मलेशिया: कुआलालम्पुर की 'थ्री डे ट्रिप' देगी यादगार अनुभव

चयनिका निगम

7th August 2020

विदेश जाने की बात आए तो पहले कुछ नामों में जरूर मलेशिया का नाम दिमाग में आता है। इस सुंदर देश की तीन दिनी यात्रा करनी है कुछ खास जगहों को ना भूलिएगा।

मलेशिया: कुआलालम्पुर की 'थ्री डे ट्रिप' देगी यादगार अनुभव
मलेशिया...हम भारतीय जब भी भारत से बाहर जाने का प्लान बनाते हैं तो कुछ शुरुआती नामों में इस देश को भी जरूर ही शामिल किया जाता है। मलेशिया में मस्ती-मजे के साथ कई चीजें ऐसी हैं, जो हर यात्री को हैरान भी जरूर करती है। ट्विन टॉवर ऐसा ही नयां नमूना है। जो इंजीनियरिंग के नए आयामों को दिखाता है और लोग को आश्चर्य में डाल देता है। इतना ही नहीं ये देश यात्रा का पूरा पैकेज जैसा है। जहां आप एंजॉय भी खूब करेंगे तो सुकून का एहसास भी भरपूर होगा। रोमांच भी फ़ील होगा और परिवार के साथ बेहतरीन समय भी गुजरेगा। इस अनोखे देश की कहानी उसकी राजधानी कुआलालम्पुर की सैर के साथ चलिए जान लेते हैं। 
पहला दिन-
मलेशिया की राजधानी कुआलालम्पुर की सैर पर निकलें तो शुरुआत आपको मडरेका स्क्वायर से की जानी चाहिए। यही वो जगह है जहां पहली दफा ब्रिटिश राज्य का विरोध शुरू हुआ था। 1957 में शुरू हुए इस विरोध में यहीं पहली बार मलेशिया का झंडा फहराया गया था। अब यहां कई सारी बिल्डिंग बन चुकी हैं पर आपको इतिहास में जरा भी रुचि है तो ये जगह आपके लिए ही है। इसी दिन आपको जामेक मस्जिद और लिटिल इंडिया भी जरूर घूमना चाहिए। यहां के बाजार आपको जरूर आकर्षित करेंगे और कई जगह आपको ये भी लगेगा कि आप भारत में ही हैं। सूरज ढलने से पहले आप स्काई बार जाने का मन भी बना लीजिए क्योंकि यहां से सूरज ढलने का नजारा बिलकुल अनोखा अनुभव देता है। ट्रेडर्स होटल के 33वें फ्लोर पर बना ये बार नाइट लाइफ के लिए बेहतरीन माना जाता है। लेकिन नाइट लाइफ के लिए एक और जगह बेहतरीन मानी जाती है। ये जगह है केएलसीसी पार्क, जिसकी झील में लाइट एंड वॉटर शो आपका दिल जरूर जीत लेगा। ये शो रात के 8 बजे शुरू होता है। 
ट्विन टावर-
पहले दिन में ही लंच के बाद आपको उस टॉवर को देखने का मन बना लेना चाहिए जो असल में दुनियाभर में मलेशिया की शान है। बात पेट्रोनास ट्विन टॉवर की हो रही है। जो आपकी 451.9 मीटर की ऊंचाई के साथ आपकी आंखों को चकाचौंध कर देगा। ये घूमने की एक एहम जगह है। यहां के टिकट बहुत आसानी से नहीं मिलते हैं इसलिए आपको कुछ दिन पहले ही इनका इंतजाम करना होगा। इस टॉवर के अंदर से पूरा शहर भी अमेजिंग लगता है। आपको इस टॉवर के 86 फ्लोर पर जाने का मौका मिलेगा। साथ में उस ब्रिज की सैर का मौका भी आपको मिलेगा, जो दोनों टॉवर के बीच कड़ी का काम करता है और 41 फ्लोर पर है। यकीन मानिए ये अनुभव आप कभी नहीं भूल पाएंगे। 
दूसरा दिन-
दूसरे दिन कुछ और मस्ती के लिए तैयार हो जाइए। इस दिन आपको कुआलालम्पुर शहर के बीचों-बीच बने केएल टॉवर को देखने जरूर जाना चाहिए। ये एक तरह से ट्विन टॉवर की प्रतियोगी बिल्डिंग है और उससे भी थोड़ी लंबी है। इसकी ऊंचाई 452 मीटर है। ये दुनिया का सातवां सबसे ऊंचा कम्युनिकेशन टॉवर कहलाता है। इसकी लिफ्ट भी कम खास नहीं है क्योंकि ये सिर्फ 54 सेकंड में आपको ऊंचाई पर पहुंचा देती है। यहां आपको कई सारे एडवेंचर एक्टिविटी भी करने का मौका मिलेगा। इसके बाद इसी बिल्डिंग के सबसे नीचे बने बुकित नानास फॉरेस्ट रिजर्व को अपना अगला ठिकाना बनाइए। शहर के बीच इस पार्क में जाते ही आप प्रकृति के करीब आ जाएंगे। इसमें ही इको पार्क भी बना है। एक तरह से आपको रेन फॉरेस्ट का एहसास होगा। विल्फ लाइफ देखने के साथ आप कैनोपी वॉक पर भी जा सकते हैं। ये एक तरह की एडवेंचर एक्टिविटी है, जिसमें रस्सियों से बने पल के सहारे लंबा रास्ता पार करना होता है। इसके बाद जरूर आप शॉपिंग को मिस कर रही होंगी तो अब बारी आती है पूरी दुनिया के शॉपिंग से जुड़े बेस्ट और सबसे बड़े ठिकाने बेरजाया टाइम्स स्क्वायर आ जाइए। यहां आपको बेस्ट शॉपिंग का मौका मिलेगा तो महंगी और सस्ती दोनों खरीदारी भी यहीं की जा सकेगी। अब बारी आती है मौज-मस्ती की। अब आपको स्ट्रीट फूड के लिए जलन एलोर फूड स्ट्रीट की ओर कदम बढ़ा देने चाहिए। यहां आते ही हर 5 मिनट में आपको एक नया मीनू देखने को मिलेगा। इसके बाद आप छंगकट बुलकिट बिनटांग स्ट्रीट की ओर चल दीजिए। ये स्ट्रीट नाइटक्लब्स के लिए जानी जाती है। यहां ढेरों बार हैं, जहां बाहर बैठ कर आप माहौल का मजा ले सकते हैं। 
तीसरा दिन-
आपकी यात्रा का आखिरी मतलब तीसरा दिन यादगार होना चाहिए। इस दिन की शुरुआत आपको द केएल बर्ड पार्क से करनी चाहिए। यहां 200 प्रजाति की 3000 चिड़ियों का साथ आपको मिलेगा। इसमें से 90 प्रतिशत यहीं की लोकल बर्ड हैं तो 10 प्रतिशत विदेशी, जिन्हें ऑस्ट्रेलिया, चाइना, हॉलैंड से लाया गया है। यहां आम दिनों में आने वाले यात्रियों की कुल संख्या तकरीबन 2 लाख मानी जाती है। ये जगह रॉयल मलेशियन पुलिस म्यूजियम, नेशनल मस्जिद और लेक गार्डेन के पास ही है। इस जगह के बाद आपको नेशनल मस्जिद भी जरूर जाना चाहिए। 1965 में बनी इस मस्जिद में एक बार में 15000 लोग आ सकते हैं। अब आपको इस्लामिक आर्ट म्यूजियम भी जरूर घूमना चाहिए। यहां दुनिया भर से लाई गई इस्लामिक डेकोरेटिव आर्ट को देखा जा सकता है। अब बारी आती है नेशनल म्यूजियम की। यहां चार गैलेरी हैं। यहां आपको पता चलेगा कि कैसे मालेशिया पॉर्तुगीज, डच, ब्रिटिश और जापानी शासन में रहा और फिर यहां तक कैसे पहुंचा। खास बात ये है कि इस म्यूजियम में एक कैफे भी है। जहां आप अपनी थकावट कॉफी के साथ मिटा सकते हैं। 
चाइना टाउन भी घूमिए-
ये एक ऐसी जगह है, जो आपको कुआलालम्पुर आने के बाद मिस बिलकुल नहीं करनी चाहिए। चाइना टाउन मतलब, वो जगह जहां से इस शहर के बनने की शुरुआत हुई थी। यहां बाजार हैं तो कई सारे नामी मंदिर भी। यहां का सिन सजे सी या मंदिर सबसे बड़ा चाइनीज मंदिर है। इसके बाद श्री महामारियममन हिन्दू मंदिर भी आपको देखना ही चाहिए। आखिर में आपको चाइना टाउन में ही बने पेटालिंग स्ट्रीट मार्केट की दूरी भी नाप ही लेनी चाहिए। इसके बाद थोड़े मजे-मस्ती के लिए आपको स्पीकइसी की सैर करनी ही चाहिए।
मलेशिया: कुआलालम्पुर की ‘थ्री डे ट्रिप' देगी यादगार अनुभव
स्टोरी-
मलेशिया...हम भारतीय जब भी भारत से बाहर जाने का प्लान बनाते हैं तो कुछ शुरुआती नामों में इस देश को भी जरूर ही शामिल किया जाता है। मलेशिया में मस्ती-मजे के साथ कई चीजें ऐसी हैं, जो हर यात्री को हैरान भी जरूर करती है। ट्विन टॉवर ऐसा ही नयां नमूना है। जो इंजीनियरिंग के नए आयामों को दिखाता है और लोग को आश्चर्य में डाल देता है। इतना ही नहीं ये देश यात्रा का पूरा पैकेज जैसा है। जहां आप एंजॉय भी खूब करेंगे तो सुकून का एहसास भी भरपूर होगा। रोमांच भी फ़ील होगा और परिवार के साथ बेहतरीन समय भी गुजरेगा। इस अनोखे देश की कहानी उसकी राजधानी कुआलालम्पुर की सैर के साथ चलिए जान लेते हैं। 
पहला दिन-
मलेशिया की राजधानी कुआलालम्पुर की सैर पर निकलें तो शुरुआत आपको मडरेका स्क्वायर से की जानी चाहिए। यही वो जगह है जहां पहली दफा ब्रिटिश राज्य का विरोध शुरू हुआ था। 1957 में शुरू हुए इस विरोध में यहीं पहली बार मलेशिया का झंडा फहराया गया था। अब यहां कई सारी बिल्डिंग बन चुकी हैं पर आपको इतिहास में जरा भी रुचि है तो ये जगह आपके लिए ही है। इसी दिन आपको जामेक मस्जिद और लिटिल इंडिया भी जरूर घूमना चाहिए। यहां के बाजार आपको जरूर आकर्षित करेंगे और कई जगह आपको ये भी लगेगा कि आप भारत में ही हैं। सूरज ढलने से पहले आप स्काई बार जाने का मन भी बना लीजिए क्योंकि यहां से सूरज ढलने का नजारा बिलकुल अनोखा अनुभव देता है। ट्रेडर्स होटल के 33वें फ्लोर पर बना ये बार नाइट लाइफ के लिए बेहतरीन माना जाता है। लेकिन नाइट लाइफ के लिए एक और जगह बेहतरीन मानी जाती है। ये जगह है केएलसीसी पार्क, जिसकी झील में लाइट एंड वॉटर शो आपका दिल जरूर जीत लेगा। ये शो रात के 8 बजे शुरू होता है। 
ट्विन टावर-
पहले दिन में ही लंच के बाद आपको उस टॉवर को देखने का मन बना लेना चाहिए जो असल में दुनियाभर में मलेशिया की शान है। बात पेट्रोनास ट्विन टॉवर की हो रही है। जो आपकी 451.9 मीटर की ऊंचाई के साथ आपकी आंखों को चकाचौंध कर देगा। ये घूमने की एक एहम जगह है। यहां के टिकट बहुत आसानी से नहीं मिलते हैं इसलिए आपको कुछ दिन पहले ही इनका इंतजाम करना होगा। इस टॉवर के अंदर से पूरा शहर भी अमेजिंग लगता है। आपको इस टॉवर के 86 फ्लोर पर जाने का मौका मिलेगा। साथ में उस ब्रिज की सैर का मौका भी आपको मिलेगा, जो दोनों टॉवर के बीच कड़ी का काम करता है और 41 फ्लोर पर है। यकीन मानिए ये अनुभव आप कभी नहीं भूल पाएंगे। 
दूसरा दिन-
दूसरे दिन कुछ और मस्ती के लिए तैयार हो जाइए। इस दिन आपको कुआलालम्पुर शहर के बीचों-बीच बने केएल टॉवर को देखने जरूर जाना चाहिए। ये एक तरह से ट्विन टॉवर की प्रतियोगी बिल्डिंग है और उससे भी थोड़ी लंबी है। इसकी ऊंचाई 452 मीटर है। ये दुनिया का सातवां सबसे ऊंचा कम्युनिकेशन टॉवर कहलाता है। इसकी लिफ्ट भी कम खास नहीं है क्योंकि ये सिर्फ 54 सेकंड में आपको ऊंचाई पर पहुंचा देती है। यहां आपको कई सारे एडवेंचर एक्टिविटी भी करने का मौका मिलेगा। इसके बाद इसी बिल्डिंग के सबसे नीचे बने बुकित नानास फॉरेस्ट रिजर्व को अपना अगला ठिकाना बनाइए। शहर के बीच इस पार्क में जाते ही आप प्रकृति के करीब आ जाएंगे। इसमें ही इको पार्क भी बना है। एक तरह से आपको रेन फॉरेस्ट का एहसास होगा। विल्फ लाइफ देखने के साथ आप कैनोपी वॉक पर भी जा सकते हैं। ये एक तरह की एडवेंचर एक्टिविटी है, जिसमें रस्सियों से बने पल के सहारे लंबा रास्ता पार करना होता है। इसके बाद जरूर आप शॉपिंग को मिस कर रही होंगी तो अब बारी आती है पूरी दुनिया के शॉपिंग से जुड़े बेस्ट और सबसे बड़े ठिकाने बेरजाया टाइम्स स्क्वायर आ जाइए। यहां आपको बेस्ट शॉपिंग का मौका मिलेगा तो महंगी और सस्ती दोनों खरीदारी भी यहीं की जा सकेगी। अब बारी आती है मौज-मस्ती की। अब आपको स्ट्रीट फूड के लिए जलन एलोर फूड स्ट्रीट की ओर कदम बढ़ा देने चाहिए। यहां आते ही हर 5 मिनट में आपको एक नया मीनू देखने को मिलेगा। इसके बाद आप छंगकट बुलकिट बिनटांग स्ट्रीट की ओर चल दीजिए। ये स्ट्रीट नाइटक्लब्स के लिए जानी जाती है। यहां ढेरों बार हैं, जहां बाहर बैठ कर आप माहौल का मजा ले सकते हैं। 
तीसरा दिन-
आपकी यात्रा का आखिरी मतलब तीसरा दिन यादगार होना चाहिए। इस दिन की शुरुआत आपको द केएल बर्ड पार्क से करनी चाहिए। यहां 200 प्रजाति की 3000 चिड़ियों का साथ आपको मिलेगा। इसमें से 90 प्रतिशत यहीं की लोकल बर्ड हैं तो 10 प्रतिशत विदेशी, जिन्हें ऑस्ट्रेलिया, चाइना, हॉलैंड से लाया गया है। यहां आम दिनों में आने वाले यात्रियों की कुल संख्या तकरीबन 2 लाख मानी जाती है। ये जगह रॉयल मलेशियन पुलिस म्यूजियम, नेशनल मस्जिद और लेक गार्डेन के पास ही है। इस जगह के बाद आपको नेशनल मस्जिद भी जरूर जाना चाहिए। 1965 में बनी इस मस्जिद में एक बार में 15000 लोग आ सकते हैं। अब आपको इस्लामिक आर्ट म्यूजियम भी जरूर घूमना चाहिए। यहां दुनिया भर से लाई गई इस्लामिक डेकोरेटिव आर्ट को देखा जा सकता है। अब बारी आती है नेशनल म्यूजियम की। यहां चार गैलेरी हैं। यहां आपको पता चलेगा कि कैसे मालेशिया पॉर्तुगीज, डच, ब्रिटिश और जापानी शासन में रहा और फिर यहां तक कैसे पहुंचा। खास बात ये है कि इस म्यूजियम में एक कैफे भी है। जहां आप अपनी थकावट कॉफी के साथ मिटा सकते हैं। 
चाइना टाउन भी घूमिए-
ये एक ऐसी जगह है, जो आपको कुआलालम्पुर आने के बाद मिस बिलकुल नहीं करनी चाहिए। चाइना टाउन मतलब, वो जगह जहां से इस शहर के बनने की शुरुआत हुई थी। यहां बाजार हैं तो कई सारे नामी मंदिर भी। यहां का सिन सजे सी या मंदिर सबसे बड़ा चाइनीज मंदिर है। इसके बाद श्री महामारियममन हिन्दू मंदिर भी आपको देखना ही चाहिए। आखिर में आपको चाइना टाउन में ही बने पेटालिंग स्ट्रीट मार्केट की दूरी भी नाप ही लेनी चाहिए। इसके बाद थोड़े मजे-मस्ती के लिए आपको स्पीकइसी की सैर करनी ही चाहिए। 
मलेशिया: कुआलालम्पुर की ‘थ्री डे ट्रिप' देगी यादगार अनुभव
स्टोरी-
मलेशिया...हम भारतीय जब भी भारत से बाहर जाने का प्लान बनाते हैं तो कुछ शुरुआती नामों में इस देश को भी जरूर ही शामिल किया जाता है। मलेशिया में मस्ती-मजे के साथ कई चीजें ऐसी हैं, जो हर यात्री को हैरान भी जरूर करती है। ट्विन टॉवर ऐसा ही नयां नमूना है। जो इंजीनियरिंग के नए आयामों को दिखाता है और लोग को आश्चर्य में डाल देता है। इतना ही नहीं ये देश यात्रा का पूरा पैकेज जैसा है। जहां आप एंजॉय भी खूब करेंगे तो सुकून का एहसास भी भरपूर होगा। रोमांच भी फ़ील होगा और परिवार के साथ बेहतरीन समय भी गुजरेगा। इस अनोखे देश की कहानी उसकी राजधानी कुआलालम्पुर की सैर के साथ चलिए जान लेते हैं। 
पहला दिन-
मलेशिया की राजधानी कुआलालम्पुर की सैर पर निकलें तो शुरुआत आपको मडरेका स्क्वायर से की जानी चाहिए। यही वो जगह है जहां पहली दफा ब्रिटिश राज्य का विरोध शुरू हुआ था। 1957 में शुरू हुए इस विरोध में यहीं पहली बार मलेशिया का झंडा फहराया गया था। अब यहां कई सारी बिल्डिंग बन चुकी हैं पर आपको इतिहास में जरा भी रुचि है तो ये जगह आपके लिए ही है। इसी दिन आपको जामेक मस्जिद और लिटिल इंडिया भी जरूर घूमना चाहिए। यहां के बाजार आपको जरूर आकर्षित करेंगे और कई जगह आपको ये भी लगेगा कि आप भारत में ही हैं। सूरज ढलने से पहले आप स्काई बार जाने का मन भी बना लीजिए क्योंकि यहां से सूरज ढलने का नजारा बिलकुल अनोखा अनुभव देता है। ट्रेडर्स होटल के 33वें फ्लोर पर बना ये बार नाइट लाइफ के लिए बेहतरीन माना जाता है। लेकिन नाइट लाइफ के लिए एक और जगह बेहतरीन मानी जाती है। ये जगह है केएलसीसी पार्क, जिसकी झील में लाइट एंड वॉटर शो आपका दिल जरूर जीत लेगा। ये शो रात के 8 बजे शुरू होता है। 
ट्विन टावर-
पहले दिन में ही लंच के बाद आपको उस टॉवर को देखने का मन बना लेना चाहिए जो असल में दुनियाभर में मलेशिया की शान है। बात पेट्रोनास ट्विन टॉवर की हो रही है। जो आपकी 451.9 मीटर की ऊंचाई के साथ आपकी आंखों को चकाचौंध कर देगा। ये घूमने की एक एहम जगह है। यहां के टिकट बहुत आसानी से नहीं मिलते हैं इसलिए आपको कुछ दिन पहले ही इनका इंतजाम करना होगा। इस टॉवर के अंदर से पूरा शहर भी अमेजिंग लगता है। आपको इस टॉवर के 86 फ्लोर पर जाने का मौका मिलेगा। साथ में उस ब्रिज की सैर का मौका भी आपको मिलेगा, जो दोनों टॉवर के बीच कड़ी का काम करता है और 41 फ्लोर पर है। यकीन मानिए ये अनुभव आप कभी नहीं भूल पाएंगे। 
दूसरा दिन-
दूसरे दिन कुछ और मस्ती के लिए तैयार हो जाइए। इस दिन आपको कुआलालम्पुर शहर के बीचों-बीच बने केएल टॉवर को देखने जरूर जाना चाहिए। ये एक तरह से ट्विन टॉवर की प्रतियोगी बिल्डिंग है और उससे भी थोड़ी लंबी है। इसकी ऊंचाई 452 मीटर है। ये दुनिया का सातवां सबसे ऊंचा कम्युनिकेशन टॉवर कहलाता है। इसकी लिफ्ट भी कम खास नहीं है क्योंकि ये सिर्फ 54 सेकंड में आपको ऊंचाई पर पहुंचा देती है। यहां आपको कई सारे एडवेंचर एक्टिविटी भी करने का मौका मिलेगा। इसके बाद इसी बिल्डिंग के सबसे नीचे बने बुकित नानास फॉरेस्ट रिजर्व को अपना अगला ठिकाना बनाइए। शहर के बीच इस पार्क में जाते ही आप प्रकृति के करीब आ जाएंगे। इसमें ही इको पार्क भी बना है। एक तरह से आपको रेन फॉरेस्ट का एहसास होगा। विल्फ लाइफ देखने के साथ आप कैनोपी वॉक पर भी जा सकते हैं। ये एक तरह की एडवेंचर एक्टिविटी है, जिसमें रस्सियों से बने पल के सहारे लंबा रास्ता पार करना होता है। इसके बाद जरूर आप शॉपिंग को मिस कर रही होंगी तो अब बारी आती है पूरी दुनिया के शॉपिंग से जुड़े बेस्ट और सबसे बड़े ठिकाने बेरजाया टाइम्स स्क्वायर आ जाइए। यहां आपको बेस्ट शॉपिंग का मौका मिलेगा तो महंगी और सस्ती दोनों खरीदारी भी यहीं की जा सकेगी। अब बारी आती है मौज-मस्ती की। अब आपको स्ट्रीट फूड के लिए जलन एलोर फूड स्ट्रीट की ओर कदम बढ़ा देने चाहिए। यहां आते ही हर 5 मिनट में आपको एक नया मीनू देखने को मिलेगा। इसके बाद आप छंगकट बुलकिट बिनटांग स्ट्रीट की ओर चल दीजिए। ये स्ट्रीट नाइटक्लब्स के लिए जानी जाती है। यहां ढेरों बार हैं, जहां बाहर बैठ कर आप माहौल का मजा ले सकते हैं। 
तीसरा दिन-
आपकी यात्रा का आखिरी मतलब तीसरा दिन यादगार होना चाहिए। इस दिन की शुरुआत आपको द केएल बर्ड पार्क से करनी चाहिए। यहां 200 प्रजाति की 3000 चिड़ियों का साथ आपको मिलेगा। इसमें से 90 प्रतिशत यहीं की लोकल बर्ड हैं तो 10 प्रतिशत विदेशी, जिन्हें ऑस्ट्रेलिया, चाइना, हॉलैंड से लाया गया है। यहां आम दिनों में आने वाले यात्रियों की कुल संख्या तकरीबन 2 लाख मानी जाती है। ये जगह रॉयल मलेशियन पुलिस म्यूजियम, नेशनल मस्जिद और लेक गार्डेन के पास ही है। इस जगह के बाद आपको नेशनल मस्जिद भी जरूर जाना चाहिए। 1965 में बनी इस मस्जिद में एक बार में 15000 लोग आ सकते हैं। अब आपको इस्लामिक आर्ट म्यूजियम भी जरूर घूमना चाहिए। यहां दुनिया भर से लाई गई इस्लामिक डेकोरेटिव आर्ट को देखा जा सकता है। अब बारी आती है नेशनल म्यूजियम की। यहां चार गैलेरी हैं। यहां आपको पता चलेगा कि कैसे मालेशिया पॉर्तुगीज, डच, ब्रिटिश और जापानी शासन में रहा और फिर यहां तक कैसे पहुंचा। खास बात ये है कि इस म्यूजियम में एक कैफे भी है। जहां आप अपनी थकावट कॉफी के साथ मिटा सकते हैं। 
चाइना टाउन भी घूमिए-
ये एक ऐसी जगह है, जो आपको कुआलालम्पुर आने के बाद मिस बिलकुल नहीं करनी चाहिए। चाइना टाउन मतलब, वो जगह जहां से इस शहर के बनने की शुरुआत हुई थी। यहां बाजार हैं तो कई सारे नामी मंदिर भी। यहां का सिन सजे सी या मंदिर सबसे बड़ा चाइनीज मंदिर है। इसके बाद श्री महामारियममन हिन्दू मंदिर भी आपको देखना ही चाहिए। आखिर में आपको चाइना टाउन में ही बने पेटालिंग स्ट्रीट मार्केट की दूरी भी नाप ही लेनी चाहिए। इसके बाद थोड़े मजे-मस्ती के लिए आपको स्पीकइसी की सैर करनी ही चाहिए। 

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