डिप्रेशन में हैं तो डायरी लिखिए

Poonam Mehta

11th September 2020

वर्तमान समय में आधुनिक जीवन शैली से उपजा है स्टैªस और यही स्टैªस कांलातर मे डिप्रैशन व मानसिक रोगो को जन्म देता है।

डिप्रेशन में हैं तो डायरी लिखिए

कई दिनों ,कई हफ्तो या महीनो से यदि आपका कुछ भी करने को मन नही करता है,शरीर थका हुआ सा रहता है। भूख नही लगती, नींद भी नही आती ,आप चिडचिडे से हो गए है और कही भी आपका ध्यान केन्द्रित नही हो पाता है तो यह सभी लक्षण अवसाद के है।

 वर्तमान समय में आधुनिक जीवन शैली से उपजा है स्टैªस और यही  स्टैªस कांलातर मे डिप्रैशन व मानसिक रोगो को जन्म देता है।

मेडिकल कालेज कोटा में प्रौफेसर डाक्टर चन्द्रशेखर सुशील के अनुसार अवसाद दो तरह का होता न्यूरोैटिक व साइकौटिक । न्यूरौटिक अवसाद लाईफ स्टाइल डिसआर्डर से पनपता है और बिहेवियरल थैरेपी से ठीक किया जा सकता है जबकि साइकौटिक अवसाद में व्यक्ति के ब्रेन में ही केमीकल चेन्जेज हो जाती है जिनका उपचार दवाईयों से ही संभव है।

छोटे-मोटे डिप्रैशन के लक्षण भी मनोचिकित्सक के दिखा लेने चाहिए ताकि वो गंभीर रोग न बन जाएं ,पर यदि एनजाइटी से आप रिश्तो को भली प्रकार नही निभा पा रहे हो और अकारण ही दुःखी हो रहे है तो कीजिए राइटिंग ।

आधुनिक चिकित्सा पद्धति एवं लेटेस्ट रिसर्च बताते है कि तनाव में राइटिंग करना श्रेष्ठतम उपचार है  । मनोचिकित्सक इसे ‘मूड डायरिज' कहते  है । अपने लिए एक डायरी खोलिए और उसमें लिखिए ।

अपने विचारः- जो भी विचार आपके मन में आते है, जाते है दिन भर में उन्हे लिपीबद्ध करीए।

अपनी भावनाएंः- अच्छी -बुरी ,गुस्से वाली -प्यार वाली सभी तरह की भावनाएं कागज पर उतारिए ।

अपने इमोशन्स:- मनोभाव ,जिनपे आप नियत्रंण रख पाए और जिनपे आपका नियंत्रण नही रहा सभी लिख डालिए ।

अपनी  प्रतिक्रियाः- दैनिक घटनाओ के प्रति अपना नजरिया लिखे।

कैसे शुरू करेंः- मूड डायरी की शुरूआत करे उस पल से, जब आप लिखने बैठे है आपको कैसा महसूस हो रहा है । किसी भी घटना व्यक्ति या चीज के प्रति अपनी फीलिग्ंस लिख डालिए। आप सेल्फ सजैस्शन भ्ंाी कर सकती ैे।

टाईम सैट करे:- दिन का कोई घटा जब आप फ्री होते हो । रिलैक्स रहते हो लिखने के लिए चुने। यह आप रोजाना निश्चित समय पर कर सके तो अधिक उपयोगी होगा।
क्यो लिखे अवसाद में आप अक्सर स्वयं को अभिव्यक्त नही कर पाते पर

अपनी भावनाओं को लिख कर तो गहराई ,से समझा देते है । डायरी मूड चार्टिंग का काम करती है  और यह समझने में मदद करती है कि  आपके व्यवहार में बदलाव कब, कैसे और क्यों आया।

 कैसे लिखेः- शब्द सीमा,पृष्ठ सीमा या एडीटिंग की सीमा बना लीजिए । कोई व्यक्ति, घटना या शीर्शक ऐसा हो जिस पर लिख नही पा रहे हो तो उसे छोड के जो दूसरा टापिक पकडिए । विचारों का जो भी क्रम हो उसी हिसाब से आगे लिखें।

  लिखने से क्या होगाः- आप अपने विचारों,भावनाओं के प्रवाह को जब शब्दों में बांधना शुरू करेगे तब पायेगें कि आपका मन हल्का हो गया है। बिना बात आप कितनी बातों पर ओवररिएक्ट करते है आप कितना नैगेटिव सोचते है,आपको पता चलेगा ।

राइटिंग से धीरे-धीरे आपका व्यवहार संतुलित होने लगता है। अपनी कुठांओ, विचारो,भावनाओं को लिखने से नकारात्मकता खत्म होने लगती है। परिस्थितियों या भावनाओं की गहनता को आप सामान्य तौर पर लेने लगते है।

सिर्फ राइटिंग ही नहीः- राइटिंग से आप देखेगें अपने नेगेटिव इमोशन्स को पाॅजिटिव होते हुए । डायरी महीने भर बाद पढने पर संभवत यह रियलाइज हो कि आपने ही गल्ती की थी। यदि मूड डायरी से आपकी कोई गलत आदत पकड में आती है तो रूकिए मत; एक्शन लीजिए।

अपने नकारात्मक विचारों के सामने ही सकारात्मक विचार लिखिए। देखिए अगर आप उन पर कार्य कर सकते है तो।
केवल राइटिंग से फायदा धीरे-धीरे होता है यदि आप चिकित्सकीय परामर्श ले ंतो रिकवरी फास्ट होगी।

राइटिंग को प्रौफेशन बना लेः- कितनी बेस्ट सेलर्स के लेखक शौकिया लिखने वाले ही थे। ‘मूड डायरी ' से हो सकता है आपकी कोई जन्मजात प्रतिभा अभर के सामने आ जाए आप भविष्य में लेखक भी बन सकते है।
यदि आपने ईमानदारी से लिखा है और आप उस के सकारात्मक पहलू पर मेहनत करने को तैयार है तो निश्चित तौर पर आपका अवसाद छूमंतर हो जाएगा। ‘‘मूड डायरी'' कोई जादू नही पर अवसाद ग्रसित लोगों के लिए जादू से कम भी नही................ ।

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