पहचानें खाद्य पदार्थों में मिलावट

Nira

26th June 2020

हमारी पूरी कोशिश होती है कि जो कुछ खाया जाए उसमें गलत चीजों की मिलावट न हो लेकिन क्या आप जानते हैं कि हम जो दालें खाते हैं, जिन मसालों का इस्तेमाल करते हैं, जिन सब्जियों और फलों का सेवन करते हैं, यहां तक कि जिस चाय को पीकर हमारी सुबह होती है, उन सबमें कुछ न कुछ मिलावट की जाती है? जानते हैं खाद्य पदार्थों में मिलावट को पहचानने के कुछ उपाय।

पहचानें खाद्य पदार्थों में मिलावट

मिलावट का असर सीधा हमारी सेहत पर पड़ता है लेकिन अब खाद्य पदार्थों को शुद्ध रूप से प्राप्त करना आज के युग में एक स्वप्न बनता जा रहा है।

मिलावट के कारण अधिकांश लोग एलर्जी, एक्जीमा, पैरालिसिस (पक्षाघात) जैसी जानलेवा बीमारियों की गिरफ्त में आ रहे हैं। मिलावट की वजह से कैंसर होने तथा नेत्र ज्योति चले जाने में भी कुछ मामले प्रकाश में आए हैं। अत: जरूरी है कि मिलावटी खाद्य-पदार्थों के सेवन को रोका जाए। यह तभी संभव है जब मिलावट की गई वस्तुओं की तात्कालिक जांच के बारे में ज्ञान हो।

दूध या मक्खन

 

दूध कैल्सियम तथा प्रोटीन का उत्तम स्रोत है। इसमें मिलावट होने पर जरूरी पोषक तत्त्व शरीर को नहीं मिल पाते। इसमें पानी या स्टार्च की मिलावट की जाती है। यदि दूध में पानी मिला है तो जांच के लिए एक समतल जगह पर दूध की एक बूंद गिराने पर दूध नीचे को बहेगा। यदि दूध में स्टार्च की मिलावट है तो उसका पता लगाने के लिए एक परखनली में दो-तीन चम्मच दूध गरम करें। ठंडा होने पर इसमें आयोडीन के घोल की कुछ बूंदें मिलाएं। यदि दूध का रंग नीला पड़ जाए तो समझें स्टार्च मिला है।

खोया- दूध से बनी मिठाई, आईसक्रीम, दही

 

इन चीजों में भी स्टार्च की मिलावट की जाती है। अत: इसके लिए भी नमूने को थोड़े से पानी के साथ उबालें, ठंडा करें तथा उसमें तीन-चार बूंद आयोडीन टिंचर की डालें। यदि नीला रंग दिखाए दे तो समझ लें कि इसमें स्टार्च मौजूद है।

देशी घी

इसमें अधिकतर वनस्पति घी, पिसी हुई शकरकंद तथा स्टार्च की मिलावट की जाती है। तिल के तेल की भी मिलावट देखी जाती है। परखनली में एक चम्मच पिघला घी या मक्खन लें तथा उसमें बराबर मात्रा में हाइड्रोक्लोरिक एसिड मिलाएं, साथ ही एक चुटकी चीनी भी डाल दें। एक मिनट तक हिलाएं, फिर पांच मिनट तक स्थिर होने दें। यदि अम्ल के निचले तह पर गहरा लाल रंग दिखे तो यह देशी घी में वनस्पति घी की मिलावट को दर्शाता है।

 

चने और अरहर की दाल

 

चने और अरहर की दाल में खेसारी दाल की मिलावट की जाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार खेसारी दाल के सेवन से अंधत्व का खतरा बढ़ जाता है। खेसारी दाल को पहचानना बहुत मुश्किल नहीं है, पर जरूरत है सही ध्यान देने की। खेसारी दाल के दानों में तीन कोने निकले होते हैं तो किसी में चार कोने। वैसे यदि बीनने और पहचानने में दिक्कत हो तो मिलावट जानने के लिए थोड़ी-सी दाल लेकर उस पर पचास मिली हाइड्रोक्लोरिक एसिड डालें और पंद्रह मिनट उबालें। यदि हल्का गुलाबी रंग दिखाई दे तो कहा जा सकता है कि दाल में खेसारी दाल की मिलावट है।  यदि दाल में पीला रंग मिला है तो उबलने से पहले ही हल्का पीला रंग दिखाई देगा।

मिठाई, शर्बत और आइसक्रीम

 

इन चीजों में पीला मेटेनिस कलर मिलाया जाता है। हल्के गुनगुने पानी में खाद्य सामग्री से थोड़ा रंग निकालकर डालें तथा थोड़ी-सी हाइड्रोक्लोरिक एसिड की कुछ बूंदें डालें। यदि मजेंटा लाल रंग दिखाई दे तो पीला मेटेलिक कलर मिला हुआ है।

बेसन

बेसन तैयार करने में उसमें चने की दाल के साथ खेसारी दाल भी पीस दी जाती है। इसको पहचानने के लिए भी थोड़े से हाइड्रोक्लोरिक एसिड के साथ बेसन को गरम करने पर हल्का बैंगनी रंग आ जाए तो समझिए खेसारी दाल बेसन में पीसी गई है।

सरसों का तेल

इसमें आर्जिमोन तेल की मिलावट की जाती है। जांच के लिए एक परखनली में तीन-चार चम्मच सरसों का तेल लेकर उसमें कुछ बूंदें सान्द्र नाइट्रिक एसिड की मिलाएं। यदि तेल का रंग लाल या भूरा दिखाई दे तो यह आर्जिमोन तेल की मौजदूगी दिखाता है। इससे आंखों की रोशनी प्रभावित होती है, साथ ही हृदय संबंधी रोगों की भी आशंका होती है।

हींग

इसमें साबुत पत्थर या अन्य मिट्टी के पदार्थ मिलाए जाते हैं। पानी के साथ मिलाकर हिलाइए। साबुत पत्थर या मिट्टी नीचे बैठ जाएगी।

 

हल्दी

 

हल्दी पाउडर में चार-पांच बूंद हाइड्रोक्लोरिक एसिड की डालें, तत्काल इसका रंग बैंगनी हो जाएगा, पर उसमें थोड़ा-सा पानी मिलाने पर रंग उड़ जाए तो समझिए हल्दी शुद्ध है अन्यथा उसमें पीला कृत्रिम रंग मिला है जिसे मिलाने की सख्त मनाही है। हल्दी में रंगीन बुरादा भी मिलाया जाता है।

मिर्च पाउडर

इसमें ईंट का चूरा, नमक चूर्ण या रबड़ी का चूर्ण मिला दिया जाता है। कई बार कृत्रिम रंग भी मिलाया जाता है। अत: एक गिलास पानी में दो चम्मच मिर्च पाउडर डालें। गिलास की पेंदी पर चूरा जम जाए और पानी लाल हो जाए तो समझिए मिलावट है।

कालीमिर्च

 

इसमें पपीते के बीज मिला दिए जाते हैं। यह अलग किए जा सकते हैं, क्योंकि ये सिकुड़े हुए, अंडाकार, हल्का हरा, भूरा या हल्का भूरा, काला रंग लिए होते हैं। एक गिलास पानी में थोड़े से कालीमिर्च के दाने डालें, यदि पपीते के बीज होंगे तो ऊपर तैरने लगेंगे।

चीनी

इसमें अधिकतर पिसी हुई चॉक तथा कपड़े धोने का सोड़ा मिला दिया जाता है। एक गिलास पानी में चीनी डालें, चॉक या सोड़ा नीचे बैठ जाएगा। मिलावट पहचानने का दूसरा तरीका यह है कि एक साफ परखनली में दो चम्मच चीनी डालें तथा थोड़ा-सा हाइड्रोक्लोरिक एसिड मिलाएं। यदि एसिड के मिलाने पर बुदबुदाहट हो तो यह चीनी में पिसी हुई चॉक की उपस्थिति का संकेत है।

चाय की पत्ती

इसमें प्रयोग में लाई जा चुकी चाय की पत्तियों को रंगकर, चना दाल की भूसी या लकड़ी के बुरादे को रंगकर या लौह चूर्ण मिला दिया जाता है। परीक्षण के लिए सोख्ता कागज पर चाय की पत्ती छिड़कने पर तुरंत मिलाया गया रंग बाहर आ जाता है।

केसर

 

केसर का प्रयोग मिठाइयों, आइसक्रीम, सब्जी आदि में किया जाता है। लेकिन आजकल केसर में मक्का के दाने के रंगीन तंतु चीनी में भिगोकर व रंग से रंगकर तैयार किए जाते हैं। परीक्षण आसान है, नकली रंग पानी में घुल जाता है और शुद्ध केसर पानी में घुलने पर अंत तक केसरिया रंग ही देता है।

धनिया पाउडर

धनिया पाउडर में थोड़ा-सा आयोडीन का घोल डालें यदि वह काला पड़ जा तो समझिए धनिया पाउडर नकली है।

चांदी का वर्क

 

मिठाइयों, कई सब्जियों व पान आदि में चांदी का वर्क लगाया जाता है। पर आजकल एल्युमिनियम के वर्क आ गए हैं। खरी चांदी का वर्क जलाने पर सफेद चमकदार व उतनी ही मात्रा में परिवर्तित हो जाता है। एल्युमिनियम का वर्क जलने पर गाढ़ा भूरा कालापन लिए राख में परिवर्तित हो जाता है।

कॉफी पाउडर

इसमें चिकोरी मिलाई जाती है। एक गिलास पानी में कॉफी पाउडर छिड़कें, कॉफी पाउडर सतह पर तैरता है जबकि चिकोरी कुछ सेकंड में ही पानी में बैठ जाती है।

 

शहद

 

इसमें चीनी और पानी की राब मिलाई जाती है। रूई की बत्ती को शहद में डुबोकर जलाने पर जलती है, लेकिन मिलावट वाला शहद पानी मिला होने पर जलता नहीं।

लौंग

बाजार में अधिकांशत: अर्क निकाली लौंग मिलती है। पहचान बतौर सत्त निकाली लौंग छोटे आकार की सिकुड़ी हुई तथा स्वाद रहित होती है।

कहने का मतलब है कि रोजमर्रा में आने वाली चीजों का सरल परीक्षण करके उनकी शुद्धता को परखा जा सकता है।

सब्जियां, फल तथा मिठाइयां भी मिलावटी

सिर्फ दाल, चावल, मसालों में ही मिलावट नहीं होती वरन आजकल सब्जियों, फलों व मिठाइयों को अधिकाधिक आकर्षक बनाने के लिए उपयुक्त मात्रा से कहीं ज्यादा रंगों का प्रयोग किया जा रहा है ग्राहक को उसके प्रति भी सावधान रहना चाहिए।

सब्जियों को अधिक हरा दिखाने के लिए हरे रंग का प्रयोग खूब हो रहा है। परवल, भिंडी, मटर के दानों, करेला के अलावा बैंगन, लौकी आदि सब्जियों को अधिक चमकदार बनाने के लिए विके्रता खराब तेल आदि का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई बार देखने को मिलता है कि सब्जियों को धोने के लिए गंदे नाले का पानी इस्तेमाल में लाया जाता है। फलों को ज्यादा लाल, पका दिखाने के लिए चाकू में मसाला लगाकर काटकर दिखाते हैं, जिससे वह हिस्सा एकदम लाल दिखाई देता है।

आहार विशेषज्ञों की मानें तो यदि रंगे दालों, मसालों से बचना है और स्वस्थ रहना है तो आर्गेनिक खाद्य पदार्थों की तरफ रुझान करें। ये स्वास्थ्य के लिए हितकर हैं। इसके अलावा रंगीन सब्जी, फल आदि से बचाव के लिए स्वयं का किचन गार्डेन तैयार करें। घर से बाहर कच्चे सलाद का सेवन न करें। चाहे दाल-चावल हो या सब्जी अथवा फल खूब अच्छी तरह धोएं। कुछ चीजों को सलाद के लिए हल्का स्टीम करके खाएं। बहुत चमकते और रंगीन सब्जियों, फल आदि खरीदने से बचें।

खाद्य पदार्थों में हो रही मिलावट को यदि हम रोक नहीं सकते तो उपर्युक्त उपायों को अपनाकर उनकी जांच तो कर ही सकते हैं और खुद को मिलावटी पदार्थों से दूर कर सकते हैं। 

 

 

 

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