चटनी- स्वाद भी, सेहत भी

किरण बाला

7th May 2021

भारतीय खाने का अभिन्न अंग है- चटनी। इसमें स्वाद तो छिपा ही है, साथ ही मौजूद हैं सेहत के गुण भी। जानिए इसी बारे में कुछ -

चटनी- स्वाद भी, सेहत भी

भारतीय संस्कृति में भोजन की थाली तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती, जब तक कि उसमें चटनी न हो। कुछ विशिष्ट खाद्य सामग्री तो चटनी से ही अच्छी लगती है या उसका जायका बढ़ जाता है। वैसे इस बारे में पसंद अपनी हो सकती है, लेकिन आप तरह-तरह की चटनियों का सेवन करते हैं तो आपके भोजन की पौष्टिकता तो बढ़ेगी ही, साथ ही सेहत भी बनेगी। जी हां, चटनियां सेहतमंद होती हैं। शायद आप इनके स्वाद के अलावा इनके पौष्टिक और औषधीय गुणों को नहीं जानते हैं। आयुर्वेद में भी इनकी महत्ता बताई गई है। तभी सदियों से चटनी भारतीय थाली की शोभा बनी हुई है।

पुदीना चटनी

  • पुदीने की चटनी खुशबूदार होती है और इसकी महक ही इसे खाने के लिए प्रेरित कर देती है। पुदीने की चटनी चाट-पकौड़ी के अलावा भी कई व्यंजनों का जायका बढ़ाती है।
  • पुदीने की चटनी बनाने के लिए पुदीने को धोकर ठीक से साफ कर लें। डंठल निकालकर पत्तों को अलग कर लें। पत्तों में अदरक, नींबू, हरी मिर्च, नमक, काला नमक, जीरा मिलाकर एक साथ पीस लें। चटनी तैयार है।
  • पुदीने की चटनी काफी गुणकारी होती है। इसकी तासीर ठंडी होती है, यानी गॢमयों में राहत पहुंचाती है। गॢमयों में यह लू से भी बचाती है। पेट संबंधी तमाम तकलीफों में मुक्ति दिलाती है, पुदीने की चटनी। यह त्रिदोषनाशक होती है। घबराहट, बेचैनी या उल्टियां होने पर यह चटनी राहत भी पहुंचाती है। गठिया, सिरदर्द और खांसी में भी लाभप्रद है।
  • पुदीने की चटनी से अमाशय को शक्ति मिलती है। पीलिया रोग में भी यह लाभदायक है। यह संगृहणी, अतिसार और मंदाग्नि जैसे रोगों को भी दूर करने में सहायक है। पेटदर्द, अफारा आना आदि को पुदीने की चटनी शांत करती है। बुखार की स्थिति में मुंह का स्वाद चला जाता है। ऐसे में पुदीने की चटनी मुंह का जायका वापस लाती है।
  • पुदीने की चटनी के सेवन से मुंह की दुर्गंध का नाश होता है। हैजा होने पर भी यह गुणकारी है। इसके सेवन से रक्तचाप की अनियमितता दूर होती है। दमा, खांसी, हिचकी आदि रोगों में भी पुदीने की चटनी लाभदायक होती है।

नारियल चटनी

  • दक्षिण भारत में तो घर हो या रेस्त्रां, हर जगह नारियल चटनी बनती देखी जाती है। इडली, डोसा, वडा, सांभर आदि साउथ इंडियन व्यंजन तो इसके बगैर अधूरे ही हैं। इसे बनाने के लिए नारियल की गिरि या गोले का इस्तेमाल किया जाता है। दही में नारियल गिरि मिलाकर उसमें हरी मिर्च, नमक, जीरा डालकर मिक्सी में बारीक पीस लें। अब तेल में छोंक लगाएं, जिसमें मीठा नीम, यानी कढ़ी पत्ता, राई और थोड़ी सी लालमिर्च डालें। नारियल चटनी तैयार है।
  • नारियल चटनी रुचिकर और स्वादिष्ट होती है। खमन ढोकला, अप्पा आदि के साथ नारियल चटनी का सेवन करने से पित्त प्रकोप दूर होता है। परिणामस्वरूप एसिडिटी का नाश होता है। पीलिया रोग में भी यह लाभदायक है। इसके सेवन से थकावट दूर होती है। नारियल चटनी उल्टियां और मूत्र में होने वाली जलन को भी दूर करती है।

हरा धनिया

  • चटनी जब कभी चटनी की बात होती है तो आमतौर पर उसका आशय हरे धनिये की चटनी से ही लगाया जाता है। हमारे देश में प्राय: हर घर-परिवार में इसे बनाया-खाया जाता है। यह एक ऐसी चटनी है, जिसका मेल सभी व्यंजनों के साथ है।
  • हरा धनिया चटनी बनाने हेतु खुशबूदार हरा धनिया लें। उसे धोकर डंठल निकाल दें। अब इस साफ किए हुए धनिये में हरीमिर्च, अदरक, नींबू, काला नमक, सादा नमक, जीरा मिलाकर मिक्सी में पीस लें। चटनी तैयार है।
  • हरा धनिया चटनी रुचिकर और स्वादिष्ट तो होती ही है, औषधीय दृष्टि से भी महत्ता रखती है। हरे धनिये में विटामिन ए और सी प्रचुर मात्रा में होता है। अत: इसकी चटनी के सेवन ९२ गृहलक्ष्मी जून २०१९ किरण बाला स्वाद पर उसका आशय हरे धनिये की चटनी से ही लगाया जाता है। हमारे देश में प्राय: हर घर-परिवार में है। यह एक ऐसी चटनी धनिया लें। उसे धोकर डंठल निकाल दें। अब इस साफ किए हुए धनिये में हरीमिर्च, अदरक, नींबू, महक ही इसे खाने के लिए प्रेरित कर देती है। पुदीने की चटनी चाट-पकौड़ी के अलावा भी कई व्यंजनों का जायका बढ़ाती है।
  • बनाने के लिए पुदीने को धोकर ठीक से साफ कर लें। डंठल निकालकर पत्तों को अलग कर लें। पत्तों में अदरक, नींबू, हरी मिर्च, नमक, काला नमक, से नेत्र ज्योति बढ़ती है। रतौंधी रोग में भी इससे बहुत फायदा होता है।
  • यह चटनी मंदाग्नि दूर कर भोजन के प्रति रुचि जगाती है। इससे भूख खुलती है। जी मिचलाने, उल्टियां आदि की शिकायत होने पर हरे धनिये की चटनी गुणकारी है। गर्मियों में बार-बार प्यास लगने की शिकायत हो सकती है, जो कि इस चटनी के सेवन से दूर हो जाती है।
  • हरा धनिया चटनी से पेशाब खुलकर होता है और उसमें रुकावट दूर होती है। पेशाब में होने वाली जलन दूर होती है। डायबिटीज के रोगियों के लिए भी यह चटनी गुणकारी है। इससे रक्त में इंसुलिन की मात्रा नियमित रहती है।

 

इमली चटनी

  • इमली की चटनी एक ऐसी चीज है, जिसके बगैर चाट-पकौड़ी, दही-बड़े आदि बेस्वाद रह जाते हैं। कचौरी, समोसे हों या छोले-टिकिया, जब तक उसमें इमली की चटनी न हो, मजा ही नहीं आता। गोलगप्पे या पानीपुरी हो या दड़ीपापड़ी, सभी का जायका बढ़ाती है इमली की चटनी।
  • इमली की चटनी बनाने के लिए इमली को साफ कर उसे कुछ घंटे पानी में भिगो दें। जब वह अच्छी तरह से भीग जाए तो उसे हाथ से मसलकर उसका गूदा निकाल लें तथा छानकर उसके बीजों को अलग कर दें। इस गूदे में थोड़ा गुड़, सौंठ, नमक, काला नमक, काली या लाल मिर्च डालकर मिक्सी में फेंट लें। इमली-चटनी तैयार है।
  • इमली-चटनी में विटामिन सी बहुत होता है, जिससे रोगों से लड़ने की ताकत बढ़ती है। इसमें विटामिन बी कॉम्पलेक्स भी होता है, जो कि शरीर के लिए बेहद जरूरी है। इमली में आयरन भी होता है, जिसकी वजह से रक्ताल्पता की शिकायत दूर होती है। कैल्शियम, फास्फोरस होने से हड्डियों के लिए भी यह लाभदायक है।

 

टमाटर की चटनी

  • टमाटर की चटनी बड़ी स्वादिष्ट लगती है। यह आलू, मेथी, मूली, फूलगोभी के परांठों के साथ बड़ी अच्छी लगती है। ब्रेड बटर, सैंडविच, ब्रेड पकौड़े आदि के साथ इसका सेवन टोमैटो सॉस का विकल्प बनता है।
  • इसे बनाने के लिए लाल टमाटरों को काटकर मिक्सी में डालें। उसमें हरीमिर्च, सादा नमक, काला नमक, जीरा और थोड़ी सी शक्कर मिलाकर फेंट लें।
  • टमाटर की चटनी में अनेक पोषक तत्व होते हैं। इसमें आयरन की प्रचुरता होती है। परिणामस्वरूप एनिमिया की शिकायत दूर होती है। विटामिन सी की अधिकता होने से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। रेशे प्रधान होने से यह सुपाच्य होती है तथा कब्ज से निजात दिलाती है। विटामिन ए होने से यह नेत्र ज्योति बढ़ाती है तथा त्वचा संबंधी रोगों से बचाती है।
  • टमाटर की चटनी का सेवन करने से कमजोरी, थकान दूर होती है। इससे मंदाग्नि शांत होकर भूख खुलती है। यदि मुंह में छाले हों तो उनमें भी लाभ होता है। मसूढ़ों की सेहत के लिए भी इसका सेवन अच्छा है। टमाटर की चटनी का सेवन हमारी हड्डियों को भी मजबूत बनाता है। परिणामस्वरूप हड्डियों से जुड़े रोगों से बचाव होता है।
  • टमाटर की चटनी का सेवन करने से बच्चों के पेट में उत्पन्न कीड़े भी नष्ट हो जाते हैं। चर्म रोगों में भी यह चटनी लाभप्रद है।

 

अमरूद चटनी

  • अमरूद की चटनी बेहद स्वादिष्ट होती है। इसे बनाने के लिए अधपके अमरूद को काटकर बीजों को निकाल दें। इसमें थोड़ा सा गुड़, स्वादानुसार काला नमक, सादा नमक और हरीमिर्च डालकर मिक्सी में पीस लें।
  • अमरूद की चटनी पौष्टिक तो होती ही है, औषधीय गुणों वाली भी होती है। इसके सेवन से कोष्ठबद्धता दूर होती है, क्योंकि इसमें रेशे की प्रधानता होती है। यदि उन्माद के रोगी इसे खाएं तो उन्माद का प्रकोप कम हो जाता है। भांग का नशा चढ़ जाने पर अमरूद की चटनी खिलाने से वह दूर हो जाता है।
  • पेट दर्द, अफारा आना, पुराना जुकाम आदि में यह चटनी रामबाण नुस्खे के रूप में काम आती है। आयुर्वेद की दृष्टि से अमरूद त्रिदोषनाशक है।
  • अमरूद की चटनी में विटामिन सी भी खूब होता है। अत: इससे विटामिन की कमी से होने वाली बीमारियों से बचाव होता है। अमरूद में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जिससे शरीर का स्वस्थ और संतुलित विकास होता है तथा मांसपेशियां पुष्ट होती हैं। इसके अलावा, लौहतत्व होने से इसकी चटनी रक्त निर्माण में भी सहायक होती है। अमरूद की चटनी के सेवन से हड्डियों को कैल्शियम और फास्फोरस की पूॢत भी होती है।

 

आंवला चटनी

  • आंवले की चटनी थोड़ी कसैली होती है, लेकिन लगती बड़ी स्वादिष्ट है। इसे बनाने के लिए ताजे आंवलों को धोकर काट लें तथा उसके बीज निकाल दें, अब इसमें थोड़ी शक्कर या गुड़ मिलाएं ताकि वह खट्टी  न लगे। स्वादानुसार नमक, हरीमिर्च, जीरा मिलाकर मिक्सी में पीस लें।
  • आयुर्वेद में आंवले को एक रसायन माना गया है। इसमें विटामिन सी की प्रचुरता होती है। परिणामस्वरूप आंवला चटनी खाने से रोग- प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। इसके सेवन से मसूढ़े स्वस्थ रहते हैं। यदि शरीर में कहीं छोटे-मोटे घाव हों तो वे भी भर जाते हैं।
  • आंवला चटनी त्रिदोषनाशक होती है, यानी  वात, पित्त और कफ को दूर करती हैं। अत: त्रिदोषों की वजह से उत्पन्न रोगों से बचाव होता है।
  • आंवले की चटनी खाने से शरीर में रक्त की कमी दूर होती है तथा वह शुद्ध होता है। नियमित रूप से आंवला चटनी खाने से चिरयौवन की प्राप्ति होती है और बुढ़ापा देर से आता है।
  • आंवला चटनी रेशे प्रधान होती है। अत: पाचन क्रिया दुरूस्त करती है। कब्ज तथा कब्जजनित रोग जैसे बवासीर आदि में गुणकारी है। इसके अलावा यह अजीर्ण से भी बचाती है। इसके सेवन से बच्चों की हकलाहट, बिस्तर गीला करना आदि रोग दूर होते हैं। आंवला चटनी पेशाब में जलन, हृदयशूल, स्वप्नदोष, दांतदर्द आदि में भी गुणकारी है।

कच्चे आम या केरी की चटनी

  • कच्चे आम या केरी की चटनी बनाने के लिए पहले उन्हें छील लें और फिर उसकी गुठली निकाल दें। गूदे को बारीक काट लें तथा उसमें थोड़ा सा गुड़ या शक्कर, हरीमिर्च, काला नमक, सादा नमक, जीरा डालकर मिक्सी में पीस लें।
  • कच्चे आम की चटनी गॢमयों में काफी रुचिकर, स्वादिष्ट और खट्टी -मीठी लगती है। कच्चे आम में प्रोटीन, विटामिन, खनिज लवण, कार्बोहाइड्रेट, वसा तथा रेशा होता है। विटामिन सी की प्रचुरता होती है। इसके अलावा, इसमें कैल्शियम, फास्फोरस होता है, जो कि हमारी हड्डियों को मजबूत बनाता है। इसके सेवन से भोजन आसानी से पचता है तथा कब्ज की शिकायत नहीं रहती। नियमित रूप से कच्चे आम की चटनी का सेवन आसानी से पचता है तथा कब्ज की शिकायत नहीं रहती। नियमित रूप से कच्चे आम की चटनी का सेवन करने से लू का अंदेशा नहीं रहता। इसकी चटनी खाने से गुर्दे की पथरी तक गलकर बाहर निकल जाती है। इसी प्रकार बढ़ी तिल्ली को सही करने का अद्भुत गुण भी है इस चटनी में।

लहसुन चटनी

  • लहसुन की चटनी चरपरी, किंतु रुचिकर और स्वादिष्ट होती है। आलू की कचौरी, आलू परांठे के साथ अच्छा मेल है। इसके अलावा भी अन्य खाद्य सामग्रियों के साथ इसे खाया जाता है।
  • लहसुन की चटनी बनाने के लिए लहसुन को ठीक से छीलकर उसकी कलियां निकाल लें। इसमें नमक, हरीमिर्च मिलाकर पीस लें। चटनी तैयार है।
  • लहसुन की चटनी काफी पौष्टिक होती है। इसमें प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट अच्छी मात्रा में होता है। इसके सेवन से शरीर हृष्ट-पुष्ट होता है तथा मांसपेशियां शक्तिशाली होती हैं। इस चटनी के सेवन से रक्ताल्पता दूर होती है तथा खून साफ होता है।
  • लहसुन की चटनी हृदय के लिए काफी अच्छी होती है। यह रक्तचाप को बढ़ने नहीं देती तथा कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रण में रखती है। परिणामस्वरूप हृदय सुचारू रूप से कार्य करता रहता है। इसके सेवन से धमनियों की ऐंठन भी दूर होती है।  लहसुन की चटनी पेट के लिए भी अच्छी है। इससे वायु नहीं बनती। पाचन क्रिया सुधरती है। कब्ज की शिकायत दूर हो जाती है। लहसुन की चटनी के नियमित सेवन से जोड़ों के दर्द और सूजन, गठिया में भी राहत मिलती है। खांसी होने पर भी यह चटनी राहत दिलाती है। यह चटनी नवयुवतियों को हिस्टीरिया से सुरक्षित रखती है। अस्थमा में भी यह गुणकारी है।

प्याज चटनी

  • प्याज की चटनी बड़ी रुचिकर होती है। खमन, फाफड़े, आलू की कचौरी आदि के साथ इसका अच्छा मेल है। इसके अलावा यह भरवां परांठे के साथ भी अच्छी लगती है।
  • प्याज की चटनी के लिए प्याज को काटकर उसमें नमक, जीरा व हरीमिर्च डालें तथा मिक्सी में कुछ सेकंड के लिए घुमाएं, ताकि वह एकदम महीन न हो जाए, अन्यथा वह पानी छोड़ देगी।
  • प्याज की चटनी का सेवन खट्ट डकारों से निजात दिलाता है। पेट में उत्पन्न गैस, अफारा, जलन आदि से भी राहत मिलती है। चूंकि इसमें फाइबर होता है, अत: कब्ज की शिकायत दूर कर पेट साफ रखती है।
  • सामान्य खांसी और कुकर खांसी में भी प्याज की चटनी गुणकारी है। जोड़ों के दर्द, गठिया होने पर भी यह दर्द, सूजन से राहत दिलाती है। इससे चर्मरोगों से भी निजात मिलती है, क्योंकि यह रक्त को शुद्ध करती है। प्याज की चटनी से रक्तचाप सामान्य बना रहता है। इसके सेवन से गुर्दे सही ढंग से कार्य करते रहते हैं।
  • प्याज की चटनी का नियमित सेवन संक्रामक रोगों से बचाता है। इसके सेवन से यकृत ठीक से काम करता है तथा बढ़ी हुई तिल्ली सामान्य अवस्था में आ जाती है। दमा के रोगियों के लिए भी यह लाभदायक है। टांसिलाइटिस में यह चटनी लाभ पहुंचाती है। महिलाओं में श्वेतप्रदर की शिकायत होती है। उसमें प्याज की चटनी का सेवन लाभदायक है। प्याज की चटनी हृदय के लिए भी हितकारी है, क्योंकि इससे कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता है।

चटनियां सेहतमंद होती हैं। शायद आप इनके स्वाद के अलावा इनके पौष्टिक और औषधीय गुणों को नहीं जानते हैं। आयुर्वेद में भी इनकी महत्ता बताई गई है। तभी सदियों से चटनी भारतीय थाली की शोभा बनी हुई है।

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