कैसे ईम्यूनिटी बढ़ाए, मटके का पानी, जानें अन्य फायदे

Jyoti Sohi

22nd July 2020

मिट्टी की सौंधी सौंधी महक हमारे मन को तो भाती ही है, साथ ही हमारे तन के लिए किसी औषधि से कम नहीं है। मिट्टी में कई प्रकार के रोगों से लड़ने की क्षमता है और घड़े का पानी पीने से हमारी इम्यूनिटी खुद ब खुद बढ़ जाती है। दरअसल, मटका पानी में जमा धूल के कणों और सूक्ष्म जीवाणुओं को सोख लेता है, जिससे पानी साफ हो जाता है।

कैसे ईम्यूनिटी बढ़ाए, मटके का पानी, जानें अन्य फायदे

कहा जाता है कि कुम्हार के चाक से उतरे मिट्टी के मटके की कीमत उससे बेहतर कोई नहीं जान सकता। कच्ची मिट्टी जो एक सांचे में ढ़लकर उसके बाद पककर हमारे पास पहुंचती है, उसके ढेरों फायदे हैं, जिससे हम सब वाकिफ नहीं हैं।  भले ही आधुनिकता के इस दौर में अब मिट्टी के बर्तनों का स्थान धातु के बर्तनों ने ले लिया है मगर आज भी किसी न किसी रूप से मिट्टी निर्मित बर्तन अपनी पहचान बनाए हुए हैं। मिट्टी की सौंधी सौंधी महक हमारे मन को तो भाती ही है, साथ ही हमारे तन के लिए किसी औषधि से कम नहीं है। मिट्टी में कई प्रकार के रोगों से लड़ने की क्षमता है और घड़े का पानी पीने से हमारी इम्यूनिटी खुद ब खुद बढ़ जाती है।  दरअसल, मटका पानी में जमा धूल के कणों और सूक्ष्म जीवाणुओं को सोख लेता है, जिससे पानी साफ हो जाता है। आइए जानते हैं क्या हैं मिटटी से बने मटके के फायदे  

 

अमृत है घड़े का पानी

पीढ़ियों से, भारतीय घरों में पानी स्टोर करने के लिए मिट्टी के बर्तन यानी घड़े का इस्तेमाल किया जाता है। आज भी कुछ लोग ऐसे हैं जो इन्हीं मिट्टी से बने बर्तनो में पानी पीते है। विशेषज्ञों के अनुसार मिट्टी के बर्तनों में पानी रखा जाए, तो उसमें मिट्टी के गुण आ जाते हैं। इसलिए घड़े में रखा पानी हमें स्वस्थ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

 

इम्यूनिटी सिस्टम को रखे मजबूत, मटके का पानी

कई छोटी बीमारियों को दूर करने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली बहुत ही जरूरी है। जब मिट्टी के मटके में पानी रखा जाता है, तो उसमें मिट्टी के गुण बढ जाते हैं, जिससे कि प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा मिलता है। मटके के पानी में मृदा के गुण होने की वजह से शरीर को विषैले तत्वों से मुक्त किया जा सकता है।

 

बीमारियों से रखे दूर

गर्मी शुरू होते ही सभी प्रकार के बैक्टीरिया और वायरस हमारे इर्द गिर्द क्रियाशील हो जाते हैं। इसके चलते हमारे आसापास मलेरिया, पीलिया, टायफाईड और डायरिया जैसी बीमारियां मंडराने लगती हैं। ऐसे में मटके का पानी रोगांे से लड़ने में मददगार साबित होता है।

 

विषैले पदार्थ सोखने की क्षमता

मिटटी में शुद्धिकरण का एक ऐसा गुण पाया जाता है, जो सभी विषैले पदार्थ अपने अंदर सोख लेती है तथा पानी में सभी जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व मिलाती है। ऐसे में मिट्टी के मटके का पानी सही तापमान पर रहता है, ना बहुत अधिक ठंडा ना गर्म। चाहे बच्चे हो यां बुजुर्ग हर कोई आसानी से इस पानी को पी सकता है। 

 

गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद

आमतौर पर गर्भवती महिलाओं को फ्रिज के ठंडे पानी को पीने की सलाह नहीं दी जाती। ऐसे में घड़े या सुराही का पानी उनके लिए बेहद फायदेमंद है। घड़े में रखा पानी न सिर्फ उनकी सेहत के लिए अच्छा होता है, बल्कि पानी में मिट्टी का सौंधापन बस जाने के कारण गर्भवती महिलाओं के मन को शांत रखता है।

 

गले को ठीक रखे

अक्सर हमें गर्मियों में ठंडा पानी पीने की तलब होती है और हम फिज्र से ठंडा पानी ले कर बार बार पीते भी हैं। मगर बहुत ज्यादा ठंडा होने के कारण यह गले और शरीर के अंगों को एक दम से ठंडा कर शरीर पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है। इससे गले की कोशिकाओं का ताप अचानक गिर जाता है, जिससे गले का पकना और ग्रंथियों में सूजन आने लगती है। मगर मटके का पानी आपके गले पर किसी तरह का कोई प्रभाव नहीं डालता है। 

 

चयापचय को बढ़ावा

नियमित रूप से घड़े का पानी पीने से प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद मिलती है। प्लास्टिक की बोतलों में पानी स्टोर करने से, उसमें प्लास्टिक की अशुद्धियां एकत्रित हो जाती है और वह पानी को अशुद्ध कर देता है। साथ ही यह भी पाया गया है कि घड़े में पानी स्टोर करने से शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ जाता है।

 

घड़े का पानी पेट की गैस में है रामबाण

यदि आप फ्रिज का पानी पीते हैं तो पेट में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है जो वात को बढ़ाता है। मटके का पानी बहुत अधिक ठंडा ना होने से वात नहीं बढ़ता और पेट भी जल्दी साफ हो जाता है और पेट में गैस की समस्या को दूर करने का काम करता है ।

 

पेट की एसिडिटी मिटाए

मिर्च-मसालेदार खाना खा लेने से कई बार एसिडिटी की समस्या पैदा हो जाती है। घड़े के पानी में मिट्टी के क्षारीय तत्व और पानी के तत्व मिलकर उचित पीएच बेलेंस बनाते हैं, जो शरीर को कई तरह की हानि और एसिडिटी से बचाते हैं।

 

मटके का पानी दिलाए संतुष्टि

गर्मियों में लोग फ्रिज का या बर्फ का पानी पीते है, इसकी तासीर गर्म होती है। यह वात भी बढाता है। बर्फीला पानी पीने से कब्ज हो जाती है तथा अक्सर गला खराब हो जाता है। मटके का पानी बहुत अधिक ठंडा ना होने से वात नहीं बढाता, इसका पानी संतुष्टि देता है।

 

पीएच संतुलन की बढ़ोतरी

इसमें मिट्टी में क्षारीय गुण विद्यमान होते है। क्षारीय पानी की अम्लता के साथ प्रभावित होकर, उचित पीएच संतुलन प्रदान करता है। इस पानी को पीने से एसिडिटी पर अंकुश लगाने और पेट के दर्द से राहत प्रदान पाने में मदद मिलती हैं।

 

मटका के साथ डिजाइनर सुराही भी है पसंद

बाजार में मिलने वाले विभिन्न आकार के मटके के साथ लंबी गर्दन वाली सुराही भी मौजूद है, जिनकी कारीगरी और डिजाइन लोगों को पसंद आती है। इन्हें कम पानी रखने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। इन मिट्टी से बने बर्तनों में बारीक छिद्र होते हैं, जिनसे छनकर बाहरी हवा मटके के अंदर प्रवेश करती है और उसे ठंडा करती है। बाजार में विभिन्न आकार व प्रकार के मटके उपलब्ध हैं। इनमें मटका टंकी, गोल मटका व सुराही आदि प्रमुख हैं। इनकी कीमत 60रुपये से लेकर 350रुपये तक है, जो उसकी क्षमता व मटके के आंतरिक आयतन पर निर्भर करती है। बाजार में मटके के आकार के अनुसार स्टैंड की बिक्री भी हो रही है। लोहे व एल्युमिनियम से बने स्टैंड खासतौर पर बाजार में बिक रहे हैं। 

 

मिट्टी से बनी बोतलें हैं आकर्षण का केंद्र

इको फ्रेंडली ठंडे पानी के बर्तन लोगों को लुभा रहे हैं। इनमें मिट्टी की बोतलें खास हैं। मिट्टी से बनी बोतलों में पानी डालकर आसानी से वाहन में रखकर कहीं भी ले जाया जा सकता है। यह बोतलें भी कई आकार व डिजाइन में उपलब्ध हैं। बाजार में ढक्कन वाली बोतल व बिना ढक्कन वाली बोतलें उपलब्ध हैं। इनमें एक लीटर से पांच लीटर तक पानी रखा जा सकता है। हांलाकि समाज तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन बावजूद इसके पुरातन परंपराएं, संस्कृति और जीवनोपयोगी साधनों का आज भी महत्व बरकरार है। 

 

मटका बनाने की विधि

कुम्हार के चाक से एक एक कर उतरने वाले मिट्टी के बर्तन बनाने की विधि सरल है। मटके बनाने के लिए चिकनी मिंट्टी में रेत मिलाकर और फिर इसे गूंथकर चाक पर चढ़ाकर बड़ी कुशलता से मन चाहा साइज दिया जाता है। इसके बाद इसे पांच से छह दिन तक धूप में सुखाया जाता है। सूख जाने पर भट्ठीनुमा संयत्र में उपलों तथा लकड़ियों के मध्य रखकर आग से दो दिन तक पकाया जाता है और आग ठंडी होने पर बाहर आता है गरीबों का फ्रिज यानि मटके।

खरीदते वक्त रखें ध्यान

घड़ा खरीदते वक्त अच्छी तरह से चेक करा लें कि कहीं उसमें कोई छेद आदि तो नहीं है। इसके लिए घड़े में पानी भरवाकर कुछ मिनट के लिए छोड़ दें। अगर घड़े में छेद होगा तो आपको पता चल जाएगा। 

मटकों की सफाई संबंधी सावधानियां

घड़े या सुराही का पानी रोज सुबह बदल देना चाहिए। अगर अगले दिन सुबह पानी बच गया है तो उसे फेंक दें और ताजा पानी भर दें।  

मटके से पानी निकालने के लिए भी साफ बर्तन का प्रयोग किया जाना चाहिए, जिससे स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल असर से बचा जा सके।

घड़े के अंदरूनी हिस्से को हाथ से या स्क्रब से रगड़कर साफ न करें। इससे उसके पोर्स बंद हो जाने का खतरा रहता है। पोर्स बंद होने से उसकी कूलिंग कपैसिटी कम हो जाती है। 

अंदर के हिस्से को साफ करने के लिए रोज सुबह पानी बदलने से पहले साफ पानी डालकर और फिर हिलाकर बाहर फेंक दें। घड़ा अपने आप साफ हो जाएगा। 

बाहर के हिस्से को हाथ से रगड़कर साफ कर सकते हैं। आमतौर पर एक घड़ा एक सीजन चल जाता है। अगले सीजन में घड़े को बदल दें। अगर बीच में कभी घड़ा अंदर से गंदा नजर आए, पानी में कोई गंध महसूस हो तो सीजन से पहले भी बदल सकते हैं। -

घड़े को किसी भी चीज से ढकें, लेकिन यह जरूर सुनिश्चित करें कि वह पूरी तरह से ढका हुआ हो, जिससे कि उसके भीतर चींटी, कीड़ा आदि न घुसे।  

 

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