ब्लड प्रेशर की समस्या और वास्तुदोष

मिताली जैन

17th September 2020

बीपी की समस्या का एक कारण हमारा वास्तुदोष भी होता है। इसलिए बहुत जरूरी है कि हम वास्तुनियमों का पालन करें। आइए लेख के माध्यम से इसके कारण व उपायों पर प्रकाश डालें।

ब्लड प्रेशर की समस्या और वास्तुदोष

ब्लड प्रेशर का सामान्य होना स्वस्थ जीवन जीने के लिए बेहद आवश्यक है। लेकिन आज की भागदौड़ और तनाव भरी जिंदगी में अधिकतर लोग ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे हैं। रक्तचाप चाहे क्षय हो या लो,दोनों ही रूपों में घातक होता है और इसे नियमित करने के लिए लोग दवाइयों के साथ-साथ अन्य कई तरह के परहेज भी करते हैं। लेकिन इन सबके अतिरिक्त वास्तु भी इसके उपचार में सहायक हो सकता है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में-

दिशाओं पर ध्यान

दिशाएं व्यक्ति के तन,मन और धन तीनों को ही प्रभावित करने की क्षमता रखती है। अगर चीजों को उनकी दिशा के अनुरूप न रखा जाए तो इससे काफी परेशानी होती है। बीपी की समस्या भी इससे संबंधित है। उदाहरण के तौर पर,अगर कोई व्यक्ति घर के दक्षिण-पूर्व कमरे में लंबे समय तक रहता है,तो इससे ब्लड प्रेशर की समस्या होने का खतरा अधिक होता है। दरअसल,दक्षिण-पूर्व दिशा आग्नेय कोण है और इस कोण में बीपी के लिए जिम्मेदार टॉक्सिन अधिक बनते हैं। जिससे व्यक्ति को ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ सकती है। इस दिशा में खेलने का कमरा या मेहमानों का कमरा बनवाना अधिक उचित माना जाता है।

 

लाल रंग से परहेज

घर के बेडरूम में बहुत अधिक गहरे लाल रंग का प्रयोग नहीं करना चाहिए। अक्सर नवविवाहित दंपत्ति के कमरे को रोमांटिक लुक देने के लिए अत्यधिक लाल रंग का प्रयोग किया जाता है। लेकिन अत्यधिक लाल रंग तेजी व गर्मी लाता है,जिससे ब्लड प्रेशर की समस्या शरीर में जन्म ले सकती है। अगर आप लाल रंग का प्रयोग कमरे में कर रहे हैं तो भी कुछ बातों का ध्यान रखें। मसलन,यदि कमरे की दक्षिण दिशा की दीवार को आप लाल कलर कर रहे हैं तो ऌिफर सिराहना भी दक्षिण दिशा में होना चाहिए। कहने का तात्पर्य यह है कि लेटने के बाद लाल रंग की हुई दीवार को आप सामने से न देखें।

यह भी हो सकते हैं कारण

  • अगर आप लोहे के बेड पर सोते हैं और सोते समय आपके शरीर का कोई अंग बेड के लोहे से लगातार संपर्क में रहता है तो इससे शरीर की ऊर्जा निकलती है और इससे बीपी की समस्या बढ़ सकती है।
  • वहीं दक्षिण पश्चिम में पानी इकट्ठा या पानी का टैंक हो या इकट्ठा होकर सड़ रहा है तो भी यह व्यक्ति के लिए स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बनता है। खासतौर से यह ब्लडप्रेशर का एक बहुत बड़ा कारण बन जाता है।
  • शायद आपको पता न हो लेकिन उत्तर दिशा में सिर व पैर दक्षिण दिशा में करके सोना ब्लड प्रेशर की वजह बन सकता है। दरअसल,ऐसा करने से शरीर में रक्त का प्रवाह उत्तर दिशा की तरफ अधिक प्रवाहित होता है। उत्तर दिशा का चुम्बकीय प्रभाव रक्त को अपनी ओर खींचता है क्योंकि रक्त में भी आयरन होता है। ऐसे में रक्त को पैर व शरीर के अन्य भागों तक पहुंचाने के लिए हृदय को काफी जोर से पंप करना पड़ता है और अंतत: ब्लड प्रेशर की बीमारी अपने पैर पसारती है।

 

  • अगर आपको दिन में सोने की आदत है तो गर्मी के दिनों में कभी भी दक्षिण दिशा की खिड़की खोलकर नहीं सोना चाहिए। ऐसा करने से सूरज की धूप भी ब्लड प्रेशर को बढ़ाती है।
  • कभी भी घर में ऐसी तस्वीरों का प्रयोग न करें,जो मन को उत्तेजित या आक्रोशित करती हों जैसे लड़ाई-झगड़े के चित्र,कंकाल,सांप,रोते हुए बच्चे आदि। यह तस्वीरे मन-मस्तिष्क पर असर डालती हैं,जिसका प्रभाव हृदय भी पड़ता है और व्यक्ति का हृदय तेजी से धड़कने लगता है और ब्लड प्रेशर बढ़ने के चांसेज बढ़ जाते हैं।

यह है उपचार

  • वास्तु में ब्लडप्रेशर को नियंत्रित करने के लिए कुछ कारगर उपाय बताए गए हैं। ड्राइंग रूम या लॉबी में आप ऐसे चित्र लगाएं,जो मन को शांति प्रदान करते हों। मसलन,ड्राइंग रूम में उत्तर दिशा में बहते हुए पानी,झरने या फाउंटेन आदि का चित्र लगाएं। कोशिश करें कि नीले रंग या हरे रंग की तस्वीरें आपकी आंखों के सामने हों। इससे मन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और धीरे-धीरे ब्लड प्रेशर की समस्या खत्म होती चली जाती है।

 

  • अगर किसी व्यक्ति को ब्लड प्रेशर की समस्या है,वह सी-सॉल्ट की मदद से इसका उपचार कर सकता है। इसके लिए अपने बेड की दाई ओर किसी टेबल या साइड टेबल पर थोड़ा सा साबुत सी-सॉल्ट शीशे की कटोरी में रखें। अगर ब्लड प्रेशर की समस्या बहुत अधिक है तो सी-सॉल्ट को तीन-चार दिन से एक सप्ताह के बीच अवश्य बदलें। वहीं बाद में इसे एक महीने में भी बदला जा सकता है। लेकिन सी-साल्ट को बदलना बेहद आवश्यक है। इस बात का भी ख्याल रखें कि सी-साल्ट बदलते समय इसे बाहर फेंके नहीं,बल्कि बहते हुए पानी या वॉश बेसिन आदि में डाल दें। ताकि नमक भी पानी में घुलकर बह जाए।
  • शरीर को स्वस्थ बनाने से पहले घर को स्वस्थ बनाना आवश्यक है ताकि किसी भी तरह की बीमारी अपने पैर न पसारे। घर को स्वस्थ बनाने के लिए पूर्व-उत्तर दिशा के कोने में एक श्यामा तुलसी का पौधा अवश्य लगाएं। श्यामा तुलसी रक्त संबंधी सभी समस्याओं को दूर करने में रामबाण की तरह काम करती है। साथ ही आप इसके पत्तों को अपने आहार में किसी न किसी रूप में अवश्य शामिल करें।
  • बीपी की समस्या को ठीक करने के लिए सुबह उठने के बाद नहा-धोकर सूरज को जल अवश्य दें। लेकिन कोशिश करें कि आप हरी-भरी घास के ऊपर खड़े होकर जल दें। इससे जब जल आपके पैरों को छुएगा तो इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार शरीर में होता है और आभामंडल को ठीक करता है। इससे कई तरह की बीमारियां स्वत: ही ठीक होने लगती हैं।

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