कीजिए उन फिल्मों से मुलाकात, जो सिखाती हैं रोमांस

चयनिका निगम

23rd July 2020

फिल्में समाज का आईना होती हैं, जिंदगी के कई रूप दिखाती और सिखाती हैं। रोमांस भी इन्हीं फिल्मों से सीखा जा सकता है। रोमांस सिखाती इन फिल्मों से एक बार और रूबरूर होइए ताकि जिंदगी में वापस रोमांस का डोज पूरा हो सके।

कीजिए उन फिल्मों से मुलाकात, जो सिखाती हैं रोमांस

रोमांस, जिसके सहारे किसी भी कपल की जिंदगी आसानी से बढ़ती और चलती रहती है। उस रोमांस का डोज़ सबकी जिंदगी में भरपूर हो ये जरूरी नहीं। इसीलिए इस रोमांस के लिए भी कई बार मोटिवेट होना पड़ता है। और इस मोटिवेशन के लिए फिल्मों की मदद भी ली जा सकती है। वही फिल्में जो अपने समय में रोमांस का पर्याय बनीं। जो किसी न किसी पीढ़ी को रोमांस का पाठ पढ़ाने में कामयाब रहीं। इन्होंने प्यार के मायने और जिंदगी खुशी से गुजारने के तरीके बड़ी आसानी से समझाए। इन्हीं फिल्मों ने प्यार दर्शाने के तरीके भी समझाए। महबूब के सामने अपना प्यार जताने के ना जाने कितने तरीके इन फिल्मों ने जोड़ों को सिखाए। यही वो फिल्में थीं, जिन्होंने लोगों को प्यार करना सिखाया। ऐसी ही रोमांटिक फिल्मों के बारे में चलिए जानते हैं। ताकि इन फिल्मों को बारबार देखा जाए और रोमांस का तड़का बार-बार जिंदगी को गुलजार करता रहे। इन फिल्मों से एक और मुलाकात तो बनती ही है-

 

जब वी मेट से बदला बहुत कुछ-

13 साल पहले साल 2007 में रिलीज हुई जब वी मेट आज भी दिलों में तरोताजा है। ये वो फिल्म है जो जिंदगी को फुल मूड में जी लेना सिखाती है। इसके एक-एक पल को महसूस करना सिखाती है। कहती है प्यार कर लो, खुश हो लो फिर न जाने कब अंशुमन जैसी परेशानी जिंदगी में आ जाए। जी हां, करीना कपूर का निभाया किरदार गीत कितना खुशदिल था लेकिन उसकी जिंदगी में साथ न देने वाल प्यार या कहें झूठा प्यार था। वो उस झूठ को सह नहीं पाती और अपनी जिंदगी से मानो खुशियों को निकाल ही देती है। लेकिन फिर आदित्य कश्यप यानि शहीद कपूर गीत को वो सिखाने वापस आता है जो कुछ समय पहले खुद गीत ने आदित्य को सिखाया था। गीत ने आदित्य को तमाम परेशानियों के बाद भी जीना सिखा दिया था। और जीने की इसी सीख के साथ दोनों को प्यार का पाठ भी पढ़ने को मिल गया था। इस फिल्म का हर एक सीन आपको फील गुड देगा ही। 

 

रहना है तेरे दिल में का सुरूर-

एक्टर आर माधवन के करियर की इस बेहतरीन फिल्म को हर पीढ़ी पसंद करती है। करीब 20 साल पुरानी इस फिल्म को जब साल 2001 में रिलीज किया गया तो आर्थिक तौर पर इस फिल्म ने कोई बड़ा कमाल नहीं किया था। लेकिन कमाल ये था कि ये फिल्म तब से ही युवा पीढ़ी के दिल में बैठ गई। ये फिल्म प्यार के लिए बदल जाने की कहानी है। फिल्म में मैडी का किरदार माधवन ने निभाया है। बिगड़ैल मैडी को रीन यानी दिया मिर्जा से प्या रहो जाता है। कभी कॉलेज के बदमाशों में गिना जाने वाला मैडी रीना के सामने सफेदपोश सज्जन पुरुष है और अपनी पहचान राजीव बताई है। वही राजीव जिससे रीना की शादी तय हुई है और वही राजीव जिसे रीना ने कभी देखा ही नहीं है। मैडी ने सोचा है कि वो किसी दिन ये सच्चाई रीना को बता देगा लेकिन इससे पहले असल राजीव यानी सैफ अली खान रीना के सामने आ जाता है, जो कॉलेज में मैडी का प्रतिद्वंदी भी था। रीना नाराज हो जाती है लेकिन अंत में वो और मैडी एक होते हैं। इसी एक होने की कहानी है रहना है तेरे दिल में। पहली नजर में प्यार हो जाने और प्यार को पा लेने की सीख दे जाती है। 

 

दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे-

इस फिल्म को बाद में डीडीएलजे कहा गया और इसने कई कीर्तिमान भी बनाए। 1995 में जब ये फिल्म रिलीज हुई तो किसी को भी नहीं पता था कि ये कमाल करने वाली है। ये फिल्म कैसे प्यार और रोमांस का दूसरा रूप बनने वाली है। फिल्म राज यानि शाहरुख खान और सिमरन यानि काजोल के प्यार की कहानी है। इस फिल्म में दोनों अपने दोस्तों के साथ घूमने निकलते हैं और फिर प्यार हो जाता है। प्यार भी ऐसा कि राज लंदन छोड़ कर भारत तक आ जाता है। धीरे-धीरे ही सही लेकिन राज सिमरन के परिवार को मना ही लेता है। ये पूरी कहानी प्यार, मजे, रोमांच और रोमांस से भरी है। गाने भी प्यार से सराबोर करने वाले हैं तो रोमांस के कई सारे मौके भी। फिल्म में भारतीय त्योहारों को भी बहुत अच्छे से दिखाया गया है। 

 

प्यार कादम' लगा के हाइसा-

दम लगा के हाइसा, एक ऐसी फिल्म थी, जो ये बताती है कि प्यार करने के लिए रंग-रूप पर ध्यान देना जरूरी नहीं है बल्कि सिर्फ प्यार होना ही काफी होता है। फिल्म हरिद्वार के प्रेमप्रकाश तिवारी की जिंदगी से जुड़ी है, इसमें तब खलबली मच जाती है जब एक बहुत मोटी लड़की संध्या (भूमि पेडनेकर) से उनकी शादी हो जाती है। पहले पहल नाराजगी में हुई ये शादी बाद में प्यार में बदल जाती है और उसी मोटी संध्या को प्रेमप्रकाश पसंद करने लगता है। कई उतार-चढ़ाव के बाद उन दोनों की जिंदगी अच्छे से कटने लगती है। 2015 में आई इस फिल्म देखने के बाद आपको प्यार के असल माने समझ आने लगेंगे। 

 

दिलों को मिलाते 2 स्टेट्स-

टू स्टेट एक ऐसी फिल्म है जिसकी कहानी के साथ गाने भी लोगों के दिलों में बैठ गए थे। फिल्म दो अलग समुदायों के लोगों के बीच प्यार होने को दिखती है और लेखक चेतन भगत की असल कहानी औ किताब पर बनी है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे बिलकुल अलग पृष्ठभूमि के लोगों के बीच भी प्यार हो सकता है। कैसे तमाम विरोधों के बाद भी परिवार को शादी के लिए मानाया जा सकता है। 2014 में आई इस फिल्म की कहानी कृष और अनन्या यानी अर्जुन कपूर और आलिया भट्ट की है। कैसे पंजाबी अर्जुन और साउथ इंडियन अलिया को प्यार हो जाता है और फिर शादी भी, कहानी इसी के इर्द-गिर्द घूमती है।

 

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