श्रद्धा के साथ पढ़ें साईंबाबा की व्रत कथा, तो मिलता है शुभ फल

Jyoti Sohi

2nd March 2021

साईं बाबा दीन दयालु, प्यार के सागर, बनकर भक्तों के लिए संसार में प्रकट हुए। सबका मालिक एक यही साईं बाबा का मंत्र है, जो व्यक्ति मन से साईं भक्ति करता है उसके सर्व विघ्न दूर होकर सब दुख दूर हो जाते हैं। साईं बाबा ने अपने जीवन में अनेक चमत्कार किए और आज भी यदि साईं बाबा की भक्ति सच्चे मन से विश्वासपूर्वक की जाए, तो भक्तों को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। साईं बाबा साक्षात देव हैं यह व्रत श्रद्धा भाव और नियमों को ध्यान में रखकर 9 गुरुवार तक विधिपूर्वक किया जाए तो निश्चित ही इच्छित फल की प्राप्ति होती है।

श्रद्धा  के साथ पढ़ें साईंबाबा की व्रत कथा, तो मिलता है शुभ फल
सभी भक्तों का दुख हरने वाले शिर्डी के साईं बाबा का चमत्कार दुनियाभर के लोग मानते है। ऐसी मान्यता है कि साईं बाबा के दरबार में जो भी व्यक्ति जाता है वह खाली हाथ नहीं लौटता। बाबा कभी किसी को दुखी देख ही नहीं सकते जिस भी भक्त ने अपनी पीड़ा उन्हें बताई वह उस पीड़ा को हर लेते हैं। साईं बाबा ने अपना पूरा जीवन मानव कल्याण को समर्पित किया और लोगों को एक ईश्वर की अवधारणा का संदेश दिया। गुरुवार के दिन साईं बाबा के व्रत किये जाते हैं। माना जाता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति की सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है।साईं बाबा का पूजन वैसे तो किसी भी दिन किया जा सकता है, लेकिन खासकर गुरुवार के दिन व्रत रखने से शुभ फल की प्राप्ति होती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कहा जाता है साईं जी शिरडी गांव में नीम के वृक्ष के नीचे बालक के रूप में प्रकट हुए थे। धरती उनकी माता व आकाश उनके पिता थे। संतो का कोई जाति, धर्म नहीं होता है। दया शांति ही संतों का धर्म होता है। साईं बाबा दीन दयालु, प्यार के सागर, बनकर भक्तों के लिए संसार में प्रकट हुए। सबका मालिक एक यही साईं बाबा का मंत्र है, जो व्यक्ति मन से साईं भक्ति करता है उसके सर्व विघ्न दूर होकर सब दुख दूर हो जाते हैं। साईं बाबा ने अपने जीवन में अनेक चमत्कार किए और आज भी यदि साईं बाबा की भक्ति सच्चे मन से विश्वासपूर्वक की जाए, तो भक्तों को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। साईं बाबा साक्षात देव हैं यह व्रत श्रद्धा भाव और नियमों को ध्यान में रखकर 9 गुरुवार तक विधिपूर्वक किया जाए तो निश्चित ही इच्छित फल की प्राप्ति होती है। दरअसल, कोई भी व्रत बिना व्रत कथा को पढ़े पूरा नहीं माना जाता है। अगर आपने साईं बाबा का व्रत रखा है तो आपके लिए इस कथा को पढ़ना बेहद जरूरी है।
साईंबाबा की व्रत कथा
कोकिला नाम की एक महिला अपने पति महेशभाई के साथ एक शहर में रहती थीं। जो बहुत ही ज्यादा धार्मिक आस्था और विश्वास वाली महिला हुआ करती थी। कोकिला और महेशभाई का जीवन स्नेह और प्रेमपूर्वक व्यतीत हो रहा था। हालांकि, कई बार महेश भाई कोकिला से झगड़ा कर लिया करते थे। लेकिन कोकिला फिर भी शांति से बिना कुछ कहे चुपचाप अपने पति के क्रोध को सहन कर लेती थीं और बुरा नहीं मानती थीं। कोकिला के पति महेशभाई का काम कुछ दिनों से बहुत ज्यादा अच्छा नहीं चल रहा था। काम में परेशानी के चलते वो ज्यादा समय घर पर ही बिताते थे। उनका व्यवसाय काफी हद तक ठप्प हो गया था और इसी के चलते उनका स्वभाव बेहद चिड़चिड़ा रहने लगा था। इसी के चलते महेशभाई की कोकिला से बहुत ज्यादा नोकझोंक होने लग गई थी। एक दिन कोकिला के घर पर एक बूढ़े बाबा आए। दोपहर का समय हो रहा था। बाबा के चेहरे पर गजब का तेज था। उन्होंने कोकिला से भिक्षा मांगी। कोकिला ने उन्हें दाल.चावल दान में दे दिए। फिर कोकिला ने बाबा के सामने हाथ जोड़े और बाबा ने उसे आशीर्वाद दिया। इतने में ही कोकिला की आंखों से आंसू बहने लगे। बूढ़े बाबा ने कोकिला की परेशानी को देखते हुए उसे 9 गुरुवार श्री साईंबाबा का व्रत करने को कहा। बाबा ने कहा कि अगर वो पूरी श्रद्धा और सबूरी के साथ साईंबाबा का व्रत करेगी तो उसकी मनोकामना पूर्ण होंगी। जिस तरह बाबा ने बताया था ठीक उसी तरह कोकिला ने 9 गुरुवार साईंबाबा का व्रत किया। गरीबों को भोजन कराया। साईंबाबा की पुस्तकें भेंट दी। इसके बाद कोकिला का पति उसके साथ झगड़ा नहीं करता था। महेशभाई के व्यापार में भी वृद्धि होने लगी। इसके बाद दोनों ही सुखमय जीवन व्यतीत करने लगे। एक दिन कोकिला की जेठानी उसके घर आई हुई थी। उसकी जेठानी ने बताया कि उसके बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लगता है। इस वजह से ही वो परिक्षा में फेल हो जाते हैं। कोकिला ने अपनी जेठानी को साईंबाबा के व्रत के बारे में बताया। जेठानी के कहे अनुसार उसने 9 श्रीसाईंबाबा का व्रत किया। कुछ ही दिनों में उसके बच्चों का मन पढ़ाई में लगने लगा। उसके बच्चे अच्छे नंबरों से पास हो गए। 
कौन थे साईं बाबा 
ऐसा माना जाता है कि सन् 1854 में साईं बाबा शिर्डी आए थे। वह दिव्य शक्ति के महात्मा थे। जब साईं बाबा शिर्डी आए, उस समय वह एक छोटा सा गांव था। बाद में बाबा के चमत्कार से शिर्डी की ख्याति दूर−दूर तक फैलती गई जिससे शिर्डी का विकास होता चला गया। साईं बाबा शिर्डी में एक पुरानी मस्जिद में रहा करते थे। उनके भक्तों को उनसे मिलने यहीं आना पड़ता था। साईं बाबा ने इस मस्जिद का नाम द्वारका भाई रखा था। शिर्डी में कई नई इमारतें बनने के बावजूद साईं बाबा द्वारका भाई में ही रहना पसंद करते थे।
कैसे रखें व्रत
साईं बाबा का व्रत कोई भी कर सकता है। चाहें वह बच्चा हो, बुजुर्ग हो या फिर महिला। उनके व्रत की संख्या 9 गुरुवार होनी चाहिए। व्रत के दौरान आप फलाहार ले सकते है। आप समय.समय पर चाय, फल आदि का सेवन कर सकते हैं। शाम में साईं बाबा के सामने दीपक जलाकर उनके मंदिर में दर्शन करने जाएं और एक समय भोजन कर सकते हैं। व्रत के दौरान अगर स्त्रियों को मासिक समस्या आए या फिर अन्य कारणों से आप व्रत नहीं कर सकते तो आप दूसरे गुरुवार को व्रत कर सकते हैं। अंतिम व्रत के दौरान आप गरीबों को खाना खिलाएं और दान करें। आप रिश्तेदारों और पड़ोसियों को साईं बाबा के व्रत की किताबें दे सकते हैं। इनकी 5, 11 या फिर 21 हो। इससे आपको उद्यापन भी पूरा हो जाएगा।
साईं बाबा के व्रत संबंधी नियम
गुरुवार के दिन आप को पीले वस्त्र जरूर पहने चाहिए। यह बहुत ही ज्यादा शुभ माने जाते हैं। साथ ही पूजा के भोग के लिए आपको बेसन के लड्डू या फिर किसी मिठाई का इस्तेमाल करना चाहिए और साईं बाबा को भोग लगाना चाहिए। बाबा को भोग लगाने के बाद आप उस मिठाई या लड्डू को लोगों में या परिवार के सदस्यों में प्रसाद के रूप में बांट दें।
साईं बाबा को बिल्कुल भी नहीं पसंद कि उनके भक्त भूखे पेट रहकर उनकी आराधना करें या उनकी पूजा करें। बाबा हमेशा अपने भक्तों को सिखाते थे कि भूखे पेट से पूजा नहीं होती। यदि आपका मन शांत है तो आप किसी भी चीज में अपना ध्यान लगा सकते हैं। इस व्रत के दौरान आप फलाहार ग्रहण कर सकते हैं। लेकिन व्रत के अलावा भी कुछ ऐसे उपाय हैं जिनका इस्तेमाल करने से साईं बाबा प्रसन्न हो जाते।
जिनके घर में साईं बाबा की पूजा लंबे समय से होती आ रही है या जो साईं बाबा के परम भक्त हैं उनको बहुत ही अच्छे से पता है कि साईं बाबा को पालक बहुत ही ज्यादा पसंद है। इसलिए गुरुवार के दिन भक्तों को साईं बाबा के ऊपर पालक का चढ़ावा चढ़ाना चाहिए।
गुरुवार के दिन साईं बाबा को भोग में या उनके चढ़ावे में मीठा भी अर्पित कर सकते हैं। वैसे तो साईं बाबा छोटी.छोटी बातों से ही अपने भक्तों से खुश हो जाते हैं। यदि आप साईं बाबा को खिचड़ी का भोग लगाएं। तो वह और भी ज्यादा प्रसन्न हो जाते हैं। साथ ही ध्यान रखिए कि उसमें नारियल इस्तेमाल जरूर हो क्योंकि साईं बाबा को खिचड़ी के साथ नारियल बहुत ही ज्यादा पसंद है।
साईं बाबा जी का यह व्रत या पूजा कोई भी जाति . धर्म के पुरूष व महिला कर सकती हैं। बाबा की एक बात सबके मन को छू जाती थीए बाबा कहते थे कि सबका मालिक एक है जोकि हर जाति धर्म के व्यक्ति के मन को छू जाती थी। 
गुरूवार के दिन बाबा का व्रत पूरा होने के बाद अगर आप पूरी श्रद्धा के साथ किसी गरीबए असहाय लोगों को भोजन करते हैं तो वह काफी शुभ माना जाता है। साथ ही साईं बाबा की कृपा भी आप पर बिनी रहती है। 
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