बच्चों की छुट्टियां: माइंड गेम्स, मानसिक स्वास्थ्य टॉनिक

Sushil Sarit

29th August 2020

पहेलियां बुझाना या अधूरी कहानी पूरी करवाना, यह भी तो एक शानदार माइंड गेम ही था। जो माइंड को शार्प तो करता ही था। आप खुद ही सोचिए यह जीवन भी क्या किसी पहेली से कम है। हर दिन कितनी-कितनी बार हम किसी न किसी क्विज में फंसते ही रहते हैं।

बच्चों की छुट्टियां: माइंड गेम्स, मानसिक स्वास्थ्य टॉनिक

कल एक मित्र का फोन आया औपचारिक बातचीत के बाद अचानक बोले, ‘ज़रा अपनी भाभी से बात कर लो' और अपनी मैडम को फोन पकड़ा दिया। ‘क्या बात है भाभी जी, कोई खास बात?' ‘नमस्ते भाई साहब, अब क्या बताऊं, मैं तो परेशान हो गई हूं। यह गुड्डू और बेबी दिन भर बस टीवी या फोन पर गेम, क्या करूं, इनकी अच्छी छुट्टियां हुई। वैसे कम से कम स्कूल जाते थे, होम वर्क मिलता था तो उस में बिजी रहते थे।' भाभी जी लगभग आधा घंटा इसी विषय में बताती रही और उस बीच मैं लगातार सोचता रहा कि इसका समाधान क्या हो सकता है?

आइए इस विषय में विस्तार से बात करते हैं। अपने बचपन की मुझे याद है, तब यह टीवी और स्मार्टफोन वगैरा-वगैरा तो थे ही नहीं, फिर भी छुट्टियों में बोरियत तो होती ही थी। ऐसे में अगर हमारी बुआ जी घर आ जाती थीं, तो वह किसी न किसी तरह हम बच्चों को ऐसा उलझा देती थीं, कि न बोरियत बचती थी न समय का पता चलता था।

जैसे उनका एक बेहद प्रिय तरीका था- पहेलियां बुझाना। हरी थी मन भरी थी, नौ लाख मोती जड़ी थी, राजा जी के बाग में दुशाला ओढ़े खड़ी थी, कह कर पूछतीं बताओ क्या है? बड़ी देर तक सोचने और दिमाग लगाने के बाद भी जब उत्तर नहीं सूझता था, तो खुद ही बता देती थीं, भुट्टा। लेकिन मजे की बात यह थी कि, तीन-चार पहेलियों के बाद ही दिमाग ऐसा चलने लगता था कि बड़ी-बड़ी कठिन पहेलियों के उत्तर भी बड़ी जल्दी सूझ जाते थे। इसी तरह कभी-कभी वह एक कहानी शुरू कर देतीं और शुरू करने के 2 मिनट बाद ही रोक देतीं और कहतीं अच्छा तुम बताओ अब कहानी में क्या होगा? पहेलियां बुझाना या अधूरी कहानी पूरी करवाना यह भी तो एक शानदार माइंड गेम ही था। जो माइंड को शार्प तो करता ही था।

आप खुद ही सोचिए यह जीवन भी क्या किसी पहेली से कम है। हर दिन कितनी-कितनी बार हम किसी न किसी क्विज में फंसते ही रहते हैं। अब ये क्विज कुछ सामाजिक भी हो सकती है, आर्थिक भी हो सकती है, बस धैर्य, चिंतन और समस्याओं को मैनेज करने की योग्यता ही तो हमें इन क्वीजेज के चक्रव्यूह से बाहर निकालती है और यह सब तभी संभव हो पाता है जब हमारा दिमाग ठीक से, सही दिशा में सोचने में सक्षम हो और उसे इसका अभ्यास भी हो अर्थात एक पंक्ति में कहें, तो हमारा मानसिक स्वास्थ्य परफेक्ट हो और दिमाग को ट्रेन करने का यही काम माइंड गेम करते हैं। अगर बच्चों को इस तरह के माइंड गेम की ओर प्रेरित कर दिया जाए, तो न केवल वे टीवी, स्मार्टफोन गेम्स की आभासी दुनिया से मुक्ति पा जाएंगे, वरन उनके मस्तिष्क की क्षमता का भी विकास होगा अर्थात बुद्धि, स्मृति, ध्यान, सही दिशा में सोच और समस्याओं को हल करने की सामर्थ्य का विकास होगा। पहेलियां हों या क्रॉसवर्ड पजल गेम्स सब में एक बात तो कामन है, कि समस्या का या पहेली का हल उसी में छुपा होता है अर्थात बच्चे को जैसे ही यह समझ में आता है कि हल कहां पर है, वह पहेली सुलझा लेता है। स्पष्ट है कि ये मानसिक अभ्यास धीरे-धीरे जब आदत में आ जाता है, तो अचेतन रूप से जीवन के हर क्षेत्र में सहायक सिद्ध होता है।

यूं मोबाइल पर ढेर सारे गेम्स माइंड गेम के नाम पर  मौजूद हैं, जैसे- आर आई क्यू... (जो एक तरह का मल्टीप्लेयर गेम है। यहां आप की शुरुआत एक सेल से होती है। यहां आपको अपने से छोटे सेल्स को निगलकर बड़ा सेल बनाना होता है। अगर आप बड़े सेल को इग्नोर करते हैं, तो वे आपको निगल जाएंगे। इसमें हजारों ईस्टर एग जैसे सेल होते हैं, इनके बीच आपको अपना अलग सेल बनाना होता है।)

क्रांति रोड -(इसमें आपके पास 100 से ज्यादा कैरेक्टर होते हैं। इस पूरे गेम में आपको सड़क पार करनी होती है। तेज रफ्तार गाड़ियों के बीच से आपको खुद को बचाते हुए निकलना पड़ेगा। अगर टकराए तो गेम ओवर)।

लिंबू - (इसमें आपका किरदार एक छोटे बच्चे का होगा, जो अपनी बहन को खोजने की कोशिश करता है। इसकी बहन लिंबू में कहीं खो गई है। मंजिल तक पहुंचने के लिए कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसमें काफी समय भी लगता है।)

लारा क्रॉफ्ट गो -(यह किसी मिशन पर ले जाता है। सही प्लानिंग और दिमाग का इस्तेमाल कर आगे बढ़ना होता है। सफ़र में मुश्किलें और दुश्मन भी मिलेंगे। सिर्फ आपकी सूझबूझ ही आप को सुरक्षित रख सकती है।

ऐसे ही ढेर सारे गेम हैं लेकिन बात घूमकर फिर वहीं पर आती है। एक तो दुबारा से बच्चा गैजेट्स में उलझ जाएगा, दूसरे ये सारे गेम्स कम से कम भारतीय परिवेश को ध्यान में रखकर तो तैयार नहीं किए गए हैं। तो जरूरत इस बात की है, कि ऐसे गेम ढूंढे जाएं, जिनमें गैजेट्स की जरूरत ही न पड़े और जो भारतीय परिवेश के अनुरूप हों। आइये कुछ ऐसे ही गेम्स की बात करते हैं-

वर्ग पहेली - यह किसी भाषा के शब्द और अर्थ के ज्ञान की पहेली होती है, जो प्राय: सफेद और काले रंग के वर्गाकार या आयताकार खानों के रूप में होती है। इस पहेली में सफेद खानों में अक्षरों को इस प्रकार भरना होता है, ताकि इस प्रकार बने शब्द दिए गए दिशा निर्देशों का पालन करें। इन दोनों के प्रारूप से तो लगभग हम सभी परिचित हैं। ये दोनों बेसिकली माइंडगेम ही हैं, किंतु ये थोड़ा बड़े बच्चों के लिए उपयुक्त हैं।

सुडोकू-जो वर्ग पहेली या शतरंज की पहेलियों की तरह लगभग हर अखबार में छपता है। इसमें एक वर्ग के अंदर 9 गुणा 9 के खाने बने होते हैं। इस खेल का उद्देश्य होता है, एक पंक्ति या स्तम्भ में 1 से 9 तक के अंकों को इस तरह भरना की कोई अंक दुबारा न आए और न ही 3 गुणा 3 के वर्ग में हो। अर्थात प्रत्येक अंक एक स्तंभ में एक पंक्ति में और एक ब्लॉक में केवल एक बार ही आए। एक पंक्ति में कहा जाए तो कह सकते हैं कि यह भौतिक तार्किकता को बढ़ावा देता है, मानसिक विकास को तेज करता है, और सोचने-समझने की शक्ति का विकास करता है।

आइए पहले 3 से 5 वर्ष तक के बच्चों के लिए गेम्स की बात करते हैं

3 से 5 या 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए दो गेम बहुत उपयोगी माने जाते हैं-

 पहला है पिक एंड सेपरेट

5 वर्ष तक के लिए अगर माइंड गेम्स की बात की जाए तो उन्हें आसानी से ये खिलाया जा सकता है।

उसे एक छोटी सी कहानी सुनाइए ।एक राजा था। उसकी 4 बेटियां थीं। एक बार राजा ने अपनी बेटियों से कहा कि वे उसके लिए अच्छी-अच्छी चीजें बनाकर खिलाएं। तीन बेटियों ने तो अपनी मां से पूछ कर कुछ चीजें जैसे- मिठाई, दही बड़ा... वगैरह बना लीं। अब छोटी बेटी ने कहा कि वह खुद अपने आप बनाएगी, तो राजा ने उसे खूब सारा सामान लाकर दे दिया। इतना कह कर आप एक बड़ी सी थाली में राजमा, खजूर, साबुत हल्दी जैसी चीजें मिलाकर रख दीजिए। और कहिए कि राजा ने कहा कि इन चीजों को अलग अलग करके लाओ, तब वह बताएगा की छोटी बेटी को क्या बनाना है। अब तुम उसकी हेल्प करो, तो राजा तुम्हें गिफ्ट देगा। बच्चा जब इन चीजों को अलग-अलग करके रखेगा तो एक तो उसकी कंसंट्रेशन पावर बढ़ेगी और दूसरे उसकी उंगलियों की ग्रिप भी मजबूत होगी।

कलर विद् वेजिटेबल

क्योंकि बच्चे रंगों के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं तो उन्हें रंगों से खेलने का मौका दीजिए। इसके लिए आप एक कागज पर कुछ छोटे-छोटे डॉट्स बना दें और दो-तीन रंगों की छोटी-छोटी डिब्बियां  या पूरा कलर बॉक्स लाकर उसके सामने रख दें। अब उससे कहें कि तुम्हें इन बिंदुओं पर फूल बनाना है। इसके लिए उसे पहले से ही काट कर कुछ चीजें दे दीजिए जैसे भिंडी को बीच से काट दीजिए। इस तरह आलू, प्याज काट दीजिए, आलू पर एक पैटर्न बना दीजिए और एक बार आप उसे बना कर दिखा  भी दें। बच्चे के लिए यह बिल्कुल नया अनुभव होगा। वह ध्यान से करेगा और उसे आनंद भी आएगा।

आइए कुछ ऐसे माइंड गेम्स की चर्चा करते हैं, जो 5 से 12 साल के बच्चों के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।

5 से 12 वर्ष तक के बच्चों के लिए माइंड गेम्स

एक पहेली अजब बूझिये शब्दों में से शब्द ढूंढिए... एक कागज पर एक अंग्रेजी का शब्द लिखिए और बच्चे से कहिए कि वह खोजे कि इस शब्द में कितने शब्द हैं।

उदाहरण के लिए- donkey में एक शब्द छुपा है key, indian में india, mango में दो शब्द छुपे हैं man और go.

इन और सारी चीजों में से क्या हो गया है गुम

एक टेबल पर एक साथ चीजें अलग-अलग तरीकों की रख दीजिए। उदाहरण के लिए पेंसिल, कॉपी, किताब वगैरा-वगैरा। इन सबको एक बड़े से कपड़े से ढक दीजिए। बच्चे को बुलाइए और कहिए कि अब मैं यह कवर हटा दूंगा। कवर को हटा दीजिए। अब बच्चे से कहिए कि वह अच्छी तरह देख ले कि मेज पर कौन-कौन सी चीजें रखी हैं।

इसके लिए बच्चे को ज्यादा से ज्यादा 30 सेकेन्ड दीजिए। उस से कहिए कि वह आंखें बंद कर 50 तक गिनती गिने और फिर आंखें खोले, इसी बीच इन 20 चीजों में से दो चीजों को हटा दीजिए। अब बच्चे को आंख खोलने को कहिए और उससे पूछिए कि वह बताए कि कौन सी दो चीजें गुम हो गई है? अगली बार इसी प्रकार से दो चीजों को और हटा दीजिए। इसी प्रकार पांच राउंड कीजिए। अब 10 मिनट का रेस्ट दे दीजिए और फिर इसी क्रम को दोहराइये। लेकिन इस बार टेबल पर रखी चीजें बदल दीजिए अर्थात वहां नई चीजें रख दीजिए।

 शतरंज

शतरंज बेहद पुराना माइंडगेम माना जाता है। यह केवल प्लानिंग का खेल है और 8 से 12 साल की उम्र के बच्चे बड़ी आसानी से इसे खेल सकते हैं।

उल्टी गिनती/उल्टी कविता

बड़ा आसान लेकिन बड़ा मजेदार है यह गेम। बच्चे को बोलें कि वह 100 से 1 तक गिनती उल्टी करके सुनाएं, लेकिन बिना रुके हुए। इसी तरह से कोई भी पापुलर कविता जैसे- ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार सुनाए यानी star little twinkle twinkle.

उल्टा पुल्टा गड्डम गड्ड सीधा करो बनाओ शब्द 

बड़ा आसान लेकिन बड़ा ही मजेदार है यह गेम।  बच्चे को अंग्रेजी या हिंदी का कोई शब्द उल्टा पुल्टा करके या गड़बड़ कर लिखकर दें और कहें कि दिए हुए टाइम लिमिट में वह इसे सीधा करें जैसे- आप लिखकर दें

Aymbob, इसका सही शब्द है bombay, covdisrey लिख कर दें, इसका सही शब्द है Discovery, इसे आप और भी सरल या कठिन बना सकते हैं।

उलझी कहानियां

कई कहानियां ऐसी होती हैं, जिनमें एक समस्या खड़ी कर दी जाती है और उसका हल बच्चे से पूछा जाता है। इससे बच्चे की विश्लेषण क्षमता बढ़ती है और कंसंट्रेशन भी पुख्ता होता है। जैसे एक कहानी आपको याद ही होगी, शेर बकरी और घास वाली  फिर भी हम आपको दोबारा से सुना देते हैं।

एक नदी के किनारे एक आदमी खड़ा हुआ था। उसे नदी पार करनी थी। उसके पास एक घास का गठ्ठर था, एक बकरी थी और एक शेर भी था। अब मुश्किल यह थी कि नदी पार करने के लिए जो नाव थी, उसमें एक बार में एक ही चीज ले जाई जा सकती थी और नाव भी उस आदमी को खुद ही चला कर ले जाना था। अब समस्या यह है कि अगर वह पहले घास को ले जाता है, तो शेर पीछे से बकरी को खा जाएगा। अगर वह शेर को ले जाता है, तो पीछे से बकरी घास को खा जाएगी। तो क्या किया जाए? अब बच्चा इसका हल सोचेगा, रास्ता निकालेगा।

चलिए उसे सोचने दीजिए इसका जवाब क्या है, वह बता देते हैं। पहले वह बकरी को लेकर के जाए तो जाहिर है कि पीछे से शेर तो घास खाएगा नहीं। फिर दोबारा घास लेकर के जाए और उधर से बकरी को वापस ले आए। तिबारा शेर को ले जाए और अकेला वापस आ जाए और चौथी बार बकरी लेकर चला जाए। इस तरह सभी उस पार पहुंच जाएंगे और कोई नुकसान भी नहीं होगा। आप ऐसी ही और कहानियां भी ढूंढ़ सकते हैं। आपको मिल जाएंगी।

मैगजीन सारांश

इस खेल में बच्चे को कोई बच्चों की मैगजीन दें और कहें कि 5 मिनट में वह इसे उलट-पुलट कर जितना पढ़ सकता है पढ़ ले और फिर उसे आंखें बंद कर 100 तक गिनती गिनने को बोलें और आंखें खोलने के बाद उससे पूछें कि वह बताए उस मैगजीन में उसने कौन-कौन सी कहानियां और कविताएं पढ़ीं या कम से कम किस किस विषय पर पढ़ीं।

गीत गाता चल

अपनी पसंद का या बच्चे की पसंद का एक गाना  चुनें और बच्चे से कहें कि मैं इसे गाने जा रहा हूं। जरा ध्यान से सुनना। गीत गाते हुए गीत में जानबूझकर 1-2 शब्द छोड़ दें। जैसे जिंदगी एक सफर है सुहाना यहां कल क्या हो किसने जाना... को गाएं, जिंदगी एक... है सुहाना यहां कल क्या हो... जाना। अब बाद में बच्चे से पूछें कि भाई गाने में क्या कमी थी।

शब्द अंताक्षरी

यह बड़ा आसान माइंड गेम है। आप बच्चे से कहें कि मैं एक शब्द बोलूंगा और तुम्हें उसके अंतिम अक्षर से दूसरा शब्द बोलना है। उदाहरण के लिए आप कहें india वह बोलेगा asia या ऐसे ही हिन्दी में बोलें भारत तो वह बोलेगा त से तबला।

उल्टी स्पेलिंग पज़ल

बच्चे से पूछें कि तुम्हारे मामा का नाम क्या है। वह बोलेगा (मान लीजिए) amit इसे उल्टी तरफ से बोल कर बताओ tima या हिंदी में अनीता तो इसका उल्टा होगा तानीअ।

कलर मैच/मिस मैच

एक कागज पर दस अलग-अलग रंगों से उनका वह नाम न लिखें जो है, यानी नीले रंग की कलम से लाल रंग लिखें, हरे रंग की कलम से काला लिखें। अब आप उसे जल्दी-जल्दी पढ़ने को कहें।

पहेलियां

पहेलियों के बारे में हम जानते हैं। आप बच्चे से पहेलियां पूछें। कुछ पहेलियां हम यहां दे

रहे हैं-

 -एक किले के दो ही द्वार, उनमें सैनिक लकड़ी दार, टकराए जब दीवारों से खत्म हो जाए उनका संसार। (उत्तरमाचिस)

 -दो सुंदर लड़के, दोनों एक ही रंग के, एक बिछड़ जाए तो दूसरा काम न आए। (उत्तरजूता)

एक साथ आए दो भाई, बिन उनके दूर शहनाई, पीटो तब वह देते संगत, फिर आए महफ़िल में रंगत।(उत्तरतबला)

-प्रथम कटे तो दर हो जाऊं, अंत कटे तो बंद, केला मिले तो खाता जाऊं, बताओ मैं कौन हूं।(उत्तरबंदर)

-  सुंदर-सुंदर सपने दिखाती, पास सभी के रात में आती, थके मांदे को दे आराम, बताओ उसका नाम।(उत्तरनींद)

पानी से निकला पेड़ ,पात नहीं पर डाल अनेक, इस पेड़ की ठंडी छाया, बैठ के नीचे उसको पाया, बताओ क्या। (उत्तर- फव्वारा)

कुछ ध्यान देने योग्य बातें

 -इन सारे गेम्स में टाइम लिमिट रखें।

बच्चे की तुलना भूलकर भी दूसरे बच्चों से न करें।

-बच्चे से कहें कि तुम्हें खुद ही अपने आप से कंपटीशन करना है, यानी कल जहां तक तुम पहुंचे थे, उससे आगे बढ़ना है।

-बच्चे को हर गेम पर नंबर दें और कहें कि आज कल से ज्यादा नंबर लाने हैं।

-  बच्चे को उत्साहित करें कि वह अगर पूरे सप्ताह में इतने नंबर लाएगा तो उसे एक गिफ्ट मिलेगा।

यह माइंड गेम्स के कुछ उदाहरण मात्र हैं। हम स्वयं कुछ ऐसे ही माइंड गेम्स डेवलप कर सकते हैं। ये सभी बच्चे की स्मृति क्षमता बढ़ाने में, ध्यान देने की क्षमता बढ़ाने में, कंसंट्रेशन बढ़ाने में, आत्मविश्वास बढ़ाने में और माइंड शार्प करने में सहायक सिद्ध होते हैं। उसे वही गेम खिलाए जाए, जिनमें मोबाइल का उपयोग न हो।

-  कापी-पेंसिल के उपयोग को वरीयता दें।

-इन सब से बच्चों की बोरियत भी दूर होगी और मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होगा।

ये सारे ही गेम्स, जो कभी भी खिलाये जा सकते हैं, खासतौर से छुट्टियों में तो बच्चों को इंगेज करने के लिए बड़े ही उपयोगी हैं और ये मानसिक स्वास्थ्य के लिए टॉनिक का काम करते हैं। 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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