हैं बजरंगबली के भक्त तो जरूर जाएं करमानघाट मंदिर

चयनिका निगम

23rd August 2020

हनुमान के भक्तों के लिए तेलंगाना का करमान घाट मंदिर खुद में असीमित आस्था समेटे हुए है। इस मंदिर के दर्शन एक बार जरूर करें।

हैं बजरंगबली के भक्त तो जरूर जाएं करमानघाट मंदिर
भगवान हनुमान के भक्तों के लिए कभी भक्ति का कारण बन जाते हैं तो कभी आस्था का समंदर। कभी वो बजरंगबली को अपने दुख बता कर सुकून ढूंढ लेते हैं तो कभी दर्शन भर से उनका मन शांत हो जाता है। ऐसे ही भक्तों के लिए तेलंगाना का करमानघाट मंदिर भक्ति के केंद्र का काम करता है। इस मंदिर की अपनी अलग ही आस्था और अहमियत है। ये राज्य के सबसे पुराने मंदिरों में से भी एक माना जाता है। इसका निर्माण बारहवीं शताब्दी में किया गया था। इस मंदिर में भक्तों का मानो तांता सा लगता है और आस्था में डूबे भक्त खुद को साकारात्मकता से लबरेज पाते हैं। इन अनोखे मंदिर की कहानी जान लीजिए और कोरोना के जाते ही यहां हो भी आइए-
कब जाएं-
इस मंदिर में हफ्ते के सातों दिन आया जा सकता है। ये मंदिर सोमवार से रविवार तक सुबह 6 से दोपहर 12 बजे तक और फिर शाम को 4.30 बजे से 8.30 बजे तक खुलता है। मंगलवार को समय थोड़ा अलग होता है। इस दिन सुबह 5.30 से दोपहर 1 बजे तक और शाम को 4.30 से 9 बजे तक मंदिर के दर्शन किए जा सकते हैं। 
कैसे जाएं-
तेलंगाना के करमानघाट से सागर रोड जाते हुए ये मंदिर बना है। हैदरबाद के महात्मागांधी बस टर्मिनल से ये जगह सिर्फ 12 किलोमीटर दूर है। अपने वाहन से सड़क रास्ते से भी इस मंदिर में आया जा सकता है। 
कहां रुकें-
इस मंदिर के दर्शन के लिए आएं तो करमान घाट के आसपास रुकने की बजाए हैदराबाद में ही रुकें, जहां आपके जेब के हिसाब से आराम से रुकने की व्यवस्था हो जाएगी। 
ऐतिहासिक महत्व जानिए-
माना जाता है कि जब राजा काकातिया जंगल में शिकार करने गए तो थक कर एक पेड़ के नीचे आराम करने लगे। तभी उन्हें सुनाई दिया कि कोई भगवान राम के नाम का अनुसरण कर रहा है। उनको उस व्यक्ति से मिलने की इच्छा जाग्रत हुई। वो उस आवाज के पीछे-पीछे चलते गए और बिलकुल जंगल के बीच में पहुंच गए। जंगल के बीच में पहुंच कर उन्हें भगवान हनुमान की मूर्ति मिल गई। ये मूर्ति बैठी हुई अवस्था में थी और आवाज इसी में से आ रही थी। राजा इसके बाद अपने घर आ गए लेकिन रात में उनको एक सपना आया। जिसमें भगवान हनुमान ने उनसे एक मंदिर बनाने की बात कही थी। मंदिर तुरंत बनवा दिया गया। लेकिन करीब 400 साल बाद औरंगजेब खुद यहां आया ताकि मंदिर को हटवा सके। लेकिन जब वो वहां पहुंचा तो कुछ ऐसी आवाजें उसे सुनाई दीं कि उसके हाथ से औजार छूट गया। तभी उसे एक आवाज सुनाई दी, ‘मंदिर तोड़ना है राजा तो कर मन घाट' मतलब अगर मंदिर तोड़ना है तो अपना दिल मजबूत कर लो। स्वर्ग से आई ये आवाज सुनने के बाद ही इस जगह का नाम करमान घाट पड़ा। 

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