जनसंख्या वृद्धि से दिनों-दिन बढ़ती समस्याएं

Anuj Srivastava

16th July 2020

11 जुलाई का दिन विश्व में जनसंख्या दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस को 1989 में संयुक्त राष्ट्र परिषद् द्वारा शुरु किया गया था। तेजी से बढ़ती जनसंख्या ने आज दुनिया के सामने कई समस्याओं को ला खड़ा किया है। इसी समस्या पर ध्यान केंद्रित करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है।

 जनसंख्या वृद्धि से दिनों-दिन बढ़ती समस्याएं

आज विश्व कई प्रकार की समस्याओं से जूझ रहा है मसलन बेरोजगारी, पर्यावरण, गरीबी, भुखमरी आदि। पर कहीं न कहीं इन समस्याओं का जो मूल है वो जनसंख्या है। विश्व की आबादी 7 अरब से ज्यादा है। जनसंख्या वृद्धि पर नजर डालें तो चौकाने वाले आंकड़े नजर आते हैं। वर्ष 1800 में जहां पहली बार विश्व की जनसंख्या 1 अरब पर पहुंची थी, तो 2 अरब होने में 130 वर्ष लगे। इसी तरह आगे जनसंख्या बढ़ती रही और वर्षों का अंतराल कम होता गया। जैसे 3 अरब का आकड़ा 1960 में तो 4 अरब 1974 में। इस बीच आप वर्षों के अंतराल पर नजर बनाएं रखें। 5 अरब होने में मात्र 13 वर्ष लगे। वर्तमान आकड़ा 7.7 अरब से ज्यादा है। प्रतिवर्ष 8.3 करोड़ की दर से विश्व में जनसंख्या बढ़ रही है।  ऐसा अंदाजा लगाया जाता है कि सन् 2030 तक आबादी 8.6 अरब और 2050 में 9.8 अरब तथा सदी के अंत तक यह आंकड़ा 11 अरब को छू जाएगा। 

वहीं भारत की बात करें तो यह दुनिया में चीन के बाद सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है जिसकी कुल जनसंख्या, बढ़ती आबादी पर लाइव अपडेट देने वाली वेबसाइट worldometers.info के अनुसार 136 करोड़ से ज्यादा है। और हर एक सेंकड के साथ यह बहुत तेजी से बढ़ रही है। भारत की आबादी 2010 से 2019 के बीच 1.2 की औसत वार्षिक दर से बढ़कर 1.36 अरब हो गई है, जो चीन की वार्षिक वृद्धि दर के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा है। 

विश्व की कुल आबादी में अकेले भारत की हिस्सेदारी 17 फीसदी है, जबकि हमारे पास दुनिया का केवल चार फीसदी पानी और 2.5 फीसदी ही जमीन है। यही कारण है कि आज करोड़ों भारतीय बुनियादी सुविधाओं से मरहूम हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत की तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या चिंताजनक है। भारत में जिस प्रकार से जनसंख्या  वृद्धि होती रही है उतनी तेजी से सरकारों ने इस दिशा में कभी कोई काम नहीं किया।

फलस्वरूप आज जनसंख्या  वृद्धि  के कारण कई समस्याओं से हमें दो चार होना पड़ा है, जो इस प्रकार है-

बेरोजगारी- भारत अभी एक विकासशील राष्ट्र है और यहां अभी जनसंख्या के लिहाज से उतने उद्योग-धंधे नहीं है। जो सबको रोजगार दे सकें। निरंतर बढ़ती जनसंख्या और बेकारी के चलते समाज में अराजकता और बेरोजगारी दर बढ़ी है।   

संसाधनों का दुरुपयोग- जनसंख्या  वृद्धि  का सबसे बड़ा नुकसान प्राकृतिक संसाधनों को पहुंचा है। नदियां, जगंलों का विनाश तीव्र गति से हुआ है। ऐसा कहा जाता है कि प्राकृतिक संतुलनों के बने रहने के लिए 33प्रतिशत भाग वनों को ढका रहना चाहिए। संसार में प्रति मिनट 30 हेक्टेयर वनों की कटाई हो रही है। यदि ऐसे ही चलता रहा तो वनों का और हमारे जीवन का सर्वनाश तय है।     

मंहगाई का कारण- जब किसी वस्तु की मांग ज्यादा होती है और उसकी पूर्ति कम तो मंहगाई का बढ़ना लाजिमी है। खाद्य उत्पादन और वितरण बढ़ती हुई आबादी जरूरतों को पूरा की करने में सक्षम नहीं है। उत्पादनों का कम होना महंगाई के कारकों में से एक है।

बुनियादी ढांचे पर प्रभाव -दुर्भाग्य से बुनियादी ढांचे का विकास उतनी तेजी से नहीं हो रहा जितनी तेजी से आबादी में वृद्धि हो रही है। इसका नतीजा परिवहन, संचार, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा आदि की कमी के तौर पर सामने आता है। झुग्गी बस्तियों, भीड़ भरे घरों, ट्रेफिक जाम आदि में बढ़ोत्तरी हुई है।

हम इस समस्या पर किस प्रकार काबू पा सकते हैं , आइए कुछ बिंदुओं से समझते हैं- 

शिक्षा का प्रसार- जनसंख्या नियंत्रण के लिए यह आवश्यक है कि लोगों को इस दिशा में शिक्षित किया जाए। शिक्षित व्यक्तियों में सीमित परिवार रखने की प्रवृत्ति अधिक होती है।

परिवार नियोजन- जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए परिवार नियोजन के विभिन्न कार्यक्रमों का प्रचार-प्रसार अति आवश्यक है। परिवार नियोजन कार्यक्रम को जन आंदोलन का रूप दिया जाना चाहिए।

बाल-विवाह पर रोक- हमारे देश में आज भी बाल विवाह की प्रथा है। अत: बाल-विवाह पर कारगर कानूनी रोक लगायी जानी चाहिए। साथ ही विवाह के लिए तय उम्र सीमा का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।

सीमा निर्धारण- परिवार, समाज और राष्ट्र के हित में संतान की सीमा निर्धारण करना अति आवश्यक है। जनसंख्या विस्फोट से बचने के लिए प्रत्येक दम्पति के संतानों की संख्या 1 या 2 करना अति आवश्यक है। चीन में इसी उपाय को अपनाकर जनसंख्या वृद्धि में नियंत्रण पा लिया गया है।

महिला शिक्षा- हमारे देश में आज भी महिलाओं की शिक्षा का स्तर पुरुषों की अपेक्षा काफी कम है। महिलाएं शिक्षित न होने के कारण जनसंख्या वृद्धि के दृष्परिणामों को नहीं समझ पातीं। वे अपने खान-पान पर भी ध्यान नहीं दे पाती तथा जनसंख्या नियंत्रण में अपना योगदान नहीं दे पातीं हैं। जिन क्षेत्रों मे महिलाओं का शिक्षा स्तर कम है वहां जनसंख्या वृद्धि दर अधिक है।

जनसंख्या वृद्धि न सिर्फ देश के विकास में अपितु हमारे जीवन में बहुत बड़ी बाधा है जिसका समाधान खोजने की आवश्यकता बहुत जरूरी है। आज जहां नजर उठा कर देखो हर तरफ सिर्फ लोग ही लोग नजर आते हैं, हर समय व्यक्ति स्वयं को एक भीड़ से घिरा पाता है। अभी पिछले महीने एक तस्वीर हमने देखी थी जिसमें माउंट एवरेस्ट पर भी लोगों की भीड़ नजर आ रही है। वहां भी टै्रफिक जाम जैसी स्थिति हो गई थी। यदि जल्द ही हमने इस दिशा में कोई समाधान नहीं खोजा तो आने वाले समय में जनसंख्या वृद्घि के भयंकर परिणाम भुगतने होंगे।

 

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