हम नारियों की व्यथा

Poonam Mehta

11th September 2020

घर में लड़-झगड़ के मायके जाने की धमकी देने लायक भी नहीं छोड़ा तूने तो हमें। जीवन में कोई उमंग ही नहीं बचेगी, न शृंगार, न परिहास तो ऐसा नारी जीवन किस काम का! हम नारियों पे तरस खा और अब तू चीन ही लौट जा।

हम नारियों की व्यथा

ओ कोरोना। तेरा सत्यानाश हो। तू नर्क में जाए और तुझे कोई पानी भी न पूछे। अभी प्रकट होना था तुझको, जब फेशियल करवा के, नई ड्रैस खरीद के, मैं बस तैयार ही थी। घर का रेनोवेशन ही नहीं करवाया था, गहने भी सारे एक्सचेंज करवा लिए थे। बाई को देने को पुराने कपडे भी गठरी बांध के तैयार कर लिये थे। गर्मियों में ठंडे प्रदेश के टिकट बुक करवाये ही थे। मेरी किट्टी पार्टी इस महीने होनी थी। पैसे के पैसे आ जाते और सभी सहेलियों पर इम्पोर्टेड चीजों का रूआब भी झाड़ लेती पर तुमसे रहा नहीं गया।
पिछली किट्टी पर पता है मैं अपने इन्हीं नायाब आइडियाज के कारण कितनी पापुलर हो गयी थी। अब तो बाई भी नहीं आ रही, जो गली-गली जा के मेरी शापिंग के बारे में बातें करे। मेरी लिपस्टिक, नेल पालिश सब बेकार हो रही है। चलो घर पर कोई नहीं आ सकता तो क्या मुहल्ले में ही चहल कदमी कर लेती। कम से कम दो चार ड्रैसेज और सैंडिल ही प्रदर्शित हो जाते पर लाक डाउन ने तो घर में ही कैद कर दिया है। 
कोरोना तेरे कारण सब बंद है। कभी सोचा है तूने हम बेचारी नारियां कैसे जी रही हैं। वाट्सएप, फेसबुक, टीवी, रेडियो, ट्विटर और टिक टॉक पर तेरे ही चर्चे हैं। न गॉसिप, न बुराई, न चुगली, न अफेयर की बातें और तो और पतियों को घर बिठवा के तूने तो हमें कालापानी की सजा ही दे डाली। शादी के बाद से आज तक इतने मीन-मेख किसी ने मेरे नहीं निकाले, जितने इन्होंने हफ्ते-दस दिन में निकाल दिये।
जब तू चीन में जन्मा था तो वहीं रहता। बड़ी मुश्किल से जिम जा-जा के जो दो-तीन किलो घटाये थे, घर का सारा काम करने के बावजूद ऐसे डबल हो के चढ़े हैं कि पड़ोस वाले शर्मा जी ने पहचानना ही बंद कर दिया है। एक दिन बाजू वाले वर्मा जी के सामने छींक क्या आ गई वह तो तब से मेरी तरफ झांक भी नहीं रहे। कोरोना तेरे कारण वैश्विक मंदी आ गई है। विश्व का तो पता नहीं पर आजकल मेरी बचत जरूर मंद है। चौबीस घंटे ये घर में ही रहते हैं और अपने पर्स पर नजर जो रखते हैं।
अपनी पाक कला का प्रदर्शन करते-करते अब मैं थक गई हूं। हमारा शहर बिना कचोरी-समोसे के जि़ंदा कैसे है, मैं तो इस बात पर हैरान हूं। हर हफ्ते सिनेमा हॉल में, जो पिक्चरें देख लिया करते थे तो अब घर पर रामायण ही चल रही है। अड़ोसी-पड़ोसी इतने ढके छुपे रहते हैं कि मानो चांद पर जाने वाले एस्ट्रोनॉट हों।
इस लॉक डाउन के चलते कितने घर उजड़ जाएंगे। मियां-बीवी एक छत के नीचे इतना साथ रहेंगे तो कितने भेद खुल जाएंगे। अरे खाने में रूखी-सूखी आदमी खा ले पर मेल-मिलाप, उत्सव-त्योहार के बिना जीना, कोई जीना है भला! समाज हो या त्योहार, रंग तो महिलाएं ही भरती हैं जीवन में। तूने सड़कें ही वीरान नहीं कीं हमारी हंसती-खेलती दुनिया लील ली है। जवानी में ही मोक्ष प्राप्ति की ओर अग्रसर हो गयी हैं हम। साफ-सुथरा आसमान, प्रदूषण रहित हवा, पक्षियों का कलरव, परिवार के साथ बिताया समय सब अच्छा लग रहा है पर यह सब चार दिन की चांदनी है। 
घर में लड़-झगड़ के मायके जाने की धमकी देने लायक भी नहीं छोड़ा तूने तो हमें। जीवन में कोई उमंग ही नहीं बचेगी, न शृंगार, न परिहास तो ऐसा नारी जीवन किस काम का! हम नारियों पे तरस खा और अब तू चीन ही लौट जा। 

 

ओ कोरोना। तेरा सत्यानाश हो। तू नर्क में जाए और तुझे कोई पानी भी न पूछे। अभी प्रकट होना था तुझको, जब फेशियल करवा के, नई ड्रैस खरीद के, मैं बस तैयार ही थी। घर का रेनोवेशन ही नहीं करवाया था, गहने भी सारे एक्सचेंज करवा लिए थे। बाई को देने को पुराने कपडे भी गठरी बांध के तैयार कर लिये थे। गर्मियों में ठंडे प्रदेश के टिकट बुक करवाये ही थे। मेरी किट्टी पार्टी इस महीने होनी थी। पैसे के पैसे आ जाते और सभी सहेलियों पर इम्पोर्टेड चीजों का रूआब भी झाड़ लेती पर तुमसे रहा नहीं गया।
पिछली किट्टी पर पता है मैं अपने इन्हीं नायाब आइडियाज के कारण कितनी पापुलर हो गयी थी। अब तो बाई भी नहीं आ रही, जो गली-गली जा के मेरी शापिंग के बारे में बातें करे। मेरी लिपस्टिक, नेल पालिश सब बेकार हो रही है। चलो घर पर कोई नहीं आ सकता तो क्या मुहल्ले में ही चहल कदमी कर लेती। कम से कम दो चार ड्रैसेज और सैंडिल ही प्रदर्शित हो जाते पर लाक डाउन ने तो घर में ही कैद कर दिया है। 
कोरोना तेरे कारण सब बंद है। कभी सोचा है तूने हम बेचारी नारियां कैसे जी रही हैं। वाट्सएप, फेसबुक, टीवी, रेडियो, ट्विटर और टिक टॉक पर तेरे ही चर्चे हैं। न गॉसिप, न बुराई, न चुगली, न अफेयर की बातें और तो और पतियों को घर बिठवा के तूने तो हमें कालापानी की सजा ही दे डाली। शादी के बाद से आज तक इतने मीन-मेख किसी ने मेरे नहीं निकाले, जितने इन्होंने हफ्ते-दस दिन में निकाल दिये।
जब तू चीन में जन्मा था तो वहीं रहता। बड़ी मुश्किल से जिम जा-जा के जो दो-तीन किलो घटाये थे, घर का सारा काम करने के बावजूद ऐसे डबल हो के चढ़े हैं कि पड़ोस वाले शर्मा जी ने पहचानना ही बंद कर दिया है। एक दिन बाजू वाले वर्मा जी के सामने छींक क्या आ गई वह तो तब से मेरी तरफ झांक भी नहीं रहे। कोरोना तेरे कारण वैश्विक मंदी आ गई है। विश्व का तो पता नहीं पर आजकल मेरी बचत जरूर मंद है। चौबीस घंटे ये घर में ही रहते हैं और अपने पर्स पर नजर जो रखते हैं।
अपनी पाक कला का प्रदर्शन करते-करते अब मैं थक गई हूं। हमारा शहर बिना कचोरी-समोसे के जि़ंदा कैसे है, मैं तो इस बात पर हैरान हूं। हर हफ्ते सिनेमा हॉल में, जो पिक्चरें देख लिया करते थे तो अब घर पर रामायण ही चल रही है। अड़ोसी-पड़ोसी इतने ढके छुपे रहते हैं कि मानो चांद पर जाने वाले एस्ट्रोनॉट हों।
इस लॉक डाउन के चलते कितने घर उजड़ जाएंगे। मियां-बीवी एक छत के नीचे इतना साथ रहेंगे तो कितने भेद खुल जाएंगे। अरे खाने में रूखी-सूखी आदमी खा ले पर मेल-मिलाप, उत्सव-त्योहार के बिना जीना, कोई जीना है भला! समाज हो या त्योहार, रंग तो महिलाएं ही भरती हैं जीवन में। तूने सड़कें ही वीरान नहीं कीं हमारी हंसती-खेलती दुनिया लील ली है। जवानी में ही मोक्ष प्राप्ति की ओर अग्रसर हो गयी हैं हम। साफ-सुथरा आसमान, प्रदूषण रहित हवा, पक्षियों का कलरव, परिवार के साथ बिताया समय सब अच्छा लग रहा है पर यह सब चार दिन की चांदनी है। 
घर में लड़-झगड़ के मायके जाने की धमकी देने लायक भी नहीं छोड़ा तूने तो हमें। जीवन में कोई उमंग ही नहीं बचेगी, न शृंगार, न परिहास तो ऐसा नारी जीवन किस काम का! हम नारियों पे तरस खा और अब तू चीन ही लौट जा। 

कमेंट करें

blog comments powered by Disqus

संबंधित आलेख

हम नारियों क...

हम नारियों की व्यथा

मुझे माफ़ कर...

मुझे माफ़ कर देना- भाग 1

बस, अब और नहीं

बस, अब और नहीं

मुझे माफ़ कर...

मुझे माफ़ कर देना- भाग 2

पोल

आपको कैसी लिपस्टिक पसंद है

वोट करने क लिए धन्यवाद

मैट

जैल

गृहलक्ष्मी गपशप

क्या आप भी स...

क्या आप भी स्किन...

स्किन केयर डिक्शनरी

सुपर फूड्स फ...

सुपर फूड्स फाॅर...

माइग्रेन का सिरदर्द अक्सर सुस्त दर्द के रूप में शुरू...

संपादक की पसंद

क्या आज जानत...

क्या आज जानते हैं,...

आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक नायाब घड़ी के बारे में।...

महिलाएं पीरि...

महिलाएं पीरियड्स...

मासिक धर्म की समस्या

सदस्यता लें

Magazine-Subscription