बच्चे को बनाएं चैम्पियन

Poonam Pandey

8th August 2020

बच्चे का जन्म माता-पिता के लिए सिर्फ खुशी का ही संकेत नहीं लाता बल्कि इसके साथ ही उनकी इच्छाओं को भी पंख से लग जाते हैं। धीरे-धीरे बड़े होते बच्चे में माता-पिता को भविष्य का एक ऐसा चैम्पियन नजर आने लगता है,जो अपने आप में अनूठा हो, खास हो।

बच्चे को बनाएं चैम्पियन

पर क्या भविष्य के सपने देखना ही काफी होता है! माता-पिता होने के नाते हर अभिभावक एक नैतिक कर्तव्य से भी जुड़े होते हैं। घर पर बच्चों के मन में संस्कारों का ऐसा स्वस्थ बीज रोपना अनिवार्य है। तभी बन सकता है बच्चा, सच्चा चैम्पियन।

1. बच्चे का चाव, उसकी रूचि पर बारीकी से नजर रखना शुरू कर दीजिए जो उसका खास शौक है, उसी में तो छिपे हैं, उसके चैम्पियन बनने के गुण।

2. अपने किसी जन्मजात गुण के बल पर यदि बच्चा कोई मैडल प्राप्त करता है तो उसे इसका सच बताएं अन्यथा वह हवा में ही रहेगा और अपनी प्रतिभा को तराशना छोड़ देगा। अच्छा गाना  , अच्छा नृत्य करना, इन प्राकृतिक योग्यताओं पर विनम्रता से अभ्यास द्वारा और बेहतर बनने की ललक पैदा करे। अगर श्रेया घोषाल अपनी मधुर आवाज पर ही मुग्ध रहती और हर हफ्ते कुल 30 घंटे रियाज न करती तो मात्र आठ वर्षों में सफलता के शिखर पर कहां होती।

3.आज का समय भीषण प्रतिस्पर्धा का है। ऐसे में बाहर के प्रतियोगी वातावरण के लिए बच्चे को मानसिक रूप से तैयार करें। उसके भीतर आत्म-विश्वास व आत्म-अनुशासन जैसे विशेष गुण विकसित करते रहें। यह उसके लिए खाद-पानी का काम करेंगे।

4.प्रतियोगिता ही जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं होती। हारने वाला भी बाद में विश्व-विजेता बन जाते हैं। नकारात्मक जीवन-शैली से समय और उत्साह दोनों नष्ट हो जाते हैं। इस प्रकार की चर्चाएं करके बच्चे का जोश उसका जज्बा बनाए रखें।

5. अति हर चीज की बुरी होती है। एक संतुलन ही अच्छे परिणाम देता है। इसलिए बच्चे को तेज प्रखर और विजेता बनने के साथ विनम्रता, सामंजस्य, सामाजिकता के भी सभी गुण बार-बार सिखाते रहें।

6.अच्छा तन रखने के लिए अच्छा व पोषक आहार जरूरी है। बच्चे को फास्ट फूड, जंक-फूड, ठेले का भोजन, सॉफ्ट ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक की आदतों में पड़ने से बचाएं। इनका चस्का जानलेवा होता है।

7.बच्चे से अति अपेक्षाएं न रखें, उसके सर पर सफल होने का भारी बोझ न लादें। उसे सदा तनावमुक्त व हल्का-फुल्का ही रहने को कहें। ताकी न तो उसमें कोई चिंता पनपे और ना ही लापरवाही। यह बात गौर करने की जिम्मेदारी माता-पिता की है कि कहीं बच्चा नर्वस ना हो। सीखना खास है और सीखना बच्चे को आनंद तथा उल्लास की तरफ ले जाता है। 

 

 

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