मां संतोषी पूरी करेंगी मनोकामना, शुक्रवार का रखें उपवास

चयनिका निगम

23rd July 2020

शुक्रवार के व्रत में पूरे विधिविधान से तैयारी करनी होती है ताकि संतोषी मां के आशीर्वाद में कोई कमी न रह जाए और मनोकामना भी पूरी हो जाए।

मां संतोषी पूरी करेंगी मनोकामना, शुक्रवार का रखें उपवास
मनोकामना पूरी करने के लिए महिलाएं अक्सर कई सारे व्रत करती हैं। मां संतोषी का व्रत भी ऐसा ही उपवास है, जिसमें महिलाएं देवी मां से परिवार की खुशियां मांगती हैं और ये मनोकामना पूरी भी होती है। माना जाता है इस व्रत को विधि-विधान से करने से सारी इच्छाएं पूरी होती हैं और जीवन सुखमय हो जाता है। मगर ये तब ही संभव है। जब ये व्रत पूरी विधि-विधान से किया गया हो। इस व्रत में एक बात बहुत ध्यान रखनी होती है। इस व्रत को करने के लिए खट्टी चीजों से दूरी बनानी होती है। ऐसी कई और बातें भी हैं, जिन्हें याद करके इस व्रत को पूरा किया जा सकता है। शुक्रवार के इस व्रत से जुड़ी सारी बातें चलिए जानते हैं-
कलश की स्थापना और पूजा-
शुक्रवार का व्रत करने के लिए सबसे पहले तो सुबह उठकर स्नान करना होगा फिर मां संतोषी की प्रतिमा सजानी होगी। इसके बाद मौका आएगा कलश स्थापना का। कलश स्थापना तो वैसे ही होगी लेकिन ये कलश सिर्फ तांबे का ही होना चाहिए। वरना विधि अधूरी रह जाएगी। पूजा में बड़े बर्तन में पानी भी जरूर रखें। पूजा के बाद इस पानी को पूरे घर में जरूर छिड़कें। 
प्रसाद हो ऐसा-
इस व्रत में खट्टी चीजों से दूरी बनानी होती है। खट्टे से दूरी इतनी रखनी होती है कि व्रती के अलावा पूरे घर को भी खट्टे को हाथ नहीं लगाना होता है। इसलिए प्रसाद में गुड़ और चना ही रखा जाता है। विधिवत पूजन, कथा सुनने और आरती के बाद इसी प्रसाद को पूजा में चढ़ाएं। पूजा के दौरान जब कथा कहें तो कहने और सुनने वालों के हाथों में गुड़ और चना जरूर होना चाहिए। कथा पूरी होने के बाद इन्हें गाय को जरूर खिला दें। फिर पूजा में रखे गुड़ और चना ही प्रसाद में बांटे। 
मनोकामना पूरी हो तो उद्यापन-
जिस भी मनोकामना के लिए ये व्रत किया है, उसके पूरा होने के बाद उद्यापन जरूर किया जाना चाहिए। उद्यापन में भी आपको मां संतोषी के व्रत से जुड़ी कथा सुननी होती है। पूजा में  पूड़ी, खीर और चने की सब्जी आदि रखनी होती है। इसके बाद 8 लड़कों को खाना भी खिलाएं। भोजन के बाद उनको दक्षिणा भी जरूर दें। इस तरह विधिवत उद्यापन से मां संतोषी का आशीर्वाद पूरा मिलता है।
संतोषी व्रत कथा-
संतोषी मां के इस व्रत में सास-बहू की कहानी कही जाती है, जिसमें सास अक्सर ही बहू को सताती है। ये सब देखता बेटा घर छोड़कर दूसरे शहर नौकरी करने चला जाता है। लेकिन फिर बहू के जीवन खुशियां तब ही आ पाती हैं, जब वो संतोषी मां का व्रत करती है। 
खट्टा क्यों नहीं-
शुक्रवार को मां संतोषी से कामना के लिए व्रत रखें तो खट्टा खाना मना होता है। लेकिन ऐसा क्यों है? ये भी जानना जरूरी है। जानकार मानते हैं कि हर ग्रह का एक स्वाद होता है और शुक्र ग्रह का स्वाद खट्टा होता है। अब इसी दिन व्रत रख रहे हैं तो इस स्वाद से बचना होगा। 
(अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वास्तुविद एवं ज्योतिषी सर्वांगजी से बातचीत पर आधारित)
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