कैसे रहें दूर नकारात्मक विचारों से

Vimmi Karan

17th August 2020

नकारात्मक विचार हमारी सोच और जीवन को अत्यधिक प्रभावित करते हैं। हमारे जीवन में जितनी नकारात्मक सोच होगी उतनी ही निराशा, तनाव और डिप्रेशन की वृद्धि होगी।

कैसे रहें दूर  नकारात्मक विचारों से

एक बार स्वामी विवेकानंद जी वाराणसी में किसी पुल पर से जा रहे थे। बहुत छोटा-सा पुल था। उस के एक तरफ गहरा पानी था जहां स्वामी जी के पीछे कुछ बंदर लग जाते हैं। बहुत सारे बंदर पीछे ही पड़ जाते हैं और स्वामी जी को परेशान करते हैं। स्वामी जी अपने आप को बचाने के लिए उन बंदरों से दूर भागने की कोशिश करते हैं पर इस दौरान नदी में उनके कपड़े भीग जाते हैं। तभी सामने से एक आदमी आता है और स्वामी विवेकानंद जी से कहता है, ‘आप इन बंदरों से डरो मत, आप जितना डरोगे ये बंदर आपको उतना ही डरायेंगे। इनका सामना करोगे तो ये बंदर भाग जायेंगे।'

‘इनका सामना करो इनसे डरो मत'- जैसे ही ये शब्द स्वामी विवेकानंद के कानों में पड़े उन्होंने बंदरों का सामना करने के लिए उनकी तरफ कठोरता से देखा। उनकी आंखों में आंखें डालकर चिल्लाए। आश्चर्य वे बंदर भाग गए।

बस ऐसे ही होते हैं नकारात्मक विचार भी, आप इनसे जितना डरेंगे ये उतना ही आपको डराएंगे। किसी भी काम को शुरू करने से पहले मन में विश्वास जगा लें कि मैं वह काम कर सकता हूं। बस समझो वह काम हो गया। नकारात्मक विचार हमारी सोच और जीवन को अत्यधिक प्रभावित करते हैं। हमारे जीवन में जितनी नकारात्मक सोच होगी उतनी ही निराशा, तनाव और डिप्रेशन की वृद्धि होगी। जिसके कारण ब्लडप्रेशर ऊपर-नीचे होने लगता है, हार्ट प्राब्लम्ज़ उठ खड़ी होती हैं। ये छोटे-छोटे रोज़ाना की जि़ंदगी से जुड़े नकारात्मक विचार हमें इस तरह जकड़ लेते हैं कि हमारी सोच ही नकारात्मक बन जाती है और हमारे जीवन में निराशा बढ़ जाती है।

लेकिन अगर हम हमारे जीवन में कुछ छोटे-छोटे बदलाव कर लें तो इस नकारात्मकता से छुटकारा पाकर सकारात्मक बन सकते हैं। बस कुछ उपाय करने होंगे, जो देखने में छोटे लगेंगे लेकिन असर गंभीर डालते हैं। जब भी आपके मन में नकारात्मक सोच आए, नीचे लिखी बातों को अपनेआप से दोहरा लें-

-अपने आप से कहें कि नकारात्मक विचारों पर विश्वास करना सफलता की सबसे बड़ी रुकावट हैं। अगर मैंने इनपर विश्वास कर लिया तो मेरी उन्नति के सब रास्ते बंद हो जाएंगे और मैं ऐसे कैसे होने दे सकता हूं।

-हमारे जीवन में सकारात्मक व नकारात्मक दोनों विचार अहम भूमिका निभाते हैं। आप कभी भी नकारात्मक सोच पर ज्यादा ध्यान न दें और अपने जीवन में सकारात्मक सोच पर ही ध्यान केंद्रित करें। याद रखिए हमारी सोच ही हमारी दिशा तय करती है। संसार की पहली विकलांग पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा ने पांव गंवाने के बावजूद हौसला नहीं गंवाया और एवरेस्ट पर अपने देश का परचम लहरा दिया।

-कोशिश करें कि नकारात्मक विचारों का कारण बनने से बचें। स्वयं को सदैव व्यस्त रखें क्योंकि $खाली दिमा$ग शैतान का घर होता है। कोई अच्छी किताब पढ़ें या बा$गवानी करें। ज़रूरी नहीं कि हमारे हर काम की उपयोगिता धन में बदले, सुकून और खुशी भी तो हो सकती है।

-कभी-कभी कुछ समस्याएं ऐसी आ जाती हैं जिनका जवाब हमें तुरंत नज़र नहीं आता किंतु कभी न भूलें कि सही रवैया अपनाने से नकारात्मक सोच को भी सकारात्मक में बदल सकते हैं। भला संसार में ऐसी कौन-सी समस्या है जिसका हल नहीं है।

-सबसे महत्वपूर्ण बात कि अपना आत्मविश्वास बनाए रखें और इसमें कमी न आने दें क्योंकि ज्यादातर लोग आत्मविश्वास की कमी से नकारात्मक सोच के शिकार बनते हैं। जो आपको नहीं बनना। अपनी क्षमताओं को पहचानिये। ज़रूरत पड़े तो किसी विशेषज्ञ की मदद लीजिए। आजकल ऑनलाइन ऐसे टूल्स भी हैं, जिनके उपयोग से आप अपने स्किल को पहचान सकते हैं।

-अपने अतीत के बारे में मत सोचो क्योंकि अतीत की गलतियां या भविष्य बनाने की चिंता ही नेगेटिव थिंकिंग का मुख्य कारण है।  चाणक्य ने भी कहा है कि हमें बीते हुए कल के बारे में कभी भी पछतावा नहीं करना चाहिए और न ही भविष्य की चिंता होनी चाहिए क्योंकि विवेकवान व्यक्ति हमेशा वर्तमान में जीते हैं।  अगर आपको अपना जीवन सकारात्मक जीना है तो सदैव आज में जियें। आपके पास न तो आने वाला कल है और न हीं बीता हुआ कल। आपके पास बस एक ही चीज है वह है- आज। जो बीत गया सो बीत गया उसके बारे में पछताते रहोगे तो खुद को ही दुखी करोगे। आगे का रास्ता कहां से ढूंढोगे? आपने सुना ही होगा कि ‘बीती ताही बिसार दे, आगे की सुध ले' और वैसे भी इंसान अपनी $गलतियों से ही सीखता है। इनसे प्रेरणा लेकर आप आगे की बेहतरीन प्लानिंग कर सकते हैं। मान लीजिए आपने इस साल नौकरी बदलने का सोचा था लेकिन कोरोना संकट के कारण अच्छे विकल्प नहीं मिल रहे तो निराश मत होइए। किसी ऑनलाइन कोर्स को ज्वाइन कर लीजिए और अपने हुनर को निखारिए।

-कभी भी नकारात्मक वातावरण में न रहें, नेगेटिव थॉट्स वाले लोगों से दूर रहें। क्योंकि साथ का असर ज़रूर होता है। किसी जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करें। जब हम दूसरों के लिए कुछ अच्छा करते हैं तो अपने आप सकारात्मक महसूस करने लगते हैं। किसी भी उम्र के चाहे महिला हो या पुरुष, अगर जीवन में मित्र न हों तो जीवन में अकेलापन बढ़ता है। हम अपने सुख-दु:ख शेयर नहीं कर पाते, जिससे नकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं। जहां तक हो सके अपने दोस्त ज़रूर बनायें और उनके साथ वक़्त बिताएं। सच्चा दोस्त बड़ी से बड़ी मुश्किल से भी बाहर निकाल देता है। पंचतंत्र की चूहे और कबूतर की कहानी भला किसने नहीं सुनी।

-कोशिश करें कि हमेशा कुछ न कुछ करते रहें, अपने आप को व्यस्त रखें, कुछ काम नहीं है तो मोटिवेशनल गाने ही सुनें या किताबें पढ़ें, आधी टेंशन ख़त्म हो जाएगी। हर रोज थोड़ा समय निकालकर मेडिटेशन भी जरूर करें। ध्यान लगाकर एकाग्रचित हों, इससे मानसिक शांति तो मिलेगी ही साथ ही मानसिक विकास और किसी भी काम को करने में एकाग्रता भी बढ़ेगी। नकारात्मक विचार भी दूर होंगे सो अलग।

-ऐसे लोगों के साथ रहें जो खुश रहते हैं। हमेशा खुश रहने और हंसते रहने की कोशिश करें, देखिए ज़िंदगी कैसे बदलती है। हंसने के लिए किसी मौके की ज़़रूरत नहीं है। अपनी दिनचर्या में हंसने की आदत डाल लें। हंसना किसी थैरेपी से कम नहीं है। हंसने से हमारा ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और विचार सकारात्मक बनते हैं।

-अगर कोई आपकी गलतियों या कोशिशों पर हंस रहा है तो खुद को गलत मत समझो बल्कि सोचो कि कामयाब लोगों पर ज़माना पहले हंसा ही था पर जब कामयाबी आयी तो उनके मुंह पर ताले लग गए। एक बड़ी अच्छी कहानी है कि एक बार ज़िंदगी से हताश परेशान होकर एक युवक एक महात्मा के पास गया और बोला कि मेरा कोई काम नहीं बनता, जिसमें भी हाथ डालता हूं असफल हो जाता हूं। क्या करूं, आप ही कोई राह दिखायें। ऐसा मंत्र दें कि मेरे सब काम बनते जाएं। महात्मा उसकी बात सुनकर मुस्कुराए और उसे दो पौधे दिए- एक बांस का और एक कैक्टस का। और कहा कि रोज़ इन दोनों को पानी देना, चाहे कोई कितना भी हंसे या मना करे पर तुम अपनी दिनचर्या न बदलना। वह युवक दोनों पौधे लाकर आंगन में लगा देता है। रोज़ पानी भी देता। दिन बीतते जाते हैं और कैक्टस का पौधा बड़ा होने लगता है, फूल भी आ जाते हैं। लेकिन बांस का पौधा वैसे का वैसा ही रहता है। लोगबाग कहना शुरू करते हैं कि इसे तो बेकार ही पानी दे रहे हो, मेहनत ज़ाया कर रहे हो। ये तो बड़ा ही नहीं हो रहा और कैक्टस को देखो कैसे बढ़ रहा है। पर वह युवक महात्मा की बात मानकर दोनों को ही पानी देता रहता है और एक दिन देखता है कि बांस का पौधा रातों रात बढ़ना आरम्भ हो गया। वह हैरानी से भागा-भागा ये ख़बर देने महात्मा के पास गया तो महात्मा ने मुस्कुराते हुए समझाया कि जैसे बांस का पौधा पहले अपनी जड़ें मज़बूत करता है और फिर पनपता है उसी तरह संघर्ष के समय इंसान को अपने उत्साह को बनाए रखना चाहिए और अनुकूल समय आने पर दुगुने परिश्रम से जुट जाना चाहिए। ऐसे लोग ही जीवन में आगे बढ़ते हैं। हर कामयाब व्यक्ति की यही कहानी है। 

ये सीख उस युवक के साथ-साथ हम सब के लिए भी है। आपको अपनी जड़ें मज़बूत करनी है क्योंकि सफलता के फल उसी पेड़ पर ही लगेंगे। आप के मन में भी अगर नकारात्मक सोच चल रही है तो इन बातों को अपनाकर आइए बाहर, देर किस बात   की। 

 

 

 

 

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