चाहते हैं पितरों का आर्शीवाद ,तो श्राद्ध पक्ष में लगाएं ये विशेष पौधे

Jyoti Sohi

11th September 2020

श्राद्ध पक्ष में पितरों की संतुष्टि के लिए तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन के साथ ही पौधे लगाकर भी संतुष्ट करना चाहिए। कुछ पेड़-पौधे सकारात्मक उर्जा देते हैं। श्राद्ध पक्ष में पीपल का पेड़ खासतौर से लगाना चाहिए। इसके साथ बरगद, नीम, अशोक, बिल्वपत्र, तुलसी, आंवला और शमी का पेड़ लगाने से पर्यावरण को साफ रखने में मदद होगी। पितरों के साथ देवता भी प्रसन्न होंगे।

चाहते हैं पितरों का आर्शीवाद ,तो श्राद्ध पक्ष में लगाएं ये विशेष पौधे
हर व्यक्ति के जीवन में पितृ पक्ष का एक खास महत्व होता है। इन दिनों में हम लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं और पितरों की संतुष्टि के लिए विशेष कार्य करते हैं।  कहा जाता है कि श्राद्ध पक्ष में पितर अपनी संतानों के बीच पृथ्वी लोक पर आते हैं, और संताने भी अपने पित्रों के निमित्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार श्राद्ध कर्म, दान पुण्य जैसे अनेक छोटे बड़े कर्म श्रद्धापूर्वक करते ही हैं । लेकिन इन सबके अलावा भी एक ऐसा भी महान कर्म है जिसे करने से पितर अति प्रसन्न हो जाते हैं । जी हां श्राद्ध पक्ष में पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन के साथ ही पौधे लगाकर भी उनको संतुष्ट करना चाहिए। कुछ पेड़-पौधे सकारात्मक उर्जा देते हैं। इसलिए ग्रंथों में बताए गए शुभ पेड़-पौधे पितृपक्ष में लगाए जाए तो पितरों का विशेष आशीर्वाद और कृपा मिलती है। शास्त्रों के अनुसार अगर पितृपक्ष या पितरों की पुण्य तिथि पर संताने अपने पूर्वजों की याद में देव वृक्ष पीपल का पेड़ लगाते है तो पितर अति प्रसन्न हो जाते हैं। इसके साथ बरगद, नीम, अशोक, बिल्वपत्र, तुलसी, आंवला और शमी का पेड़ लगाने से पर्यावरण को साफ रखने में मदद भी मिल जाती है। साथ ही पितरों के साथ देवता भी प्रसन्न होंगे। जाने वो कौन से वृक्ष हैं, जिन्हें लगाने से पितर प्रसन्न हो जाते हैं ।
पीपल
पीपल वृक्ष को देव वृक्ष भी कहा जाता हैं, क्योंकि इसमें भगवान विष्णु जी वास करते हैं। ऐसी मान्यता हैं की पित्रों का निवास स्थान भी इसी पर होता है। कहा जाता है कि वहीं से श्राद्ध की तिथियों के अनुसार अपने परिजनों के पास सुक्ष्म रूप से जाते हैं, और पितरों के निमित्त निकाले गए अन्न को ग्रहण करके प्राणवायु के रूप में पीपल पर लौट आते हैं । इसलिए कहा जाता हैं कि अपने पित्रों की याद में किसी मंदिर या अन्यत्र कही पवित्र स्थान पर पीपल का पेड़ लगाना चाहिए, क्योंकि पीपल वृक्षों की आयु सैकड़ों वर्षों की होती है, इसलिए इस पेड़ को लगाने से पितरों का आशीर्वाद भी चिरकाल तक अपनी संतोनों और संतानों की संतानों को आजीवन मिलता रहता हैं जिससे वे जीवन में खुश रहते हैं और आगे भी बढ़ते हैं। पुराणों के अनुसार पीपल में पितरों का वास होता है। इसलिए पीपल के पेड़ पर दूध में पानी और तिल मिलाकर चढ़ाना चाहिए। इससे पितर संतुष्ट होते हैं।
बरगद 
हिंदू परंपराओं के अनुसार बरगद के पेडद्व का एक खास महत्व है। कहा गया है कि इस पेड़ के मूल में ब्रह्म्रा, मध्य में विष्णु और अग्रभाग में भगवान शिव का वास माना जाता है। वहीं शास्त्रों में बरगद को आयु देने वाला तथा मोक्ष देने वाला पेड़ भी माना गया है। बरगद के पेड़ को ही साक्षी मानकर माता सीता ने राजा दशरथ के लिए पिंडदान किया था। बरगद पर जल चढ़ाकर इसकी परिक्रमा करने से पितर प्रसन्न होते हैं। एक अन्य कथा के अनुसार इस वृक्ष के नीचे ही देवी सावित्री ने अपने पति को पुर्नजीवित किया था।
 
अशोक 
अशोक के पेड़ को शुभ माना गया है। इसमें भी भगवान विष्णु का वास होता है। इसलिए इस पेड़ को लगाने और इसकी पूजा करने से पितृ देवता संतुष्ट और प्रसन्न होते हैं।
तुलसी 
कहा जाता है कि तुलसी का पौधा लगाने और उसकी पूजा से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। भगवान विष्णु के प्रसन्न होने से पितर भी संतुष्ट हो जाते हैं। इसलिए तुलसी का पौधा पितृपक्ष में जरूर लगाना चाहिए। तुलसी के पौधें में रोज जल डालने से भी पितृ प्रसन्न होते हैं। यूं तो तुलसी का पौधा हर घर में होता है क्योंकि सनातन परंपरा के अनुसार यह पौधा घर में तरक्की लाता है। मान्यता है कि अगर मृतक के मुख में तुलसी दल रख दिया जाता है तो उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है। इसलिए यदि पितृ पक्ष में तुलसी का पौधा घर में लगाया जाए। साथ ही इसके ऊपर नियमितरूप से जल चढ़ाया जाए तो इससे पितर प्रसन्न होते हैं और उनके आशीर्वाद से जातक के जीवन की सारी दिक्कतें दूर हो जाती हैं।
बेलपत्र 
यूं तो भगवान शिव को अत्यंत पसंद है और बेल पत्र चढ़ाने से शिवजी अत्यंत प्रसन्न होकर जातक को सुख-शांति का आशीर्वाद देते हैं। लेकिन पितृ पक्ष के दौरान अगर बेल का पौधा लगाया जाए तो शिवजी तो अत्यंत प्रसन्न होते ही हैं। साथ ही पूर्वजों की मुक्ति का मार्ग भी प्रशस्त होता है। इसलिए विद्वानजन पूर्वजों की कृपा प्राप्ति के लिए पितृपक्ष में बेल का पौधा लगाने के लिए कहते हैं।
शमी
वैसे तो शमी के पौधे को शनि देव का पौधा माना जाता है। कहते हैं कि इस पौधे को जहां भी लगाया जाए वहां से सारी नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है। इसलिए पितृ पक्ष के दौरान शमी का पौधा घर में जरूर लगाएं, इससे पितर प्रसन्न होते हैं। उनकी कृपा से अधूरे पड़े कार्य पूरे होने लगते हैं। तरक्की के नए रास्ते खुलते हैं।
परिवार के मृत सदस्यों के मुताबिक अलग-अलग पेड़-पौधे लगाए जा सकते हैं।
बच्चे- अमरूद, आम या इमली का पेड़ लगाएं।
कुंवारी लड़की-  आंवला, अनार या अंजीर का पेड़ लगाया जा सकता है।
शादीशुदा महिला-  अशोक, तुलसी या सीताफल का पेड़ लगाना चाहिए।
दुर्घटना में मृत लोगों के लिए- पीपल, बरगद, नीम या शमी का पेड़ लगाएं।
माता, दादी और परदादी-  पलाश, पारस पीपल या चन्दन का पेड़ लगाया जा सकता है।
पिता, दादा और परदादा- बिल्वपत्र, पीपल, बरगद या आंवले का पेड़ लगाना चाहिए।
सनातन धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है, मान्यता है कि इन दिनों अगर नियमपूर्वक पूजा कर ली जाए तो पितर प्रसन्न होते हैं। इस बार पितरों को प्रसन्न करने के लिए ये पौधे जरूर लगाएं। ऐसा करने से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है और सुख-समृद्धि का वास होता है। वृक्ष और पेड़ पौधों में भी प्राण होते हैं। ये हर तरह की सकारात्मक और नकारात्मक उर्जा को महसूस कर लेते हैं। कुछ वृक्ष केवल सकारात्मक उर्जा देते हैं और कुछ केवल नकारात्मक. शुभ वृक्षों पर तो पितरों और आत्माओं का निवास भी माना जाता है। अगर पितृ पक्ष में शुभ वृक्ष लगाये जाएं या उनकी उपासना की जाय तो पितरों का विशेष आशीर्वाद मिल सकता है।

 

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