प्री-टीन बच्चे से करें कुछ जरूरी बातें

मोनिका अग्रवाल

9th August 2020

यह वह पड़ाव होता है जब वे बचपन से टीन एज की ओर बढ़ रहे होते हैं। अगर उम्र की बात की जाए तो 9 से 12 वर्ष के बीच के समय को प्री टीन एज कहा जाता है। इस उम्र के पड़ाव से पहले बच्चा अपने माता पिता की हर बात आंख बंद करके मानता है लेकिन जब इस ओर बढ़ने लगता है तो ना जाने क्यों उसका व्यवहार बदलने लग जाता है और यह बात बात पर गुस्सा और बहस करता है।

प्री-टीन  बच्चे से करें कुछ जरूरी बातें

प्री-टीन बच्चे से करें कुछ जरूरी बातें

यदि आप का बच्चा भी अपनी किशोरवस्था में प्रवेश करने जा रहा है तो हो सकता है वो थोड़ा बदल गया हो। हो सकता है उसके व्यवहार व बोल चाल के तरीके में पहले से कुछ बदलाव हो गया हो। लेकिन आप को परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि आप का बच्चा अब बड़ा होने लगा है। अब उसे हर छोटी से छोटी बात में आपका प्यार व दुलार परेशान करता है जिस कारण वह चिड़चिड़ा हो जाता है। प्री-टीन बच्चों में शारीरिक व मानसिक तौर पर कई सारे बदलाव होते हैं जो कि बिल्कुल नॉर्मल हैं। अतः उनको डांटने व परेशान करने की बजाय उनको उनकी उम्र में ढलने में साथ दें। आप निम्नलिखित टिप्स को फॉलो कर सकते हैं। 

 बच्चे को थोड़ी स्वतंत्रता दें-

यदि आप के बच्चे अब हर बात आपसे शेयर करने की बजाय अपने दोस्तो व खुद के साथ समय बिताना अधिक पसंद करते हैं तो आप खुद को निग्लेक्टेड बिल्कुल न समझें। क्योंकि बच्चे जब बड़े होते हैं तो उन्हें खुद के लिए भी कुछ स्वतंत्रता चाहिए होती है। यह बिल्कुल सवभाविक है। हो सकता है बच्चे आपसे कुछ छुपाएं भी। लेकिन इसके लिए उन्हें डांटने की बजाय प्यार से समझाए।

 बच्चों के साथ समय बिताएं-

यदि आप को लगता है कि आप के बच्चे आपके साथ पहले की तरह समय नहीं बिता रहे हैं, तो आप इस बात का समाधान भी निकाल सकते हैं। आप अपने बच्चों के साथ स्वयं के लिए थोड़ा बहुत समय निश्चित कर लें। ताकि उस समय में आप अपने बच्चों से उनके दिन के बारे में व उनके सीक्रेट्स के बारे में जान सकें। 

बच्चों के दोस्त बनें-

जब आपके बच्चे छोटे होते थे तो आप सीधा उनसे पूछ लेते थे कि आपका दिन कैसा रहा या आप का स्कूल टेस्ट कैसा गया। लेकिन जैसे ही बच्चे बड़े होते हैं तो उन्हें ये सब बताना चिड़चिड़ा लग सकता है इसलिए यदि आप उनसे कुछ पूछना चाहते हैं तो सीधा न पूछें। उनके साथ चुप चाप बैठ जाएं और वे स्वयं ही आप को सारी बात बता देंगे।

उन्हें हर बात पर जज न करें

उन्हें हर बात पर जज न करें -

उस उम्र में आपके बच्चे हर छोटी बात के लिए जज होना पसंद नहीं करेंगे। अतः ज्यादा जजमेंटल न बने। उन्हें बातें समझने में समय लगेगा। इसलिए उन्हें वह समय दें। उनके व्यवहार और मानसिकता में थोड़े बहुत बदलाव अवश्य होंगे उन्हें उन बदलावों के आधार पर जज न करें। ऐसा करने से उनकी भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है। 

बच्चे को सही गलत की शिक्षा दें-

यदि आप चाहते हैं कि आप अपने बच्चे को इस उम्र में ज्यादा परेशान न करें लेकिन वो ज्यादा बिगाड़ें भी न तो आप जो चीज यानि फोन या टीवी में जो वह देख रहे हैं उनके साथ बैठ कर देखें। ऐसा करने से आप उन पर निगरानी भी रखेंगे और उन्हें बूरा महसूस भी नहीं होगा। 

बच्चे को सेक्स के विषय में बताएं-

एक बच्चे का सबसे पहला व अच्छा शिक्षक उसके माता पिता ही होते हैं। अतः आपको अपने बच्चे से हर विषय के बारे में बात करनी चाहिए। उन्हें हर विषय के बारे में समझाना चाहिएं चाहे वह सेक्स या ड्रग का विषय ही क्यों न हो, क्योंकि यदि आप उन्हें इन चीजों के दुष्परिणामों के बारे में पहले ही समझा देंगे तो, वह इनसे जुड़ी वो गलतियां नहीं करेंगे जिन की वजह से उन्हें नुकसान पहुंचे।

हर बात पर प्रतिक्रिया न करें -

यदि आप के बच्चे से इस उम्र में कोई गलती हो भी जाती है तो उस पर ओवर रिएक्ट न करें। अपने बच्चे को समझाएं कि ऐसी गलती दुबारा न करे। यदि उसको आप उस गलती के परिणामों के बारे में समझा देते हैं तो, वह आगे से कोई गलती नहीं करेगा। लेकिन यदि आप उसे लेकर ओवर रिएक्ट करते हैं तो वे आप के बारे में गलत सोचेंगे।

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