देवरानी को दिल से कहें 'वेलकम'

चयनिका निगम

26th September 2020

जब नई देवरानी घर आए तो क्या करेंगी? उसको अपनी प्रतियोगी मान लेंगी या दोस्त बनाने की कोशिश करेंगी।

देवरानी को दिल से कहें 'वेलकम'
‘पूरा घर मेरी ज़िम्मेदारी' आप ऐसा तब तक मानती हैं, जब तक देवरानी घर नहीं आ जाती। नई-नवेली दुल्हन में अचानक से आपको जिम्मेदारियों के साथ-साथ अधिकारों का बंटवारा भी नजर आने लगता है। यही अहसास आपकी मनः स्थिति ऐसी बना देता है कि आप चाह कर भी देवरानी को परिवार का सदस्य नहीं मान पाती हैं। फिर अक्सर ही झगड़े होते हैं या मनमुटाव बना रहता है। यही वजह है कि ज़्यादातर लोग इस रिश्ते के अच होने की अपेक्षा करते ही नहीं। जबकि ये संभव है कि इस रिश्ते में भी प्यार का रंग घोल दिया जाए। ये इतना कठिन भी नहीं है कि संभव ही न हो। थोड़े से प्रयास से इस रिश्ते को भी प्यार भरा बनाया जा सकता है। क्योंकि जेठानी घर पहले आती है इसलिए उसकी ज़िम्मेदारी है कि पहला कदम वो उठाए और देवरानी को नए घर में अपनापन महसूस कराए। ये सब कैसे होगा? जवाब हम दिए देते हैं-
नए घर की अकेली दोस्त-
नए घर में जेठानी ही होती है, जो देवरानी के लिए दोस्त का काम करती है। पूरे घर में सिर्फ जेठानी ही होती है, जो देवरानी की स्थिति को अच्छे से समझ सकती है। लेकिन अक्सर जेठानी के साथ पूरे परिवार भी नई नवेली परिवार का हिस्सा बनी देवरानी को जज करने लगते हैं। इसमें ये कमी है, ये अच्छाई है...वाले जजमेंट देते हुए पूरा परिवार ही देवरानी के नए दिनों को निराशा से भर देते हैं। लेकिन जेठानी होने के नाते आपको पहले पहल द्यालू होना पड़ेगा। देवरानी को उसकी दोस्त होने का एहसास कराना होगा। ताकि वो भी बनी बनाई छवि से इतर आपके साथ प्यार के रिश्ते को महसूस कर सके। 
ऐसे करें दोस्ती-
देवरानी के साथ दोस्ती करने के कई तरीके हैं। उसे अहसास कराएं कि आप उनकी हमदर्द हैं। ये अहसास कई तरीकों से कराया जा सकता है। यकीन मानिए इसके लिए बहुत ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ेगी। पहले दिन ही देवरानी से कुछ इमोशनल बातें कर लें, जैसे जब भी कोई बात कहनी हो तो मैं हूँ याद रखना। जब घर की याद आए तो मेरे पास चली आना। या फिर ‘सास इन बातों से नाराज हो जाती हैं, फिर भी गलती हो जाए तो मैं हूँ।' ये सारी बातें आपको उनके करीब लाने में काफी मदद करेंगी। 
अपना कॉम्प्टिशन न मानें-
देवरानी किसी भी दूसरे पारिवारिक सदस्य की तरह ही है। उससे उसी तरह का व्यवहार किया जाना कोई कटीं काम बिलकुल नहीं है। उसको जितना आम मानेंगी, उतना ही वो आपकी दोस्त बनती जाएंगी और पूरा परिवार खुश रहेगा। लेकिन जैसे आप उन्हें अपनी प्रतियोगी मानेंगी, जिंदगी कठिन होती जाएगी, सबके लिए। फिर इस प्रतियोगिता का कोई अंत नहीं होगा। थोड़ा सोचिए, ये पूरी जिंदगी चलने वाला सिलसिला है। 

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