वास्तु की नज़र से

ज्योति सोही

22nd June 2020

घर में सुख, शांति बरकरार रखने के लिए हम ईश्वर की अराधना और वास्तु शास्त्र का खास ख्याल रखते हैं। ऐसे में हम कई तरह की वस्तुएं और ईश्वर के विभिन्न स्वरूपों को स्थापित करते हैं।

वास्तु की नज़र से

मगर कई बार जाने अनजाने में उन ईश्वरीय स्वरूपों और विशेष वस्तुओं का नियमानुसार सही रखरखाव न होने के कारण या उचित ढग से स्थापना न कर पाने के कारण हमें उनका लाभ मिलने के बजाय नुकसान झेलना पड़ता है। आइए जानते हैं कुछ ऐसी ही वस्तुओं की देखभाल करने का सही तरीका-

शिवलिंग 

महादेव की अराधना सबसे शुभ मानी जाती है। इसीलिए हम में से ऐसे बहुत से लोग हैं, जो घर में शिवलिंग की स्थाप्ना करते हैं। दरअसल, शिवलिंग से लगातार ऊर्जा निकलती रहती है, जो आसपास का वातावरण सकारात्मक और शुभ रखती है। घर में यदि शिवलिंग स्थापित करते हैं, तो इन बातों का खास ध्यान रखें।  .

सदैव प्रवाहित रहे जलधारा

वास्तु के अनुसार शिवलिंग से हर वक्त ऊर्जा का संचार होता है। मगर ऊर्जा की मात्रा का संतुलन बनाए रखने के लिए शिवलिंग पर जलधारा का प्रवाह बने रहना चाहिए।

 सबसे शुभ दिशा

शिवलिंग की पूजा करते समय अपना मुख दक्षिण दिशा में रखें। खास बात ये है कि जिस स्थान पर शिवलिंग स्थापित किया जाता है उससे पूर्व में मुख करके पूजा करना सही नहीं माना जाता है। साथ ही शिवपुराण के अनुसार घर में एक से ज्यादा शिवलिंग नहीं रखने चाहिए।

अँधेरे स्थान में न रखें

शिवलिंग को कभी भी अँधेरे या बंद कमरे में नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से शिवलिंग नकारात्मक ऊर्जा उत्सर्जित करने लगता है। 

कभी अकेला स्थापित न करें

शिवलिंग स्थापित करने के साथ गणेश भगवान की मूर्ति रखना भी शुभ माना जाता है। घर में शिवलिंग को कभी अकेला न रखें।

शिवलिंग की लंबाई

घर में छोटा सा शिवलिंग रखना चाहिए। शिवलिंग की लम्बाई हमारे हाथ के अंगूठे के ऊपर वाले पोर से ज्यादा बड़ी नहीं होनी चाहिए। ज्यादा बड़ा शिवलिंग घर में नहीं रखना चाहिए। ज्यादा बड़ा शिवलिंग सिर्फ मंदिरों में ही ज्यादा शुभ फल प्रदान करता हैं।

शालिग्राम

शिवलिंग की तरह शालिग्राम भी बहुत दुर्लभ है। अधिकतर शालिग्राम नेपाल के मुक्तिनाथ यां काली गण्डकी नदी के तट पर पाए जाते है। पूर्ण शालिग्राम में भगवाण विष्णु के चक्र की आकृति अंकित होती है। विष्णु के अवतारों के अनुसार शालिग्राम पाया जाता है। लगभग 33 प्रकार के शालिग्राम होते हैं जिनमें से 24 प्रकार को विष्णु के 24 अवतारों से संबंधित माना गया है। बहुत से विद्वान मानते हैं कि शालिग्राम का पत्थर ब्रह्मांडीय ऊर्जा का एक स्रोत है। यानि यह एक छोटी-सी गैलेक्सी की तरह है। इसमें अपार एनर्जी होती है। इसका प्रभाव घर के आसपास तक रहता है। एनर्जी के इस स्रोत को पवित्र और सकारात्मक बनाए रखना जरूरी है, लेकिन यदि आप इसे किसी भी प्रकार से दूषित करते हैं तो निश्चित ही आपके घर में गृहकलह और घटना-दुर्घटनाएं बढ़ जाएंगी।

 

शालिग्राम की पूजा

शालिग्राम वैष्णव धर्म का सबसे बड़ा विग्रह है। यदि आप मांस या मदिरा का सेवन करते हैं तो यह आपके लिए घातक सिद्ध हो सकता है।

 

कहते हैं कि रोग, यात्रा या रजोदर्शन आदि को छोड़कर शालिग्राम की प्रतिदिन पूजा करना जरूरी है। 

घर में सिर्फ एक ही असली शालिग्राम रखना चाहिए। कई घरों में कई शालिग्राम होते हैं जो उचित नहीं है।

शालिग्राम पर चंदन लगाकर उसके ऊपर तुलसी का एक पत्ता रखना बेहद आवश्यक है। 

प्रतिदिन शालिग्राम को पंचामृत से स्नान कराया जाना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि जिस घर में शालिग्राम का पूजन होता है उस घर में लक्ष्मी का सदैव वास रहता है।

शालिग्राम पूजन करने से अगले-पिछले सभी जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। शालिग्राम सात्विकता के प्रतीक हैं। उनके पूजन में आचार-विचार की शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है।

 

कछुआ

कछुए को भगवान विष्णु का अवतार माना गया है। ऐसा माना जाता है कि ये पहाड़ जैसी चीज को भी अपनी पीठ पर स्थिर कर लेता है इसलिए इसे घर में रखा जाता है ताकि घर में स्थिरता का माहौल रहे।

ऐसे रखें घर में कछुआ

घर में तांबे का कछुआ पूर्णिमा पर रखना चाहिए क्योंकि इसी तिथि को भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार लिया था।

पूर्णिमा पर तांबे का कछुआ खरीद कर उसे कच्चे दूध में डूबाकर ज़रूर रखें। 

उसके बाद उचित मुहूर्त पंचांग में देखकर कछुए को दूध से निकालें, उसे साफ पानी से धोएं।

तांबे के चौड़े बाउल या कांच के बाउल में थोड़ा पानी भर कर कछुए को उसमें स्थापित कर दें।

कछुआ पानी में रहने वाला जीव है सो इसके लिए पानी वाली दिशा यानी घर का उत्तर-पूर्व कोना सबसे अच्छा माना गया है।

कछुए की कूर्म अवतार के रूप में पूजा करें, उसे कुंकुम चावल ज़रूर चढ़ाएं। कछुए को बेडरूम की बजाय बैठक में रखें।

घर में अंदर की तरफ कछुए का मुख रखना शुभ फलदायी माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे घर में लक्ष्मी स्थिर रहती है। ऐसी मान्यता है कि कछुए को घर में रखने से निरंतर आर्थिक उन्नति होती है। 

 

श्रीयंत्र

पौराणिक शास्त्रों की मानें तो प्रतिदिन श्रीयंत्र के दर्शन मात्र से ही इसकी अद्भुत शक्तियों का लाभ मिलना शुरू हो जाता है। मनुष्य को चाहिए कि वे हर रोज श्रीयंत्र के दर्शन और पूजन का लाभ अवश्य लें। इतना ही नहीं नियमित मां महालक्ष्मी के मंत्र जाप करने अथवा शुक्रवार के दिन महालक्ष्मी और श्रीयंत्र का पूजन करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर अपने भक्तों को अद्भुत शक्तियां और अपार धन देती है। श्री यंत्र देवी लक्ष्मी का यन्त्र होता है, जो कष्टनाशक होने के कारण  सिद्धिदायक और सौभाग्यदायक माना जाता है।

श्रीयंत्र पूजन का रखें ख्याल

सुबह स्नान के बाद श्रीयंत्र पूजा की तैयारी करनी चाहिए। श्रीयंत्र को लाल कपड़े पर स्थापित करके इसे गंगाजल और दूध से पूजना चाहिए। 

श्री यंत्र को पूजा स्थान या व्यापारिक स्थान तथा अलमारी में शुद्ध स्थान पर रखा जा सकता है। 

श्रीयंत्र का पंचामृत, दुग्ध, दही, शहद, घी और गंगाजल से स्नान करा कराएं.

श्रीयंत्र को मंदिर या तिजोरी में रखकर प्रतिदिन पूजा करें। 

इस यंत्र की पूजा से मनुष्य को धन, समृद्घि, यश, कीर्ति की प्राप्ति होती है और रुके कार्य बनने लगते हैं। व्यापार की रुकावट खत्म होती है।

जन्मकुंडली में मौजूद विभिन्न कुयोग श्रीयंत्र की नियमित पूजा से दूर हो जाते हैं।

इसकी कृपा से मनुष्य को अष्टसिद्घियां और नौ निधियों की प्राप्ति होती है।

इतना ही नहीं श्रीयंत्र के नियमित पूजन से समस्त रोगों का नाश होता है।

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