बिना छांव का दरख़्त - गृहलक्ष्मी कहानियां

नीतू मुकुल

28th February 2017

अनु जरा जल्दी जल्दी हाथ चला, मुझे देर हो रही है। हां मम्मी, बस काम खत्म होने वाला है , मैंने सब्जी काट दी और किचेन का सारा काम भी निबटा दिया है।

बिना छांव का दरख़्त  - गृहलक्ष्मी कहानियां

मम्मी, आज मेरा गायन का प्रैक्टिकल है इसलिए मैं आज सुबह 7.30 बजे तक निकल जाउंगी।  अपने लम्बे बालों को बेतरतीबी से बांधते हुए अनु बाहर जाने लगी।

तभी मां ने आवाज लगाकर कहा, बेटा आज हमारी महिला सशक्तीकरण पर स्पीच है, बहुत बड़ा समारोह है। वहां मुझे बेटियों को पढ़ाने , उनके विकास में क्या-क्या करना चाहिए , कैसे उनका सहयोग करें पर बोलना है  |

तुम तो जानती हो मैं महिला समिति की अध्यक्ष हूं, तो सबसे पहले मंत्री के सामने मुझे ही भाषण देना होगा।

बेटा प्लीज एक काम करना जब तुम्हारा प्रैक्टिकल ख़त्म हो जाए तो लौटकर जराघर का झाडू पोंछा भी कर देना, आज बाई नही आयेगी और शाम को कुछ मेरी फ्रेंड्स भी आयेंगी | अनु खामोशी से ये सब सुन रही थी।

ठीक है मम्मी... अब मैं जाऊं ..................., और वो स्कूल के लिए निकल गयी।सुबह आठ से शाम के छह बज गए,  मगर एग्जामिनर  का अता पता नहीं था। सारी लड़कियों का भूख से बुरा हाल था। 

बेचारी अनु तो जल्दी जल्दी में चाय तक न पीकर आयी थी। सर दर्द से फटा जा रहा था | सारे दिन की भूखी प्यासी, गाना क्या गाऊंगी।

सारी लड्किया मिलकर मैडम के पास गयीं।मैडम हम लोग बाहर जाकर कुछ खा- पीकर वापस आते हैं। तुम सब एक साथ नहीं जा सकती, अगर सर आ गये तो.....।

अनु जरा इधर आना तुम्हारा घर स्कूल के बगल में है। ऐसा करो तुम अपने घर से इन सबके लिए चाय बनवा लाओ | पर जल्दी ही वापस आना। अनु खुश हो गयी और बोली कि कुछ खाने को भी लेती आउंगी। तेज़ कदमों से उसने घर की दूरी पांच मिनट में ही पूरी कर ली। घर जाते ही देखा कि मां ड्राइंग रूम में अपनी फ्रेंड्स के साथ बैठी थी।

अनु मां को देख खुश होकर बोली कि माँ मुझे बहुत तेज़ भूख लगी है, जल्दी से कुछ खाने को दे दो और साथ में दस कप .......।अनु पूरा वाक्य बोल ही न पाई कि मां ने कहा कि अच्छा हुआ तू आ गयी। हम सब के लिए चाय बना ले और थोड़ा पकौड़े भी तल ले। 

मां मेरा एग्जाम अभी शुरू भी नहीं हुआ है , मुझे तुरंत चाय लेकर वापस जाना है | अरे तो फिर क्या प्रॉब्लम है, जब तक बाकी लड़कियों का एग्जाम हो, तब तक तुम चाय बना दो। अनु ने किचेन में जाकर देखा कि वहां खाने को कुछ भी नही था। शायद मामा आयें होंगे तो खाना ख़त्म हो गया होगा।

उसने एक ब्रेड खाई और चाय पकौड़े बनाने में लग गयी। तभी कुछ ही देर बाद उसकी फ्रेंड का फ़ोन आया कि अनु जल्दी आ जाओ, सर आ गए है। पकौड़े का पीस मुंह तक ले जाते हुए वापस रख दिया। नाश्ता ड्राइंग रूम में रख कर वापस जाने लगी | तभी मम्मी की फ्रेंड्स बोली कि आज तेरी मम्मी ने तो कमाल ही कर दिया।

बेटियों की शिक्षा के ऊपर इतना अच्छा बोला कि मंत्री जी ने हमारे एन.जी.ओ . के लिए पैसा देने का वादा कर दिया | अब देखना वो सारी गरीब लड़कियां  पढ़ लिख कर अपने समाज में फ़ैली बुराइयों को दूर करेंगी। जब मां पढ़ी लिखी होगी तभी बच्चों को अच्छे संस्कार देगी और समाज में क्राइम कम होगा।

अनु तुम वहां होती  तो तुम्हे अपनी मां पर गर्व होता | कैसे इन चंद लाइनों पर सारा हाल तालियों की गूंज से भर गया था  | बड़ी खामोशी से ये सब सुन रही अनु बोली " हां .. वाकई आंटी .. ठीक उसी तरह कि मां ने ये पूछने तक की जहमत नही उठायी कि तेरा एग्जाम कैसा रहा, सुबह से कुछ खाया कि नहीं। इतना स्पेस तो एक पढ़ी लिखी मां ही अपनी बेटी को दे सकती है।" फिर अनु मां की तरफ  जिबह किये जाने वाले बकरे की सी कातरता भरी निगाह से देखने लगी।

फिर बड़ी खामोशी के साथ बोली " मां हम एक ही दरख़्त की अलग अलग शाखाओं पर उन पत्तों की तरह हैं जहां तुम्हें मेरी जरूरत तो है पर फिक्र नहीं "। 

मां शून्य सी बेटी को निहारती रह गयी और फिर वह तेज़ी से पलट कर जाने लगी, तभी देखा कि सामने उसकी सहेलियां खड़ी हैं और वह आंखों की नदी को सुखाने की कोशिश करते हुए बाहर आ गई।

अनु चाय कहां है ? उनमें से एक बोली | यार वो दूध ख़त्म हो गया, सो चाय नही बना पायी, अनु ने उदास हो कर बोला। छोड़ यार वो देख बाहर चाय की दुकान है, हम सब वहीं चाय पीकर आते हैं।

और वो उन्मुक्त सी अपनी सहेलियों के साथ मुस्कुराती हंसी ठिठोली करती हुई आगे बढ़ गई ................. ।

यह भी पढ़ें -जुनून कुत्ता पालने का - गृहलक्ष्मी कहानियां

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