करें सहस्रनाम पाठ, करें देवी को याद

चयनिका निगम

30th September 2020

देवी को याद करने का कोई भी मौका हाथ से जाना नहीं चाहिए। देवी सहस्रनाम भी ऐसा ही मौका है।

करें सहस्रनाम पाठ, करें देवी को याद
देवी मां का कोई खास दिन नहीं बल्कि हर दिन होता है। लेकिन उनके कुछ खास दिन नवरात्रों में भी आते हैं। जिसमें हिन्दू धर्म को मानने वाले हर शख्स का पूरा विश्वास है। विश्वास ये है कि इन दिनों में देवी मां से जो कुछ भी मांगेंगे, वो मिलेगा जरूर। इन दिनों को मन्नत पूरी हो जाने की वजह से ही कामदूधा काल भी कहते हैं। इन दिनों या कहें कभी भी देवी को खुश करने का एक और साधन है। वो है सहस्रनाम का पाठ। ये वो पाठ है जो आपकी दिक्कतों को सीधे मां तक पहुंचा देता है। मां आपसे खुश होकर आपकी हर मन्नत पूरी कर देती हैं। क्या है सहस्रनाम और इससे जुड़े दूसरे नियम जान लीजिए और मां की भक्ति में लीन हो जाइए। देवी मां आपकी जरूर सुनेंगी। 
क्या है सहस्रनाम-
सहस्रनाम वो पुस्तक है, जिसमें देवी के एक हजार नाम मौजूद हैं। ये नाम गुण और काम के अनुसार हैं। इन नामों के साथ साधक को हवन करना चाहिए और हर नाम के बाद नमः जरूर बोलना चाहिए।  
ललिता सहस्रनाम पढ़ें-
इसमें ही हम देवी के एक हजार नाम जपते हैं। इसमें हर नाम के साथ देवी की एक अलग विशेषता बताई गई है। 
पंचांग साधन-
पंचांग साधन का इस्तेमाल देवी की प्रसन्नता के लिए किया जाता है। इसमें पटल, पद्धति, कवच, सहस्रनाम और स्रोत की बात कही गई है। क्योंकि सहस्रनाम इसका हिस्सा है। तो इसका असर भी भरपूर होता है। पटल का शरीर, पद्धति को शिर, कवच को नेत्र, सहस्रनाम को मुख तथा स्रोत को जिह्वा माना गया है। 
हवन है जरूरी-
सहस्रनाम के इन नामों को अगर हवन के साथ लिया जाए तो इसका फल दोगुनी तेजी से मिलता है। इन नामों के साथ अर्चन भी किया जाता है। जिसे सहस्रार्चन कहा जाता है। सहस्रार्चन के लिए देवी की आपको सहस्त्र नामावली की जरूरत पड़ेगी। इससे एक-एक नाम लेते हुए देवी की मूर्ति पर फूल चढ़ाते जाएं। हर नाम के साथ नमः भी बोलते जाएं। 
क्या-क्या होगा इस्तेमाल-
अर्चन करते हुए किन-किन चीजों का इस्तेमाल करना होगा? आपके इस सवाल के लिए जवाब तैयार है। दरअसल अर्चन के लिए बिल्वपत्र, हल्दी, केसर या कुमकुम से रंग चावल, इलायची, लौंग, काजू, पिस्ता, बादाम, गुलाब के फूल की पंखुड़ी, मोगरे का फूल, चारौली, किसमिस आदि का प्रयोग किया जाना चाहिए। ये सारी ही चीजें देवी की प्रिय मानी जाती हैं। 
साधना का समय-
साधना के समय हर शख्स को पूजा पूरी होने से पहले अपनी जगह से बिलकुल नहीं उठना चाहिए। इसके साथ कुमकुम के इस्तेमाल को लेकर भी कुछ बातें ध्यान देनी
होंगी। इसको देवी पर अनामिका-मध्यमा व अंगूठे के साथ चुटकी से चढ़ाना चाहिए। फिर आप ये भक्तों को प्रसाद के तौर पर दे सकते हैं। 
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करें सहस्रनाम पाठ, करें देवी को याद
स्टोरी-
देवी मां का कोई खास दिन नहीं बल्कि हर दिन होता है। लेकिन उनके कुछ खास दिन नवरात्रों में भी आते हैं। जिसमें हिन्दू धर्म को मानने वाले हर शख्स का पूरा विश्वास है। विश्वास ये है कि इन दिनों में देवी मां से जो कुछ भी मांगेंगे, वो मिलेगा जरूर। इन दिनों को मन्नत पूरी हो जाने की वजह से ही कामदूधा काल भी कहते हैं। इन दिनों या कहें कभी भी देवी को खुश करने का एक और साधन है। वो है सहस्रनाम का पाठ। ये वो पाठ है जो आपकी दिक्कतों को सीधे मां तक पहुंचा देता है। मां आपसे खुश होकर आपकी हर मन्नत पूरी कर देती हैं। क्या है सहस्रनाम और इससे जुड़े दूसरे नियम जान लीजिए और मां की भक्ति में लीन हो जाइए। देवी मां आपकी जरूर सुनेंगी। 
क्या है सहस्रनाम-
सहस्रनाम वो पुस्तक है, जिसमें देवी के एक हजार नाम मौजूद हैं। ये नाम गुण और काम के अनुसार हैं। इन नामों के साथ साधक को हवन करना चाहिए और हर नाम के बाद नमः जरूर बोलना चाहिए।  
ललिता सहस्रनाम पढ़ें-
इसमें ही हम देवी के एक हजार नाम जपते हैं। इसमें हर नाम के साथ देवी की एक अलग विशेषता बताई गई है। \
पंचांग साधन-
पंचांग साधन का इस्तेमाल देवी की प्रसन्नता के लिए किया जाता है। इसमें पटल, पद्धति, कवच, सहस्रनाम और स्रोत की बात कही गई है। क्योंकि सहस्रनाम इसका हिस्सा है। तो इसका असर भी भरपूर होता है। पटल का शरीर, पद्धति को शिर, कवच को नेत्र, सहस्रनाम को मुख तथा स्रोत को जिह्वा माना गया है। 
हवन है जरूरी-
सहस्रनाम के इन नामों को अगर हवन के साथ लिया जाए तो इसका फल दोगुनी तेजी से मिलता है। इन नामों के साथ अर्चन भी किया जाता है। जिसे सहस्रार्चन कहा जाता है। सहस्रार्चन के लिए देवी की आपको सहस्त्र नामावली की जरूरत पड़ेगी। इससे एक-एक नाम लेते हुए देवी की मूर्ति पर फूल चढ़ाते जाएं। हर नाम के साथ नमः भी बोलते जाएं। 
क्या-क्या होगा इस्तेमाल-
अर्चन करते हुए किन-किन चीजों का इस्तेमाल करना होगा? आपके इस सवाल के लिए जवाब तैयार है। दरअसल अर्चन के लिए बिल्वपत्र, हल्दी, केसर या कुमकुम से रंग चावल, इलायची, लौंग, काजू, पिस्ता, बादाम, गुलाब के फूल की पंखुड़ी, मोगरे का फूल, चारौली, किसमिस आदि का प्रयोग किया जाना चाहिए। ये सारी ही चीजें देवी की प्रिय मानी जाती हैं। 
साधना का समय-
साधना के समय हर शख्स को पूजा पूरी होने से पहले अपनी जगह से बिलकुल नहीं उठना चाहिए। इसके साथ कुमकुम के इस्तेमाल को लेकर भी कुछ बातें ध्यान देनी होंगी। इसको देवी पर अनामिका-मध्यमा व अंगूठे के साथ चुटकी से चढ़ाना चाहिए। फिर आप ये भक्तों को प्रसाद के तौर पर दे सकते हैं। 

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