योगा: डिलीवरी के बाद कमर दर्द को कहिए 'चल हट'

चयनिका निगम

4th October 2020

मां बनने के बाद कमर में दर्द होना आम सी बात है। लेकिन कुछ खास योगासन से इस दर्द को कम किया जा सकता है।

योगा: डिलीवरी के बाद कमर दर्द को कहिए 'चल हट'
मां बनने वाली प्रीति से तान्या का सवाल है। क्या तुम पीठ के जिंदगीभर वाले दर्द के लिए तैयार हो? क्यों भाई, मां बनने का पीठ दर्द से क्या नाता। अब प्रीति ने सवाल किया है। पर तान्या भी तैयार हैं। वो कहती हैं बच्चे के दुनिया में आने के बाद तो समझ लो पीठ का दर्द जिंदगीभर का हो जाएगा। मैं खुद झेल रही हूं, मेरी कई दूसरी सहेलियां भी। छोटी-छोटी चीजें पीठ का दर्द मानो बढ़ा ही देती हैं। कभी ज्यादा देर खड़े हो गए तो... झुक कर काम कर लिया तो... या फिर कोई भारी सामान उठा लिया तो भी। प्रीति परेशान हुईं पर उन्हें याद आया योगा टीचर के सुझाव। जिन्होंने डिलीवरी के बाद होने वाले पीठ दर्द के लिए बहुत आसान से प्रभावी आसन बताए थे। अब इन आसनों को खुद तान्या भी करती हैं। यकीन मानिए उन्हें काफी आराम है।योगा वैसे भी काइयों के आराम का कारण अब तक बन चुका है। बड़े हों या बच्चे, सभी को योगा के फायदे दिखने लगे हैं। फिलहाल हम आपके लिए वो आसन ले आए हैं तो मां बनने के बाद कमर दर्द का हल बन जाएंगे। इन आसनों से चलिए रूबरू होते हैं-
दर्द होता क्यों है-
ज्यादातर हाल ही में मां बनीं महिलाओं की कमर में दर्द होता रहता है। कारण तरह-तरह के बताए जाते हैं। कई लोग ये भी मानते हैं कि सिजेरियन के दौरान रीढ़ की हड्डी पर लगे इंजेक्शन की वजह से ये दर्द हो रहा है लेकिन ऐसा नहीं है। इसका सबसे बड़ा कारण कैल्शियम की कमी है। जो खासतौर पर भारतीय महिलाओं के साथ सामान्य सी बात है। दरअसल ज्यादातर भारतीय महिलाएं कैल्शियम की कमी से पीड़ित होती हैं और इसको पूरा करना भी जरूरी नहीं मानती हैं। बाद में मां बनने के बाद बच्चे को दूध पिलाने के लिए कैल्शियम का दोहन तो बढ़ जाता है लेकिन इसकी पूर्ति बिलकुल नहीं होती है। मुश्किल ये है कि महिलाएं डाइट में भी भरपूर कैल्शियम नहीं लेती हैं। फिर कई महिलाएं जल्दी-जल्दी मां बनती हैं तो कैल्शियम का ये दोहन और बढ़ जाता है। याद रखिए कैल्शियम की कमी का सबसे पहले असर फ्लेट हड्डियों पर ही होता है। कमर में यही हड्डियां होती हैं। 
कैल्शियम के अलावा गलत पोशचर भी एक कारण हो सकता है। जिसमें अक्सर ही नई मांओं को बैठना पड़ जाता है। अक्सर ही महिलाएं कई बार तो पूरी रात बच्चे को गोद में लेकर बैठी ही रहती हैं। इसके साथ दूध पिलाने के लिए भी उन्हें बैठे ही रहना पड़ता है, वो भी कई दफा घंटों के हिसाब से। इसलिए जानकार मानते हैं कि खान-पान और लाइफस्टाइल के थोड़े से बदलाव डिलीवरी के बाद कमर के दर्द को कम कर सकते हैं। इन सुधारों का फायदा कई बार धीमा लगेगा लेकिन होगा जरूर-
योगा में है इलाज-
योगा स्वस्थ्य रहने का अचूक इलाज बन चुका है। इसमें आपको कई सारी बीमारियों का हल मिल जाएगा। सिजेरियन हो या नॉर्मल हर तरह की डिलीवरी के बाद अगर कमर में दर्द है तो योगा के कुछ आसान आपकी मदद जरूर कर देंगे। खास बात ये है कि ये आसान बहुत कठिन भी नहीं हैं, चलिए फिर इन्हें जान लेते हैं-
सुप्त भद्रासन है बहुत आसान-
सुप्त भद्रासन नाम के योगासन को मोची आसन भी कहा जाता है। इस आसन में बिल्कुल वैसा ही पोज बनाना होता है, जिसमें बैठ कर मोची काम करता है। पर ये आसन आपको बैठकर नहीं बल्कि लेट कर बनाना होता है। इसको 30 सेकंड के लिए तीन बार करना होता है। 
स्पाइन को दें आराम-
स्पाइन को आराम देने वाले आसनों में कुछ के नाम पहले लिए जाने चाहिए क्योंकि ये बहुत ज्यादा आराम देते हैं। इन आसनों के नाम हैं, धनुरासन, चक्रासन, शलभासन, भद्रासन और भुजंगासन। इन सभी आसनों को कम से कम 3 बात जरूर करें। हर बार 20 सेकंड के लिए पोज में जरूर रुकें। अभ्यास करने के बाद इसे 1 मिनट तक भी किया जा सकता है। इन आसनों को कैसे करते हैं जान लीजिए-
धनुरासन-पेट के बल लेटें और पैरों को घुटनों से मोड़ लें। अब पैरों को हाथों से पकड़ कर पूरे शरीर को ऊपर करने की कोशिश करें। अल्सर, माइग्रेन या पेट की बीमारी आदि है तो ये आसन न करें।  
शलभासन-इसमें पेट के बल लेट कर हाथों की हथेलियों को कमर के पास लाकर जमीन की ओर किया जाता है। फिर पीछे से पैरों को उठाने की कोशिश की जाती है। 
भुजंगासन- इस आसन में पेट के बल लेटना है। अब हाथों को कंधे के पास लाकर हथेलियों के बल आगे के शरीर को ऊपर उठाना होता है। 
भद्रासन-इस आसन में बैठकर पैरों की पलथी बनानी है। अब पैरों के दोनों पंजों को आपस में मिलाना है। और इन्हें हाथों से पकड़ कर पीछे की ओर खींचें। 
सबका होगा संतुलन-
स्पाइन, हिप्स मसल, जांघों और पैरों के पंजों के लिए एक ही आसन काड़ी मदद कर देता है। नाम है संतुलन आसन, जिसे अक्सर प्लेंक ही कहा जाता है। इसमें लेट कर हाथों की कोहनियों पर उठना होता है। साथ में पैरों को भी पंजों पर लाना होता है। इस अवस्था में 30 सेकंड के लिए 3 से 4 बार रुकना होता है। 
ताड़ आसन भी करेगा मदद-
इस आसन में हाथों ऊपर लेकर ऊपर की ओर ही खींचना है। जब-जब ऊपर जाना है, तब-तब पूरी शरीर का वजन पंजों पर ले आना है। इस अवस्था में कम से कम 15 से 20 सेकंड के लिए जरूर रुकें। चलित ताड़न आसन भी करना फायदेमंद रहेगा। इसमें ताड़ आसन में आने के बाद छह कदम आगे और छह कदम पीचे चलना है। 
(स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. विनीता अवस्थी और अंतरराष्ट्रीय योगा गुरु सुनील सिंह से बातचीत पर आधारित)

 

 

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