'मैं उस जैसा क्यों नहीं हूं'…ना सोचे बच्चे

चयनिका निगम

25th July 2020

अक्सर बच्चे खुद की तुलना दूसरों से करते रहते हैं। लेकिन उनकी ये आदत उनके व्यक्तित्व पर गलत असर डाल सकती है। इसलिए पेरेंट्स को चाहिए कि वो अपने बच्चों को हमेशा तुलना वाली बातों से दूर रखें।

'मैं उस जैसा क्यों नहीं हूं'…ना सोचे बच्चे
‘मुझे तो बस रोहित जैसा हेयर कट कराना है', ‘मेरे पास पुनीत जैसे खिलौने नहीं हैं', ‘आरव थोड़े दिन पहले शिमला गया था, हम लोग कब जाएंगे', 8 साल के मयंक के मुंह से अक्सर ही ऐसी बातें सुनी जा सकती हैं। वो ज्यादातर बार खुद की इच्छाओं से पहले दूसरों की तरह सबकुछ कर लेना चाहता है। उनके लिए अपनी खुद की प्रतिभा अहम नहीं है बल्कि दोस्त को क्या आता है और उसे खुद को क्या नहीं जैसी बातों पर ही उसका ध्यान रहता है। मयंक अकेला नहीं है ऐसे कई बच्चे हैं, जो दूसरों से तुलना खूब करते हैं। वो खुद को कमतर समझते हैं और दोस्तों को बेस्ट। फिर उसके जैसा ही बन जाने की कोशिशों में लग जाते हैं। कुछ समय बाद यही सोच एक आदत बन जाती है और बड़े होने तक बच्चे दूसरों से खुद की तुलना में खूब समय बर्बाद करते हैं। ये इतना ज्यादा होता है कि बच्चा आपकी खासियतें भूलता ही जाता है। उसकी अपनी पर्सनलिटी कभी उभर कर सामने आ ही नहीं पाती है। आपका बच्चा भी ये गलती न करे इसलिए कुछ सतर्कता आपको भी बरतनी होगी। बच्चे के साथ कैसा हो आपका बर्ताव कि वो खुद पर विश्वास रखे और दूसरों से तुलना न करे, इसके लिए जरूरी टिप्स जान लीजिए-
तुलना कैसी-कैसी-
जब बच्चे अपनी तुलना दूसरों से करने लगते हैं तो इसमें सिर्फ उनका खेल और मस्ती-मजा ही शामिल नहीं होता है बल्कि पूरे परिवार को इस तुलना वाले खेल में शामिल कर लिया जाता है, जैसे-
• मेरे पापा ज्यादा स्ट्रॉंग है। 
• उसकी मम्मा तो उसे अक्सर मॉल ले जाती हैं। 
• पापा कह रहे थे अगली छुट्टियों में हम लोग ऑस्ट्रेलिया जानेगे। 
• मेरे पास तो 5 रिमोट कंट्रोल कार हैं
• मेरी दीदी के पास तो बहुत बड़ा फोन है। 
आत्मविश्वास की कमी-
आप देखिएगा, जो भी बच्चे दूसरों से अपनी तुलना करते रहते हैं, उनका आत्मविश्वास बहुत कम होता है। वो कभी खुद को कुछ समझ ही नहीं पाते हैं। भले ही वो जिंदगी में कितना भी अच्छा क्यों न कर रहे हों। इन्हीं भावनाओं के बीच उनमें जलन, गलत हो जाने का डर और दूसरों से कमतर होने की बात घर करती जाती है। फिर वो खुद की जिंदगी में कुछ भी कमाल नहीं कर पाते हैं क्योंकि वो तो दूसरों एक हिसाब से जिंदगी जी रहे होते हैं। 
आप न करें तुलना-
बच्चा तुलनात्मक रवैया न अपनाए इसके लिए जरूरी है कि आप खुद भी बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से ना करें। बल्कि उन्हें उनकी सफलता से रूबरू कराते रहें। 
प्रतिभा ढूंढने में करने मदद-
बच्चे में कौन सी प्रतिभा है और वो कैसे खास है? ये आपको उसे हर दिन बताते रहना होगा। जैसे छोटे-छोटे काम कर देने पर उसकी तारीफ कर देना, पढ़ाई में थोड़े सुधार पर भी ‘कीप इट अप'  बोलना आदि। आप बच्चे को ये भी बताइए कि हर बच्चे की अपनी अलग प्रतिभा होती है। जिसको ढूंढना और विकसित करना ही जरूरी होता है। जरूरी नहीं कि जिस चीज में एक बच्चा खास हो उसमें ही दूसरा बच्चा भी खास हो। इसलिए बच्चों को अपनी खासियतों पर ध्यान देने की जरूरत होती है।
आप उसके रोल मॉडल-
याद रखिए बच्चे के लिए पहली रोल मॉडल आप ही हैं। इसलिए आपको खुद पर भी वही नियम लागू करने होंगे, जो आप चाहती हैं कि बच्चा अपनाए। इसलिए खुद की भी दूसरों से तुलना आपको बंद करनी होगी। साथ में साकरात्मक भी आपको रहना होगा। 

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