मां बनने की मनोकामना पूरी करते तीर्थ

चयनिका निगम

28th July 2020

बच्चे की मनोकामना पूरी नहीं हो रही तो देश के कुछ खास तीर्थ आपकी इच्छा जरूर पूरी करेंगे। इन जगहों को पहचान लीजिए।

मां बनने की मनोकामना पूरी करते तीर्थ
जिनके बच्चे नहीं हैं वो बच्चे की चाहत में ना जाने कितनी ठोकरें खाते हैं। कभी इस डॉक्टर के पास तो कभी उस डॉक्टर के पास। कभी इस मंदिर तो कभी उस मंदिर। उनकी दौड़ लगती ही रहती है। जोड़ों को हर कीमत पर बस अपना बच्चा चाहिए होता है। ऐसे ही जोड़ों की मन्नतें पूरी करने के लिए कई मंदिर और गुरुद्वारे पहचाने जाते हैं। इन पवित्र जगहों का बेऔलाद लोगों की खुशियों से गहरा नाता है। ये सिर्फ कहने के लिए भगवान के घर नहीं हैं बल्कि यहां सच में लोगों की मन्नतें पूरी होती देखी गई हैं। चलिए रूबरू होते हैं माता-पिता बनने की तमन्ना पूरी करने के लिए अहम माने जाने वाले मंदिरों एक बारे में-
कमलेश महादेव मंदिर, श्रीनगर, उत्तराखंड
उत्तराखंड में अलखनंदा नदी की किनारे बसे इस मंदिर से प्रकृति का बेहद सुंदर रूप देखने को मिलता है। जहां आपको नजारे भाएंगे, वहीं मंदिर का रूप भी दिल को जरूर छू लेगा। इस मंदिर की माता-ता न बन सकने वाले जोड़ों के बीच काफी मान्यता है। माना जाता है कि इस मंदिर में  अगर कोई महिला पूरी रात दिया लेकर खड़ी रहे तो भगवान शिव के आशीर्वाद से वो जल्द मां बन पाती है। इसके लिए पूरी रात दिया लेकर खड़े रहने के बाद सुबह अलखनंदा में नहाना भी होता है। यहां आने का सही समय कार्तिक मास की पूर्णिमा से पहला दिन यानि बैकुंठ चतुर्दशी, शिवरात्रि और अचला सप्तमी का दिन अच्छा माना जाता है। इस मंदिर से जुड़ी एक मान्यता और है। माना जाता है कि भगवान राम रावण का वध करने के बाद खुद को पाप से ग्रस्त पा रहे थे। तब इसी जगह पर आकर उन्होंने भगवान शिव की उपासना की थी। इसीलिए इस जगह का नाम कमलेश्वर महादेव है। 
गुरुद्वारा नानक लामा साहिब, चुंगथांग, सिक्किम
इस गुरुद्वारे के बारे में मान्यता है कि यहां की झील से अगर कोई महिला पानी पीती है तो वो जल्द ही मां बन सकती है। लेकिन ये झील इस इलाके के तापमान के चलते अक्सर जमी रहती है। ये जगह राज्य की राजधानी गंगटोक से 95 किलोमीटर दूर है।
मनसा देवी, हरिद्वार
नागों के देवता वासुकी की बहन मनसा का ये मंदिर बिन बच्चों के दंपति के लिए बहुत मान्यताप्राप्त है। मनसा को नागों की देवी कहा जाता है। 178 मीटर की ऊंचाई पर बना ये मंदिर हरिद्वार में मौजूद 3 सिद्ध पीठ में से एक है। बिल्वा पर्वत पर बना ये मंदिर सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक खुलता है। 
गोल्डेन टेंपल, अमृतसर-
ये एक ऐसा गुरुद्वारा है, जिसके बारे में ज़्यादातर लोग जानते हैं और इसकी अखंडता को मानते भी हैं। माना जाता है कि यहां मांगी गई दुआ जल्द कुबूल होती है। मंदिर के अमृत सरोवर में नहा कर भी लोग अपने दुखों का त्याग करते हैं। 
श्री बड़े हनुमान मंदिर, अमृतसर-
इस मंदिर को लंगूरवाला हनुमान मंदिर भी कहा जाता है और यहां औलाद की तमन्ना में अक्सर लोग जोड़ों का जमघट लगता है। ऐसे जोड़े यहां धागा बांधने आते हैं। फिर बच्चे के साथ इस धागे को खोलने भी आ जाते हैं। 

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