमवार के व्रत में सफेद रंग का बहुत महत्व होता है। इस दिन व्रत करने वाले को सफ़ेद कपड़े पहनने चाहिए तो भगवान शिव पर भी सफ़ेद फूल ही चढ़ाए जाने चाहिए। 
व्रत कथा-
कथा सुनना काफी अहम माना जाता है। इसमें एक ऐसे साहूकार की कहानी कही जाती है, जो धनवान होने के बावजूद पुत्र न होने की वजह से खुश नहीं था। वो भगवान शिव की आराधना खूब करता था। शिव जी उसकी पुत्रप्राप्ति की इच्छा पूरी तो करते हैं लेकिन बच्चे को उम्र सिर्फ 12 साल ही देते हैं। कहानी इसी के आधार पर आगे बढ़ती है। 
कब कर सकते हैं शुरू-
सोमवार का व्रत अगर सावन के सोमवाए से शुरू किया जाए तो काफी फलदायी रहता है। सावन महीने में किए गए सोमवार को आगे आम दिनों में भी जारी रखा जा सकता है। मगर इस महीने में अगर व्रत शुरू करना मुश्किल रहा है तो शुक्ल पक्ष के पहले सोमवार से भी ये व्रत शुरू किया जा सकता है। शुक्ल पक्ष भी कुछ खास महीनों के ही व्रत के लिए सही रहते हैं। ये महीने हैं, चैत्र मास, बैसाख मास, कार्तिक मास। पर हां, इन सबके बावजूद सावन के महीने में शुरू किया गया व्रत ज्यादा लाभकारी होता है। भगवान शिव को भी ये महीना बेहद प्रिय माना जाता है। इस साल सावन का महीना अगले महीने की 6 तारीख मतलब 6 जुलाई से शुरू हो रहा है। 
मूर्ति की स्थापना-
सोमवार व्रत करते हुए भक्तों की उनकी मूर्ति घर के ईशान कोण पर रखनी चाहिए। ईशान कोण मतलब घर उत्तर-पूर्व क्षेत्र। 
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