ऑनलाइन कोर्स के नेगेटिव प्रभाव

मोनिका अग्रवाल

29th July 2020

कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन में छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो इसके लिए ऑनलाइन पढ़ाई की शुरुआत की गई. करीब दो महीने तक घरों से ही लैपटॉप या स्मार्टफोन के द्वारा ऑनलाइन माध्यमों से पढ़ाई कराए जाने के बाद अब इसका विरोध जोर पकड़ता जा रहा है. छोटी कक्षाओं में पढ़ रहे बच्चों के माता-पिता भी इसके खिलाफ स्कूलों में शिकायतें दे रहे हैं.

ऑनलाइन कोर्स के नेगेटिव प्रभाव

ऑनलाइन कोर्स के नेगेटिव प्रभाव

आजकल ऑनलाइन कोर्स बहुत प्रचलन में हैं। हर कॉलेज अपने अधिकतर कोर्स ऑनलाइन उपलब्ध करा रहा है। यदि कोई बच्चा रोजाना कॉलेज आने में असमर्थ है तो वह ऑनलाइन कोर्स को ज्वाइन करके अपनी पढ़ाई पूरी कर सकता है। परंतु इन ऑनलाइन कोर्स की कुछ कमियां भी हैं। आइए उन कमियों के बारे में जानते हैं।

1. डायरेक्ट कॉन्टैक्ट नहीं हो पाता : ऑनलाइन कोर्स में अध्यापक व बच्चे का डायरेक्ट कॉन्टैक्ट नहीं हो पाता है जिस से बहुत कुछ समझना मुश्किल हो जाता है। एक अध्यापक ऑनलाइन उतना नहीं समझा पाता जितना वह क्लास में आमने सामने समझा सकता है। और उस यह भी नहीं पता चल पाता की बच्चे को समझ आ रहा है या नहीं। इससे बच्चो के मन में भी डाउट रह जाते हैं।

2. अनुचित समय : कई बार ऐसा होता है कि ऑनलाइन को क्लास के समय या तो अध्यापक को कोई अन्य काम आ जाता है या बच्चे को उस समय कोई काम आ जाता है। इसलिए एक नियमित समय पर क्लास नहीं हो पाती है। यदि हम कॉलेज में क्लास अटेंड करते हैं तो उनकी एक समय सारिणी होती है। लेकिन ऑनलाइन क्लास का कोई समय निर्धारित नहीं होता है। 

3. कम उत्तरदायित्व : ऑनलाइन क्लास में न तो अध्यापक अपनी ढंग से जिम्मेदारी निभाते हैं और न ही छात्र। इसलिए यदि बच्चो के कम अंक आते हैं तो न तो अध्यापक अपने आप को उत्तरदाई मानता है और न ही छात्र। अध्यापक समझता है कि मैंने सारा कुछ पढ़ाया है, बच्चे ने ही पढ़ाई नहीं की होगी। दूसरी ओर छात्र यह सोचता है कि अध्यापक ने कुछ भी अच्छे से नहीं पढ़ाया। 

4. बच्चो के Fail होने का डर : ऑनलाइन क्लासो में नियमितता नहीं होती है। कभी क्लास होजाती हैं तो कभी कैंसल हो जाती हैं। अध्यापक छात्रों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं और न ही छात्र अपनी पढ़ाई को लेकर गम्भीर रहते हैं। ऐसे में आधे बच्चे क्लास ही नहीं लेते और या तो कोर्स को बीच में ही छोड़ देते हैं या Fail हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में अध्यापक या छात्र किसी को भी दोषी नहीं ठहराया जा सकता। 

5. इंटरनेट की कमी : कुछ बच्चे या अध्यापक किसी ऐसी जगह में रहते हैं जहां उन्हें इंटरनेट की सुविधा बहुत कम मिलती है या बहुत धीमी सुविधा होती है। जिसकी वजह से उन्हें हर रोज क्लास लेने में कठिनाई होती है। यह ऑनलाइन क्लासों की सबसे बड़ी समस्या होती है। कई अध्यापक पुराने तरीकों से पढ़ाना जानते हैं तो उनको ऑनलाइन पढ़ाने में भी दिक्कत महसूस होती है। 

ऑनलाइन कोर्सों में अध्यापक व छात्रों को बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लॉकडाउन काल में ऑनलाइन क्लासों का प्रयोग और अधिक बढ़ गया है। परंतु ऑनलाइन क्लास केवल तभी होनी चाहिए जब स्थिति आपातकालीन हो। यदि आप कॉलेज जाने और अध्यापक से फेस तो फेस कॉन्टैक्ट करके पढ़ने में समर्थ हैं तो आपको ऐसा ही करना चाहिए। जान बूझ कर अपनी मुसीबतों को न बढ़ाए। 

यह भी पढ़ें-

ऑनलाइन सामान मंगवाने से पहले, जान लें यह जरूरी बातें

ऑनलाइन खाना ऑर्डर करने जा रही हैं तो जान लें यह जरूरी बातें

कमेंट करें

blog comments powered by Disqus

संबंधित आलेख

किशोर और COV...

किशोर और COVID-19: चुनौतियां और अवसर

बच्चों में क...

बच्चों में कोविड-19 का डर दूर करें। अपनाएं...

Gl ban 65w

ऑनलाइन कोर्सों के नेगेटिव प्रभाव

ऑनलाइन लर्नि...

ऑनलाइन लर्निंग लेने से पहले याद रहें यह टिप्स...

पोल

आपकी पसंदीदा हिरोइन

वोट करने क लिए धन्यवाद

सारा अली खान

अनन्या पांडे

गृहलक्ष्मी गपशप

उफ ! यह मेकअ...

उफ ! यह मेकअप मिस्टेक्स...

सजने संवरने का शौक भला किसे नहीं होता ? अच्छे कपड़े,...

लाडली को गृह...

लाडली को गृहकार्य...

उस दिन मेरी दोस्त कुमुद का फोन आया। शाम के वक्त उसके...

संपादक की पसंद

प्रेग्नेंसी ...

प्रेग्नेंसी के दौरान...

प्रेगनेंसी में अक्सर हर कोई अपने क्या पहनने क्या नहीं...

क्रेश डाइट क...

क्रेश डाइट के क्या...

क्रैश डाइट क्या होता है और क्या ये इतना खतरनाक है कि...

सदस्यता लें

Magazine-Subscription