भगवान शिव की सबसे ऊंची प्रतिमाओं के अद्भुत दर्शन

चयनिका निगम

30th July 2020

भगवान शिव की प्रतिमा आपको हर रंग-रूप में अच्छी लगती होगी। लेकिन शिव जी की अनोखी और अद्भुत ऊंचाई वाली प्रतिमाएं भी आपको जरूर देखनी चाहिए।

भगवान शिव की सबसे ऊंची प्रतिमाओं के अद्भुत दर्शन
देवों के देव महादेव के भक्तों की संख्या इतनी है कि इन्हें गिना जाना ही एक कठिन काम है। इनके भक्त पूरी दुनिया में फैले हैं और इन्हीं भक्तों ने बनवाई हैं दुनिया की सबसे अद्भुत मूर्तियां। इन मूर्तियों की भव्यता देख कर लगेगा मानो, इनमें खुद शिव जी उतर आए हों। इन मूर्तियों को देखने भी पूरी दुनिया के लोग जाते हैं और इस पर मंत्रमुग्ध होकर वापस आते हैं। इनको देखने का मौका एक बार तो आपको भी मिलना चाहिए। अभी कोरोना का खौफ है और आप बाहर नहीं जाएंगी लेकिन हम शिव जी की इन मूर्तियों के दर्शन तो आपको करा ही सकते हैं। चलिए फिर शिव जी की अनोखी मूर्तियों के दर्शन कर लीजिए, ये पूरे देश में अलग-अलग राज्यों में हैं-
कैम्प फोर्ट शिव मूर्ति, बेंगलुरु
करीब 25 साल पुरानी इस 65 फुट ऊंची प्रतिमा में कैलाश पर्वत का नजारा भी देखने को मिलेगा। शिव जी के घर का मनोरम दृश्य देखें को मिलेगा। खास बात ये है कि इस प्रतिमा में शिव जी का पद्मासन रूप देखा जा सकता है। 
नागेश्वर महादेव, गुजरात-
गुजरात एक ऐसा राज्य है, जहां 12 ज्योतिर्लिंगों में से 2 स्थापित हैं। पहले सोमनाथ और दूसरे नागेश्वर महादेव। म्यूजिक कंपनी के टी सीरीज के मालिक गुलशन कुमार ने इस मंदिर का जीर्णोंद्धार कराया था। यहीं पर लगी है शिव जी की 82 फुट ऊंचाई और 25 फुट चौड़ाई वाली मूर्ति। 
हर की पौड़ी, हरिद्वार-
100 फुट की शिव जी की ये प्रतिमा हर की पौड़ी जाते हुए बहुत दूर से ही नजर आ जाती है। ये मूर्ति खड़ी मुद्रा में है और पहाड़ों के बीच में है। ये मनमोहक मूर्ति एक तरह से हरिद्वार की शान बन चुकी है और हिन्दू धर्म में विश्वास न रखने वालों को भी खूब आकर्षित करती है। 
मुरुदेश्वरा, कर्नाटक-
अरब सागर के तट पर बनी ये मूर्ति काफी विशालकाय है। कह सकते हैं कर्नाटक राज्य के कन्नड़ जिले के भटकल तहसील में स्थित मुरुदेश्वरा को इसी मूर्ति की वजह से अलग पहचान मिल रही है, इसकी ऊंचाई करीब 123 फुट की है। मंदिर इस मूर्ति के साथ-साथ अपने आस-पास के नजारों की वजह से भी मन को सुकून देता है। दरअसल मुरुद्वेश्वर मंदिर तीन ओर से पानी से घिरा है और कंदुका पहाड़ी पर बना है। माना जाता है कि यहां आत्मलिंग भी स्थापित है। मान्यता ये है कि रावण शिव जी का आत्मलिंग लेकर लंका जा रहा रहा था लेकिन रास्ते में उसने इसे मुरुद्वेश्वर में रख दिया। फिर इसे जहां रखा, वहीं इसकी स्थापना हो गई। 
कचनार महादेव, जबलपुर-
बैठी मुद्रा में बनी ये मूर्ति इसलिए भी अनोखी है क्योंकि इसको बहुत बारीकी से बनाया गया है। आपको मूर्ति में शिव जी के हाथों कि नसें तक समझ आएंगी। इसके अलावा इस मूर्ति के नीचे गुफा जैसी जगह पर 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन भी किए जा सकते हैं। इस मूर्ति की ऊंचाई 76 फुट है।

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