शादी की रस्में होती हैं क्यों?

चयनिका निगम

22nd June 2020

शादी की रस्में होती हैं क्यों?
हर शख्स के जीवन का एक जरूरी पड़ाव होता है शादी। वही शादी जिसकी हर एक रस्म निभाते हुए खुद की कल्पना करने मात्र से रोमांच महसूस होता है। जो ये रस्में असल जीवन में निभा चुके होते हैं, उन्हें भी शादी इन्हीं पलों की वजह से खूब याद रहती है। पर शादी और इनकी रस्मों को देखते और रोमांचित होते हुए कभी ये ख्याल मन में आया है कि आखिर यही रस्में क्यों निभाई जाती हैं। खासतौर पर हिन्दू रीतिरिवाजों से शादी की बात करें तो इनकी रस्मों में खूब अठखेलियां हैं तो गहराई भी। परिवार का साथ है तो पति-पत्नी की अपनी बहुत निजी यादें भी। इस वक्त तो जरूर मन में ये ख्याल उठा होगा कि इन्हीं रस्मों के साथ शादी पूरी क्यों मानी जाती है। क्या है इनकी अहमियत? सारे जवाब हम ले आएं हैं-
घोड़ी ही क्यों?
शादी पर दूल्हे का घोड़ी चढ़ना एक बहुत ही जरूरी रस्म है। इस रस्म का ही असर है कि शादी योग्य लड़कों से अक्सर घोड़ी कब चढ़ रहे हो? पूछ ही लिया जाता है। इस रस्म के पीछे कई सारे कारण बताए जाते हैं। जैसे घोड़े को वीरता और शौर्य का प्रतीक माना जाता है तो घोड़ी को उत्पत्ति का। पुराणों की मानें तो इस रस्म का रिश्ता सूर्य देव से भी है। माना जाता है कि सूर्य देव की चारों संतानों के जन्म के समय उनकी पत्नी रूपा ने घोड़ी का रूप धरा था। तब ही से घोड़ी को उत्पत्ति का रूप माना जाता है। इसके साथ एक बहुत ही सार्थक कारण ये भी माना जा सकता है कि चतुर और दक्ष घोड़ी को कोई स्वास्थ्य और योग्य इंसान ही कंट्रोल कर सकता है। फिर दूल्हा जब शादी में घोड़ी पर आता है तो माना जाता है कि वो अपने परिवार को पूरी दक्षता से संभाल लेगा। 
हल्दी क्यों है जरूरी?
हिन्दू रीतिरिवाज ही नहीं मुस्लिम समुदाय की रस्मों में भी दूल्हा-दुल्हन को हल्दी लगाई ही जाती है। मतलब शादी की रस्मों में हल्दी का महत्व भी बहुत है। मगर फिर सवाल उठता है कि क्यों? क्यों हल्दी लगाना जरूरी माना जाता है? पहले पहल तो कारण यही है कि हल्दी एंटीबायोटिक होती है। ये शारीरिकतौर पर बहुत फायदा पहुंचाती है। फिर माना जाता है कि ये रंग शुभ होता है। ये रंग समृद्धि का प्रतीक होता है। इतना ही नहीं ये भी मान्यता है कि पहले समय में जब कॉस्मेटिक नहीं होते थे तब हल्दी रूप निखारने का काम करती थी। 
मेहंदी की रस्म-
शादियों में दूल्हा-दुल्हन को मेहंदी लगाने का भी रिवाज है। माना ये जाता है कि मेहंदी जितनी गाढ़ी रचती है तो उसका पार्टनर उतना ही ज्यादा प्यार करता है। पुराने समय से इसे प्यार और स्नेह का प्रतीक भी माना जाता है।
कन्यादान के पीछे सृष्टि का संचालन-
कन्यादान किया जाना भी एक अहम रस्म है, जिसके बिना शादी पूरी मानी ही नहीं जाती है। इस रस्म के पीछे दक्ष प्रजापति से जुड़ी एक कहानी प्रचलित है। माना जाता है कि सबसे पहले उन्होंने ही कन्यादान किया था। 27 नक्षत्रों को दक्ष की पुत्री कहा जाता है, जिनका विवाह चंद्रमा से हुआ था। दक्ष ने ये विवास सृष्टि के संचालन के लिए किया था।  
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