क्यों हनुमान जी के भक्तों पर शनि देव का प्रकोप नहीं होता

Jyoti Sohi

10th April 2021

शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से समस्त दुखों का नाश होता है। हालांकि, इस दिन हनुमान जी की भी पूजा करने का विधान है। इस बारे में भी मान्यता है कि अगर हनुमान जी की पूजा.आराधना सच्ची श्रद्धा और भक्ति से करें तो शनि के बुरे प्रकोप से बचा जा सकता है। बहुत कम लोगों को इस कथा के बारे में पता है, जिस कारण शनिवार के दिन शनिदेव के साथ हनुमान जी की भी पूजा करने का विधान है।

क्यों हनुमान जी के भक्तों पर शनि देव का प्रकोप नहीं होता

शनिदेव न केवल कर्मफल दाता है बल्कि दंडाधिकारी भी हैं। ये व्यक्ति के बुरे कर्मों का फल देकर उन्हें दंड भी देते हैं। शनिदेव की उपस्थिति किसी के जीवन में अनुशासन, समय की पाबंदी और धार्मिकता को दर्शाती है। हिन्दू धर्म में शनिवार के दिन शनि देव की पूजा का विधान है। ऐसा कहा जाता है कि जिस भी व्यक्ति पर शनि की ढैया होती है। उन्हें शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा.आराधना करनी चाहिए। ऐसा करने से उनके समस्त दुखों का नाश होता है। हालांकि, इस दिन हनुमान जी की भी पूजा करने का विधान है। इस बारे में भी मान्यता है कि अगर हनुमान जी की पूजा.आराधना सच्ची श्रद्धा और भक्ति से करें तो शनि के बुरे प्रकोप से बचा जा सकता है। बहुत कम लोगों को इस कथा के बारे में पता है, जिस कारण शनिवार के दिन शनिदेव के साथ हनुमान जी की भी पूजा करने का विधान है। आइए जानते है ये कथा 

 

सबसे प्रचलित कथा 

एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार रावण ने शनिदेवी जी को कैद कर लिया था और उन्हें लंका की एक जेल में डाल दिया था।  हनुमानजी जब सीता मैया को ढूंढते हुए लंका पहुंचे, तब मां जानकी को खोजते खोजते उनकी नज़र भगवान शनि देव पर गई, जो जेल में कैद मिले। कथा के अनुसार हनुमानजी ने तब शनि भगवान को वहां से मुक्त करवाया। तभी उसी क्षण शनिदेव ने हनुमानजी को वचन दिया कि जो भी जातक शनिवार को हनुमानजी की पूजा करेगा उसे वह अपने प्रकोप से मुक्त कर देंगे।

 

अन्य कथा

एक अन्य कथा के मुताबिक हनुमानजी श्री राम के किसी कार्य में व्यस्त थे। इस दौरान वहां से शनिदेव जी गुजर रहे थे। अब शनिदेव जी को एक शरारत सूझी और वे उस काम में विघ्न डालने के लिए हनुमान जी के पास पंहुच गए। हनुमानजी ने शनि देव को चेतावनी दी और उन्हें ऐसा करने से रोका पर शनिदेव नहीं माने। हनुमान जी की चेतावनी सुनकर भी शनिदेव कार्य में बिध्न डालते गए और हनुमान जी को बार.बार परेशान करने लगे। ऐसी स्थ्तिि से तंग आकर हनुमान जी ने शनि देव को अपनी पूंछ में जकड़ लिया और राम काज में व्यस्त हो गए। अब शनि देव ने खुद को मुक्त कराने के लिए पूरी कोशिश की लेकिन बजरंगबली की जकड़ से मुक्त नहीं हो पाए। हनुमान जी अब अपना काम कर रहे थे और उनकी पूंछ इधर.उधर डोल रही थी। अब पूंछ के बार बार हिलने से शनि देव को कई जगह पर चोटें आ गईं।  जब काम समाप्त हुआ तब हनुमान जी को शनिदेव का ख्याल आया और उन्होंने शनिदेव को आजाद कर दिया। उसी क्षण शनिदेव जी को अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने हनुमानजी से तुरंत माफ़ी मांगी और कहा कि श्री राम और हनुमान जी के भक्तों को उनका विशेष आशीष प्राप्त होगा। इसके बाद शनिदेव जी ने अपने घावों पर लगाने के लिए हनुमानजी से सरसों का तेल मांगा। हनुमानजी ने उन्हें सरसों का तेल दे दिया। तब शनिदेव जी ने कहा की इस स्मृति में जो भी भक्त शनिवार के दिन मुझपर सरसों का तेल चढ़ाएगा उसे मेरा विशेष आर्शीवाद प्राप्त होगा।

 

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