बच्चों में होने वाला,कान का संक्रमण

मोनिका अग्रवाल

15th September 2020

कान का दुखना हर किसी के लिए दर्द और परेशानी का एक आम कारण है। बच्चों में यह चिंता का एक बड़ा कारण बन जाता है क्योंकि दर्द का कारण बताने के लिए बच्चे बहुत छोटे होते हैं। इसलिए यह बच्चे की देखभाल करने वाले पर निर्भर है कि दर्द को कैसे कम किया जा सकता है।

बच्चों में होने वाला,कान का संक्रमण

बच्चों में होने वाला,कान का संक्रमण

बच्चों में होने वाला,कान का दर्द होना आमतौर पर एक प्रकार के संक्रमण का संकेत है..आम तौर पर यह दर्द ,कान के मध्य भाग या बाहरी भाग को प्रभावित करता है. कान का दुखना हर किसी के लिए दर्द और परेशानी का एक आम कारण है। बच्चों में यह चिंता का एक बड़ा कारण बन जाता है क्योंकि दर्द का कारण बताने के लिए बच्चे बहुत छोटे होते हैं। इसलिए यह बच्चे की देखभाल करने वाले पर निर्भर है कि दर्द को कैसे कम किया जा सकता है।

कारण-बच्चों के कान में दर्द होने के अनेक कारण हो सकते हैं-

बाहरी वस्तुएँ-छोटे बच्चे अक्सर अपने मुँह ,कान या कभी कभी आँख तक में छोटी छोटी चीज़ें जैसे,पेन्सल,पेन या ईयर फ़ोन आदि डाल देते हैं जिससे कान में दर्द हो सकता है.

कान में मैल का जमाव- कभी कभी कान में बहुत मैल जमा हो जाता है या,मौजूदा मैल कान के अंदर पहुँच जाता है,जिस से बच्चे को कान में दर्द महसूस होने लगता है. कान में मैल जमा होने के कारण आपके बच्चे को सीटी की आवाज़ सुनाई देती है

साइंनस का संक्रमण- सॉईनस पोईंट या नाक में सूजन होने के कारण बलगम जमने लगता है जिससे,बैक्टीरियल व वायरल संक्रमण हो जाता है,जिससे बच्चे को कान में संक्रमण व गम्भीर दर्द हो जाता है.

कान के मध्य भाग में संक्रमण-वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण के कारण बच्चे के कान का मध्य भाग संक्रमित  होने लगता है जिससे कान में भयंकर दर्द होने लगता है.यह समस्या बच्चों में आम है.

सर्दी और खाँसी-सर्दी ज़ुकाम के कारण भी बच्चों के कान में गम्भीर दर्द हो सकता है

कान के दबाव में बदलाव- अक्सर ऊँचाई पर रहने से कान में दर्द महसूस होने लगता है,जैसे विमान यात्रा. इसे एरोप्लेन ईयर भी कहा जाता है.

कान में संक्रमण-बच्चे के कान में कोई पुराना संक्रमण होने से भी उसे गम्भीर दर्द हो सकता है

संकेत व लक्षण-छोटे बच्चे अपना दर्द शेयर नहीं कर सकते सिर्फ़,संकेतों के माध्यम से ही अपनी परेशानियों को व्यक्त कर सकते हैं जैसे

1-बच्चे को सुनने में कठिनाई हो सकती है.

2-उसे लेटते,समय,चूसते समय या चबाते समय कान में दर्द हो सकता है.जिससे बच्चा चिड़चिड़ा हो सकता है.

3-बच्चा अपने कान को सामान्य से अधिक खींच या रगड़ सकता है

4-उसे बुखार,बेचैनी या सिर दर्द भी हो सकता है

5-बच्चे के कान से एक प्रकार का द्रव भी बह सकता है

करें घरेलू इलाज-इनमें से आपको,बच्चे में कोई भी लक्षण दिखाई दे तो आप निम्नलिखित घरेलू इलाज कर सकती हैं-

A-गर्म सिंकाई करें-दर्द को दूर करने के लिए अपने बच्चे के कान पर,लगभग दस मिनट तक हीटिंग पैड या गर्म कपड़े से सिंकाई कर सकते हैं.

B-दर्दनाशक दवाईवाइ का उपयोग करें-बाज़ार में कई दर्द निवारक दवाईया,जैसे आईसोंब्रूफेन (डाक्टर से सलाह लेकर)आदि मिल जाती हैं.इससे बच्चे को काफ़ी आराम मिल सकता है.

C-टी-ट्री ओयल का उपयोग करें-दर्द दूर करने का यह प्रभावी विकल्प है.इस तेल में एंटिफ़ंगल,एंटीबैक्टीरियल,एंटीइंफ़्लेमेंटरी और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जो बच्चे को संक्रमण से दूर रखते हैं

D-काइरोप्रेटिक चिकित्सा करवाएँ-यह थोड़ा विचित्र सा लगता है लेकिन,एक अध्ययन में पाया गया है कि,90% से अधिक रोगियों को इस चिकित्सा से तुरंत राहत मिलती है.

E-हर्बल ड्राप्स डालें-कान के लिए हर्बल या प्राकृतिक दवा आप आसानी से मेडिकल स्टोर या ओनलाइन ख़रीद सकते हैं.

F-औलिव ओयल का उपयोग करें-कान के दर्द में राहत के लिए इस तेल का उपयोग सदियों से किया जा रहा है.प्रभावित कान में तेल को हल्का सा गर्म करके ( गुनगुना)कुछ बूँदें डालने से राहत मिलती है

G-सोने की मुद्रा बदलें-दर्द के दौरान कोशिश करें कि प्रभावी कान पर दबाव न पड़े.इस लिए जिस कान में दर्द है उसे दूसरी करवट सुलाएँ.सोते समय बच्चे का सिर ऊँचा रखें. इससे उसके कान से द्रव के रूप में मैल के स्त्राव में मदद मिलेगी.

H-हाइड्रोजन पेराकसाइड का उपयोग करें-बच्चे के दर्द वाले कान में कुछ बूँदें हाईड्रोजन पैराक़्साइड की डालकर,थोड़ी देर बाद कान को डिस्टिल या शुद्ध पानी से साफ़ कर लें.

ध्यान रखें यदि दाँत में केविटी है ,और कान में दर्द हो रहा है तो इन घरेलू उपचारों से कोई लाभ नहीं होगा.वायरल या बैक्टीरीयल संक्रमण के कारण हुआ कान का दर्द इन उपचारों से ठीक किया जा सकता है.कान की समस्या ज़्यादातर एक या दो हफ़्तों में ठीक हो जाती है,लेकिन अगर आपका बच्चा दो साल से कम उम्र का है तो बेहतर होगा आप डौक्टर की सलाह लें.

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