भूटान में बिताइए यादगार तीन दिन

चयनिका निगम

25th August 2020

भूटान की यात्रा करने का मन जरूर बनाइए क्योंकि ये देश आपको कुछ बहुत अनोखे अनुभव देगा तो नेचर के भी बहुत करीब ले आएगा.

भूटान में बिताइए यादगार तीन दिन
भूटान एक ऐसा देश है, जिससे भारत के रिश्ते हमेशा ही अच्छे रहे हैं और ये अपने ईको फ्रेंडली माहौल के लिए जाना जाता है. गूगल पर सर्च कीजिए तो हरियाली, पहाड़ और इनके साथ खुली साफ हवा आपको खुद ही महसूस होने लगेगी. इस छोटे से देश को देखने जाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है. दक्षिणी एशिया की जमीन के आस-पास बने इस देश से हिमालय की जमीन भी पूर्वी छोर पर मिलती है. भारतीय राज्य असम और पश्चिम बंगाल भी इससे कुछ करीब हैं. इस देश का सबसे बड़ा शहर है थिम्पू, जो इसकी राजधानी भी है. इस देश की यात्रा का मन बने इससे पहले इसकी तीन दिनी यात्रा में जरूर देखी जाने वाली जगहों के बारे में जान लीजिए-
कैसे शुरू करें यात्रा-
आप दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट से भूटान के पारो इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए सीधी फ्लाइट मिलती है. दिल्ली के अलावा कोलकाता, गुवाहाटी और बागडोगरा से भी पारो के लिए फ्लाइट मिल जाती है. 
पहला दिन- 
सबसे पहले तो पारो पहुंचने के रस्ते में ही आपका दिल खुश हो जाएगा क्योंकि फ्लाइट से पारो की जाते हुए आपको माउंट एवेरस्ट का खूबसूरत नजारा दिखेगा. इसके साथ हिमालय के कई लुक भी आपको नेचर के काफी करीब ले आएंगे. इसके बाद भूटान की सीमा में उड़ते हुए भी आपको बेहद खूबसूरत नजारे देखने को मिलेंगे. ये आपकी यात्रा के आगाज के लिए सबसे बेहतरीन होगा. पारो आने के बाद आपका गाइड आपको थिम्पू की और ले जाएगा. इसके बाद शुरू होगी आपकी यात्रा, इसमें सबसे पहले आपको कुंसेंचोलिंग व्यू पॉइंट जाना होगा. यहां से आपको थिम्पू वैली की खूबसूरती दिखेगी. यहां आपको बुद्धा पॉइंट भी देखने को मिलेगा. मेमोरियल चोर्तेन यानी स्तूप देश के तीसरे राजा की याद में 1974 में बनवाया गया था. 
दूसरे दिन-
दूसरे दिन नाश्ता करने के बाद आपको फिर से थिम्पू से पारो आना होगा. यहां आप पारो वैली और तक्तसांग मोनेस्ट्री देखने का मौका मिलेगा. इस जगह को टाइगर्स नेस्ट भी कहते हैं. ये एक गुफा के चारों और बनी है, जिसमें गुरु रिमपोचे मेडिटेट करते हैं. माना जाता है कि गुरु बाघ की पीठ पर बैठ कर तिब्बत से आए थे. मोनेस्ट्री की मुख्य बिल्डिंग 1998 में आग में जल गई थी. 8वीं शताब्दी में बनी इस मोनेस्ट्री एक पत्थर के ऊपर बनी है, जो 9678 फीट की ऊंचाई पर है. यहां आना लम्बा समय लेता है. इसलिए खुद को इसके लिए तैयार करके ही आएं.
तीसरा दिन-
तीसरा दिन थिम्पू और पारो की नदिओं के बीच चुजोम जाने के लिए है. यहीं ओअर इन दोनों नदियों का मिलन होगा. इसके बाद थिम्पू शहर को जरूर घूमें. ये शहर खुद में मॉडर्न रंग भी समेटे हुए हैं. इस दिन आपको बुद्धा डोरडेनमा भी जाना चाहिए. ये क्यूंसेल्फोड्रेंग नेचर पार्क के ऊपर बना है. 

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