किडनी प्रॉब्लम को न करें अनदेखा

Arpana Yadav

31st July 2020

एक अध्ययन के अनुसार सीकेडी यानि गंभीर किडनी रोग बहुत जल्द ही मृत्यु का आंकड़ा देने वाला भारत में 5 वां सबसे मुख्य कारण बन सकता है। प्रत्यक्ष स्थिति के अनुसार किडनी रोग भारत में बड़ी समस्याओं में से एक बनकर उभर रहा है,

किडनी प्रॉब्लम को न करें अनदेखा

जिसके लिए किडनी से संबंधित रोगों को व्यापक रूप से समझना होगा। भारत में किडनी रोग से पीड़ित लोगों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। इस वर्ष ‘वर्ल्ड किडनी डे' की थीम ‘प्रिवेंशन टू डिटेक्शन' भी शायद ऐसे ही नजरिए को ध्यान में रख कर रखी गई है। आमतौर पर किडनी से संबंधित रोगों को मूत्र उर्त्सजन समस्या मान लिया जाता है, लेकिन वाकई यदि किडनी से संबंधित समस्याओं की बात करें तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि किडनी के तमाम रोग दूसरे रोगों को जन्म देते हैं, साथ ही दूसरे कई रोगों का किडनी की संचालन प्रक्रिया पर असर पड़ता है, फेलियर में भी हो सकता है। सबसे चिंताजनक पहलू यह भी है कि बहुत बड़ी संख्या में लोग इसके शुरुआती लक्षणों को नजरंदाज करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप डॉक्टर तक केस पहुंचते-पहुंचते देर हो चुकी होती है। इसके अलावा अंगदान के पहलू को ध्यान में रखकर किडनी प्रत्यारोपण और इसके प्रति जागरुकता पर भी नजर डालनी चाहिए, क्योंकि इलाज की दृष्टि से किडनी फेलियर के केस में किडनी प्रत्यारोपण सर्वश्रेष्ठ विकल्प माना जाता है।

अधिकतर मामलों में किडनी फेल होने और इसके प्रत्यारोपण होने की नौबत कुछ रोगों की वजह से आती है इस बारे में श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट के नियर कंसल्टेंट एंड चीफ ऑफ एक्शन किडनी ट्रांसप्लांट, एंड डायलिसिस डिपार्टमेंट, डायबिटीज डॉक्टर राजेश अग्रवाल कहते हैं कि दरअसल डायबिटीज ऐसा रोग है, जिसके तहत शरीर में इंसुलिन की मात्रा कम हो जाती है और इंसुलिन वह हार्मोन है, जो रक्त में शुगर की मात्रा को निर्धारित करता है, और खून में बढ़ी शुगर की मात्रा किडनी समेत मुख्य अंगों को नुकसान पहुंचाती है। साथ ही डायबिटीज के कारण छोटे ब्लड वैसेल्स खराब हो जाते हैं। ऐसे में जब किडनी के ब्लड वैसेल्स सही से काम नहीं कर पाते तो वे रक्त सही से साफ़ नहीं कर पाते जिसके परिणामस्वरूप ये नमक व शुगर की मात्रा अधिक अवशोषित करते हैं और किडनी खराब होने के जोखिम सामने आते हैं, जिसके लक्षण अकसर पैरों में सूजन, असामन्य रूप से वजन बढ़ना आदि में दिखाई देते हैं।

हाइपरटेंशन

हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन ब्लड वैसल्स को नुकसान पहुंचाते हैं, जिसके कारण किडनी का शरीर के तरल में से अशुद्ध पदार्थ निकालने की प्रक्रिया बाधित होती है, और संबंधित अंग प्रभावित या खराब होने लगते हैं।

यदि बार बार हो यूटीआई: अक्सर यूरिन इन्फेक्शन होना कोई बीमारी नहीं माना जाता और एहतियात के तौर पर जागरुक जनता समय पर इलाज भी करवा लेती और नियमित दवाइयों का सेवन भी करती है, लेकिन यदि किसी को बार-बार यूटीआई होता रहे और सामान्य से अधिक होने के लक्षण हों तो यह संक्रमण किडनी डैमेज हो सकता है। इसलिए अपने डॉक्टर से इस विषय में बात करें और सलाह लें।

कैसे बचा जा सकता है

जीवनशैली में सुधार से कर इन गंभीर रोगों से बचा जा सकता है इस बारे में धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशेलिटी अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट एंड डायरेक्टर, सेंटर ऑफ नेफ्रोलोजी, यूरोलोजी एंड रीनल ट्रांसप्लांटेशन डॉक्टर विकास जैन कहते हैं कि इस बार वर्ल्ड किडनी डे की थीम प्रिवेंशन टू डिटेक्शन है यानि इस बात पर खासा जोर दिया गया है कि जीवनशैली में सुधार के माध्यम से रोग की रोकथाम की जाए और रोग समय पकड़ में आए और निश्चित इलाज शुरू हो। उपरोक्त मुख्य बीमारियों के अलावा भी कई अन्य कारण हैं, जो किडनी की समस्याओं की ओर ले जाती हैं। लेकिन जीवनशैली में बहुत से ऐसे सुधार हैं, जिनके चलते इसके जोखिम को रोका जा सकता है

यूरीन का असामान्य रंग बदबू: यदि यूरिन का कोई असामान्य रंग दिखाई दे, या फिर गाढ़ा पेशाब आने लगे, यूरिन में से बदबू आने लगे तो तुरंत संबंधित डॉक्टर की सलाह लें और बताई गई जांच करवाएं।

पेन किलर्स से करें परहेज: अक्सर दर्द की स्थिति में खासकर बिना डॉक्टर के परामर्श या दर्द से छुटकारे के लिए असामान्य मात्रा में इसका सेवन किया जाता है। दरअसल अक्सर पेन किलर्स किडनी तक रक्त का प्रवाह कम कर देते हैं जो जिससे किडनी को नुकसान होने के जोखिम होते हैं।

नमक चीनी की मात्रा करें सीमित: स्वस्थ किडनी के लिए नमक व चीनी की संतुलित मात्रा लें। क्योंकि नमक में मौजूद सोडियम ब्लड प्रेशर बढ़ाता है और यह किडनी के संचालन को बाधित करता है, और चीनी शरीर में शुगर की मात्रा को प्रभावित करती है। जरूरी है अपने डाइट प्लान अनुसार दोनों की मात्रा निर्धारित करें।

ऐसे ही अन्य जीवनशैली संबंधी सुधार के बारे में जेपी अस्पताल नोएडा के डायरेक्टर, डिपार्टमेंट ऑफ़ यूरोलोजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट, कोऑर्डिनेटर किडनी ट्रांसप्लांट प्रोग्राम के डॉक्टर अमित कुमार देवड़ा  कहते हैं कि बीमारी से बचने  लिए बहुत जरुरी है कि कुछ बातों का ध्यान रखें।

नियमित व्यायाम करें

व्यायाम करना या फिजिकल एक्टिविटी करना ब्लड प्रेशर को सामान्य बनाने में मदद करता है, जो कि किडनी के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है।

शरीर में तरलता बनाये रखें: प्रचुर मात्रा में पानी पियें। शरीर में तरलता बनाये रखें।

पैरों में सूजन को करें नजरंदाज: यह एक शुरुवाती लक्षण है जिसे किडनी के संबंध में कभी नजरंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि समय पर इसका संज्ञान लेना बहुत बड़े जोखिम को रोक देता है, क्योंकि ठीक समय पर रोग पकड़ में आ जाता है।

धूम्रपान नशे की लत से निजात पायें: हालांकि धूम्रपान सभी अंगों के लिए हानिकारक है, लेकिन किडनी के विषय में यह ब्लड प्रेशर बढ़ा देता है, ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचता है जिससे किडनी का संचालन प्रभावित होता है।

यूरिन खून की जांच करवाएं: एहतियात के तौर डॉक्टर के निर्देशानुसार ब्लड व यूरिन की जांच करवाएं।

तनाव डायबिटीज नियंत्रित रखें: मानसिक स्वास्थ्य का शारीरिक स्वास्थ्य में बहुत बड़ा योगदान है। ऐसे में अपना स्ट्रेस मैनेजमेंट करें और डायबिटीज और ब्लड प्रेशर संबंधित बीमारियों से दूर रहें। 

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