सुलझाएं पंचांग की गुत्थी आसानी से

चयनिका निगम

27th June 2020

पंचांग के बारे में आपने जरूर सुना होगा लेकिन कभी इसको समझने की कोशिश नहीं की है तो आपके लिए ये काम हम आसान बनाए देते हैं।

सुलझाएं पंचांग की गुत्थी आसानी से
हिन्दू घरों में अक्सर पंचांग देखकर बहुत से काम किए जाते हैं। घर में माएं तो अक्सर ही त्योहारों का अंदाजा या किसी के जन्मदिन के बारे में जानकारी ऐसे ही जुटा लेती हैं। घरों की दीवारों पर इस पंचांग को देखा भी जा सकता है। लेकिन ये एक ऐसी चीज है, जो हर किसी के बस की नहीं होती। मतलब हर कोई इसको समझने में सक्षम नहीं होता है। खास बात ये भी है कि कईयों को तो पंचांग होता क्या है? इसका भी सही--सही जवाब नहीं पता होता है। मगर अब ये जरा भी कठिन काम नहीं होगा। क्योंकि हम आपको बता बताएंगे कि पंचांग क्या होता है? इसे देखा कैसे जाता है और इससे जुड़ी कई दूसरी बातें भी आप जान सकेंगी। चलिए फिर-
पांच अंग-
भारतीय ज्योतिष शास्त्र के पांच अंगों की जानकारी पंचांग में दी जाती है। ये पांच अंग हैं, वार, तिथि, नक्षत्र, करण और योग। 
तिथि- तिथि का हिसाब-किताब सूर्य-चंद्रमा के अंतर से लगाया जाता है। ये सूर्य और चंद्र पूर्णिमा को तो एक दूसरे के सामने होते हैं पर अमावस्या को साथ में आ जाते हैं। खास बात ये है कि तिथि के अर्ध्य भाग को करण कहते हैं। 
नक्षत्र- नक्षत्र के बारे में आपने अक्सर सुना होगा लेकिन ये होता क्या है? ये चंद्रमा की स्थिति होती है। जिस दिन चंद्रमा जिस स्थान पर होता है, उस दिन उसे ही नक्षत्र कहते हैं।  
योग-सूर्य और चंद्रमा की खास दूरियों के स्थानों को योग कहते हैं। कुल 27 योग होते हैं, जैसे प्रीति, सौभाग्य, शोभन, सुकर्मा, ध्रुव आदि। 
वार- वार मतलब सप्ताह के सातों दिन। 
राशि का अहम स्थान-
ज्योतिष में सबसे अहम राशि होती है। इसी से ग्रह की स्थिति पता चलती है। निश्चित क्रम के साथ ये राशि कुल बारह होती हैं। राशि चक्र के नाम से जाने जाने वाले इस समूह में सबसे पहले मेष राशि तो सबसे आखिर में मीन राशि का स्थान होता है। ये ग्रहों के मार्ग पर ही होता है। इसके कुल बारह हिस्सों में हर हिस्से में एक राशि होती है। 
8 पहर और पंचांग-
पंचांग के हिसाब से एक दिन 8 पहरों से मिलकर बना है। इसमें पल के बारे में भी बताया गया है। 
कुछ खास बातें-
पंचांग में कई सारे शब्दों का इस्तेमाल होता है और इन सभी का एक खास समय निश्चित है। इससे ये पता चलेगा कि भारतीय पंचांग की गणना कितनी सूक्ष्म है।
संवत- 1 वर्ष
ऋतु- 2 महीना
पक्ष- 15 दिन का समय-कृष्ण एवं शुक्ल पक्ष
सप्ताह- सात दिन का समय
प्रहर- 3 घंटे का समय
होरा-1 घंटे का समय
मुहूर्त -48 मिनट का समय
घड़ी- 24 मिनट का समय
1 क्षण- 8 सेकेंड
(अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वास्तुविद एवं ज्योतिषी सर्वांगजी से बातचीत पर आधारित)
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