आपका टेंशन न बन जाए कहीं हाइपरटेंशन

शशिकांत 'सदैव’

4th September 2020

टेंशन शब्द से तो हर कोई परिचित है, क्योंकि यह हमारे जीवन का एक आम हिस्सा बन गया है पर हाइपटेंशन यह क्या होता है? यह आम टेंशन से किस प्रकार व कितना भिन्न होता है? यह कब, किसे और क्यों होता है या हो सकता है?, क्या है इसके कारण, लक्षण और निवारण आदि जानिए इस लेख से।

आपका टेंशन न बन जाए कहीं हाइपरटेंशन

हाइपरटेंशन, जिसे कि उच्च रक्त चाप भी कहा जाता है, ऐसी स्थिति है जिसमें रक्त वाहिनियों में रक्त का दबाव लगातार बढ़ा हुआ होता है। दबाव जितना अधिक होगा ह्रदय को उतनी अधिक क्षमता से पम्प करना पड़ेगा। हाइपरटेंशन के कारण विभिन्न अंग क्षतिग्रस्त हो सकते हैं और साथ ही अनेक रोग जिनमें किडनी का फेल होना, हार्ट फेल होना, स्ट्रोक, या हृदयाघात आदि हो सकते हैं।

तीन में से एक भारतीय व्यक्ति हाई ब्‍लडप्रेशर की समस्‍या से ग्रस्‍त है। बच्‍चों से लेकर वयस्‍कों में हाइपरटेंशन की समस्‍या बढ़ती जा रही है। हाई ब्‍लड प्रेशर और हाइपरटेंशन हर साल 1.5 मिलियन लोगों की जान लेती है।

हाइपरटेंशन के कारण

देर से भोजन करना, स्‍मार्टफोन पर लंबे समय तक रहना और शारीरिक व्‍यायाम ना करना जैसी आधुनिक जीवनशैली की आदतों की वजह से हाइपरटेंशन की समस्‍या होने लगती है। कुछ कारण ऐसे भी होते हैं जिनके लिए आप जिम्‍मेदार नहीं होते जैसे उम्र, लिंग, जीवनशैली आदि। ये उच्‍च रक्‍तचाप का कारण बनते हैं। हाइपरटेंशन का कारण 90 प्रतिशत मरीजों को पता ही नहीं चला कि वे हाई ब्‍लड प्रेशर की बीमारी से कैसे ग्रस्‍त हो गए।

उच्‍च रक्‍तचाप का सामान्‍य कारण एक्लेरोसिस है। एक्लेरोसिस के कई कारण जिम्‍मेदार हैं जो हाइपरटेंशन पैदा करते हैं जिनमें स्‍ट्रेस, आधुनिक जीवनशैली, गलत खान-पान और शारीरिक व्‍यायाम की कमी आदि शामिल है। इनमें से कुछ लोगों को हाई ब्‍लड प्रेशर के साथ सेकेंडरी हाइपरटेंशन की बीमारी थी जिसमें उच्‍च रक्‍तचाप खुद किडनी रोग, थायरायड रोग, पिट्यूट्री ग्‍लैंड, प्रेग्‍नेंसी, ओबेसिटी और अनिद्रा या किसी दवा के हानिकारक प्रभाव के कारण पैदा होता है।

हाइपरटेंशन के प्रकार

हाइपरटेंशन के 2 प्रकार हैं, प्राथमिक (ऌप्राइमिरी) हाइपरटेंशन और द्वितीयक (सेकेंडरी) हाइपरटेंशन। प्राथमिक हाइपरटेंशन अज्ञात कारण से हुए उच्च रक्तचाप को कहते हैं। अधिक आम है और समस्याओं से बचने के लिए इसे औषधियों से नियंत्रित किया जाना चाहिए। द्वितीयक हाइपरटेंशन सीधे कारण से होने वाले रक्तचाप को कहा जाता है, जैसे कि किडनी का रोग, अथवा ट्यूमर, यह अत्यंत कम होता है और इसकी चिकित्सा हाइपरटेंशन होने के कारण पर निर्भर करती है।

कैसे जांचे हाइपरटेंशन?

हाइपरटेंशन का निर्धारण एक योग्य चिकित्साकर्मी द्वारा किया जाता है जो रक्तचाप को एक यन्त्र स्फिग्मोमेनोमीटर (यन्त्र में भुजा पर लगाने का कफ, डायल, पम्प, और वाल्व होता है) से मापता है। सिस्टोलिक और डायस्टोलिक अंकों को लिख लिया जाता है और उनका मिलान माप-तालिका से किया जाता है। यदि दबाव 140/90 से अधिक हो तो आपको हाइपरटेंशन होना मान लिया जाता है।

साथ ही आपके डॉक्टर हृदय रोग के लक्षण, आंखों की क्षति, और आपके शरीर में हुए अन्य परिवर्तनों को देखने के लिए शारीरिक परीक्षण कर सकते हैं।

आमतौर पर रक्तचाप की जानकारी दो अंकों द्वारा दी जाती है - उदाहरण के लिए, 120 पर 80 (जिसे 120/80 द्वद्व॥द्द इस तरह लिखा जाता है)। इनमें एक या दोनों अंक का मान अधिक हो सकता है।

ऊपर के अंक को सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर (हृदय के सिकुड़ते समय का दबाव) और नीचे के अंक को डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर (हृदय के फैलते समय का दबाव) कहा जाता है।

सामान्य रक्तचाप तब होता है जब आपका रक्तचाप 120/80 द्वद्व॥द्द से कम हो। उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) होता है जब आपका रक्तचाप 140/90 द्वद्व॥द्द या अधिक हो। यदि आपके रक्तचाप अंक 120/80 या अधिक हों, लेकिन 140/90 से कम हों तो इसे प्री-हाइपरटेंशन (रक्तचाप की पूर्वावस्था) कहा जाता है। 

किन्हें हो सकती है शिकायत?

आपको आवश्यक हाइपरटेंशन हो सकता है यदि आप अनुवांशिक रूप से इसके प्रति संवेदनशील हैं, अर्थात यदि आपके अभिभावकों को हाइपरटेंशन रहा हो तो आपको भी इसके होने की सम्भावना अधिक होती है। यदि आपका वजन अधिक है या आप अत्यधिक नमक (अचार, पापड़, और समुद्री मछली, चिकन इत्यादि) अधिक मात्रा में लम्बे समय तक लेते हैं और आपकी जीवन शैली आरामदायक है, तो आपको हाइपरटेंशन हो सकता है।

कैसे बचें हाइपरटेंशन से?

आप हाइपरटेंशन से बचने के लिए नियमित एरोबिक व्यायाम और उचित आहार के साथ सक्रिय जीवन शैली अपनाएं। नमक युक्त आहारों से परहेज। वजन घटाने से भी रक्तचाप कम होता है। अधिक धूम्रपान और मदिरापान बंद करें। कम उम्र समूहों में आवश्यक हाइपरटेंशन को जीवन शैली में परिवर्तन द्वारा नियंत्रित किया जाता है। यदि ये उपाय असफल हों तो आयु और हाइपरटेंशन की गंभीरता के अनुसार औषधियां दी जाती हैं। भविष्य की समस्याओं से बचने के लिये हाइपरटेंशन निरोधी दवाएं जीवन भर लेनी होती हैं। अपवादस्वरूप यदि रक्तचाप सामान्य सीमाओं में लौट आये तो दवाएं धीरे-धीरे घटाते हुए बंद की जाती हैं।

हाइपरटेंशन से जुड़ी समस्याएं

यदि हाइपरटेंशन को नियंत्रित नहीं किया गया तो ये आंखों, किडनी और मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है। लम्बे समय में हार्ट फेल हो सकता है। यदि रक्तचाप नियंत्रित नहीं है तो हेमोरेजिक ब्रेन स्ट्रोक और हृदयाघात का खतरा भी अत्यधिक होता है।

क्या खाएं?

हाइपरटेंशन से सामंजस्य स्थापित करने के लिए फाइबर और पोटैशियम युक्त तथा कम संतृप्त वसा वाले आहार लेने चाहिए। फल, सब्जियां, साबुत अनाज और कम वसा वाले डेरी उत्पादों की उचित मात्रा आवश्यक है।

आहार में प्रतिदिन दो से तीन बार साबुत अनाज और उनके उत्पाद जैसे कि भूरे चावल, मल्टीग्रेन ब्रेड, ताजी सब्जियों की अधिक मात्रा और तीन से चार बार फल लेने चाहिए।

डेरी उत्पाद जैसे कि दूध, पनीर, और दही लिए जा सकते हैं किन्तु ये कम वसा वाले होने चाहिए। पोल्ट्री उत्पाद (अंडे की सफेदी और चूजे से प्राप्त सऌफेद गोश्त) और समुद्री आहार लिए जा सकते हैं। साथ ही विभिन्न मेवे, गिरी, दालें और फलियां भी ली जानी चाहिए।

हाइपरटेंशन से लड़ने में सहायक है यह निम्राहार

--  साबुत अनाज (जैसे कि जई), लहसुन, अलसी, केले, आलू, खुबानी, कद्दू के बीज, ब्रोकली, काजू, तैलीय मछली (जैसे कि सैलमन और सारडाइन)।

-- उच्च रक्तचाप हेतु संतुलित आहार में अल्प मात्रा में संतृप्त और ट्रांस-फेट (रेड मीट, फास्ट फूड), और मध्यम मात्रा में अन्य वसा (जैतून, केनोला के तेल)।

क्या न खाएं?

--  शराब और कैफीनयुक्त पेयों का सीमित सेवन।

--  तम्बाकू उत्पादों का प्रयोग न करें।

-- नमक का प्रयोग कम करें - प्रतिदिन चार ग्राम या चाय का आधा चम्मच, इससे अधिक नमक ना लें।

-- पापड़ और अचार।

--  कैन में बंद फल और सब्जियां।

--  प्रोसेस्ड आहार और पैक आहार जैसे कि चिप्स, सॉस, ऌफ्रीज में रखे स्नैक्स, कैन में बंद सूप, और पकाए जाने वाले ब्रोत्थस जिनमें सोडियम की मात्रा बहुत अधिक होती है।

--  बेकरी उत्पाद- नमकयुक्त संतृप्त वसा वाले पैक उत्पाद, सोडियम की अधिकता वाले खमीर उत्पादक (बेकिंग पॉउडर, सोडा) इससे रक्तचाप में वृद्धि हो सकती है।

--शक्कर और इससे बनी अन्य मीठी वस्तुएं जैसे कि मिठाइयां, गोलियां, पेस्ट्री, केक इत्यादि से बचना चाहिए क्योंकि इनकी अधिकता मोटापा बढ़ाती है।

--आहार में संतृप्त और ट्रांस वसा के सेवन से बचना चाहिए। सभी तरह का तला आहार, मक्खन, मार्गरिन, नारियल का तेल, आदि को कम से कम मात्रा में लेना चाहिए।

--कॉफी का सेवन प्रतिदिन 2 कप तक सीमित करना चाहिए।

व्यायाम

मध्यम व्यायाम प्रतिदिन 30 मिनट, सप्ताह के अधिकतर दिनों में करने की सलाह दी जाती है।हर वो गतिविधि जो आपकी सांस और ह्रदय की गति को बढ़ाती है, एरोबिक व्यायाम कहलाती है, इनमें: घरेलू कार्य जैसे कि बगीचे की घास काटना, पत्तियां छांटना, या फर्श रगड़ कर साफ करनासक्रिय खेल जैसे बास्केटबॉल या टेनिस खेलना। सीढियां चढ़ना, पैदल चलना, दौड़ना, साइकिल चलाना, तैरना।

योग

हाइपरटेंशन धमनियों में दबाव की अधिकता के कारण होता है। उच्च रक्तचाप के लिए योग की मुद्राएं लाभदायक होती है क्योंकि योग व्यक्ति का तनाव घटाने में सहायक होता है। उच्च रक्तचाप हेतु उपयोगी योग मुद्राएं हैं: सूर्यनमस्कार, सुखासन, बद्धकोणासन।

संगीत और ध्यान

गहन ध्यान तकनीकों के नियमित अभ्यास से रक्तचाप में कमी होती है। सामान्य आनंददायक कार्य जैसे कि संगीत सुनना या गर्म पानी के टब में आराम भी लाभदायक हैं और आपको मानसिक और शारीरिक स्तर पर आनंद और शांति देते हैं।

घरेलू उपाय (उपचार)

धूम्रपान त्यागें।

अपना आदर्श वजन प्राप्त करें और

बनाये रखें।

शराब के सेवन को सीमित करें।

नियमित व्यायाम करें।

नमक का प्रयोग सीमित करें।

आहार में पोटैशियम युक्त वस्तुएं शामिल करें।

क्रोध और तनाव नियंत्रित करें।

अपने स्वास्थ्य रक्षक दल से सम्पर्क रखें।

जीवन शैली में परिवर्तन, दवाओं का सेवन और अपने स्वास्थ्य रक्षक दल की सलाह मानकर, आप अपने रक्तचाप को नियंत्रण में रख सकते हैं और भविष्य की समस्याओं से बच सकते हैं।

अन्य उपाय

लहसुन- लहसुन ब्लड प्रेशर ठीक करने में बहुत मददगार घरेलू वस्तु है।यह रक्त का थक्का नहीं जमने देती है। धमनी की कठोरता में लाभदायक है। रक्त में ज्यादा कोलेस्ट्रॉल होने की स्थिति का समाधान करती है।

सूखे मेवे- जैसे बादाम काजू, आदि उच्च रक्त चाप रोगी के लिये लाभकारी पदार्थ हैं।

चावल ​- (भूरा) उपयोग में लावें। इसमें नमक, कोलेस्ट्रॉल और चर्बी नाम मात्र की होती है। यह उच्च रक्त चाप रोगी के लिये बहुत ही लाभदायक भोजन है। इसमें पाये जाने वाले कैल्शियम से नाड़ी मंडल की भी सुरक्षा हो जाती है।

अदरक- प्याज और लहसून की तरह अदरक भी काफी फायदेमंद होता है। बुरा कोलेस्ट्रोल धमनियों की दीवारों पर प्लेक यानी कि कैल्शियम युक्त मैल पैदा करता है जिससे रक्त के प्रवाह में अवरोध खड़ा हो जाता है और नतीजा उच्च रक्तचाप के रूप में सामने आता है। अदरक में बहुत ही ताकतवर एंटीओक्सीडेंट्स होते हैं जो कि बुरे कोलेस्ट्रॉल को नीचे लाने में काफी असरदार होते हैं। अदरक से आपके रक्तसंचार में भी सुधार होता है, धमनियों के आसपास की मांसपेशियों को भी आराम मिलता है जिससे कि उच्च रक्तचाप नीचे आ जाता है।

लालमिर्च- धमनियों के सख्त होने के कारण या उनमें प्लेक जमा होने की वजह से रक्त वाहिकाएं और नसें संकरी हो जाती हैं जिससे कि रक्त प्रवाह में रुकावटें पैदा होती हैं। लेकिन लाल मिर्च से नसें और रक्त वाहिकाएं चौड़ी हो जाती हैं, फलस्वरूप रक्त प्रवाह सहज हो जाता है और रक्तचाप नीचे आ जाता है।

--  एक बड़ा चम्मच आंवला का रस और इतना ही शहद मिलाकर सुबह -शाम लेने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है।

-- जब ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ हो तो आधा गिलास मामूली गरम पानी में काली मिर्च पॉउडर एक चम्मच घोलकर 2-2 घंटे के फ़ासले से पीते रहें। ब्लड प्रेशर सही मुकाम पर लाने का बढ़िया उपचार है।

--  तरबूज का मगज और पोस्त दाना दोनों बराबर मात्रा में लेकर पीसकर मिला लें। एक चम्मच सुबह-शाम खाली पेट पानी से लें। 3-4 हऌफ्ते तक या जरूरत मुताबिक लेते रहें।

--  बढ़े हुए ब्लड प्रेशर को जल्दी कंट्रोल करने के लिये आधा गिलास पानी में आधा नींबू निचोड़कर 2-2 घंटे के अंतर से पीते रहें। हितकारी उपचार है।

--  तुलसी की 10 पत्ती और नीम की 3 पत्ती पानी के साथ खाली पेट 7 दिवस तक लें।

--  पपीता आधा किलो रोज सुबह खाली पेट खावें। बाद में 2 घंटे तक कुछ न खावें। एक माह तक प्रयोग से बहुत लाभ होगा।

-- नंगे पैर हरी घास पर 15-20 मिनट चलें। रोजाना चलने से ब्लड प्रेशर सामान्य हो जाता है।

--  सौंफ, जीरा, शक्कर तीनों बराबर मात्रा में लेकर पॉउडर बनालें। एक गिलास पानी में एक चम्मच मिश्रण घोलकर सुबह-शाम पीते रहें।

-- उबले हुए आलू खाना रक्त चाप घटाने का श्रेष्ठ उपाय है। आलू में सोडियम (नमक) नहीं होता है।

--  पालक और गाजर का रस मिलाकर एक गिलास रस सुबह-शाम पीएं। अन्य सब्जियों के रस भी लाभदायक होते हैं।

--नमक दिन भर में 3 ग्राम से ज्यादा न लें।

-- अण्डा और मांस ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाली चीजें हैं। ब्लड प्रेशर रोगी के लिए वर्जित हैं।

-- करेला और सहजन की ऌफली उच्च रक्त चाप-रोगी के लिये परम हितकारी हैं।

-- केला, अमरूद ब्लड प्रेशर रोग को दूर करने में सहायक कुदरती पदार्थ हैं।

--  मिठाई और चॉकलेट का सेवन बंद कर दें।

 

-

कमेंट करें

blog comments powered by Disqus

संबंधित आलेख

उच्च रक्तचाप...

उच्च रक्तचाप यानी 'खामोश हत्यारा'

सजगता ही बचा...

सजगता ही बचाव है लकवा में

किडनी संबंधी...

किडनी संबंधी जानलेवा समस्याएं- कैसे हो बचाव...

किडनी प्रॉब्...

किडनी प्रॉब्लम को न करें अनदेखा

पोल

आपको कैसी लिपस्टिक पसंद है

वोट करने क लिए धन्यवाद

मैट

जैल

गृहलक्ष्मी गपशप

क्या आप भी स...

क्या आप भी स्किन...

स्किन केयर डिक्शनरी

सुपर फूड्स फ...

सुपर फूड्स फाॅर...

माइग्रेन का सिरदर्द अक्सर सुस्त दर्द के रूप में शुरू...

संपादक की पसंद

क्या आज जानत...

क्या आज जानते हैं,...

आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक नायाब घड़ी के बारे में।...

महिलाएं पीरि...

महिलाएं पीरियड्स...

मासिक धर्म की समस्या

सदस्यता लें

Magazine-Subscription