अनदेखा न करें इन 7 लक्षणों को

कुमोदकर कुमार

4th September 2020

अक्सर महिलाएं सेहत से जुड़ी रोजमर्रा की तकलीफों को नजरअंदाज कर देती हैं लेकिन बेहतर है लक्षण को नजरअंदाज न करें और डॉक्टर के पास तुरंत जाएं। सेहत के प्रति बरती गई ये लापरवाही आगे चलकर उनके लिए घातक सिद्ध हो सकती है।

अनदेखा न करें इन 7 लक्षणों को

महिलाएं जीवन के हर दुख दर्द को आसानी से सहती हैं और आगे बढ़ती हैं। अपने जीवन में किसी छोटी-मोटी तकलीफ को तो महिलाएं कुछ समझती ही नहीं हैं। अपनी सेहत से जुड़ी समस्या को भी वे हमेशा मामूली रूप में ही लेती हैं। लेकिन हर बार अपनी शारीरिक तकलीफ को नजरअंदाज करना और लापरवाही बरतना कई बार उन्हें महंगा भी पड़ सकता है। यहां हम कुछ ऐसी आम समस्याओं के बारे में बात करेंगे जो कि अक्सर महिलाओं में देखी जाती हैं लेकिन ज्यादातर महिलाएं इन कारणों को अनदेखा कर देती हैं जो कि उनके लिए घातक भी हो सकता है।

कमर में दर्द

आह, ऊह, आउच का दर्द तो लगभग हर महिला को अपने जीवनकाल में झेलना ही पड़ता है। कमर दर्द को लेकर औरतों के मन में कई भ्रांतियां होती हैं। कोई इसे कमजोरी की निशानी समझता है तो कोई कमर की आम समस्या। लेकिन कमर व पीठ दर्द के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें एक सबसे बड़ा होता है स्लिप डिस्क। नई दिल्ली स्थित सर गंगाराम हॉस्पिटल के सर्जन डॉ. सतनाम सिंह छाबड़ा के अनुसार, 'हमारी गलत दिनचर्या व अन्य गलत आदतों के कारण रीढ़ की हड्‌डी पर दबाव अक्सर बढ़ने लगता है जिस कारण कई अवस्थाओं का जन्म होता है जो कि शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। जैसे स्लिप डिस्क। कमर में स्थित डिस्क प्राय : रबड़ की तरह होती है जो इन हड्डियों को जोड़ने के साथ-साथ उनको लचीलापन प्रदान करती है। तो, इन्हीं डिस्क में उत्पन्न हुए विकारों को कहते हैं स्लिप डिस्क और यह कमर दर्द से जुड़ी बिमारियों की पहचान है। कमर से लेकर पैरों में जाता हुआ दर्द जिसके साथ ही साथ पैरों का सुन्न या भारी होना या चीटियां चलने जैसा एहसास भी हो सकता है। आगे चलकर दर्द के मारे चलने में असमर्थ और कई बार लेटे-लेटे भी कमर से पैर तक असहनीय दर्द होता रहता है। कमर में होने वाला दर्द आपके लिए आगे चलकर घातक सिद्ध हो सकता है। जरूरी है इसे नजरअंदाज बिलकुल ना किया जाए।'

पैरों में दर्द

सामान्य तौर पर कई महिलाएं पैर दर्द से पीड़ित होती हैं लेकिन डॉक्टर के पास जाने की जहमत नहीं उठाती हैं। पैरों में दर्द अक्सर वेरीकोज वेन के कारण होता है। शरीर में रक्तवाहिनियां होती हैं जिनमें छोटे-छोटे वाल्व होते हैं जो कि रक्त को रक्त प्रवाह की सही दिशा में पहुंचाते हैं ताकि रक्त हृदय तक पहुंचता रहे। वाल्व उस छोटे से दरवाजे की तरह होते हैं जो कि रक्त के प्रवाह होते ही बंद हो जाते हैं ताकि रक्त विपरीत दिशा में न बह सके। नई दिल्ली के वसंत कुंज स्थित फोर्टिस हास्पिटल के प्रमुख इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप मुले के अनुसार 'इसके कई कारण है जैसे बढ़ता मोटापा, गर्भावस्था, बढ़ती उम्र आदि में ये वाल्व सही ढंग से कार्य नहीं कर पाते हैं।ऐसी अवस्था में रक्त वाल्व में ही जमा हो जाता है और एक नॉर्मल प्रक्रिया की तरह प्रवाहित नहीं हो पाता है। इस प्रकार ये वाल्व सूज जाते हैं और बड़े हो जाते हैं। इसी अवस्था को वेरीकोज वेन कहा जाता है। इस बीमारी का उपचार संभव है।'

छाती में दर्द

छाती या उसके आसपास दर्द, ऐंठन या किसी भी प्रकार का दर्द महसूस होना, कभी-कभी सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण हों तो अक्सर महिलाएं इसे एसिडिटी व गैस समझकर ध्यान ही नहीं देती हैं। नोएडा स्थित मेट्रो हॉस्पिटल के निदेशक एवं जाने माने हार्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. पुरुषोत्तम लाल का कहना है कि, 'ऐसा भी हो सकता है कि यह लक्षण एसिडिटी या जलन के नहीं बल्कि किसी बड़ी हार्ट डिसीज की ओर इशारा करते हो। शुरुआती अवस्था में महिलाओं को इतना भयानक दर्द नहीं होता जैसा कि हार्ट अटैक के समय होता है इसीलिए वे इसे हल्के से ही लेती हैं। महिलाओं की मुख्य ही नहीं बल्कि उन छोटी धमनियों में भी ब्लाकेज बन जाते हैं जो कि सीधे तौर पर दिल तक रक्त पहुंचाने का काम करती हैं। इस अवस्था को छोटी धमनी हार्ट डिसीज के नाम से जाना जाता है या इसे माइक्रोवैरकुलर डिसीज के नाम से भी पुकारा जाता है। जब भी महिलाएं डॉक्टर के पास जाती हैं तो उनके दिल को बहुत हद तक नुकसान हो चुका होता है, इसलिए प्राय: होने वाले ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज ना करें।'

जोड़ों व घुटने में दर्द

अक्सर हमारे जोड़ों व घुटनों में लगातार दर्द होता रहता है और हम सब यही सोचकर इस दर्द को नजरअदाज कर देते हैं कि ज्यादा काम या थकावट के चलते दर्द हो रहा है जबकि ऐसा जरूरी नहीं है। मुंबई स्थित पीडी हिंदुजा हॉस्पिटल के आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. संजय अग्रवाल के अनुसार, 'इस अवस्था को आर्थराइटिस कहते हैं। यह बहुत ही भयानक स्थिति होती है क्योंकि इससे पीड़ित रोगी दर्द से कराह उठते हैं व अपने रोजमर्रा के कार्य करने के लिए भी आश्रित हो जाते हैं। इसीलिए यदि किसी को भी घुटनों में तकलीफ हो तो उसे महामारी का रूप लेने से पहले ही चिकित्सा प्रारंभ कर दें।'

भयानक सिर दर्द

महिलाओं को अक्सर सिरदर्द से जूझते देखा जाता है। तब भी महिलाएं शुरुआत में तो दर्दनिवारक दवाओं की ओर ही रुख करती हैं। गुरुग्राम स्थित मेदांत हास्पिटल के न्यूरोवेस्कुलर इंटरवेशन सेंटर के इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. विपुल गुप्ता का कहना है कि, 'भयानक सिरदर्द माइग्रेन, ब्रेन ट्यूमर आदि हो सकता है। किसी-किसी केस में भयानक सिरदर्द ब्रेन में ऐन्यूरिज्यम का कारण भी हो सकता है। जब दिमाग में रक्त प्रवाह करने वाली कोशिकाओं में सूजन आ जाती है तो उस अवस्था को ब्रेन ऐन्यूरिज्यम के नाम -से जाना जाता है। यह ऐन्यूरिज्यम ऐसा खतरा है जो कि कभी भी आपके जीवन पर धावा बोल सकता है। तो, सिररर्द को कभी नजरअंदाज न करें।

आखों की समस्याएं

अक्सर लोगों को टी.वी. देखने व कंप्यूटर पर ज्यादा काम करने से आखों में कुछ प्रेशर की समस्याएं उभरने लगती हैं। आखों की दृष्टि कमजोर व धुंधली होने लगती है । हमें इस बात का अंदाजा भी होता है लेकिन तब भी चश्मा पहनने के डर से हम हमेशा आखों की दृष्टि के प्रति लापरवाही बरतते रहते हैं जो कि गलत है। फिर जब थक-हार कर हम डॉक्टर के पास जाते हैं, तो पता चलता है कि जिस चश्मे के डर से हम इतनी दूर भाग रहे हैं, वही चश्मा हमारे जीवन भर का साथी बन जाता है। हालांकि बहुत से लोगों को यह पता नहीं है कि यदि शुरुआती दौर में ही दृष्टि की जांच कराई जाए व नियमित रूप से चश्मा लगाया जाए तो चश्मा उतर भी सकता है।

दांतों का दर्द

बहुत से लोग कई वर्षों तक दांतों के दर्द को लेकर बैठे रहते हैं। वे दांतों की थोड़ी या छोटी सी समस्या को बढ़ा-बढ़ाकर बहुत बड़ा कर देते हैं। जब हालात बद से बदतर हो जाते हैं, तभी वे डॉक्टर के पास जाते हैं। उस समय डॉक्टर के पास भी उनका दांत निकालने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचता है जबकि हर छह महीने में कम से कम एक बार दंत चिकित्सक के पास जाकर दांत जरूर दिखाना चाहिए।

 

 

 

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