भावनाएं और हमारा दिल

विजय शर्मा

4th September 2020

मन को शांत करने के लिए जीवन में अच्छे विचार और दर्शन आवश्यक है। अगर हमारे जीवन में कोई बड़ी तस्वीर ही नहीं, तो हम छोटी-छोटी बातों को सोचकर, उनका ध्यान करके अपने को उत्तेजित या परेशान करते रहते हैं।

भावनाएं और हमारा दिल

जमाने से इस तरह की बातें कही जाती रही है हृदय से धन्यवाद, हृदय से आभारी, तहे दिल से शुक्रिया, मेरा दिल कहता है, दिल की बातें दिल तक पहुंचती हैं तो हम किस दिल की बात कर रहे हैं।

असली दिल

जो जन्म से मृत्यु तक सीने में धड़कता रहता है और सारे शरीर को ऊर्जा पहुंचाता है जिससे हमारे क्रियाकलापों के लिए शक्ति मिलती है या फिर भावनाओं का केंद्र, जिसका कोई आकार नहीं, जिसको हम आंखों से देख भी नहीं सकते, लेकिन फिर भी हमारे ठीक होने का अहसास वहीं से आता है। हमारी मानसिकता का प्रभाव शरीर के सभी अंगों पर पड़ता है ऐसी मान्यता काफी पुरानी है लेकिन अक्सर यह बात लोग तुरंत समझ नहीं पाते।

भावनाओं, चाहत और विचारों का असर किसी हद तक इसी तरह की स्थिति कोरोनेरी आर्टरी डिजीज में भी पाया जाता है। हमारी भावनाएं कोरोनेरी धमनियों में अवरोध पैदा तो नहीं करती परंतु दर्द और कष्ट को बढ़ाती जरूर हैं। यह बातें धमनियों के अंदर की चिकनी सतह को खुरदरा बना देती हैं जिससे वहां पर कोलेस्ट्रॉल की तरह के तत्त्व जमा होने लगते हैं, रक्त के कण इकट्ठे होने लगते हैं और खून जमना शुरू हो सकता है।

संक्षेप में, जब हम दूसरों को क्षमा करते हैं, पुरानी अप्रिय बातों को भूलते हैं और उनकी अच्छाइयों को देखने की कोशिश करते हैं तो हमारा मन शांत होता है। इसके विपरीत, यह सोचना कि दूसरे हमें नुकसान पहुंचाने की नीयत से ही काम कर रहे हैं। हमारे बारे में ही सोच रहे हैं और हम, उन्हें संदेह की दृष्टि से देखते हैं तो यह हमारे दिल पर बोझ हो जाता है। हां, कुछ लोग हमें तंग करने की नीयत से काम कर सकते हैं, लेकिन वह अपवाद स्वरूप हैं।

घर पर, बाहर में और आपसी संबंधों में सहनशीलता की अहम भूमिका होती है। ये हमारे मन को शांति प्रदान करती है और जीवन सुखमय बनाती है। उसके विपरीत अगर हम हर किसी के प्रति संदेहात्मक दृष्टिकोण अपनाते हैं, तो हमारे मन की शांति और सुख को घर निकाला ही जाता है।

मन को शांत करने के लिए जीवन में कुछ अच्छे विचार और थोड़ा दर्शन आवश्यक है। अगर हमारे जीवन में कोई बड़ी तस्वीर ही नहीं, तो हम छोटी-छोटी बातों को सोचकर, उनका ध्यान करके अपने को उत्तेजित या परेशान करते रहते हैं। ऐसा करने से हमारे शरीर में जरूरत से अधिक केटाकोलिमीन्स खून में मिल जाती है और वे कई प्रकार से हमारे दिल को प्रभावित करती हैं, ब्लड प्रेशर और हृदय गति भी बढ़ती है, दिल चिड़चिड़ा होता है। हृदय का कार्यभार बढ़ जाता है और संकरी धमनियों में खून जम सकता है। जिससे हार्ट अटैक होने की संभावना बढ़ जाती है।

हमारे शरीर के अंदर कंट्रोल पैनल सूक्ष्म रूप से परिवर्तन करता है। सुबह 4 बजे से 10 बजे तक अधिक मात्रा में केटाकोलिमीन्स प्रवाहित होती हैं और उसका नतीजा है इस 6 घंटे के समय में ही 65-75 प्रतिशत हार्ट अटैक और स्ट्रोक होते हैं। अपने दिल से बोझ हटाने के लिए या दिल पर बोझ न डालने के लिए यह जरूरी है कि हम एक अच्छा और ईमानदार इंसान बनें। यह सही है कि कहना आसान है और करना काफी मुश्किल काम। खासतौर से उन लोगों के लिए जो सारी जिन्दगी झूठ सच और तिकड़म में ही लगे रहते हैं। कभी-कभी तो इन तिकड़मी लोगों को पता तक नहीं चलता कि झूठ और फरेब के जाल में उलझ गए हैं। सच्चाई आज की दुनिया में वह सच है जिससे मुझे लाभ मिलता है और झूठ वह है जिससे मुझे नुकसान होता हो।

आंतरिक भावनाओं और संवेदनशीलता को हमारे समाज में अच्छी मान्यता प्राप्त है। आज भी दिल से कही गई बात दिल तक पहुंचती है। सोचे समझे नपे-तुले शब्द दिल को छू भी सकते हैं और हवा में बिखर भी सकते हैं। जब हम किसी दूसरे के गम से गमगीन होते हैं, दूसरे के दुख को अपने ही दुख की तरह महसूस करते हैं और दुखी जन के लिए सहायता का हाथ बढ़ाते हैं, तो बस यही भगवान के रास्ते में एक कदम है।

मूल मंत्र है समभाव

समभाव हमारी मानसिकता और व्यवहार में मध्यमार्ग ही नहीं, मन के संतोष और शांति के आधार बन सकते हैं। खुशी और गम में सम्भाव रखना सबसे जरूरी मानना चाहिए। जीवन सभी तरह के रंग का बॉक्स है। इस बक्से में सुख और दुख के सारे शेड मिले हुए रहते हैं, चाहे हम कितने ही ताकतवर या कमजोर क्यों न हो। हमें हर छोटी बड़ी समस्या का सामना करते समय अपने मानसिक संतुलन को खोना नहीं चाहिए।

जीवन में दर्शन बहुत जरूरी है

हमारे जीवन में उद्देश्य की प्राप्ति और मन की खुशी के अलावा भी कुछ और लक्ष्य होना चाहिए। हर छोटी-छोटी बात पर उबलने लगना, किसी का हल नहीं है। हमारे जीवन में सब तरह की परिस्थितियों का अलग-अलग मूल्यांकन होना चाहिए। जैसा सब्जी बाजार में, किराने या कपड़े की दुकान पर होता है। सब चीजों का मोल समान नहीं हो सकता।

अपनी बुद्धि को कैसे बचाएं?

हाल ही में हुई खोजों से एक बात साफ हो गई कि अगर अपने दिमाग को ठीक और कारगर बनाए रखना चाहते हैं तो दिमाग को लगातार काम में लाते रहिए। जब हम दिमाग का इस्तेमाल नहीं करते तो वह सिकुड़ने लगता है, उसमें जंग लगने लगती हैं। उसकी काम करने की क्षमता घट जाती है। मस्तिष्क के उपयोग के तरीके हैं हिसाब किताब करना, वाद-विवाद, शतरंज का खेल, हाजिर जवाबी, मुश्किल मैथ्स की समस्या को सुलझाने की कोशिश करना।

 

 

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