मुस्कुराने के हैं कई लाभ

शशिकांत 'सदैव’

8th September 2020

कुछ लोगों को आपने देखा होगा कि वह विकट परिस्थितियों में भी सदैव मुस्कुराते रहते हैं, वहीं दूसरे कुछ लोग होते हैं जो बात-बात पर दुखी हो जाते हैं और जीवन से शिकायते करते रहते हैं। जबकि शोध भी बताते हैं कि सदैव प्रसन्न रहने वाले व्यक्ति निरोगी, स्वस्थ एवं सदैव सकारात्मक रहते हैं।

मुस्कुराने के हैं कई लाभ

​सदैव प्रसन्न रहना व मुस्कुराते रहना सबसे बड़ी प्रार्थना है एवं एक महान साधना है। हमेशा मुस्कुराते रहना चाहिए। क्योंकि अन्य प्रार्थनाओं की अपेक्षा इससे आप स्वयं को परमात्मा के अधिक करीब अनुभव करेंगे। मानव के मुख पर मुस्कान सौभाग्य का चिह्नï है। हंसना मनुष्य की स्वाभाविक क्रिया है। विधाता की सृष्टि का कोई भी दूसरा प्राणी इस ​​प्रकार स्वाभाविक हंसता हुआ दिखाई नहीं देता। भंवरें, तितलियां भी खिले फूल पर ही बैठते हैं मुरझाये फूल पर नहीं, मुस्कुराता हुआ चेहरा व्यक्ति के व्यक्तित्व में चार चांद लगा देता है। मुस्कुराते व्यक्ति के पास क्रोध, ईर्ष्या, प्रतिहिंसा की भावना नहीं आती। क्रोध की आग को शान्त करने वाली यह अमूल्य दवा है। हंसी का एक स्वरूप है मुस्कान, गरीब-अमीर कोई भी प्रसन्नता व मुस्कुराहट के धन को चाहे तो इकट्ठा कर सकता है। जीवन में कितनी भी मुसीबतें रहें, कितनी भी कठिनाईयों में हों यदि हम प्रसन्नता को अपनाएंगे तो धनी एवं प्रसन्नत जीवन पाएंगे। विलियम शैक्सपीयर ने तो यहां तक कहा है 'मुस्कान के बल पर तुम चाहे जो पा सकते हो, तलवार से इच्छित वस्तु भी नष्ट हो जाती है।'

यद्यपि सदैव प्रसन्न रहना व मुस्कुराते रहना कोई साधारण बात नहीं, क्योंकि कभी मान है कभी अपमान, कभी सुख है तो कभी दुख, कभी हानि है तो कभी लाभ, कभी जीवन है तो कभी मृत्यु, कभी यश है तो कभी अपयश, कभी अनुकूलता है तो कभी प्रतिकूलता। जीवन में घटित विभिन्न घटनाओं का यदि विचारपूर्वक मन्थन किया जाये, तो सदैव अमृत ही नहीं मिलता, कितनी बार विष के घूंट भी पीने पड़ते हैं। इस प्रकार परस्पर विरोधी परिस्थितियों में सदा सभी प्रभु से प्रार्थना करते रहे कि हम उनके कृपा पात्र बन सकें एवं सदैव प्रसन्न व मुस्कुराते रहे।

हंसिए और स्वस्थ रहिए

अनेक चिकित्सा शास्त्रियों एवं विशेषज्ञों ने शोध करने के बाद यह निष्कर्ष निकाले हैं कि जो लोग हंसते या मुस्कुरातें नहीं वो औरों की अपेक्षा जल्दी गंभीर रूप से बीमार पड़ जाते हैं। ये देखा गया है कि उदासी से मानसिक व शारीरिक शक्तियां निर्बल हो जाती है। हंसने व मुस्कुराने से चेहरे पर कांति आ जाती है। प्रसन्नता तो बसंत ऋतु की तरह है जो हृदय की सब कलियां खिला देती है। ये प्रसन्नता सारे सद्गुणों की जननी है। मुस्कुराते हुए प्रसन्न मन से किया हुआ भोजन रुचिकर व पौष्टिक हो जाता है। मन में एक नया उत्साह पैदा होता है। हंसने व मुस्कुराने से जीवन की व्यवस्था, थकान, तनाव, एकाकीपन व दर्द में भी राहत मिलती है। खुलकर हंसने से व सदैव प्रसन्न रहने से पाचन संस्थान ठीक रहता है, रक्ताणु वृद्धि करते हैं, स्नायु संस्थान ताजा होता है, स्वास्थ्य बढ़ता है। हंसने से बुद्धि का त्वरित विकात होता है। सेल्समैन, दुकानदार, बैंक क्लर्क आदि के लिए हंसना उनकी कार्यशीलता में सहायक होता है। किन्तु टाईपिस्ट, मशीनों पर कार्य करने वाले लोगों के लिए हानिकारक भी हो सकता है, हो सकता है हंसने से उनकी एकाग्रता भंग हो। नवयुवतियों का नवयुवकों व पुरुषों के साथ अनावश्यक हंसना व मुस्कुराना अनेक प्रकार की भ्रांतियां पैदा कर सकता है। लेकिन समाज की वर्तमान दुर्दशा को देखकर सर्तक होकर ही रहना चाहिए याद रखिये हंसमुख व प्रसन्न मुख-लोग बड़ी उम्र प्राप्त करते हैं। स्वस्थ रहने की सर्वोत्तम अद्भुत एवं पौष्टिक औषधि है। ये शरीर के स्नायुओं के लिए उत्तम व्यायाम है। प्रसन्नता की अनेक बाधाएं भी हैं। उनसे भी सदैव बचने का प्रयास करते रहें। कामनाओं, इच्छाओं, आवश्यकताओं को यथासंभव सीमित करें, क्योंकि इनका कोई अंत नहीं है। एक पूरी होती है दूसरी जागृत हो जाती है। कोई कामना पूर्ण न हुई तो प्रसन्नता व मुस्कुराहट विलुप्त हो जायेगी। कर्म करें लेकिन फल की आशा न करें। आशानुकूल प्राप्त न होने पर प्रसन्नता व मुस्कुराहट समाप्त हो जायेगी। परोपकारी जीवन बनायें तन-मन, दिमाग को अधिक से अधिक व्यस्त रखें। व्यर्थ का चिन्तन, चिंताएं, ईर्ष्या बदले की भावना इत्यादि से बचते रहें। वेद, शास्त्र, संत व अर्न्तात्मा के मन के विपरीत कार्य न करें, दूसरों की अच्छाई व अपने प्रति किये उपकारों को सदैव याद रखें। किसी की बुराई व अपने प्रति किये अपकार को भूलने में ही भलाई है।

बुरे मार्ग पर चलने से हमारा तेज, बल, बुद्धि व प्रसन्नता व मुस्कुराहट समाप्त हो जाती है। अत: सद्मार्ग का अनुसरण करें। बुरा न देंखे, बुरा न सुने, बुरा न बोले, बुरा न सोचें, बुरा न पढ़े तथा यह सब तभी संभव है जब अच्छी संगति करेंगे। नियमित व अच्छी दिनचर्या तथा आहार विहार संतुलित व सात्विक रखें। परमात्मा का हृदय से स्मरण करते हुए कर्तव्य पालन करें अन्यथा दुख का कारण व प्रसन्नता का बाधक बनेगा। यदि दुखी हो तो दूसरों के अपने से भी बड़े दुख को देखकर के अपने दुख को कम अनुभव करें और प्रसन्नता को बरकरार रखें।

चिकित्सकों का मानना है कि हंसी सबसे बेहतरीन दवा है। बल्तिमोर स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ मेरीलैंड मेडिकल सेंटर के हृदयरोग विशेषज्ञों के अनुसार हंसी हृदय रोगों से बचाव करती है। शोध से स्पष्ट हुआ है कि हृदयाघात से पीड़ित व्यक्ति उसी उम्र के स्वस्थ व्यक्तियों की तुलना में कम हंसते या मुस्कराते हैं। यूनिवर्सिटी के डॉ. मिशेल मिलर का कहना है कि 'बेशक अभी तक यह ठीक से पता नहीं चल पाया है कि हंसी हृदय को कैसे स्वस्थ रखती है, लेकिन इस बात के प्रमाण अवश्य हैं कि हंसते समय दिमागी तनाव खत्म हो जाता है।' हंसने से चेहरे पर ताजगी बनी रहती है। चेहरे पर झुर्रियां पड़ने से रोकने का इलाज भी हंसी में ही छिपा है।

क्या आप खुश व्यक्तियों में शामिल हैं?

नीचे दी गई कुछ विशेषताएं ऐसे लोगों की हैं जो खुश रहते हैं और खुलकर हंसते हैं। पढ़िए और जानिए कि क्या आप भी खुश और हंसमुख लोगों की श्रेणी में आते हैं या नहीं।

खुश रहने वाले लोग जीवन के ताल से ताल मिलाते हैं

हर किसी की जिंदगी में कुछ ऊंचे-नीचे रास्ते आते हैं। कुछ ऐसी कठिन परिस्थितियां आती हैं, जिनसे जूझना मुश्किल होता है। खुश रहने वाले लोग ऐसी स्थितियों का सूझबूझ व शांत मन से निपटारा करते हैं। उन्हें सामान्य जीवन का एक हिस्सा मानते हैं। सकारात्मक सोचते ही नहीं, उसके अनुसार कार्य भी करते हैं। कुछ करने की चाह को सिर्फ सोच तक रखना उचित नहीं है। अगर आप खुश रहना चाहते हैं तो हंसिए और खुशी को वास्तविकता में अपनाइए।

दृष्टिकोण स्पष्ट होता है

हंसमुख और खुश लोग फिजूल की बातों में समय नहीं गंवाते। उन्हें जिस चीज की जरूरत होती है, वे सीधे उसी की मांग करते हैं। उनका दृष्टिकोण हर चीज के मामले में स्पष्ट होता है।

बदलाव को आतुर होते हैं

खुश रहने वाले लोग नए बदलावों को अपनाने से हिचकिचाते नहीं हैं, बल्कि बदलाव को खुलेमन से स्वीकार करते हैं।

हारने में विश्वास नहीं रखते

किसी काम को करने से पहले ही बुरे परिणाम के बारे में सोचना ही आधी हार है। खुश रहने वाले व्यक्ति कभी हार नहीं मानते। वे हमेशा जीत का स्वाद चखने को आतुर रहते हैं।

वर्तमान में जीते हैं

समय के साथ चलना खुशमिजाज लोगों की आदत होती है। खुशियों से भरी जिंदगी जीने का राज है कि आप वर्तमान में जिएं। वर्तमान को बेहतर तरीके से जीना, अच्छे भविष्य का निर्माण करना है।

योजनाएं बनाकर चलते हैं

खुश लोगों का उनके भविष्य पर पूरा नियंत्रण होता है। इस तरह वे वर्तमान में तो खुश रहते ही हैं भविष्य की खुशी भी सुनिश्चित कर लेते हैं।

लाफ्टर थैरेपी

विश्वभर में लाफ्टर थेरेपी को काफी बड़े स्तर पर अपनाया जा रहा है। इसके द्वारा तनाव से तो राहत मिलती ही है इसी के साथ यह एक प्राकृतिक दर्दनिवारक भी है। लाफ्टर थेरेपी द्वारा कई व्यक्तियों को सर्दी-जुकाम जैसे रोगों से छुटकारा मिल सकता है। अब चिकित्सकों द्वारा एड्स जैसी घातक बीमारी के लिए भी लाफ्टर थेरेपी को प्रयोग किए जाने की योजना है। जिन लोगों को माइग्रेन, आर्थराइटिस, स्पॉन्डिलाइटिस, मांसपेशियों में अकड़न जैसी तकलीफें होती हैं, उन्हें भी लाफ्टर थेरेपी से काफी लाभ मिला है।

हंसी को सबसे बेहतरीन एरोबिक व्यायाम भी माना जाता है। दिल से हंसने पर बहुत ही अच्छा एहसास होता है। इसका सीधा-सा कारण है कि हंसते समय शरीर अधिक ऑक्सीजन प्राप्त करता है, साथ ही इससे रक्त संचार बेहतर होता है।

लाफ्टर क्लब

खुश रहने के मॉडर्न तरीके में लाफ्टर क्लब को भी शामिल किया जाता है। भारत में लाफ्टर क्लब की बढ़ती संख्या ने इसकी लोकप्रियता को साबित कर दिया है। अभी इसकी पहुंच सिर्फ शहरों तक ही है। भारत में लगभग 400 लाफ्टर क्लब हैं। इन क्लबों में करीब 25 हजार से अधिक सदस्य हैं। इन क्लबों में डॉक्टर, उद्योपतियों, व्यवसायी, सरकारी अधिकारी और अन्य कई पेशों से संबंधित व्यक्ति खासतौर से जुड़े हुए हैं। इन क्लबों से जुड़े सभी व्यक्ति किसी पार्क आदि में इकट्ठे होकर लगभग 20-25 मिनट के लिए हंसते हैं। इस काम को सुबह-सुबह किया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है, जिससे दिन की अच्छी शुरुआत हो।

ठहाके लगाने के लिए किसी अच्छे चुटकुले या कुछ अजीबोगरीब हरकतों से शुरुआत की जाती है। जैसे-जैसे समय बढ़ता है, वैसे-वैसे ऊट-पटांग हरकतें बढ़ती है और इसी के साथ हो-हो, हा-हा की आवाजें और तेज हो जाती हैं। आजकल कई क्लब हंसने के नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। इनमें डांसिंग लाफ, धस्वगिंग लाफ और कॉकटेल लाफ जैसी हंसने की नई किस्में इजाद की गई हैं। ऐसा नहीं है कि इन लाफ्टर क्लबों का कोई फायदा नहीं है। लगभग 72 प्रतिशत सदस्यों का मानना है कि उनके सहकर्मियों के साथ संबंध बेहतर हुए हैं। 85 प्रतिशत व्यक्ति मानते हैं कि उनमें आत्मविश्वास आया है और 66 प्रतिशत लोगों में ध्यानकेंद्रण की क्षमता काफी हद तक बढ़ी है। मानसिक तनाव के कामों को करने वाले लोगों ने स्वीकारा है कि उनकी सिरदर्द और तनाव समस्या का काफी हद तक समाधान हो गया है।

 

 

 

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